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27 जून 2012

एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन की योजना

जय गुरुदेव की ! राजीव जी ! शायद आप मुझे भूल गये होंगे । क्योंकि आपके पाठकों की संख्या इतनी हो गयी है कि सबको याद रखना मुश्किल है । मैंने पहले भी आपसे कई सवाल पूछे हैं । जिनका मुझे मनोनुकूल जबाब मिला है । और काफ़ी समय बाद अब मैं एक नया सवाल लेकर आया हूँ । आशा है । आप जबाब दोगे । अरे मैंने अपना नाम तो बताया नहीं । मैं - विजय तिवारी । मेरा सवाल ये है राजीव कि आजकल लोग जो प्यार करते हैं । उसमें प्रेम तो कहीं होता नहीं । वस वासना होती है । और इस वासना को प्यार का नाम देकर ये लोग प्यार को बदनाम कर रहे हैं । ऐसा क्यों ? धन्यवाद । आपके जबाब की प्रतीक्षा करूँगा ।
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आजकल कुछ कामों में बेहद बिजी हूँ । एक तो ट्रस्ट के गठन से सम्बंधित कार्य चल रहा है । दूसरे गुरु पूर्णिमा महोत्सव का कार्य भी है । जिज्ञासुओं के फ़ोन काल्स भी सुनने समझाने होते हैं । इनके अलावा कुछ और महत्वपूर्ण कार्य हैं । जिन्हें समय देना होता है ।
देश विदेश के हमारे बहुत से पाठक । जिज्ञासु और शिष्य काफ़ी समय से ये मांग करते रहे कि हमारे आश्रम से सम्बंधित पुस्तकें किस तरह से प्राप्त हो सकती हैं ? लेकिन तव क्योंकि ऐसी कोई पुस्तकें थी ही नहीं । इसलिये मैंने कहा - अभी ये सुविधा हमारे पास नहीं है । पर अब दिल्ली के अशोक जी ने इस कमी को दूर करने की दिशा में कदम उठाये हैं । और इसके लिये एक मासिक पत्रिका के प्रकाशन की योजना बनायी है । जिसके रजिस्ट्रेशन आदि औपचारिक पहलूओं पर कार्य हो रहा है ।

उम्मीद है । ये पत्रिका सितम्बर अक्टूबर में मुक्त रूप से बुक स्टाल पर उपलब्ध होगी । लेकिन क्योंकि सम्भव है । यह पत्रिका इतनी जल्दी डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क के अभाव में अभी देश विदेश में हर जगह उपलब्ध न हो । और प्रारम्भ में अधिक धन के अभाव में इसकी सीमित प्रतियाँ ही छपेंगी । इसलिये जो पाठक इस पत्रिका को नियमित रूप से प्राप्त करना चाहते हैं । वे वार्षिक subscription के द्वारा इसकी अग्रिम बुकिंग करा सकते हैं । इसके लिये आपको अशोक जी के नेट खाते में 360 रुपये 12 प्रति ( वर्ष भर के ) के भेजने होंगे । अगर ये सुविधा आपके पास उपलब्ध नहीं है । तब आप उनके पोस्टल एड्रेस पर मनी आर्डर आदि विकल्पों से भुगतान कर सकते हैं । और भी कोई जानकारी सीधे सीधे अशोक जी से उनके मोबायल नम्बर 0

96549 65477 पर या उनकी ई मेल ID  - dipl91( यहाँ एट द रेट आफ़ @ लगायें)rediffmail( यहाँ डाट )com पर ले सकते हैं । इसी ब्लाग की तरह इस पत्रिका में भी आपके प्रश्नों के उत्तर दिये जायेंगे । पर पत्रिका का स्थान ( पेज ) सीमित होने की वजह से आपके बङे प्रश्नों को एडिट करके संक्षेप में छापा जायेगा । इसके साथ ही हमारे स्थायी पाठकों के फ़ोटो ( मगर सिर्फ़ नये भेजे गये । ब्लाग में छपे फ़ोटो नहीं ) भी प्रकाशित किये जायेंगे । और आत्म ज्ञान या अलौकिक अनुभवों पर उनके लेख भी सचित्र प्रकाशित किये जायेंगे । इसके अलावा पाठकों द्वारा भेजे गये दुर्लभ फ़ोटो दुर्लभ जानकारी को भी पत्रिका में शामिल किया जायेगा ।
इसके अतिरिक्त मेरे अनुभव लेख आदि भी पत्रिका में नियमित छपेंगे । इसके अलावा ये खबर जो शायद आपके

लिये खुशखबरी जैसी हो सकती है । मेरी नयी प्रेत कहानियाँ और भूतिया अनुभव अब आपको पुस्तकों के रूप में बुक स्टाल द्वारा उपलब्ध होंगे ।
ध्यान रहे । हमारे सभी प्रकाशन आम धार्मिक संस्थाओं की तरह बोरिंग और नीरस नहीं होंगे कि आपको सर पकङकर रोना आ जाय । और न ही उनमें आश्रम या गुरु के प्रोग्राम या गुरु के सिर्फ़ बङे बङे फ़ोटो आदि छाप कर ही आपकी जेब काटी जायेगी । बल्कि पूरी तरह व्यवसायिक अन्दाज में आपके पैसा वसूल तर्ज पर विशुद्ध दुर्लभ ज्ञान । चरित्र निर्माण । उच्च स्तरीय मनोरंजन । और आपकी शंकाओं का समाधान किया जायेगा । जिसको कहते हैं - गागर में सागर ।
पत्रिका में इस ब्लाग की तरह ग्लैमरस या अर्धनग्न फ़ोटो को जरा भी स्थान नहीं दिया जायेगा । कोई अशोभनीय शब्द या अपशब्दों को भी स्थान नहीं दिया जायेगा । कहने का मतलब ये पत्रिका न सिर्फ़ संग्रहणीय होगी । बल्कि आप इसको घर में आराम से सभी को पढाकर प्रेरित कर सकते हैं ।

इसके भी अतिरिक्त समय समय पर आपके बहुमूल्य सुझावों पर अमल करते हुये पत्रिका में उस तरह के बदलाव करने की कोशिश की जायेगी । और एक बात का आपको खास ध्यान रखना होगा कि - आपके द्वारा भेजा गया कोई भी मैटर पत्रिका में अगले 2-4 दिन में छप जाये । जैसा ब्लाग में होता है । ऐसा संभव नहीं होगा । हो सकता है । वह अगले 2 महीने बाद स्थान पा सकें । इसलिये कोई भी MATTER समय से काफ़ी पहले भेजना होगा । भेजने का तरीका वही मेरा ई मेल आई डी golu224 होगा । जिनके पास नेट सुविधा उपलब्ध न हो । वह डाक या कोरियर द्वारा अशोक के एड्रेस पर भेज सकते हैं । यह एड्रेस शीघ्र ही उपलब्ध होगा ।
वैसे हमारी पूरी पूरी कोशिश इस पत्रिका को देश भर में उपलब्ध कराने की होगी । पर कुछ समय लग सकता है । 


इसलिये इस अति दुर्लभ अद्वैत ज्ञान के धार्मिक प्रचार प्रसार में हमारे स्थायी पाठक महत्वपूर्ण भूमिका निभाकर पुण्य अर्जित कर सकते हैं । इसके लिये आप अपने शहर में 100-200 जितने सदस्य बना सकते हैं ।  बना लें । तब पत्रिका की सभी प्रतियाँ एक ऐजेंट की भांति आपके पते पर इकठ्ठी रजिस्टर्ड डाक से भेज दी जायेगी । जिसका आप वितरण कर सकते हैं । इससे पत्रिका को भेजने में खर्च बहुत कम आयेगा ।
इसके अलावा आने वाले कुछ ही महीनों में हमारे आश्रम में ध्यान की क्लासें और उनका तकनीकी ज्ञान अलौकिक अनुभव आदि शुरू हो जायेगा । जिसमें सिर्फ़ पंजीकृत लोगों को ही शामिल किया जायेगा । इसके लिये आपको पहले से पंजीकरण कराना होगा । और अपने खर्चे पर आश्रम में रहना होगा ।
इसके अतिरिक्त हम SUPREME POWER सहज योग के शिक्षक और प्रचारकों को भी तैयार करेंगे । जाहिर है । ये निरा परमार्थी कार्य नहीं होगा । इससे उन्हें आमदनी भी होगी । अतः इसके लिये ऊर्जावान लङकियाँ लङके महिलायें पुरुष आदि अभी से आवेदन कर सकते हैं । क्योंकि ऐसे स्थान फ़िलहाल तो सीमित होंगे । इसमें बेरोजगार और निर्धन लोगों को प्रमुखता दी जायेगी । या फ़िर जो परमार्थ भाव से भक्ति को समर्पित होना 


चाहते हैं । या योग में ऊँचाईयों को पाना चाहते हैं । उन्हें विशेष महत्व देते हुये अलग से खास तैयार किया जायेगा ।
जो माया को झूठा कहें । उनका झूठा ज्ञान । माया से ही होत हैं । तीर्थ पुण्य और दान ..की तर्ज पर फ़िलहाल 10 बीघा जमीन में फ़िरोजाबाद  ( से 25 किमी दूर ) के पास ग्रामीण माहौल में भरपूर हरियाली और स्वच्छ हवा ( जंगल में मंगल ) के वातावरण में आश्रम का निर्माण कार्य शनै शनै हो रहा है । इसके निर्माण में जो लोग मन्दिर आश्रम आदि को दान करने में यकीन रखते हों । वे हमसे सम्पर्क कर सकते हैं । इसके अतिरिक्त जैसा कि अन्य आश्रमों में भी होता है । पूरा कमरा बनबाकर आप आश्रम के आजीवन सदस्य भी बन सकते हैं । इसमें आपके कभी भी आश्रम आने पर वह कमरा आपके रहने के लिये विशेष उपलब्ध होगा । अब मुझे जितना अधिक से अधिक इस वक्त याद आया । मैंने लिख दिया । फ़िर भी कोई शंका सवाल शेष रहने पर आप मुझसे या श्री महाराज जी से फ़ोन पर पूछ सकते हैं । साहेब ।
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विजय तिवारी के प्रश्न का उत्तर देने की शीघ्र कोशिश की जायेगी ।

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326