22 जून 2016

सूरदास की विश्वयुद्ध भविष्यवाणी

साहित्यकार अमृतलाल नागर के चर्चित उपन्यास ‘खंजन नयन’ के एक दृश्य में भक्त कवि सूरदास द्वारा ऐसी वाणी सृजित होने का (घटना) जिक्र है । जब सन 1490 में दिल्ली पर सिकंदर लोदी का शासन था ।
उपन्यास का वह अंश देखने के लिये यहाँ क्लिक करें - खंजन नयन


सूरदास की इस भविष्यवाणी को स्पष्ट करने में सहायता करें ।
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#एक सहस्र नौ सौ के ऊपर ऐसो योग परे । 
#शुक्ला जयनाम सवंत्सर, #छट #सोमवार परे ।
#हलधर पूत #पवार धर उपजे, #देहरी क्षत्र धरे ।
#सौ पे शुन्न शुन्न (शून्य) के भीतर, आगे योग परे । (1000)
#संवत दो हजार के ऊपर छप्पन वर्ष चढ़े । 
#माघ मास संवत्सर व्यापे, #सावन ग्रहण परे ।
उड़ि विमान अम्बर में जावे, गृह गृह युद्ध करे ।
#मारूत विष फैंके जग माहिं, परजा बहुत मरे ।
द्वादस कोस शिखा हो जाकी, #कंठ सूं तेज भरे । (द्वादस कोस शिखा = 36 किमी)
#सहस्र वर्ष लगि सतयुग व्यापै, सुख की दशा फिरे
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रे मन धीरज क्यों न धरे ।
#एक सहस्र नौ सौ के ऊपर ऐसो योग परे ।
#शुक्ला जयनाम सवंत्सर, #छट #सोमवार परे ।
#हलधर पूत #पवार धर उपजे, #देहरी क्षत्र धरे । 
मलेच्छ राज्य की सगरी सेना, आप ही आप मरे ।
सूर सबहि अनहोनी होइहै, जग में अकाल परे ।
हिंदू मुगल तुरक सब नाशै, कीट पतंग जरे ।
#सौ पे शुन्न शुन्न (शून्य) के भीतर, आगे योग परे । (1000 )
मेघनाद रावण का बेटा, सो पुनि जन्म धरे ।
पूरब पश्चिम उत्तर दक्खिन, चहुँ दिशि राज करे ।
अकाल मृत्यु जग माहीं ब्यापै, परजा बहुत मरे ।
दुष्ट दुष्ट को ऐसा काटे, जैसे कीट जरे ।
#एक सहस्र नौ सौ के ऊपर, ऐसा योग परे ।
सहस्र वर्ष लों सतयुग बीते, धर्म की बेल बढ़े । (1000 वर्ष का सतयुग)
स्वर्ण फूल पृथ्वी पर फूले, पुनि जग दशा फिरे ।
सूरदास यह हरि की लीला, टारे नाहिं टरे ।
#संवत दो हजार के ऊपर छप्पन वर्ष चढ़े ।
#माघ मास संवत्सर व्यापे, #सावन ग्रहण परे ।
उड़ि विमान अम्बर में जावे, गृह गृह युद्ध करे ।
#मारूत विष फैंके जग माहिं, परजा बहुत मरे ।
द्वादस कोस शिखा हो जाकी, #कंठ सूं तेज भरे । (द्वादस कोस शिखा = 36 किमी)
सूरदास होनी सो होई, काहे को सोच करे ।
संवत दो हजार के ऊपर छप्पन वर्ष चढ़े ।
पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण, चहुं दिस काल फिरे ।
अकाल मृत्यु जग माहिं व्यापै, परजा बहुत मरे ।
#सहस्र वर्ष लगि सतयुग व्यापै, सुख की दशा फिरे
स्वर्ण फूल बन पृथ्वी फूले, धर्म की बेल बढ़े ।
काल ब्याल से वही बचे, जो गुरू का ध्यान धरे ।
सूरदास हरि की यह लीला, टारे नाहिं टरे ।
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- अभी विक्रम संवत 2073 (2016) और शक संवत 1938 (2016) है ।
शक संवत में 57-58 साल घटाये जायेंगे और विक्रम संवत में 57-58 साल जोङे जायेंगे ।
2014 से 2015 में हिन्दी वर्ष अनुसार यानी चैत्र से जयनाम संवत्सर था । 
21 मार्च 2015 शनिवार से नया मन्मथ संवत्सर प्रारंभ हुआ ।
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अन्य भविष्यवाणियां -
जब आवे संवत बीसा, तो मुस्लिम रहे न ईसा । गुरुनानक (पंजाबी कहावत)
- बीसवीं सदी में मुसलमान और ईसाइयों में ऐसा भयंकर युद्ध होगा कि दोनों की बर्बादी हो जायगी ।
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विजयाभिनन्दन बुद्धजी, और निष्कलंक इत आय ।
मुक्ति देसी सबन को, मेट सबै असुराय ।
एक सृष्टि धनी भजन एकै, एक ज्ञान, एक आहार ।
छोड बैर मिलै सब प्यार सों, भया जगत में जै जैकार ।
कहा जमाना आबसी झूठा और नुकसान ।
यार असहाब होसी कतल, तलवार उठसी सब जहान ।
अक्षर के दो चश्मे, नहासी नूसर नजर ।
बीस सौ बरसें कायम होसी, बैराट सचराचर ? योगी प्राणनाथ (महाराज छत्रसाल के गुरु)

- 20वीं शताब्दी में जब युग परिवर्तन का कार्य पूर्ण होगा और 1 विराट (विश्वव्यापी) दैवी विधान समस्त देशों में व्याप्त होगा तब विभिन्न मतमतान्तरों की द्विविधा मिट कर सब लोगों में 1 ही परब्रह्म, 1 ही उपासना, 1 सी मान्यतायें, रहन सहन, खानपान में एकता होगी । उस समय आपस की फूट, बैर का अन्त हो जायगा । सब सदभाव पूर्वक रहते हुये दैवी जीवन व्यतीत करेंगे ।
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बहुमत तियमत बालमत, बिन नरेश को राज ।
सुख सम्पदा की कौन कहे, प्राण बचे बड़ भाग ।
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