21 सितंबर 2012

बाबा जय गुरुदेव - असली परिचय


संजय ने मुझसे फ़ोन पर कहा - बनारस में जय गुरुदेव बाबा का बहुत प्रभाव है । क्योंकि पहले यहाँ बाबा जय गुरुदेव ने एक विशाल यज्ञ कराया था ।  लेकिन महाराज जी ! यहाँ बाबा जय गुरुदेव के बारे में अज्ञानतावश बहुत सी भ्रामक बातों का भी प्रचलन है । खासतौर से उनके जीवन परिचय के बारे में । इसलिये मेरा आपसे आग्रह है कि - सत्य क्या है ? बताने की कृपा करें ।
संजय ने ही मुझे नेट से बाबा जय गुरुदेव की साइट का लिंक वगैरह भेजा । और लेख की कापी भी । जो आप पहले पढ चुके हैं । अब आईये । बाबा जय गुरुदेव के जीवन परिचय के बारे में बात करते हैं ।
♥♥♥♥ 
बाबा जय गुरुदेव का एक छोटे से गाँव कुबेरपुरा ( भांवत पुल के पास ) जिला मैनपुरी में जन्म हुआ । इनके पिता साधारण किसान थे । इनके पिता का ( इनकी ) छोटी आयु में ही निधन  हो गया । तब इनकी माँ  ग्राम खतौरा ( भरथना के पास ) जिला इटावा चली गयी । और इनकी माँ ने दूसरी शादी कर ली । ये पहले बाप से अकेले ही पुत्र हुये । दूसरे बाप से कई ( पुत्र ) संतानें हुयीं । उसी खतौरा गाँव में भी इनका मथुरा की तरह भव्य आश्रम बना है ।
मुझे नहीं पता । बाबा जय गुरुदेव के जीवन के बारे में लोग क्या जानते हैं । और उनके प्रचारक उनके जीवन के बारे में क्या बताते हैं । पर जिस क्षेत्र ( स्थान ) के बाबा जय गुरुदेव हैं ( अब थे ) । वहाँ के निवासियों से ही हमारा 

व्यक्तिगत परिचय है । और क्षेत्र भी घूमा जाना पहचाना है । अतः उन्हीं लोगों के अनुसार - बाबा जय गुरुदेव घर की निर्धनता की वजह से काम की तलाश में गाजियाबाद आये । और फ़िर
गाजियाबाद की 1 फ़ैक्टरी में काम करने लगे । फ़ैक्टरी का निसंतान सेठ उन्हें अपना लङका मानने लगा था । फ़िर एक दिन बाबा जय गुरुदेव उसका एक झोला भरकर रुपया लेकर भाग आये । लेकिन भागने से पहले ही स्टेशन पर पकङ लिये गये । क्योंकि सेठ उन्हें अपना लङका मानता था । सो उसने बाबा को क्षमा कर दिया । यह सोचकर - लङकों से गलती हो ही जाती है । उसी सेठ के यहाँ दूसरा लङका काम करता था । इसी लङके का भाई राधास्वामी मत से दीक्षा प्राप्त था । उसी से बातचीत से प्रभावित होकर जय गुरुदेव उसके भाई के पास पहुँचें । और फ़िर उसके भाई से " राधास्वामी " मत की दीक्षा ली । और बाद में जैसा कि अक्सर ( सही ज्ञान न पाये ) संत करते हैं । और राधास्वामी में तो ये खास प्रथा है । उस मत ( ज्ञान ) में अपनी मिलावट कर दी ।
दोबारा उसी सेठ से काफ़ी रुपया लेकर ये 3 लोग मथुरा आ गये । एक वृद्धा । एक आदमी । बाबा । मथुरा में इन लोगों ने कई बार झोंपङी रखी । जिसे लोगों ने फ़ेंक दिया । लेकिन फ़िर धीरे धीरे स्थापित हो गये । फ़िर आश्रम बनाया । बाद में सरकारी जमीन पर कब्जा भी किया । इन्होंने एक बार सभी सीटों पर अपने प्रत्याशी खङे कर

चुनाव भी लङे । जिसमें हरेक प्रत्याशी की जमानत तक जब्त हो गयी । इन्होंने शादी नहीं की । ये कहना एकदम गलत होगा । इनकी शादी हुयी ही नहीं । ये कहना अधिक उचित है ।
- इसके बाद की बातें लगभग हरेक को पता ही हैं ।
विशेष - ये प्रमाणिक जानकारी है । जिसको इस जानकारी पर संशय हो । वह ऊपर लिखे स्थानों पर जाकर पता कर सकता है । ध्यान दें । ऐसी जानकारी जन्म भूमि वाले लोगों से बेहतर कोई नहीं बता सकता । और वहाँ आवश्यक नहीं कि - सभी लोग " उन्हें " सन्त मानते हों । वो आपको " वे बातें " बङी रुचि से बताते हैं । जिनका आमतौर पर ( दुनियां के ) लोगों को दूर दूर तक पता नहीं होता ।
♥♥♥♥
बहुत समय पहले की बात है  । एक बड़ा सा तालाब था । उसमें सैकड़ों मेंढक रहते थे । तालाब में कोई राजा नहीं था । सच मानों । तो सभी राजा थे । दिन पर दिन अनुशासन हीनता बढ़ती जाती

थी । और स्थिति को नियंत्रण में करने वाला कोई नहीं था । उसे ठीक करने का कोई यंत्र तंत्र मंत्र दिखाई नहीं देता था । नई पीढ़ी उत्तरदायित्व हीन थी । जो थोड़े बहुत होशियार मेंढक निकलते थे । वे पढ़ लिखकर अपना तालाब सुधारने की बजाय दूसरे तालाबों में चैन से जा बसते थे ।
हार कर कुछ बूढ़े मेंढकों ने घनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न कर लिया । और उनसे आग्रह किया कि - तालाब के लिये कोई राजा भेज दें । जिससे उनके तालाब में सुख चैन स्थापित हो सके । शिव जी ने प्रसन्न होकर " नंदी " को उनकी देखभाल के लिये भेज दिया । नंदी तालाब के किनारे इधर उधर घूमता । पहरेदारी करता । लेकिन न वह उनकी भाषा समझता था । न उनकी 

आवश्यकतायें । अलबत्ता उसके खुर से कुचलकर अक्सर कोई न कोई मेंढक मर जाता । समस्या दूर होने की बजाय । और बढ़ गई थी । पहले तो केवल झगड़े झंझट होते थे । लेकिन अब तो मौतें भी होने लगीं ।
फिर से कुछ बूढ़े मेंढकों ने तपस्या से शिव को प्रसन्न किया । और राजा को बदल देने की प्रार्थना की । शिव जी ने उनकी बात का सम्मान करते हुए नंदी को वापस बुला लिया । और अपने गले के सर्प को राजा बनाकर भेज दिया । फिर क्या था । वह पहरेदारी करते समय एक दो मेंढक चट कर जाता । मेंढक उसके भोजन जो थे । मेंढक बुरी तरह से परेशानी में घिर गए थे ।
फिर से मेंढकों ने घबराकर अपनी तपस्या से भोले शंकर को प्रसन्न किया । शिव भी थे तो भोले बाबा ही । सो जल्दी से प्रकट हो गए । मेंढकों ने कहा - आपका भेजा हुआ कोई भी राजा हमारे तालाब में व्यवस्था नहीं बना पाया । समझ में नहीं आता कि - हमारे कष्ट कैसे दूर होंगे ? कोई यंत्र या मंत्र काम नहीं करता । आप ही बतायें । हम 

क्या करें ?
इस बार शिव जी जरा गंभीर हो गये । थोड़ा रुक कर बोले - यंत्र मंत्र छोड़ो । और स्व तंत्र स्थापित करो । मैं तुम्हें यही शिक्षा देना चाहता था । तुम्हें क्या चाहिये ? और तुम्हारे लिये क्या उपयोगी है ? वह केवल तुम्हीं अच्छी तरह समझ सकते हो । किसी भी तंत्र में बाहर से भेजा गया । कोई भी विदेशी शासन । या नियम । चाहे वह कितना ही अच्छा क्यों न हो । तुम्हारे लिये अच्छा नहीं हो सकता । इसलिये अपना स्वाभिमान जागृत करो । संगठित बनो । अपना तंत्र बनाओ । और उसे लागू करो । अपनी आवश्यकतायें समझो । गलतियों से सीखो । माँगने से सब कुछ प्राप्त नहीं होता । अपने परिश्रम का मूल्य समझो । और समझदारी से अपना तंत्र विकसित करो । मालूम नहीं । फिर से उस तालाब में शांति स्थापित हो सकी या नहीं । लेकिन इस कथा से भारत वासी भी बहुत कुछ सीख सकते हैं ।
♥♥♥♥
- हम कांग्रेस को इसलिये समर्थन देंगें कि - हिन्दुओं की भी हमदर्द भाजपा सत्ता में न आ जाये । हम दूसरे धर्मों को बचाने के लिये इस देश और हिन्दुओं की बलि दे देगें ।

पिछले कई दिनों से सारी पार्टियां जो कांग्रेस को समर्थन कर रही हैं । वो लगातार एक ही बात कह रहीं हैं कि - कांग्रेस बेईमान है । कांग्रेस भृष्ट है । पर हम कांग्रेस को इसलिये समर्थन देते रहेंगें । क्योंकि भाजपा सांप्रदायिक है । और वो कहीं सत्ता में न आ जाये ।
इसका साफ साफ मतलब ये निकलता है कि - भले ही देश लूट लिया जाये । बर्बाद हो जाये । गुलाम हो जाये । पर हम कांग्रेस को देश को लूटते रहने देंगें । इस डर से कि - कहीं भाजपा जो हिन्दु हितों की भी रक्षक है । वो कहीं सत्ता में न आ जाये । यानी कि भले ही हिन्दु पुन: गुलाम हो जायें । लूट जायें । पर हम दूसरे धर्मों के लोगों को बचाने के लिये हिन्दुओं को बर्बाद कर देगें । हिन्दुस्तान की धरती जिस पर हिन्दुओं का पहला हक होना चाहिये । उनकी

कुर्बानी दे देगें । पर भाजपा को सत्ता में नहीं आने देंगें ।
और हिन्दुओं की दुश्मन और भृष्ट सरकार को समर्थन देते रहेंगें । पर अब हिन्दु जाग चुका है । वो अब भले ही भाजपा सत्ता में न आने दी जाये । हिन्दुओं के दुश्मनों को सबक सिखा के रहेगा । देश से बाहर जाने का रास्ता दिखा कर रहेगा । जय हिन्द ।
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=268612389924641&set=a.255618307890716.56717.255606557891891&type=1&theater
♥♥♥♥

The things that happen to us are trying to have a conversation, to make us stop or turn around .The things that matter are waiting ..for us to drop down after the first conversation has relaxed our will Then they will shine their light without warning like a doctor into the back of our eyes and ask - How long have you avoided rest ? If we answer truthfully, they will introduce us to beauty who after a time will make us cry and throw our judgments into the sea  - Mark Nepo

♥♥♥♥
जय श्री गुरुदेव महाराज की ! कृपया जैन धर्मं के ऊपर ( बारे में भी ) कुछ प्रकाश डालें । कुछ लोग हमारे यहाँ जैन धर्मं वाले हैं । उन लोगों को समझाने ( शास्त्रार्थ ) हेतु कुछ मूल बातों को जानना जरुरी है । इसकी उत्पत्ति - कब । कहाँ । कैसे हुई ? हिन्दू धर्मं से इसका क्या सम्बन्ध है ? कृपया मार्गदर्शन करें । संजय केशरी । 

♥♥♥♥
भूल सुधार - बाद में जोङा गया । 
आदरणीय महाराज जी सादर चरण स्पर्श  ! मैंने जो जय गुरुदेव जी के जेल जाने के बारे में बताया था । वो समय उनके राजनैतिक भविष्यवाणी को लेकर था । आपातकाल के आसपास की ये बात है । ये गुरुदेव जी ( बाबा जय गुरुदेव ) राजनैतिक महत्वाकांक्षा के तहत सत्ता के बिपरीत राजनैतिक भविष्य वाणी करते थे । जिसके कारण इनको जेल जाना पड़ा था । ये खबर मैंने उनके मृत्यु के दुसरे दिन पेपर में पढ़ा था ।  
आपके पोस्ट में हमारी गलती की वजह से गलत छप गयी है । हम क्षमा चाहते हैं । अगर आपको उचित लगे । तो hilight किया हुआ पोस्ट हटाने की कृपा करें । संजय ।  

एक टिप्पणी भेजें

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Follow by Email