07 दिसंबर 2013

मौत भी झूठ बोलने लगी

अब क्या लिखूँ । सब कुछ बेमानी सा, उजाङ सा लगने लगा है । मेरे साथ समस्या यह है कि विशाल परिवर्तन की श्रंखला में बहुत कुछ मुझे नजर सा आता है । और उन सभी के संकेत भी मैं कई लेखों में दे चुका हूँ । यद्यपि मैंने स्पष्ट कहा था - इन संकेतों को मेरी भविष्यवाणी जैसा नाम देना कतई गलत होगा । क्योंकि इनके न होने पर मुझे कोई ग्लानि नहीं होगी । और पूर्णतः हो जाने पर खुद की बात सत्य होने जैसा कोई गर्व महसूस नहीं होगा । और न ही मैं इनके प्रति किसी प्रकार का जबाबदेह हूँ । लेकिन ये संकेत मेरे लिये उन अनुभवों के समान हैं । जो कई जीवन में एकाध बार ही घटित होते हैं । क्योंकि इनका सम्बन्ध प्राकृत प्रलय से है । और ऐसा अक्सर नहीं होता । प्रथमदृष्टया ये संकेत मैंने चार पाँच लोगों के साथ साझा किये थे । ताकि बाद में इनकी सत्यता, इनका क्या रहस्य आदि मिलान किया जा सके । कुछ दुर्लभ वैज्ञानिक सूत्रों, समीकरण के संकेत भी उनके विज्ञान समेत आये । जिनमें गामा किरण की प्रथ्वी और सागर तल में खास हस्तक्षेप, तरंग दधर्य की अनुप्रस्थ काट होना, रिक्टर स्केल किस प्रकार असामान्य स्थिति को जायेगा, केन्द्र के घूर्णन में दबाब, ध्रुवों का विपरीत प्रभाव पैदा करना, प्रथ्वी के आधे भाग में कई दिनों तक घटाटोप अंधेरे की स्थिति बनना आदि आदि कई संकेत हैं, थे । दिक्कत यह हुयी कि मुझे इस समय अज्ञात पक्ष, गूढ नियम के अंतर्गत न बताने योग्य, शारीरिक रूप से बहुत परेशानी है । अतः मैं इनको लिख नहीं पाया । और मेरे दो सहयोगियों ने इसको अपने अलग अलग कम्प्यूटर तथा कापी पर लिखा । अतः कई महत्वपूर्ण संकेत इधर उधर हो गये । दूसरे हमारी बातचीत के महत्वपूर्ण और विषय का स्पष्टीकरण करते बिन्दु भी उन्होंने नोट नहीं किये । अन्यथा एक लगभग स्पष्ट दृश्य बनता था ।
खैर..जैसा मैंने कहा । मेरे आभासी संकेतों में कृमशः प्रथ्वी ( थल ) समुद्र, पानी का बेहद प्रदूषित हो जाना ( जल ) आकाश ( नाक्षत्रिक, तरंगे आदि ) वायु ( विकरण, हानिकारक गैसीय प्रदूषण ) अग्नि ( ज्वालामुखी, विभिन्न कारणों से अग्नि प्रकोप, परमाणु रियेक्टर आदि से संकट, आसमानी अग्नि, बिजली आदि से आपदा ) ये सभी थे । इसके बाद नयी अज्ञात असाध्य बीमारियां आदि भी ।
क्या आपको पता है । पिछले सामान्य रिकार्ड से हटकर ये सभी कुछ असामान्य स्तर की तरफ़ कृमशः बढता हुआ घटित होने लगा । जैसा कि मुझे लगता है । ये सब कुछ बेहद लयात्मक ढंग से हाहाकारी होते हुये भी किसी डरावने मगर शान्त संगीत सा घटित होगा । मतलब हमारे सारे उपाय सारी शक्तियां अप्रभावी होंगी । एक मूकदर्शक की तरह ही इसे देखा जा सकेगा । हालांकि अभी मैं स्पष्ट नहीं हूँ । पर ये सब आगामी वर्ष के अगस्त तक बचे हुये लोगों को एक ऐसा विकट परिवर्तन दिखा सकता है । जो शताब्दियों या सहस्त्राब्दियों में देखने में आता है । क्योंकि मेरा सम्बन्ध भारत से है । अतः बहुत लोग भारत पर क्या और कितना प्रभाव ? के बारे में पूछते हैं । पर मुझे मंसूर के गुरु जुनैद की बात याद आती हैं । जिसमें उन्होंने सामने जाती मौत से पूछा । तो उसने कहाँ - सामने के गाँव से हजार लोगों को लेने जा रही हूँ । मगर दस हजार मर गये । गुरु ने सोचा । मौत भी झूठ बोलने लगी । दोबारा सामना होने पर उन्होंने झूठ का कारण पूछा । तो मौत बोली - झूठ जैसा कुछ नहीं है । मैंने तो सिर्फ़ हजार लोग ही मारे । बाकी नौ हजार तो भय से मर गये । और ऐसे भय से क्या लाभ ?
विश्वास न हो । तो यहाँ देखा करो ।
http://www.emsc-csem.org/Earthquake/
http://www.emsc-csem.org/Earthquake/significant_earthquakes.php
http://www.accuweather.com/en/us/united-states-weather

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/12/07/gale-force-winds-batter-europe-as-thousands-in-u-k-face-more-flooding/

http://www.dailymail.co.uk/news/article-2519364/Death-toll-rises-Americas-big-freeze-Tens-thousands-warned-power-weeks-ice-storms-bring-cables.html

It's not bad. It's change. Life is dynamic and never stays the same for a second. What is static, in nature, is dead. It's how we react to this change that defines us. Change challenges humans to evolve, and innovate- and the world becomes a better place as a result. Look how the 2011 9.0 magnitude earthquake pushed Japan into the field of clean energy- solar power. 

http://www.sott.net/article/269762-4-5-magnitude-earthquake-shakes-Oklahoma-rattling-nerves

http://www.youtube.com/watch?v=-N4-QxLV2gQ


http://www.telegraph.co.uk/news/worldnews/antarctica/10470887/Singapore-sized-iceberg-breaks-off-in-Antarctica.html

http://www.youtube.com/watch?v=1YJf1ih36fo

http://www.cbsnews.com/news/arctic-sea-ice-larger-than-us-melted-this-year/

https://www.facebook.com/pages/The-Extinction-Protocol/151489344873301

पृथ्वी रुक रुक कर कम्पित होगी

ये सभी संकेत पिछले दिनों में । और इनमें से कई घटनायें होने भी लगी । कृपया हालिया कुछ घटनाओं हेतु निम्न साइट देखें ।
- ज्वालामुखी, भूकंप, धूमकेतु, हिमयुग, समुद्रों का खौलना, समुद्रों में अम्लता का बढ़ना, पृथ्वी की घूर्णन गति का धीमा होना, समुद्री जीवों का मरना, भयावह मौसम, महामारी, आबादी का नाश ।
http://www.sott.net/article/269256-Volcanic-eruptions-rising-CO2-boiling-oceans-and-why-man-made-global-warming-is-not-even-wrong
आसमानी घटनाओं हेतु
http://www.sott.net/category/17-Fire-in-the-Sky
प्रथ्वी की घटनाओं हेतु
http://www.sott.net/category/4-Earth-Changes
ना कुछ तेरा ना कुछ मेरा । चिङिया रैन बसेरा ।
**********
अंगकोर वट होगा विदीर्ण ( ध्वस्त )  । 
बोलीविया में नरक का नजारा । 
मलय भूमि पर होगा नए द्वीप का विस्तार ।
मिशीगन में जल भराव  ।
रेडियोधर्मी विकरण का गहन दुष्प्रभाव ।
यूगोस्लाविया का तटबंध हटा ।
मिजोरम में द्वीप समूह का निर्माण ।
पृथ्वी के केंद्र के घूर्णन पर दबाव बढेगा ।
इससे रिक्टर स्केल में वृद्धि होगी ।
5 गुना वृद्धि होगी । 3 पैमाने, स्तर होंगे - 5, 10 और 15 ।
15 (  के पैमाने ) हवाई द्वीपों पर होंगे ।
10  तक के रिहाइशी इलाकों पर होंगे ।
एक तिहाई आबादी जल में समा जाएगी ।
दो तिहाई का नामोनिशान मिट जायेगा ।
वर्मा में कहर ।
मोंट्रियल ओट्टावा ( तट पर कहर ) ।
जोशुआ ट्री, येलो स्टोन सक्रिय ।
पृथ्वी पर बहुत सी जगहों पर भूगर्भ जल स्तर शून्य ।
बाहरी जल स्तर बढेगा ।
पृथ्वी की घूर्णन गति ( केंद्र में ) ... ?
( अदृश्य ) प्राकृत प्रलय ।
न्यू जकार्ता ।
पृथ्वी के केंद्र में दबाव 300 घन मीटर बढेगा ।
100 करोड़ लोग आग से प्रभावित ।
नार्थ करोलिना में धूमकेतु से तबाही ।
कैस्पियन सागर में कुछ होगा ।
एटलांटा के ध्रुव पर होल ( छेद ) ।
अमेरिका रूस के ऊपर दबाव दाल रहा है कि वो चीन का विरोध करे ।
(?) रासायनिक हथियारों की खेप है ।
अलास्का के 100 km दायरे में तूफ़ान आयेगा  ।
हिमशिला बही ।
सीप या शीप ( भेड़ ?) में महामारी ।
85 नए धूमकेतु ।
न्यू डील नाम का वायरस जो कंप्यूटर को हैक कर लेगा ।
सभी प्रमुख कंप्यूटर निष्क्रिय । 
सूचना तंत्र के आधार ( सर्वर ) पर हमला ।
सूचना तंत्र पर असर ।
प्राकृत प्रलय ( अंदरूनी घटकों से ) ।
राशुआ (?) ।
पेंटागन होगा राख का ढेर ।
समुद्र से आ रहे हैं घड़ियाल बाहर ।
85 नए धूमकेतु आ रहे हैं । जुलाई तक इनका आना चालू हो जायेगा ।
भारत के निचले हिस्से डूबेंगे ।
कुपवाड़ा में लहर ।
रोहतक दर्रे में दो झीले उभरेंगी ।
37 नए टापुओं का उदय ।
अभी के 6 टापू क्षितिज तक जलमग्न दिखाई देंगे ।
नॉर्वे से केनिया तक ध्रुव पलटेगा ।
सौर्य विकिरण का तीक्ष्ण प्रभाव ।
रक्त जनित बीमारियों की वृद्धि ।
चिली में भूकंप धराशाई करेगा ।
अमेरिका के दो विमान चीन में चले गए थे । चीन राडार भेदी राकेट मिसाइल पेंटागन पर दागेगा ।
बादलों में काले धब्बे, विकिरण, कार्बोन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन ( ऑक्साइड ) सल्फ्यूरिक अम्ल, हेक्साइड, तरल अमोनिया, अम्ल सान्द्रता क्षार बढेगा ।
पृथ्वी रुक रुक कर कम्पित होगी ।
पेंटागन की विदेश नीति विफल ।
बन्दर ( जानवर ) पहाड़ पर जा रहे हैं ।
1 कोशीय अमीबा, जेलीफिश की संरचना विकृत होने लगी ।
उत्तरी हिमखंडों में भीषण टकराव ।
उत्तरी पठारों में घर्षण बल दुगना ।
मेनचेस्टर में काला भूकंप ।
मेन स्ट्रीम में उबाल ।
तुर्कमेनिस्तान से होकर तूफ़ान आएगा सिन्धु घाटी तक ।
लाल सागर में उफान आने वाला है ।
सिन्धु घाटी की तरफ आयेगा ।
300 से 800 km प्रति घंटे की रफ़्तार पकड़ेगा तूफ़ान ।
न्यूज़ीलैण्ड धंस रहा है ।
तूफ़ान तुर्कमेनिस्तान से होकर सिन्धु घाटी तक आएगा ।
इन सभी घटनाओं का असर ( अभी ) मध्य एशिया तक सीमित रहेगा ।
निचले हिस्से में अधिकतर तबाही होगी ।
घटाटोप अन्धकार ।
मलाया और इथोपिया में कुछ होगा ।
मोरक्को में भीषण तबाही ।
रेड रिएक्टर ( गामा विकिरण ) तोड़ेगा चक्रव्यूह ।
आसमानी छतरी होगी पीली ।
फ्लोरिडा हेक्सागन/हेक्सोगन (?) ।
सौर्य तूफानो की गिनती बढ़ेगी ।
सूर्य से निकल कर गामा किरणे चाँद से टकरा कर धरती पर आएँगी ।
ये किरणें समुद्र में कुछ करेंगी ।
हीट एक्सप्लोजन ।
लैला ट्रिपल तूफ़ान  ।
महा केतु का सूर्य से घर्षण ।
हेक्सोगन फ्लोरिडा में जल वृद्धि ।
अटलांटिक सागर से उठेगा नीला तूफ़ान ।
संशोधन करना है - सागर की तलहटी से गैसों का उत्सर्जन बढेगा । इससे टापू धसेंगे ।
संशोधन करना है - बेरुत, त्रिनिदाद में लोहित पट्टी पर धरती धसेगी ।
संशोधन करना है - सीरिया में हवाई हमला, सीरिया टूटेगा ।

28 नवंबर 2013

तबाही का संकेत बताते कुछ वैश्विक लिंक्स

http://dcclothesline.com/2013/10/03/yellowstone-supervolcano-alert-the-most-dangerous-volcano-in-america-is-roaring-to-life/

http://www.pseudoreality.org/committeeof300.html

http://www.washingtonpost.com/politics/space-hosts-busy-thanksgiving-with-launch-comet/2013/11/27/6dcf8ae2-57aa-11e3-bdbf-097ab2a3dc2b_story.html
http://www.bibliotecapleyades.net/sociopolitica/sociopol_iran57.htm


http://www.amsmeteors.org/members/fireball/browse_reports

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=343917#.UobsuXanMBQ.facebook

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/11/12/4300-evacuated-as-eruption-at-indonesias-mt-sinabung-volcano-intensifies/

http://www.youtube.com/watch?v=lGEhX3I83M0

http://beforeitsnews.com/japan-earthquake/2013/10/hawaii-went-radioactive-wednesday-2444280.html?utm_source=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2F&utm_term=http%3A%2F%2Fb4in.info%2FfMnp&utm_medium=facebook-post&utm_campaign&utm_content=awesmsharetools-fbshare-small
http://www.haaretz.com/news/national/1.553762

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/10/16/jellyfish-are-taking-over-the-seas-and-it-might-be-too-late-to-stop-them/

http://geofon.gfz-potsdam.de/eqinfo/event.php?from=rss&id=gfz2013unyb&utm_source=dlvr.it&utm_medium=facebook

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/10/15/18-foot-serpent-like-sea-creature-found-off-california/

https://www.youtube.com/watch?v=0-36psfOFsk

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/10/15/strong-typhoon-heads-for-japan-and-crippled-fukushima-nuclear-plant/?fb_source=pubv1

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=339139#.UlyPKUi4e08.facebook

https://www.facebook.com/photo.php?fbid=731732226853822&set=gm.10151938444409528&type=1

http://ireport.cnn.com/docs/DOC-1047591

http://worldtocome.org/audio/what-is-wrong-with-the-weather-part-2#.UllwywO9NH4.facebook

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/10/11/strong-magnitude-6-3-earthquake-strikes-near-kermadec-islands-new-zealand/?fb_source=pubv1

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/10/11/6-0-magnitude-earthquake-rocks-trinidad-and-tobago/?fb_source=pubv1

http://theextinctionprotocol.wordpress.com/2013/09/20/dead-sea-being-eaten-by-sinkholes-huge-chasms-appearing-in-the-region-at-a-rate-of-one-per-day/

(Ok quake swarm)
3.5 9km NNW of Enid, Oklahoma 2013-10-01 17:38:53 UTC-07:00 3.0 km
3.2 16km NNW of Enid, Oklahoma 2013-10-01 16:28:43 UTC-07:00 5.2 km
3.2 22km N of Enid, Oklahoma 2013-10-01 12:26:15 UTC-07:00 5.0 km
2.7 7km E of Edmond, Oklahoma 2013-10-01 01:18:26 UTC-07:00 5.0 km

http://www.youtube.com/watch?v=AFo6p8f6XhQ&feature=youtu.be

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=336438&utm_source=dlvr.it&utm_medium=facebook

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/09/25/sleeping-giant-yellowstone-national-park-registers-130-earthquakes-in-less-than-a-week/?fb_source=pubv1

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=335870

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=335880
http://earthquake-report.com/2013/09/24/earthquakes-in-the-world-on-september-25-2013-m4-5-or-more/

http://countdowntozerotime.com/2013/09/16/bracing-for-the-big-one-oregon-emergency-managers-to-persuade-southern-oregon-residents-to-prepare-for-a-9-0-earthquake-and-all-it-may-entail/

http://www.emsc-csem.org/Earthquake/earthquake.php?id=334552

http://theextinctionprotocol.wordpress.com/2013/09/17/rain-apocalypse-slams-mexico-rare-twin-storms-leave-34-dead/

http://voiceofrussia.com/news/2013_09_16/Japanese-government-issues-evacuation-warnings-for-300-000-people-due-to-typhoon-6186/?fb_action_ids=550628841657607&fb_action_types=og.recommends&fb_source=other_multiline&action_object_map=%7B%22550628841657607%22%3A221682704657201%7D&action_type_map=%7B%22550628841657607%22%3A%22og.recommends%22%7D&action_ref_map=%5B%5D

http://beforeitsnews.com/weather/2013/09/theyre-fuked-monster-typhoon-heads-for-fukushima-video-2441568.html?utm_content=awesm-fbshare-small&utm_term=http%3A%2F%2Fb4in.info%2FpI4S&utm_campaign=&utm_medium=facebook-post&utm_source=https%3A%2F%2Fwww.facebook.com%2F

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/09/15/10-dead-whales-wash-up-on-russias-northeast-chukotka-coast/

http://thewatchers.adorraeli.com/2013/09/14/mexico-battered-by-two-tropical-storm-systems-from-pacific-and-atlantic/

http://abclocal.go.com/kgo/story?section=news%2Flocal%2Feast_bay&id=9240762

http://news.sky.com/story/1136060/japan-tornado-dozens-injured-in-saitama

http://www.youtube.com/watch?v=Lg3ryLCOOpk

http://www.youtube.com/watch?v=h686Plywm4c

http://www.youtube.com/watch?v=-OhL0-NCjiA

https://www.youtube.com/watch?v=tAmxzN5Xf3E&feature=youtube_gdata_player

http://www.youtube.com/watch?v=Zn0-i0jdakw

http://www.youtube.com/watch?v=LPoxHEPdqpg

http://www.theweatherspace.com/2013/07/14/unusual-storm-system-moving-backwards-across-united-states-through-end-week/

http://quakes.globalincidentmap.com/

http://endtimeheadlines.wordpress.com/2013/11/27/pond-swallowed-by-sinkhole-fuels-legends-in-bosnian-village/


26 नवंबर 2013

दुनियां सिर्फ तीन खम्भों पर

विशाखापट्नम में नाभिकीय संयंत्र से तबाही ।
नौहझील ( पाकिस्तान ?) के पास परमाणविक कचरा इकट्ठा है । इससे विस्फोट का सम्बन्ध (?)
लेनिन की राजसी संधि विफल ।
टूटेगा हिमखंड ।
चन्द्र मंडल में दो नए तारों का उदय ।
न्यूजर्सी में कुछ घातक असर प्रलय । तट बंध टूटेंगे ।
निआग्रा फाल से हिमखंड का सम्बन्ध । जल स्तर बढेगा ।
दुनियां सिर्फ तीन खम्भों पर टिकी । साउथ पोल ढहा ।
नए धूमकेतु का आगमन ( रॉकी )
चीन के साथ लेनिन की संधि पुतिन ने तोड़ी ।
अलास्का से दो हिमखंड अलग हुए ।
रंगपटनम पानी में तैर जायेगा ।
जैसलमेर में तीन नए टापू बनेगे ।
( 24 नवम्बर से ) तीन दिन बाद होगा धमाका ।
कुचाली तरंगे विकिरण है ।
सूरज काला पड़ेगा । चंद्रमा पीला पड़ेगा ।
पानी ( भूमध्य सागर ) में गिरेंगे तीन बड़ी उल्काएं ।
नॉर्वे का तटीय इलाका हिमखंडो की चपेट में ।
ध्रुवों पर कटान शुरू ।
जैसलमेर में झील है । उसमे भूगर्भ से जल स्रोत फूटेगा ।
सिसली में 3 ज्वालामुखी अलर्ट ।
रोमानिया और बुल्गारिया में 6 तीव्रता का भूकंप ।
सियाचिन समुद्र में डूब जायेगा । भारत से अलग हो जायेगा ।
भूमध्य रेखा पर जल स्तर घट रहा है ।
टोक्यो में तबाही ।
बुल्गारिया के उज़बेक/उज़ेबक प्रान्त में ज़मीन का धंसना शुरू ।
न्यूगिनी, पापुआ क्षेत्र है (?) ।
न्यूबर्न उल्कापात ( अग्निशिखा )
मोज़ाम्बिक में धंसेगी ज़मीन ।
दक्षिणी ध्रुव गलने लगा ।
पेरुग्वे में समुद्री तूफ़ान ।
इस्तांबुल में बम विस्फोट ।
केन्या में ज़मीन का उठान जल प्रपात ।
मॉरीशस में जल प्रलय ।
कोच्चीपट्टनम तक जल भराव ।
उरुग्वे में जल तूफ़ान ।
जकार्ता में विस्फोट ।
सोमालिया में रंगभेद नीति का दबाव ।
लाल निशाने पर होगी चोट ।
पेरू के महासागर में उफान ।
दमिश्क ( पहाड़ी क्षेत्र ) में जलभराव ।
न्यूज़ीलैण्ड में ज्वालामुखी उठेगा । खाड़ी फट जाएगी ।
( 25 नवम्बर से ) सिसली में तीन दिन में कहर ।
भारत की तीन दीवारें ढहीं । पश्चिम उत्तर पूर्व ।
नामीबिया के राष्ट्रपति का देहांत ।
पुश्किन की घेराबंदी ।
वाल्जश्विक में क्रांति ।
अटलांटा में भीषण बर्फ़बारी ।
रोम में तीन समुदायों में भीषण टक्कर ।
राहू केतु जीभ लपलपा रहे हैं ।
तंजानिया में भूकंप ।
इटली में 9.3 तीव्रता के 200 भूकंप ।
आधी धरती होगी नाबाद ।
( तिब्बत लद्दाख के पास ) तेंजियांग में दर्रा है ।
(  पाकिस्तान में ) खेबर का दर्रा है । खेबर के दर्रे से पठान कोट तक भूमिगत सुरंग है ।  इसमें परमाणु विस्फोटक सयंत्र की नालियां डाली गयी हैं ।
उखेबर पश्चिम प्रान्त में परमाणु विस्फोट ।
नेपाल से कोट्टायम तक पानी की लकीर । चेतावनी ।
आधा समुद्र लहुलुहान होगा ।
मछुआरों की जात समाप्त हो जाएगी ।
लाल किले पर भीषण प्रहार ।
जाम्बिया गणराज्य नस्तेनाबूद ।
युगोस्लाविया में रेत के ढेर ।
रोहतक में कर्फ्यू ।
दिलशाद गार्डन में बम फटेगा ।
अंगोला में व्यापक महामारी ।
त्रिचुरापल्ली में अजीब से दहशत ।
मैसूर, आलमबाग में कुआँ फटेगा ।
ज़मीन के चारों तरफ 300 घन मीटर का घेरा कोहरे और धुएं का ।
23 जुलाई से पृथ्वी की नयी संरचना शुरू ।
नया समुद्र बरमूडा के बायें क्षेत्र से उठेगा ।
पुराना समुद्र का पुरुष जा रहा है । नए की नियुक्ति ।
खार ( होशंगाबाद, मध्य प्रदेश ) में व्यापक तबाही ओला वृष्टि से ।
तमिलनाडू में कुछ होना है (चक्रवात ?)
धारचूला ( उत्तराखंड ) में अग्निकांड ।
कोपरखेडी ( पंजिम, गोवा)  उलका वृष्टि ।
रिओ डे जेनेरो में सुनामी जल वृष्टि ।
रतलाम में ओला वृष्टि ।
मध्य प्रदेश में ओला अग्नि वृष्टि ।

22 नवंबर 2013

महाविनाश की उलटी गिनती शुरू

ये तो तय है प्रथ्वी और सौरमंडल में लगातार कुछ विचित्र सा घट रहा है । विश्व के कई स्थानों पर अदभुत असामान्य घटनायें देखने में आ रही हैं । खैर फ़िलहाल कुछ कारणों से मैं इन पर अपनी सटीक टिप्पणी नहीं कर सकता । लेकिन इतना स्पष्ट कर सकता हूँ । ये संकेत शब्दशः बल्कि अक्षरशः मैंने ज्यों के त्यों लिखे हैं । लगभग दो से तीन घण्टे में एक एक कर आये ये संकेत आने के बाद मैंने साथ के साथ फ़ोन द्वारा म प्र. स्वपनिल को बताये । क्योंकि ये लेटने के बाद आते हैं । और मैं स्वयं इनको लिख नहीं सकता । अगर लिखूँगा । तो आने बन्द हो जायेंगे । एक अजीव बात ये है कि इनमें से बहुत से स्थान, बहुत सी चीजें, कई शब्द मेरे लिये बिलकुल ही नये हैं । जिन्हें मैं पहले तो क्या, अब भी नहीं जानता । जैसे - महाविनाश की उलटी गिनती शुरू, मैंने अलंकारिक अन्दाज या भावना या शैली से स्वयं नहीं लिखा । 

बल्कि ये शब्द ठीक ऐसे ही आये । और जैसे - कुचाली तरंगे, मैं क्या मेरे पिताजी या उनके भी पिताजी को नहीं मालूम, क्या बला है ? जैसे - हयूमन बीइंग की शुरूआत, ठीक इन्हीं शब्दों में आया । अतः भाव ये कि किसी समाचार की हेडलाइंस से ये संकेत और सम्बन्धित पूर्व लेखों के संकेत ज्यों के त्यों है । बस मेरी दिलचस्पी एक सामान्य व्यक्ति की भांति इनमें सिर्फ़ इसीलिये है कि - ज्वालामुखी, नाक्षत्रिक घटनाओं, चक्रवात, समुद्रीय हलचल आदि आदि की कई सांकेतिक बातें एकदम सही हुयी या होती जा रही हैं । इनमें कई संकेत जैसे - पानी में घुल रहा है जहर, समुद्री सीमाओं के तटबंध हटे । नील नदी में उफान । जल का उठान 300 किलोमीटर आदि आदि कई संकेत मेरे सामने सचित्र से भी हुये । यानी एकदम स्पष्ट । पर अभी मैं विशेष आवेशों से ग्रस्त हूँ । बहुत पीङादायी स्थिति में । बेहद मुश्किल से टायप आदि भी कर पाता हूँ । अतः विस्तार नहीं दे पाता । लिखना भी दूभर है । जो भी है । आप इन संकेतों को समझने की कोशिश करें । ध्यान रहे । मैं इन्हें अपनी या किसी और की भविष्यवाणी हरगिज नहीं कह रहा । न

ही ये रोज आते हैं । जो भी बात है । मैं बिना छिपाये आपसे स्पष्ट ज्यों की त्यों ही कह रहा हूँ ।
ये संकेत लगभग पन्द्रह दिन पहले के, बीच बीच में आये - राजीव कुलश्रेष्ठ ।
तिरुवत लद्दाख के नीचे और शिंजिआंग के पास है ।
निकरागुआ में भीषण आगजनी ।
पंचगनी में होगा घमासान ।
लोआबे टापू पर कटेगी जलराशि - दक्षिण अफ्रीका के मध्य का हिस्सा ।
समुद्री सीमाओं के तटबंध हटे । 
हवाई में भूकम्प । 
चिली में कहर मारकाट । 
वेनेज़ुएला में संघर्ष रक्तपात ( सामरिक तबाही )
ओहायो में कर्फ्यू । 
नील नदी में उफान । 
पेरू में ज्वालामुखी ।
मलय में आगजनी ।
रक्तक्रांति का दौर ।
मिसीसिप्पी में नरसंहार ।
फुरकेत किसी का अड्डा ।
रोमानिया 3 टुकड़ों में टूटा ।
रोमानिया आया ( हिंद ) महासागर की चपेट में ।
निकरागुआ ढहा ।
रूस में वालजोश्विक भैरव आ गया । 
रूस का छंटवा हिस्सा टूटा । 
गुआटेमाला में भूकम्प । 
पेंसलवेनिया में भूकम्प । 
तुर्कमेनिस्तान में भूकम्प । 
फिलीपीन्स में नरसंहार ( आगजनी ) । 
फ्रैंकफर्ट में अरबों ( जाति ) का घमासान । फ्रैंकफर्ट जमींदोज । 
चीन होगा नए समय का सबसे छोटा देश । आबादी होगी सिर्फ 70 ।
चीन की भूमि नष्ट ।
ऑस्ट्रेलिया जापान के बचने की सम्भावना कम ।
दक्षिण जलमग्न । उत्तर में पहाड़ । पश्चिम में बिखराव । पूरब ढहा ।
पनामा में जल वृष्टि । उरगुए में जलसंधि ।
उत्तर में सूर्योदय ।
नॉर्वे में विस्फोट ।
बरमूडा से गयी है पाताल तक सुरंग । यही है अनंत जलराशि का स्रोत । यही खजाने का स्रोत भी है । 
विएना में भूकम्प । 
खाड़ी देशों में आपातकालीन स्थिति । 
चौरीचौरा कांड की पुनरावृत्ति । 
होंगशेन के किले ( चीन की दीवार, निंगजिआ की पूर्वी दीवाल ) पर कब्ज़ा । 
तेल अवीव से पाकिस्तान तक बारूदी सुरंग । 
भूमध्य सागर में ज्वालामुखी प्रेत । 
जल का उठान 300 किलोमीटर ।
होनुलूलू में भूकम्प या भीषण विस्फोट ।
तेंतिआंग/तेंजिआंग में जलकटाव ।
अल्जीरिआ में भूकम्प ।
पानी में ज़हर घुल रहा है ।
उरंगुटान में 2 टापू ध्वस्त ।
विएतनाम में तबाही ।
यहाँ से मिले संकेत कल रात के हैं -
कम्बोडिआ में अकाल भुखमरी ।
निकरागुआ में भीषण वृष्टि ।
तोरा बोरा पहाड़ में भूस्खलन ।
पानी में घुलेगा ज़हर - सल्फ्यूरिक एसिड की मात्र बढ़ेगी ।
इससे तेज़ाबी वृष्टि होने की सम्भावना ।
अमेज़न में झटका 9.3/9.7 का । 
( शरीर के ) अंदरूनी चोटों के मामलों में वृद्धि । 
घातक लक्षणों वाले ज्वर । 
( ये मुख्यतः ) जल प्रलय होगी । 
पश्चिमी पंजाब ( पाकिस्तान ? ) का तटबंध टूटेगा । 
न्यूज़ीलैण्ड में बम फटा ।
हयूमन बीइंग की शुरुआत । कल रात्रि से ।
प्रचंड काली हवाओं का आगमन ।
टापुओं में जलभराव शुरू । टापू दलदल में धसे ।
मलयागिर ( उड़ीसा/नेपाल ? ) के पहाड़ ज़मींदोज़ ।
पाकिस्तान में परमाणु बम फटेगा ।
काबुल पेशावर के ( किसी ) कारण पाकिस्तान में राष्ट्रीय आपदा ।
पाकिस्तान में परमाणु बम अंडरग्राउंड है । ये दो हैं । खुद का बनाया बम फटेगा । 
तुर्क मंगोलिया, ईरान, स्वीडेन, नार्वे । इस पट्टी पर कहर होगा ।
पृथ्वी के ध्रुव परिवर्तित । 
हिरण्यकश्यप और हिरण्याक्ष आयेंगे धरती पर असुरों से बदला लेनें । 
तीनों लोकों के देवता ( इस हलचल से ) थरथर काप रहे हैं । 
4 केन्द्रों से उठेगा नया सिरा - भारत, भूटान या पश्चिमी बांग्लादेश ( बंगाल ?) ज़ाम्बिया और निकोलस का गढ़ ।
भूटान दफ़न होने की सम्भावना । नेपाल भी खत्म ।
परिवर्तित ध्रुवों ने ( कल से ) घूमना शुरू किया ।
पृथ्वी पर भीषण आगजनी । ( ये शायद धूमकेतु, ज्वालामुखी और परमाणु बम आदि से होगी ।
- महाविनाश की उलटी गिनती शुरू । ( कल रात्रि से )
- सिसली में ज्वालामुखी प्रेत । 
- पृथ्वी पर कुचाली तरंगों का समावेश । ( होने लगा )
- रोहिणी फटेगा । रोहिणी में टकराएंगे दो विमान  ( मैं खुद इसका मतलब नहीं समझा । पर शायद इसका सम्बन्ध तारे से है । )
- मंगल लाल से पीला होने लगा ।
- कुचाली तरंगे ऐसा घेरा बना लेती हैं । जहाँ कोई अन्य चीजे काम नहीं करती हैं । जिस क्षेत्र में होती हैं । वहाँ भीषण तबाही करती हैं । ( विज्ञान शायद इनको स्थिर तरंगे कहता है )
इसी विषय पर तीनों लिंक्स -
अगले चार महीनों में क्या होने वाला है
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.in/2013/10/blog-post_9.html
लिख गयी है महाविनाश की रूपरेखा
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.in/2013/10/blog-post_11.html
महाविनाश की उलटी गिनती शुरू 
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.in/2013/11/blog-post_22.html
ऐसा ही एक और संदर्भ -
एडगर केसी ने अपने जीवन में बहुत सी बातें कहीं । वो तंद्रा की अवस्था में यह सब बताते थे । इसलिए उन्हें sleeping prophet कहा जाता है । उन्होंने लगभग हर विषय पर बोला । उदाहरण के लिए बीमारी के इलाज बताए । लेकिन समस्या यह है कि उनके बताए उपायों में प्रयोग होने वाली वस्तुएं या तो धरती पर से समाप्त हो गईं । या आने वाले समय में खोजी जाएंगी । इस कारण कई मरीजों की इलाज पता लगने के बावजूद मृत्यु हो जाती थी । केसी द्वारा बोली गई बातें श्रृंखलाबद्ध रूप में संकलित हैं । और इन पर अध्ययन के लिए यह सोसाइटी कार्य कर रही है ।
 http://www.edgarcayce.org/edgar-cayce1.html 

एडगर केसी " अनेक महल " 8

http://panchjanya.com/arch/2005/6/12/File16.htm

विशेष - ये उन दो महत्वपूर्ण साइटस के लिंक हैं । जहाँ आप भूकंप ज्वालामुखी और प्राकृतिक आपदाओं के बारे में कुछ निरीक्षण परीक्षण जैसा अध्ययन कर सकते हैं ।
http://earthquakes.volcanodiscovery.com/
Interactive Map of Active Volcanoes and recent Earthquakes world-wide
earthquakes.volcanodiscovery.com
http://hisz.rsoe.hu/alertmap/index2.php
RSOE EDIS - Emergency and Disaster Information Service
hisz.rsoe.hu
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Zindagi Haseen Hai Ise Pyar Karo
Har Raat Ki Nai Subha Ka Intjaar Karo
Wo Paal Bhi Aayega, Jiska Aapko Intjaar Hai
Bas Apne Rab Par Bharosa Aur Waqt par Aitbaar Karo
Awara parinda Vk$

19 नवंबर 2013

भेड़िया सूर्य को खा जाएगा

अगर आज यहाँ वाइकिंग होते । तो यॉर्क में बजे एक भोंपू की आवाज से हर जगह अफरा तफरी का माहौल हो जाता । इस प्राचीन वाद्य यन्त्र को 14 नवम्बर की रात को बजाया गया । जो कि नॉर्स मिथक के अनुसार विश्व के समाप्ति के ठीक 100 दिन बचे होने का द्योतक है । किंवदंतियों के अनुसार नॉर्स देवता, हाईमडाल इस जेलेर्र्होर्न ( भोंपू ) को बजाकर वाइकिंग प्रलय का संकेत देते । जिसे " रेग्नरोक " के नाम से भी जाना जाता है । रेग्नरोक जिसका अर्थ होता है - देवताओं की क़यामत । सर्दियों की सर्दी के बाद आयेगी । वाइकिंग लोगों का मानना था कि प्रलय से पूर्व धरती पर लगातार तीन जमा देने वाली सर्दियाँ आयेंगी । जिनके बीच कोई गर्मी नहीं पड़ेगी । समस्त नैतिकता अद्रश्य हो जायेगी । और दुनिया भर में युद्ध छिड जायेंगे । जो कि अंत की शुरुआत के द्दोतक हैं । भेड़िया सूर्य को खा जाएगा । और उसका भाई हाटी चंद्रमा 

को खा जाएगा । आकाश में से सारे तारे गायब हो जायेंगे । और धरती अनंत अन्धकार में चली जायेगी । नॉर्स मिथकों के विशेषज्ञों ने गणना की है कि वाइकिंग लोगों के अनुसार ये घटना 22 फरवरी 2014 को होगी । इस दिन देवता ओडिन फेंरीर नामक भेडिये और अन्य " निर्माता " देवताओं के हांथों मार दिए जायेंगे । प्रचंड भूकंप आयेंगे । समुद्र उपाद चढ़ जाएगा । धरती और आकाश विषाक्त हो जायेंगे । इस मौत के बाद धरती को समुद्र में डूब जाने का पूर्वादेश मिला है । जिससे एक नयी, अनंत संसाधनों से परिपूर्ण; काल्पनिक सी दुनिया का मार्ग प्रशस्त होगा । कथा के अनुसार इस बात का प्रभाव सर्वप्रथम मनुष्यों पर पड़ेगा । भाई भाई से लडेगा । और सभी सीमाएँ समाप्त हो जायेंगी । सीमाएँ समाप्त होने का आशय हम आज के इन्टरनेट युग से ले सकते हैं । वाइकिंग लोगों के अनुसार प्रलय से पूर्व एक भीषण ठण्ड का भी जिक्र है । हाल ही में सूर्ये के उर्जा उत्सर्जन में कमी के चलते ऐसा अनुमान है कि धरती एक छोटे हिमयुग का सामना कर सकती है । कथा के एक और हिस्से में बताया गया है कि मिड्गार्ड का सरीसृप जिसका नाम जोर्मुडगंड है । वह स्वयं को अपनी पूंछ से आजाद कर लेगा । और समुद्र से ऊपर उठेगा ।
इस लिंक पर पूरा लेख अंग्रेजी भाषा में उपलब्ध है ।
http://www.dailymail.co.uk/sciencetech/article-2507778/Will-world-end-100-days-Sounding-ancient-trumpet-York-warns-Viking-apocalypse-22-February-2014.html

इसी विषय पर तीनों लिंक्स -
अगले चार महीनों में क्या होने वाला है
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लिख गयी है महाविनाश की रूपरेखा
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ऐसा ही एक और संदर्भ -
एडगर केसी ने अपने जीवन में बहुत सी बातें कहीं । वो तंद्रा की अवस्था में यह सब बताते थे । इसलिए उन्हें sleeping prophet कहा जाता है । उन्होंने लगभग हर विषय पर बोला । उदाहरण के लिए बीमारी के इलाज बताए । लेकिन समस्या यह है कि उनके बताए उपायों में प्रयोग होने वाली वस्तुएं या तो धरती पर से समाप्त हो गईं । या आने वाले समय में खोजी जाएंगी । इस कारण कई मरीजों की इलाज पता लगने के बावजूद मृत्यु हो जाती थी । केसी द्वारा बोली गई बातें श्रृंखलाबद्ध रूप में संकलित हैं । और इन पर अध्ययन के लिए यह सोसाइटी कार्य कर रही है ।
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एडगर केसी " अनेक महल " 8
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12 नवंबर 2013

प्राकृतिक आपदा दर्शाते प्रलय के पूर्व संकेत

मैं अभी इस बात को लेकर एकदम स्पष्ट नहीं हूँ कि क्या सही है और क्या गलत । पर सब कुछ सामान्य सा नहीं है । मैं अपने और तुलनात्मक आम जनजीवन से इसको थोङा अलग ही देखता हूँ । क्योंकि मैं किसी ज्योतिषी या भविष्यवक्ता की भांति इसमें कोई हर्ष या गर्व भी महसूस नहीं करता । ये प्राकृतिक आपदा दर्शाते पूर्व संकेत या किसी समय समाज के परिवर्तन या मूलभूत बदलाव के संकेत किसी भी सूक्ष्म या अणु योगी आदि योग विधाओं से जुङे व्यक्तित्व के दिनचर्या गतिविधियों आदि का एक आम हिस्सा ही है । और आश्चर्य नहीं कि ये बहुत लोगों को आते हैं । यहाँ तक खाली दिमाग से युक्त आध्यात्मिक चेतना से खास जुङाव रखने वाले कुछ सामान्य व्यक्तियों को भी । अतः गर्व जैसा कुछ नहीं है । लेकिन इन्हीं संकेतों से मेरी सांसारिक सामाजिक कार्यों के प्रति एक उदासीनता सी बनी हुयी है । मेरी साहिल और स्वपनिल से इस विषय को लेकर घण्टों बात होती रहती है । क्योंकि वे इन विषयों का पूर्व में घटित घटनाओं पर खासा पूर्व अध्ययन भी रखते हैं ।
जैसा कि आपने देखा होगा । मेरे द्वारा बताये गये संकेत बाह्य तौर भी एक कृम में तेजी से उभर रहे हैं । वास्तव में दृश्य अदृश्य ज्ञात अज्ञात तौर पर घटनायें इतनी तेजी से घट रही हैं कि प्रमुख वैज्ञानिक भी कुछ कह नहीं पा रहे । इस अंश प्रलय को लेकर जहाँ तक मेरे अनुभव में आया है । दैवीय सत्ता के कार्यकृम में कुछ बदलाव हुये हैं । पहले यह प्रलय हाहाकारी दृश्य लिये हुये थी । जिसमें धरती के जनजीवन युक्त स्थानों पर ज्वालामुखी, भूकम्प, परमाणु केन्द्रों

से विनाश और भूगर्भ से जहरीली गैसों का रिसाव प्रमुख था । सीधी सी बात है । ऐसा होने पर अफ़रातफ़री का माहौल अधिक होना था । अतः समूचे बदलाव को शान्तिप्रिय ढंग से क्रियांवित करने हेतु इसमें खास बदलाव हुआ है । जिसके चलते फ़िलीपींस तूफ़ान जैसी घटनायें एक दृश्य उदाहरण के रूप में है । वास्तव में वैश्विक जनजीवन पूरी तरह से अस्त व्यस्त न हो । और नयी वैश्विक सभ्यता संस्कृति का उदगम हो । और क्योंकि बहुसंख्यक लोग प्रलय की बेताबी से प्रतीक्षा कर रहे हैं । अतः तेजी से बदलती स्थितियां सम्भवतः इसका संकेत देने लगी हैं । और खास आंतरिक स्तर पर कुछ अधिक ही देखने में आ रहा है । 

पुनश्च - मुझे नहीं पता असामान्य परिवर्तनों की आपको क्या क्या जानकारी मिल रही है । पर बहुत सी चीजें बहुत तेजी से घट रही हैं । इनमें जैसा कि मैंने कई बार जिक्र किया । बहुसंख्यक लोगों की जिन्दगी जैसे पहिये से उतर कर ठहर सी गयी हो । मुश्किल से रोटी भर कमा पा रहे हैं । मैंने कहा था - जो पहले से प्रचुर मात्रा में पुण्यवान हैं । वही इस समय ठीक रहेंगे । बाकी शरणार्थी कैंप जैसे । ये थी धन सम्बन्धित । तन सम्बन्धित परेशानी में - अजीब सी बीमारियों का चलन देखने में आयेगा । लगभग हर आदमी किसी न किसी दवा के सहारे से जीवन चला पायेगा । क्योंकि ये बीमारियां दैवीय होंगी । इसलिये शरीर में एक अजीब सा आलस्य थकान और दर्द कसकता सा 

मालूम पङता रहेगा । एक और अनुभव में ऐसा लगेगा । जैसे शरीर में किसी ने हवा सी भर दी हो । और शरीर भारी भारी सा रहता हो । बिना वजह सिर भी भारी भारी सा रहेगा । मन से सम्बन्धित में - मन में एक उत्साहहीनता व्याप्त होकर अजीब सी जङता आ जायेगी । मन बुद्धि ठीक से निर्णय नहीं ले सकेंगे । और अक्सर लोगों का मन हर तरफ़ से उचाट सा रहेगा । जैसे पता नहीं क्या होने वाला है ?
अभी कल मुझे एक उन्मादी ज्वर का भी संकेत मिला है । ये क्या है । मैं नहीं जानता । पर ये लोगों की सोचने समझने की शक्ति छीन लेगा । ठीक वैसा ही । जैसे श्रीराम ने खर-दूषण से स्वयं लङने के बजाय ऐसा भृम पैदा कर दिया कि उन सबको आपस में एक दूसरा राम नजर आने लगा । और वे बिना ( राम के ) श्रम के आपस में ही हताहत हो गये । मर गये । दरअसल मन स्तर पर कुछ भी अधिक अहसास न होने का माया योग तरीका विलक्षण है । इसमें आपको विश्व को जैसा

देखने की आदत पङी हुयी है । उसमें बेहद बदलाव उठापटक के बावजूद भी शेष जनता को कोई मानसिक आघात नहीं पहुंचेगा । और नयी व्यवस्था आराम से कार्य करने लगेगी । जहाँ तक इस तवाही के केन्द्र की बात है । वह अजरबेजान से हो सकता है । अमेरिका के पापुआ न्यूगिनी, लेबनान, वियतनाम और लगभग पूरा अमेरिका ही प्रभावित होकर अस्तित्व खो बैठेगा । भारत में भी निचला हिस्सा यानी केरल से ऊपर आधा पानी में डूब जायेगा । दिल्ली का मैंने बहुत पहले स्वपनिल को बता दिया था । दिल्ली के कुछ दो तीन स्थान छोङकर सारी दिल्ली ढह जायेगी । खोजे नहीं मिलेगी । आपको शायद पता न हो । कई स्थानों पर अचानक ऐसे बङे और गहरे पाताली गढ्ढे तेजी से बन रहे हैं । जिनका अन्त दिखाई नहीं देता । मेरे ख्याल से जापान आस्ट्रेलिया कभी थे । ऐसा कहा जायेगा । सबसे ज्यादा नुकसान चीन का होगा । भारत में केरल से समुद्र सीधा चीन की छाती से गुजरता हुआ रूस के समुद्र से एक हो जायेगा ।
अभी कुछ दिनों पहले मुझे एक संकेत मिला था - जाग उठा ज्वालामुखी प्रेत । ये पूर्व का सिद्ध भीषण ज्वालामुखी इटली के समुद्र में स्थित है । ये पांच सौ किलोमीटर के परिधि के ठीक केन्द्र से तीन सौ किलोमीटर ऊँचाई का जलीय फ़ब्बारा सा छोङेगा । आप कल्पना करिये । क्या हो सकता है ?
इसी विषय पर तीनों लिंक्स -
अगले चार महीनों में क्या होने वाला है
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लिख गयी है महाविनाश की रूपरेखा
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महाविनाश की उलटी गिनती शुरू 
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ऐसा ही एक और संदर्भ -
एडगर केसी ने अपने जीवन में बहुत सी बातें कहीं । वो तंद्रा की अवस्था में यह सब बताते थे । इसलिए उन्हें sleeping prophet कहा जाता है । उन्होंने लगभग हर विषय पर बोला । उदाहरण के लिए बीमारी के इलाज बताए । लेकिन समस्या यह है कि उनके बताए उपायों में प्रयोग होने वाली वस्तुएं या तो धरती पर से समाप्त हो गईं । या आने वाले समय में खोजी जाएंगी । इस कारण कई मरीजों की इलाज पता लगने के बावजूद मृत्यु हो जाती थी । केसी द्वारा बोली गई बातें श्रृंखलाबद्ध रूप में संकलित हैं । और इन पर अध्ययन के लिए यह सोसाइटी कार्य कर रही है ।
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एडगर केसी " अनेक महल " 8
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100 दिन बाद बैंक में रखा आपका पैसा हो जाएगा 'अनसेफ'!....http://aajtak.intoday.in/story/microsoft-windows-xp-on-the-way-out-psu-banks-face-security-risk-1-746974.html


Ek bar Rajiv Gandi yamlok me bathe the..Wo achanak hans pade Indira Gandi -  kyo hanse. ? Rajiv -  Soniy se shaadi meine ki, par bechara manmohan singh bhugat raha hai...!! 

10 नवंबर 2013

ओम बन्ना का रहस्य

गुरूजी सादर प्रणाम ! मेरे मन में एक प्रश्न था । वो ये है के हमारे यहाँ राजस्थान में ओम बन्ना का काफी बोलबाला हो रहा है । उनके पीछे की कहानी मैंने दोस्तों से सुनी भी है । और इंटरनेट के जरिये पढ़ी भी है । वो कहानी मैं भेज रहा हूँ । मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूँ कि - ये क्या सच हो सकता है क्या ? या फिर यूँ ही लोगो का अन्धविश्वास है । और साथ ही साथ ये भी जानना चाहता हूँ कि इस कहानी या घटना के बारे में आपकी क्या राय है । 
स्टार one पर एक एपिसोड भी इनके बारे में आया था । मैं उसका लिंक यहाँ दे रहा हूँ । साथ ही उनकी कुछ फ़ोटो भी आपेको मेल कर रहा हूँ !
उनके बारे में जो पढ़ा । या सुना है । वो ये है कि जोधपुर अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोधपुर से पाली जाते वक्त पाली से लगभग 20 km पहले रोहिट थाने का " दुर्घटना संभावित " क्षेत्र का बोर्ड लगा दिखता है । और उससे कुछ दूर जाते ही सड़क के किनारे जंगल में लगभग 30 से 40 प्रसाद व पूजा अर्चना के सामान से सजी दुकाने दिखाई देती हैं । और साथ ही नजर आता है - भीड़ से घिरा एक चबूतरा । जिस पर एक बड़ी सी फोटो लगी । और हर वक्त जलती ज्योति । और चबूतरे के पास ही नजर आती है - एक फूल मालाओं से लदी बुलेट मोटर साईकिल । यह वही स्थान है । और वही मोटर साइकिल । जिसका मैं परिचय कराने जा रहा हूँ ।
यह " ओम बना " का स्थान है । ओम बना ( ओम सिंह राठौड़ ) पाली शहर के पास ही स्थित चोटिला गांव के 

ठाकुर जोग सिंह जी राठौड़ के पुत्र थे । जिनका इसी स्थान पर अपनी इसी बुलेट मोटर साईकिल पर जाते हुए 1988 में एक दुर्घटना में निधन हो गया था । स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थान पर हर रोज कोई न कोई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाया करता था । जिस पेड के पास ओम सिंह राठौड़ की दुर्घटना घटी । उसी जगह पता नहीं । कैसे कई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते । यह रहस्य ही बना रहता था । कई लोग यहाँ दुर्घटना के शिकार बन अपनी जान गँवा चुके थे । ओम सिंह राठोड की दुर्घटना में मृत्यु के बाद पुलिस ने अपनी कार्यवाही के तहत उनकी इस मोटर साईकिल को थाने लाकर बंद कर दिया । लेकिन दूसरे दिन सुबह ही थाने से मोटर साइकिल गायब देखकर पुलिस कर्मी हैरान थे । आखिर तलाश करने पर मोटर साईकिल वही दुर्घटना स्थल पर ही पाई गई । पुलिस कर्मी दुबारा मोटर साईकिल थाने लाये । लेकिन हर बार सुबह मोटर साईकिल थाने से रात के समय गायब हो दुर्घटना स्थल पर ही अपने आप पहुँच जाती । आखिर पुलिस कर्मियों व ओम सिंह के पिता ने ओम सिंह की मृत आत्मा की यही इच्छा समझ उस मोटर साईकिल को उसी पेड के पास छाया बनाकर रख दिया । इस चमत्कार के बाद रात्रि में वाहन चालको को ओम सिंह अक्सर वाहनों को दुर्घटना से बचाने के उपाय करते व चालकों को रात्रि में दुर्घटना से सावधान करते दिखाई देने लगे । वे उस दुर्घटना संभावित जगह तक पहुँचने वाले वाहन को जबरदस्ती रोक देते या धीरे कर देते । ताकि उनकी तरह कोई और वाहन चालक असामयिक मौत का शिकार न बने । और उसके बाद आज तक वहाँ दुबारा कोई दूसरी दुर्घटना नहीं हुयी ।
ओम सिंह राठौड़ के मरने के बाद भी उनकी आत्मा द्वारा इस तरह का नेक काम करते देखे जाने पर वाहन चालकों व स्थानीय लोगों में उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती गयी । और इसी श्रद्धा का नतीजा है कि ओम बना के इस स्थान पर हर वक्त उनकी पूजा अर्चना करने वालों की भीड़ लगी रहती है । उस राजमार्ग से गुजरने वाला हर वाहन यहाँ रुककर ओम बना को नमन कर ही आगे बढ़ता है । और दूर दूर से लोग उनके स्थान पर आकर उनमे अपनी श्रद्धा प्रकट कर उनसे व उनकी मोटर साईकिल से मन्नत मांगते हैं । कौशलेंद्र नागौरिया
Om Banna पर star one पर प्रसारित होने वाले एक serial के episod का link
http://www.youtube.com/watch?v=YGgE8o8KPfw
उत्तर शीघ ही

30 अक्तूबर 2013

अद्वैत ज्ञान पर आर्य अज्ञान का प्रलाप

स्वामी दयानंद की वेद भाष्य को देन -  भाग 14
वेद और अद्वैतवाद ।  डा. विवेक आर्य - स्वामी दयानंद ने सत्यार्थ प्रकाश के 11वें समुल्लास में अद्वैतवाद विचारधारा पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट किया है । अद्वैतवाद विचारधारा की नीव गौड़पादाचार्य ने 215 कारीकायों (श्लोकों) से की थी । इनके शिष्य गोविन्दाचार्य हुए और उनके शिष्य दक्षिण भारत में जन्मे शंकराचार्य हुए । जिन्होंने इन कारीकायों का भाष्य रचा था । यही विचार अद्वैतवाद के नाम से प्रसिद्ध हुआ था । शंकराचार्य अत्यंत प्रखर बुद्धि के अद्वितीय विद्वान थे । जिन्होंने भारत देश में फैल रहे नास्तिक, बुद्ध और जैन मत को शास्त्रार्थ में परास्त कर वैदिक धर्म की रक्षा की । उनके प्रचार से भारत में नास्तिक मत तो समाप्त हो गया । पर - मायावाद अर्थात अद्वैतवाद ? (यह क्या बला है - राजीव कुलश्रेष्ठ) की स्थापना हो गयी ।
अद्वैत मत क्या हैं ? स्वामी शंकराचार्य ब्रह्म के 2 रूप मानते हैं । 1 अविद्या उपाधि सहित है । जो जीव कहलाता है । और दूसरा सब प्रकार की उपाधियों

से रहित शुद्ध ब्रह्म है । अविद्या की अवस्था में ही उपास्य उपासक आदि सब व्यवहार हैं और जब जीव अविद्या से रहित होकर `अहम ब्रह्मास्मि' अर्थात - मैं ब्रह्म हूँ । इस अवस्था को पहुँच जाता है । तो जीव का जीवपन नष्ट हो जाता है ।
माया का स्वरुप - अद्वैत मत के अनुसार माया के सम्बन्ध से ही ब्रह्म जीव कहता है । यह माया रूप उपाधि अनादि काल ? से ही ब्रह्म को लगी हुई है । और इस अविद्या के कारण ही जीव अपने आपको ब्रह्म से भिन्न समझता है । शंकराचार्य के अनुसार - माया को परमेश्वर की शक्ति, त्रिगुणात्मिका, अनादि रूपा, अविद्या का नाम दिया है । इसे अनिर्वचनीय (जो कहीं न जा सके) माना है ।
जगत मिथ्या - अद्वैत मत के अनुसार जगत मिथ्या है । जिस प्रकार स्वपन झूठे होते हैं ? तथा अँधेरे में रस्सी को देखकर सांप का भ्रम होता है । उसी प्रकार इस भ्रान्ति, अविद्या, अज्ञान के कारण ही जीव इस मिथ्या संसार को सत्य मान रहा है । वास्तव में न कोई संसार की उत्पत्ति, न प्रलय, न कोई साधक, न कोई मुमुक्षु (मुक्ति) चाहने वाला है । केवल ब्रह्म ही सत्य है । और कुछ नहीं ।
अकर्ता तथा अभोक्ता - अद्वैत मत के अनुसार यह अंतरात्मा न कर्ता है । न भोक्ता है । न देखता है । न दिखाता है ? यह निष्क्रिय है ? सूर्य के प्रतिबिम्ब की भांति जीवों की क्रियाएं ? बुद्धि पर चिदाभास (चैतन्य) प्रतिबिम्ब छाया Reflection से हो रही हैं ।
द्वैतवाद के समर्थक वेद और उपनिषद - शंकर अपने शारीरिक भाष्य 1/1/3 में ऋग्वेद आदि को अपौरुष्य और सूर्य की भांति स्वत: प्रमाण माना है ? वेद संहिता को प्रमाण मानने के बावजूद शंकर ने वेदों में से 1 भी प्रमाण अद्वैतवाद की पुष्टि के लिए प्रस्तुत नहीं किया । जबकि वेदों में अनेक प्रमाण जीवात्मा और परमात्मा की 2 भिन्न चेतन सत्ताएँ घोषित करते हैं । जैसे -
द्वा सुपर्णा सयुजा सखाया समानं वृक्षं परिषस्वजाते I
तयोरन्य: पिप्पलं स्वाद्वत्यनश्ननन्यो अभिचाकशीति । ऋग्वेद 1/164/20 
- 2 चेतन । ईश्वर और आत्मा । अनादि प्रकृति ? रुपी वृक्ष के साथ सम्बंधित हैं । इसमें 1 आत्मा अपने अपने कर्मों का फल भोग करती है । जबकि दूसरी परमात्मा किसी भी प्रकार के फलों का भोग न करता हुआ उसको देखता है ।
इसी मन्त्र का श्वेताश्वतर उपनिषद 4/6 में शंकर अर्थ करते हैं - परमेश्वर नित्य शुद्ध बुद्ध स्वभाव वाला सबको देखता है । यदि अद्वैतवाद की मानें । तो ईश्वर से भिन्न कोई और पदार्थ नहीं है । तो फिर ईश्वर किसे देख रहे है ?

ऋग्वेद 10/82/7 और यजुर्वेद 17/31 में भी आया है - हे जीवो ! तुम उस ब्रह्म को नहीं जानते । जिसने सारी प्रजा को उत्पन्न किया है । वह तुमसे भिन्न है । और तुम्हारे अंदर भी है ।
बृहद-अरण्यक उपनिषद के अंतर्यामी प्रकरण में लिखा है - जिस प्रकार परमात्मा - सूर्य, चन्द्र, पृथ्वी आदि पदार्थों के भीतर व्यापक है और उनको नियम में रखता है । उसी प्रकार जीवात्मा के भीतर भी व्यापक है । और इस जीवात्मा से पृथक भी है ।
श्वेताश्वतर उपनिषद 4/5 में प्रकृति के लिए - अजा और परमात्मा और जीव के लिए 2 बार - अज: पद आया है

। इसमें परमेश्वर, आत्मा और प्रकृति तीनों को अनादि ? बताया गया है ।
कठो-उपनिषद 1/3/1 में आया है - इस शरीर में छाया अर्थात अज्ञान से युक्त शरीर और आतप अर्थात प्रकाशमय परमात्मा है । इस मंत्र में 2 भिन्न चेतन सत्ता का स्पष्ट प्रमाण है ?
अद्वैतवाद समालोचना - जगत मिथ्या - शंकर के दादा गुरु गौडपादाचार्य ने 2/32 (गौ. का.) में ब्रह्म सत्य है । और जगत मिथ्या है । यह सिद्धांत वेदादि शास्त्रों, प्रत्यक्ष प्रमाण और युक्तियों के विरुद्ध स्थापित किया है ।
यजुर्वेद 40/8 में लिखा है - इस जगत में परमात्मा ने यथार्थ पदार्थों का निर्माण किया । जो यथार्थ पदार्थ हैं । वह मिथ्या कभी हो नहीं सकता । इसलिए जगत मिथ्या कैसे हुआ ?
ऋग्वेद 10/180/3 में लिखा है - परमात्मा प्रलय के पश्चात पूर्ववत सृष्टि की रचना करते हैं । क्या परमात्मा मिथ्या प्रकृति की रचना करते हैं ? और क्या यह नियम अनादि काल से चलता आ रहा हैं ?
यजुर्वेद 40/9 में प्रकृति को असम्भूति अर्थात नित्य लिखा है फिर नित्य प्रकृति मिथ्या कैसे हो गयी ?
ऋग्वेद 1/4/14 में लिखा है - परमात्मा ने अपने से भिन्न सब संसार को रचा ।
छान्दोग्य उपनिषद 6/4/4 में लिखा है - इस सारी सृष्टि का मूल सत्य है । और सत्य पर ही सब आश्रित है ।

वैशेषिक दर्शन ने 6 पदार्थों के और न्याय दर्शन ने 16 पदार्थों के तत्व ज्ञान से मुक्ति लिखी है ? यदि यह जगत मिथ्या है । तो इन पदार्थों के तत्व ज्ञान से मुक्ति मिलना निरर्थक सिद्ध होता है ।
वेद और दर्शन, उपनिषद के प्रमाणों से स्पष्ट प्रमाणित होता है कि जगत कार्य क्षेत्र है और इसी में जीव अपने कर्म फल प्राप्ति के लिए ही देह धारण करके भिन्न योनियों में इस विश्व में आकर फल का उपभोग करता है । जब जगत ही मिथ्या है । तो जीना किसका और फल पाना किसका ? इसलिए धर्म शास्त्रों के प्रमाण से यह सिद्ध होता है कि जगत मिथ्या नहीं । अपितु यथार्थ है ।
माया की समीक्षा - अद्वैत मत के अनुसार जीव और ब्रह्म की भिन्नता का कारण माया है । जिसे अविद्या भी कहते हैं । जिस समय जीव से अविद्या दूर हो जाती है । उस समय वह ब्रह्म हो जाता है । हमारा प्रथम आक्षेप है - यदि अविद्या ब्रह्म का स्वाभाविक गुण Natural  है । तब तो अविद्या का नाश नहीं हो सकता । क्योंकि स्वाभाविक गुण सदा ही अपने आश्रित द्रव्य के आधार पर स्थिर रहता है । यदि यह अविद्या नेमैत्तिक Acquired  है । तो किस निमित्त से ब्रह्म का अविद्या से संपर्क हुआ । यदि कोई और निमित्त माना जाये । तो ब्रह्म के साथ उस निमित्त को भी नित्य मानना पड़ेगा और उसे नित्य मानने पर द्वैत सिद्ध होता है । फिट अद्वैतवाद नहीं रहता । दूसरे इस अविद्या का नाश वेदादि शास्त्रों के ज्ञान द्वारा होता है । तो फिर वह निरुपाधि ब्रह्म वेद ज्ञान को कैसे उत्पन्न करता है ?

अद्वैत मत के अनुसार - जीव की ब्रह्म से कोई भिन्न सत्ता नहीं है । ब्रह्म का जो आभास है । जिसे चिदाभास कहते हैं । अर्थात अंत:करण पर चैतन्य ब्रह्म के प्रतिबिम्ब के कारण जीव अपने आपको ब्रह्म होता हुआ भी जीव समझ रहा है । जिस प्रकार जल कुण्डों में सूर्य का प्रतिबिम्ब दिखाई देता है और जल के हिलने से सूर्य दिखाई देता है । इसी प्रकार शरीर में अंत:करण के ऊपर ब्रह्म का आभास (चिदाभास) पड़ता है । उसी के कारण ही जीव सब खेल करता है । 
इसकी समीक्षा यह है कि - निराकार और सर्व व्यापक का प्रतिबिम्ब नहीं होता । प्रतिबिम्ब साकार और दूर की वस्तु का होता है । इसलिए सूर्य का दृष्टान्त यहाँ ठीक नहीं बैठता ? सूर्य साकार है और जल के कुण्डों से दूर है । इसलिए भीतर और बाहर व्यापक निराकार ब्रह्म में यह दृष्टान्त नहीं घट सकता ।

अद्वैत मत के अनुसार - भ्रान्ति होने के कारण हम ब्रह्म होते हुए भी अपने आपको जीव मान रहे हैं और यह भ्रम बुद्धि को होता है । आत्मा को नहीं । इसकी समीक्षा यह है कि - बुद्धि जड़ वस्तु है और सुख दुःख आदि का अनुभव चेतन यानी आत्मा को होता है । जड़ को नहीं । जिस प्रकार नेत्र के देखने से कोई नहीं कहता कि - नेत्र देखते हैं । सब यही अनुभव देखने वाला तो भीतर चेतन आत्मा है । नेत्र आदि तो उसके साधन भर हैं ।
ऋग्वेद 1/164/20 तथा मुण्डक उपनिषद 3/1/1 में लिखा है  - यह जीव ही सुख दुःख का भोक्ता है । कठ उपनिषद 1/1/3 में लिखा है - शरीर, इन्द्रिय और मन के साथ युक्त होकर यह आत्मा सुख दुःख का उपभोग करता है ।
प्रश्न उपनिषद 4/9 में लिखा है - यह आत्मा ही देखता, सुनता, सूंघता और मनन करता है । इन प्रमाणों से स्पष्ट सिद्ध होता है - मायावादियों का यह विचार कि सांसारिक खेल बुद्धि करती है । आत्मा नहीं । सर्वथा निर्मूल है ।
अद्वैत मत के कारण हानियां - प्राचीन वैदिक इतिहास को पढने से पता चलता है कि आर्य लोग चरित्र में ऊँचे, ज्ञान में निपुण, युद्ध विद्या में कुशल होते थे । उनमें बुद्धि, वीरता और निर्भयता कूट कूट कर भरी होती थी । दुष्टों के नाश और सज्जनों की रक्षा के लिए वे सदा तत्पर रहते थे । 
ऋग्वेद 10/28/4 में लिखा है - वीर पुरुष नदियों के बहाव को उल्टा देते हैं  और घास खाने वाले जीवों से सिंह को भी मार डालते हैं । वैदिक काल में आर्य, शास्त्र और शस्त्र दोनों में निपुण होते थे और परमेश्वर के अलावा किसी से भय नहीं खाते थे । इस प्रकार की शक्ति रखने वाले आर्यों का स्वार्थी, दब्बू, भयभीत और निरुत्साही जाति में परिवर्तन कैसे हो गया ? 
इसका कारण भारत में फैले 3 अवैदिक मत हैं - जैन, बौद्ध और वेदांत । जैन और बौद्ध मत के प्रभाव से छदम अहिंसा का प्रपंच आर्य हिन्दू जाति में घुस गया । जिससे वे शक्तिहीन होकर कमजोर हो गए और वेदांत के प्रभाव के कारण आर्य जाति में संसार से उदासीनता, झूठा वैराग्य और अकर्मण्यता आदि ने जन्म ले लिया । हम उदाहरण देकर अपने कथन को सिद्ध करते हैं ।
- सिंध का राजा दाहिर वीर राजा था । पर उसके राज्य में बौद्धों का वर्चस्व था । जब मुहम्मद बिन कासिम ने सिंध पर हमला किया । तो बौद्धों ने सोचा कि - युद्ध करना अहिंसा नहीं हिंसा है । इसलिए राजा का साथ नहीं दिया । जिससे राजा दाहिर हार गया । अपने देश की दुश्मनों से रक्षा करने के क्षात्र धर्म का पालन करना हिंसा नहीं कहलाती (ref. History of India by C.B.Vaidya)
नालंदा विश्वविद्यालय शिक्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध था । यहाँ बौद्ध मत का प्रचार था । 1197 में खिलजी ने केवल 200 सैनिकों के साथ यहाँ हमला किया । हजारों की संख्या में सिर मुंढे हुए `अहिंसा परमों धर्म' के मंत्र का जाप करते हुए गाजर मूली की तरह कट गए । पर किसी भी बौद्ध भिक्षु ने उनका विरोध नहीं किया । इसके बाद खिलजी ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय को आग लगाकर लाखों पुस्तकों के भंडार का नाश कर दिया (रेफ - History of India by Elliot)
इसी प्रकार गुजरात में सोमनाथ मंदिर पर जब मुहम्मद गजनी ने हमला किया । तो हजारों की संख्या में उपस्थित पुजारियों और राजपूत सैनिकों ने झूठी अहिंसा, झूठी दया, झूठी शांति और मिथ्या वैराग्य का लबादा पहन लिया । जिससे न केवल मंदिर का नाश हुआ । बल्कि इतिहास में हमेशा हमेशा के लिए हिन्दुओं पर कायर का धब्बा लग गया ।
वेद में वीरों को क्षात्र धर्म का पालन करते हुए आज्ञा है - हे मनुष्यो ! आगे बढो । विजयी बनो । ईश्वर तुम्हारी भलाई करेगा । तुम्हारी भुजाएं लम्बी हों । जिन्हें कोई रोक न सके - ऋग्वेद 10/103/13
अथर्ववेद 6/6/2 में लिखा है - जो दुष्ट हमें सताता है । तुम वज्र यानि शस्त्रों से उसके मुख को तोड़ दो ।
यजुर्वेद में लिखा है - राक्षस और लुटेरों को जला दो - यजुर्वेद 1/7
इन प्रमाणों से यह सिद्ध होता है कि जब तक हिन्दू जाति वेदों की आज्ञा का पालन करती रही । वीर योद्धा की भांति विश्व पर राज्य करती रही । जब उसने वेदों का मार्ग छोड़कर अद्वैत मत के जगत को मिथ्या समझ कर अकर्मण्यता का विचार अपनाया । अथवा जैन और बौद्ध धर्म के छदम अहिंसा को माना । तब तब दुश्मनों से मार खायी ।
- सभी आक्षेपों पर खंडन सहित स्पष्टीकरण शीघ्र ही । शीर्षक में आर्य शब्द का आशय वर्तमान `आर्य सोच' से है न कि प्राचीन आर्यों से - राजीव कुलश्रेष्ठ । 

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http://fractalenlightenment.com/15116/life/the-effect-of-negative-emotions-on-our-health

You get peace of mind not by thinking about it or imagining it, but by quietening and relaxing the restless mind. Your nature is absolute peace. You are not the mind. Silence your mind through concentration and meditation, and you will discover the peace of the Spirit that you are, and have always been. Remez Sasson
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Every storm runs, runs out of rain. Just like every dark night turns into day. Every heartache will fade away. Just like every storm runs, runs out of rain. © Alex Howitt 
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Marianne Williamson says eloquently what I sought to capture in this morning's blog. We are okay. . .sufficient for what life asks of us. And when we know our own light & combine it with the light of others, together we are sufficient for what the world needs. May we know this, experience it as we sit for just a moment- for one breath- in stillness with our eyes closed, aware of the light, the heat, the fire at the centre of being.
https://www.facebook.com/photo.php?fbid=10151704082154117&set=a.273504674116.139541.23576314116&type=1&theater

29 अक्तूबर 2013

मैं पाप बेचती हूँ पाप

1 प्रबोध कथा है । 1 युवक ने किसी साधु से पूछा था - मोक्ष की विधि क्या है ? उस साधु ने कहा - तुम्हें बांधा किसने है ? वह युवक 1 क्षण रुका । फिर बोला - बांधा किसी ने भी नहीं है । तब उस साधु ने पूछा - फिर मुक्ति क्यों खोजते हो ?
- मुक्ति क्यों खोजते हो ? यही कल मैंने भी 1 व्यक्ति से पूछा है । यही प्रत्येक को अपने से पूछना है । बंधन है कहाँ ? जो है । उसके प्रति जागो । जो है । उसको बदलने की फिक्र छोड़ो । आदर्श के पीछे मत दौड़ो । जो भविष्य में है । वह नहीं । जो वर्तमान है । वही तुम हो । और वर्तमान में कोई बंधन नहीं है । वर्तमान के प्रति जागते ही बंधन नहीं पाये जाते हैं ।
आकांक्षा - कुछ होने और कुछ पाने की आकांक्षा ही बंधन है । वही तनाव है । वही दौड़ है । वही संसार है । यही आकांक्षा मोक्ष का निर्माण करती है । मोक्ष पाने के मूल में वही है । और बंधन मूल में हो । तो परिणाम में मोक्ष कैसे हो सकता है ? मोक्ष की शुरुआत 

मुक्त होने से करनी होती है । वह अंत नहीं । वही प्रारंभ है । मोक्ष पाना नहीं है । वरन दर्शन करना है कि मैं मोक्ष में ही खड़ा हूँ । मैं मुक्त हूँ । यह बोध शांत जाग्रत चेतना में सहज ही उपलब्ध हो जाता है । प्रत्येक मुक्त है । केवल इस सत्य के प्रति जागना मात्र है । मैं जैसे ही दौड़ छोड़ता हूँ । कुछ होने की दौड़ जैसे ही जाती है कि मैं हो आता हूँ । और " हो आना " पूरे अर्थो में हो आना ही मुक्ति है । तथाकथित धार्मिक इस " हो आने " को नहीं पाता है । क्योंकि वह दौड़ में है - मोक्ष पाने की । आत्मा को पाने की । ईश्वर को पाने की । और जो दौड़ में है । चाहे उस दौड़ का रूप कुछ भी क्यों न हो । वह अपने में नहीं है । धार्मिक होना आस्था की बात नहीं । किसी प्रयास की बात नहीं । किसी क्रिया की बात नहीं । धार्मिक होना तो । अपने में होने की बात है । और यह मुक्ति 1 क्षण मात्र में आ सकती है । यह सत्य के प्रति सजग होते ही । जागते ही कि बंधन दौड़ में है । आकांक्षा में है ।

आदर्श में है । अंधेरा गिर जाता है । और जो दिखता है । उसमें बंधन पाये ही नहीं जाते हैं । सत्य 1 क्षण में क्रांति कर देता है ।
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ये एक जिज्ञासु शिष्य से मेरी बातचीत है । आप लिंक पर सुन सकते हैं । पिछली बार ये फ़ाइल्स अपलोड साइट ने हटा दिये थे । अबकी बार इन्हें यू टयूब पर डाला गया है । राजीव कुलश्रेष्ठ  
http://www.youtube.com/playlist?list=PLd8a1JnbafW-i29DaBK_wrZnpDzEzGFIH


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ईश्वर है ? हमें ज्ञात नहीं । आत्मा है ? हमें ज्ञात नहीं । मृत्यु के बाद जीवन है ? हमें ज्ञात नहीं । जीवन में कोई अर्थ है ? हमें ज्ञात नहीं ।
- हमें ज्ञात नहीं । यह आज का पूरा जीवन दर्शन है । इन तीनों शब्दों में हमारा पूरा ज्ञान समा जाता है । पर के

संबंध में । पदार्थ के संबंध में । जानने की हमारी दौड़ का अंत नहीं है । पर " स्व " के चैतन्य के संबंध में हम प्रतिदिन अंधेरे में डूबते जाते हैं ।
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कल्कि अवतार के बारे में बङे ही हास्यास्पद तरीके से अभी के तमाम धर्म गुरु और यहाँ तक मुसलमान मुहम्मद को और शायद कहीं कहीं ईसाई भी ईसामसीह को कल्कि अवतार घुमा फ़िराकर घोषित करते हैं । जो सब एकदम मिथ्या है । शास्त्र के अनुसार कल्कि अवतार शंभल ग्राम में विष्णुयश नामक ब्राह्मण के घर पुत्र रूप में होगा । मेरी जानकारी के अनुसार अभी इसमें दस हजार वर्ष से अधिक का समय है । राजीव कुलश्रेष्ठ 
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nothing is everything and everything is nothing, 
in between of these to there is something
What is that ? Can anyone explain this ?
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जो ( ये ) कुछ नहीं है । वही सब कुछ है । ( ये ) जो सब कुछ है । वो कुछ नहीं है । और जो कुछ आपको अनुभव में आता है । वो इसी " कुछ नहीं और सब कुछ " के मध्य ही है । राजीव कुलश्रेष्ठ
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इसी को फ़क्कङ सन्तों ने इस तरह कहा है -
चाह मिटी चिन्ता मिटी मनुआ बेपरवाह ।
जा को कछू न चाहिये सो ही शहंशाह ।
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तू अजर अनामी वीर भय किसकी खाता ।
तेरे ऊपर कोई न दाता ।
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हद टपे सो मानवा बेहद टपे सो पीर ।
हद बेहद दोनों टपे उसका नाम फ़कीर ।
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सबहि सयाने एक मत पहुँचे का मत एक ।
बीच में जो रहे तिन के मते अनेक ।
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The process of refinement of a soul is very long , its traits are not developed in just a single lifetime.The traits are acquired and accumulated from previous lifetimes which results in the overall personality of a person. our present personality is only a continuation of the previous one but the process of refinement is always going on. This means that a person who is soft spoken and a team working till the end of his/her present life time will not drastically transform to an arrogant, dominant person. He will carry the same traits from his/her previous lifetime.The process of refinement follows the following path:
soul - consciousness
consciousness - mind
mind - Three Gunas (satva, rajas and tamas)
gunas - sanskara
http://en.wikipedia.org/wiki/Sanskara
sanskara - karma (deeds)
karm - sanskara
also sanskara results in determining the nature of  person. and the nature determines the new acts (deeds) of that person.
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आप में भी राम है । और हम में भी राम है । आप भी राम हैं । में भी राम हूँ । राम किसी को भी बड़ा छोटा नहीं 

बनाता है । एक समानता का संदेश है । अर्थात जो आप हैं । वही हम सब हैं ।
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We are not humans having a spiritual experience, but rather spiritual beings having a human experience.
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we think were made of stuff but in fact we're really a form of energy ? ( E=mc2 ) ?
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कोहम > सोहम > ओहम 
Who am i ? > Mind > Body
अब क्या बचा ? राजीव कुलश्रेष्ठ 
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http://revolutionarynewphilosophy.com/2013/09/11/atheistic-pride-and-prejudice
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भारतीय जड़ी बूटी, औषधियों का सम्पूर्ण विवरण चित्रों के साथ इलेक्ट्रोनिक बुक ( ई-बुक ) रूप में
http://prakriti-farms.org/downloads/MedicinalAndAromaticPlants.chm
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1 बार घूमते घूमते कालीदास बाजार गये । वहाँ 1 महिला बैठी मिली । उसके पास 1 मटका था । और कुछ प्यालियाँ पड़ी थी । कालीदास ने उस महिला से पूछा - क्या बेच रही हो ? महिला ने जवाब दिया -महाराज ! मैं पाप बेचती हूँ । कालिदास ने आश्चर्यचकित होकर पूछा - पाप और मटके में ? महिला बोली - हाँ ! महाराज ! मटके में पाप है । कालिदास - कौन सा पाप है ? महिला - 8 पाप इस मटके में हैं । मैं चिल्लाकर कहती हूँ कि मैं पाप बेचती हूँ पाप । और लोग पैसे देकर पाप ले जाते है ।  अब महाकवि कालीदास को और आश्चर्य हुआ - पैसे देकर लोग पाप ले जाते है ? महिला - हाँ ! महाराज ! पैसे से खरीदकर लोग पाप ले जाते है । कालिदास - इस मटके में 8 पाप कौन कौन से है ? 
महिला - क्रोध, बुद्धिनाश, यश का नाश, स्त्री एवं बच्चों के साथ
अत्याचार और अन्याय, चोरी, असत्य आदि दुराचार, पुण्य का नाश, और स्वास्थ्य का नाश । ऐसे 8 प्रकार के पाप इस घड़े में है । कालीदास को कौतुहल हुआ कि यह तो बड़ी विचित्र बात है । किसी भी शास्त्र में नहीं आया है कि मटके में 8 प्रकार के पाप होते हैं । वे बोले -  आखिरकार इसमें क्या है ? महिला - महाराज ! इसमें शराब है शराब ।
कालीदास महिला की कुशलता पर प्रसन्न होकर बोले - तुझे धन्यवाद है । शराब में 8 प्रकार के पाप हैं । यह तू जानती है । और - मैं पाप बेचती हूँ । ऐसा कहकर बेचती है । फिर भी लोग ले जाते हैं ।  धिक्कार है ऐसे लोगों को । Indresh Tiwari 

28 अक्तूबर 2013

मनोरंजन नहीं मनोमंजन करो

Sat sat naman rajeev ji. I was eagerly waiting for ur next blog. You wrote after five days. I was little disappointed but when i came to knw the reason u have written i salute you for this. Magar kya karu apki blog padhane ka nasha kuchh aisa hai ki itna intezar to mai apni aane wali saanso ( breath ) ka bhi nahi karta. Thnx for the blog. Pls write smthng daily at least two lines like " thought of the day ". Jai gurudev ji . Vivek kumar
- शायद दो बातें हैं । जो मुझे अक्सर लेखन उदासीनता की ओर ले जाती हैं । कबीर ने बङे चिन्तित भाव में लगभग खीजकर कहा - स्वांसा खाली जात है तीन लोक का मोल । और.. झूठे सुख से सुखी है मानत है मन मोद । जगत चबैना काल का कछु मुख में कछु गोद ।
अतः क्या लिखूँ ? जो लिखा । उसको आप कितना समझ पाये ? और मैं सिर्फ़ सैद्धांतिक समझाने के प्रति भी नहीं कह रहा । मैं आपको आपकी करोङों जन्मों से खोयी पहचान तुरत दिलाने को तत्पर हूँ । मैं आपको ( जन्म मरण से ) मुक्त देश का वासी बनाने को तत्पर हूँ । क्योंकि अब सिर्फ़ यही मेरा कार्य है । क्या यह छोटी बात है ? क्या संसार के किसी कार्य किसी उपलब्धि से इसकी समानता हो सकती है ? और इसके लिये मैं नियुक्त हूँ । अधिकारी हूँ ।
पर क्योंकि यह 50-50 के प्रभु सत्ता नियमानुसार ही किया जाता है । यानी 50% जिज्ञासा लगन इच्छा आदि 

घटकों की पहल उप-स्थित के लिये जीव की होनी चाहिये । तब 50% मार्गदर्शक उसकी और चलता है । यह चुम्बक और लोहे के सिद्धांत जैसा ही है । क्या अति दुर्लभ आत्मज्ञान सिर्फ़ बौद्धिक भूख या मनो-रंजन की वस्तु है ? नहीं । मनोरंजन की बजाय मनो-मंजन आवश्यक है । और ये पूर्ण क्रियात्मक है । तब मैं ऐसे पात्रों का विशेष चयन करता हूँ । जो मनो-मंजन की दिशा में प्रयत्नशील हैं । और तब इधर मेरी उदासीनता युक्त निष्क्रियता सी हो जाती है । क्योंकि तुलनात्मक क्रिया के ( सिर्फ़ ) विचारोत्तेजना टाइम वेस्ट मनी वेस्ट जैसा ही है । फ़िर यह तो अक्षय धन है । जो ( मृत्यु के बाद भी ) हमेशा काम आता है । तब क्या सार्थक है ?
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रहस्य की परत दर परत खोलने जानने के इच्छुक अनेकों प्रश्नों पर मेरे उत्तर यहाँ भी लगातार पढ सकते हैं । कृपया निम्न फ़ेसबुक लिंकों पर ज्वाइन करें ।
https://www.facebook.com/groups/supremebliss/
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अगर आध्यात्म या अलौकिक विज्ञान के अनुसार बात की जाये । तो ये 9 द्वार हमारे शरीर के आँखों से नीचे पिंड

भाग में स्थित हैं । क्योंकि मायावश हम अज्ञान से इसी शरीर से मोहित हुये इसी शरीर को सत्य मानते हैं । अतः - जहाँ आशा वहाँ वासा । जैसी मति वैसी गति । अन्त मता सो गता.. सिद्धांत अनुसार हमारी गति पशुवत ही होती है । क्योंकि शरीर ही सत्य नहीं है । यह सिद्ध है । पर हम जीवन अन्त तक शरीर से पशु की भांति मोहित रहते हैं । इसलिये अन्तिम गति भी पशुवत ही होगी ।
तब मृत्यु समय दोनों कानों ( में किसी एक ) से जीवात्मा निकलने पर विभिन्न प्रकार की प्रेत योनि होगी । क्योंकि प्रेतत्व शब्द ध्वनि आधारित है । दोनों आँखों ( में किसी एक ) से जीवात्मा निकलने पर प्रकाश प्रेमी विभिन्न कीट पतंगे होगें । क्योंकि कीट पतंगे प्रकाश आकर्षण वाले हैं । दोनों नासिका छिद्रों में किसी एक से प्राण तजने पर वायुचर जीव पक्षी आदि । क्योंकि नासिका छिद्र से वायु ही बाहर होती है । मुँह से विभिन्न प्रकार के पशु । क्योंकि यह सिर्फ़ उदर पूर्ति और 

स्वाद का माध्यम अधिक है । लिंग या योनि छिद्र से तदनुसार ही विभिन्न जल जीव । और गुदा मार्ग से तदनुसार ही विभिन्न नरकगामी होगा । अतः सिर्फ़ दसवां द्वार ही आगे मनुष्य शरीर या मोक्ष मार्ग देता है । राजीव कुलश्रेष्ठ
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When energy moves through the body - it is sex, when energy moves through the soul - it is kundalini
Kundalini and Multi-Dimensional Consciousness
- ऐसा व्यर्थ प्रलाप सिर्फ़ पाश्चात्य व्यक्ति या पाश्चात्य सोच वाले ही कर सकते हैं । क्योंकि मूल रूप से शरीर या आत्मा से उठी उर्जा या चेतना का स्रोत सिर्फ़ आत्मा की चेतना ही है । क्योंकि ये लोग संभवतः सत रज तम तीन गुणों के बारे में नहीं जानते । इसलिये ऐसा कहते हैं । कोई भी उर्जा सिर्फ़ सत गुण से ही प्रवाहित होती है । फ़िर उस उर्जा को हम अपनी इच्छा या कामना अनुसार - कामवासना, भक्ति, उद्धार, मोक्ष आदि आदि अनगिनत कामना बहावों से जोङ सकते हैं । राजीव कुलश्रेष्ठ 
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An 81-year-old woman believes that a ghost healed her of an illness and she even has a photo to prove it. Woman claims a ghost healed her and she even has proof .by John Albrecht, Jr.
www.examiner.com/user/5107871/3571611/subscribe?destination=node/66941236

27 अक्तूबर 2013

मुझे सत्यकीखोज से प्यार है..लेकिन

हालांकि मेरी सम्पूर्ण शिक्षा स्कूल के पीछे ही हुयी है । फ़िर भी मुख्य मु्ख्य तौर पर मैं जानता हूँ कि - सबसे बङी शक्ति गुरुत्व है । इसीलिये स्थूल रूप में देहधारी गुरु का स्थान सबसे उच्च है । इसके बाद चुम्बकत्व है । इसको स्थूल रूप में कृष्ण ( कर्षण शक्ति ) रूप से दर्शाया जाता है । इसके बाद गतित्व है । इसको स्थूल रूप में राम ( चेतना या रमत्व ) रूप में दर्शाया जाता है । इसके बाद देवत्व है । जिसको स्थूल रूप में विभिन्न योगत्व ( योग क्रियायें ) की स्थितियों उपाधियों द्वारा दर्शाया जाता है । इसके बाद सबसे नीचे जीवत्व है । जिसे स्थूल रूप में मनुष्य और विभिन्न 84 लाख योनियों के रूप में जाना जाता है । सामान्य जीवधारियों के लिये यही जीवत्व दृश्य और ज्ञात है । क्या आप भौतिक विज्ञान या आध्यात्म विज्ञान में इस कृमवद्ध श्रंखला के अतिरिक्त कुछ और बता सकते हैं । क्योंकि कुछ और है ही नहीं । और इन सबसे निर्लेप निर्विकार आत्मा ( परमात्मा ) से यह .. गुरुत्व - चुम्बकत्व - गतित्व - देवत्व - जीवत्व..सब कुछ उसकी मूल प्रकृति में समाहित है । सोचिये ! अगर मैं बाकायदा स्कूल में पढता । तो क्या होता ?
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सत्यकीखोज से मुझे प्यार है । क्योंकि मुझे वैश्विक स्तर पर इसी मंच से अच्छे लोग मिलें । और मैं बहुत कुछ यहीं से देना भी चाहता हूँ । पर मैंने हमेशा कहा - एक

जीवन बचाना, उसमें उमंगे पैदा करना, उसे जीवन्त धाराओं की तरफ़ मोङना । और हो सके तो उद्धार पर चला देना । तुलनात्मक इसके बहुत अच्छा है कि मैं विद्वता पूर्ण दस लेख लिखूँ । एक जीव को चेताने का पुण्य फ़ल भी सृष्टि के किसी भी अन्य पुण्य कर्म फ़ल से बहुत अधिक है । ऐसे ही जीवन्त उदाहरणों में से ये एक है । ये विदेशी लङकी अकेलेपन की गहन निराशा अवसाद में अभी परसों ही आत्महत्या जैसा विचार बना चुकी थी । आप पढकर देखें ।
Today I come here to express a deep desire to end my life ? I have done everything to end the pain associated with what happened! It has left me to feel unworthy of ever finding love, trust, and as much as I try to move forward what seems to have happened has held me captive to feeling I have lost myself. I know what a 

special women, lady, mother, I am but seems my dream of finding love has deserted me, left me disillusioned that it will never be found ? So that alone makes me feel there is not much to look forward too ? So what's the use ?? I hate having nothing to look forward too ?

फ़िर उसी दिन उसका मुझसे संवाद हुआ । संवाद आदि ( उसके ) व्यक्तिगत होने के कारण नहीं रख रहा । और अब इसके विचार देखें । इसने बङे आशा पूर्ण कई मैसेज अपने फ़ेसबुक वाल पर पोस्ट किये हैं ।

I wonder when being alone will feel like the norm for me. I have this intimate feeling that the man of my dreams is not for this life ? I feel this life is simply for learning about myself so my next life will bring me all my hopes and dreams!! Or my dream man!!!
और यही वो मुख्य कारण है कि मैं आजकल यहाँ अनुपस्थित सा ही हूँ । आप क्या सोचते हैं । लेख लिखने या

किसी को बचाने आशान्वित करने, दोनों में से क्या मत्वपूर्ण है ।
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किसी भी घटना, कोई भाव विशेष, कोई मर्मघाती बात, पूर्व जन्म के संस्कार, पूर्व जन्म की यात्रा ये सब व्यक्ति ( जीवात्मा ) का 50% खुद का सृजन योगदान होता है । शेष 50% ईश्वरीय व्यवस्था या तन्त्र करता है । जैसे भोजन ( 50% ) तो आप करते हैं । पर शरीर में उसके विभिन्न रस सार या मल ( 50% ) आदि क्रियायें शरीर तन्त्र करता है । अतः यदि विलक्षण जीवन यात्रा को सिर्फ़ इसी जीवन के नजरिये से न देखें । बल्कि अनन्त से देखें । तो इसमें आश्चर्य या चमत्कार जैसा कुछ नहीं । मैंने इसका वृत चित्र बहुत पहले देखा है । पर हम लोगों को सामान्य अध्ययन सामान्य नजरिये के बजाय हर चीज को रहस्यमय अन्दाज में देखने की आदत सी बन गयी है । राजीव कुलश्रेष्ठ
http://fractalenlightenment.com/943/enlightening-video/buddha-boy-with-divine-powers
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ब्रह्मा कुमारी मानते हैं - भारत में श्रीनगर से लेकर कन्याकुमारी तक । और बंगाल से लेकर बम्बई तक । इसी 

रूप की प्रतिमा मिलती है । जिसका न कोई मुख है । न कान हैं । न चरण हैं । न देह है । कहीं इसे विश्वनाथ, कही अमरनाथ, कही मुक्तेश्वर, और कही पापकटेश्वर भी कहते हैं । ये सब नाम सिद्ध करते हैं कि ये परमात्मा के रूप की ही प्रतिमायें हैं । साप्ताहिक पाठयक्रम पृ 42 ।
चिंतन - जब आप लोग कहते हो कि - परमात्मा निराकार है । और ज्योति बिंदु है । तो उसके रूप की प्रतिमायें कैसे हो सकती हैं ? आपने तो प्रतिमायें बताकर स्वयं के सिद्धांत का ही खंडन कर दिया | शिवलिंग के पीछे की पौराणिक कथा शायद आपको मालूम नहीं है । वह लिंग है । लिंग के न तो मुख, न कान, न चरण और न देह होता है । ब्रह्मा कुमारी और कुमारों एक बार शिव पुराण पढ़ना चाहिये । आप मानते हैं कि गीता का ज्ञान परमात्मा ने दिया । तो उसने उसमें तो ऐसा कहीं नहीं लिखा कि ये जो सारे लिंग हैं । ये मेरा ही रूप हैं । फिर आपने कैसे और किस आधार पर इन्हें परमात्मा का रूप बता दिया ? हमने 

ये विश्वनाथ, अमरनाथ सुना । पर यह पाप कटेश्वर ? नहीं सुना । क्या आप बता सकते हैं कि यह शिवलिंग भारत में कहाँ स्थित है ? जो निराकार है । ज्योति बिंदु है । उसकी जड़ प्रतिमा बन कैसे सकती है । इस पर भी प्रकाश डालें ? यह तो आपके सिद्धांत के विपरीत सिद्धांत है । आप तो लोगों को भ्रमित कर रहे हैं । एक और तो कहते हैं - निराकार है । ज्योति बिंदु है । और दूसरी और रूप वाला बना देते हो ।
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