23 दिसंबर 2012

एक अत्यंत नीच रहस्यमय दुनिया - इलुमिनाटी 1

हर एक व्यक्ति अपनी दिनचर्या में बहुत से कार्य करता है और इन्हें करने के लिए विभिन्न साधनों का प्रयोग करता है । यह साधन एक ओर तो उसे सुविधा देते हैं  तो दूसरी ओर किसी स्तर तक उसे बाध्य भी बनाते हैं । पर अपनी व्यस्त दिनचर्या में वह सामान्य व्यक्ति इस पर अधिक ध्यान नहीं देता । वह इस प्रत्यक्ष के पीछे की वास्तविकता से अनभिज्ञ रहता है  और इससे हो रही क्षति को भी नहीं समझ पाता ।
उदाहरण के लिए आप बैंक को ही लीजिये  और अगर बिजनेस को चालू करने वाला कॉर्पोरेट व्यक्ति किसी प्रकार का धोखा देकर, जितने पैसे निकलवाये । उतना व्यवसाय में न लगाकर, सरकार को ये कह दे कि व्यवसाय में दिवालिया हो गया और 1000 में से 200 रुपये ही लौटा पाया तो ऐसे में या तो सरकार उन सभी छापे गए रुपयों को नष्ट करे  या अगर तंत्र भृष्ट हो तो ये कर्पोरेट व्यक्ति, फाइनेंस मिनिस्टर और रिजर्व बैंक का गवर्नर बचे हुए 800 रुपये आपस में पैसे बाँट सकते हैं । जिससे मुद्रा का अवमूल्यन होता । मतलब ये छापे गए नोट अपना मूल्य आर्थिक तंत्र में चल रहे नोटों से लेते हैं । जिससे प्रत्येक नोट के द्वारा चीजों को खरीदने की शक्ति कम होती है और इसी से महंगाई बढती है ।
https://www.youtube.com/watch?v=_fpjByugMqo
इसका असर अमीरों को नहीं पड़ता । यहाँ पर पुनः गरीब व्यक्ति मारा जाता है ।
अब और समझिये कि ये बैंक का तंत्र किस प्रकार से मूर्ख बनाता है CRR का मतलब होता है Cash Reserve Ratio ये वो धन की मात्रा होती है  जो बैंक को अपने पास रखनी पड़ती है । उन लोगों के लिए जो बैंक से पैसे निकलवाने आते हैं । अगर CRR 10% है  और आपने बैंक में 100 रुपये जमा कराये तो बैंक 10 रुपये अपने पास रखेगा और 90 रुपये लोन देगा । अगर ये 90 रुपये लोन के रूप में लेकर किसी अन्य बैंक में डलवा दिए जाये । तो इस 90 रुपये का 10% अर्थात 9 रुपये बैंक अपने पास रख कर 81 रुपये पुनः लोन में दे देगा । इसे Fractional Reserve Banking कहते हैं ।
http://en.wikipedia.org/wiki/Fractional_reserve_banking
इस प्रकार ये चक्र चलता जाता है और मूल में जमा किया गया 100 रुपये अलग-अलग बैंक में पहुँच कर 900 रुपये लगने लगते हैं । अगर इस चक्र में हर लोन देने वाला बैंक 14% का ब्याज लगाता है और हर राशि को जमा रखने वाला बैंक उस पर 3% का ब्याज देता है ।
अर्थात 900 X 0.14 – 900 X 0.03 = 99 रुपये बैंक इस आभासी 900 रुपये से बनाये । जिसके मूल में मात्र 100 रुपये है । अगर ये 99 रुपये तंत्र में नहीं है तो पुनः कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति बैंक के हाथों देकर गरीब हो जायेगा और अगर ये पैसा (नोट) आर्थिक तंत्र में है । तो किसी अन्य के पास से वो पैसा जायेगा । इस कुचक्र के दुष्परिणाम से यह होता है कि बैंक के द्वारा आर्थिक तंत्र में डाला गया पैसा हमेशा ही कम होता है । 
बैंक के द्वारा वापस लिए गए पैसों से क्योंकि उस पर ब्याज होता है और इसी से महंगाई बढ़ती है । अब इस आभासी 900 रुपये की पोल तब खुलती है । जब बड़ी मात्र में लोग जिन्होंने अपना पैसा जमा कराया है । वो अपना पैसा निकलवाने आ जाये । 
CRR का कार्य ही ऐसी स्थितियों के लिए है  पर ये तब धराशाई हो जाता है । जब पैसा निकलवाने वालो की संख्या बहुत ही अधिक हो । यही कारण है कि जब कोई बैंक दिवालिया हो जाता है तो आपको मात्र आपकी जमा राशि का CRR के बराबर मूल्य ही मिलता है ।
यानी ऊपर बताये उदाहरण के अनुसार 10% इस प्रकार ये बैंक की नीतियां आर्थिक तंत्र में दीमक की तरह कार्य करती हुई इसे खोखला कर रही है । जिसे हम सुविधा समझ कर काम में ले रहे हैं । वही अभिशाप का कार्य कर रहा है और देश को कमजोर बना रहा है । हम बैंक में पैसा सुरक्षा के कारण जमा करते हैं और कुछ लोग ब्याज के लालच से । यही ब्याज देश को खोखला कर रहा है ।
अगर बैंक ब्याज लेना और देना बंद कर दे तो बैंक में पैसा जमा करने वालों की संख्या में भारी गिरावट आ जाये । ऐसे में बैंक लोन देना भी बंद कर देंगे  और आपका पैसा सुरक्षित मात्र रखने के लिए आपसे फीस लेंगे । अगर बैंक में पैसा रखने से वह कम हो रहा हो तो लोग बैंक में पैसा रखना ही बंद कर देंगे और बैंकों का अस्तित्व ही नष्ट हो जायेगा । इससे आपके सामने कागज के नोटों की सच्चाई सामने आ जाती है । जिनका मूल्य पहले के समय में स्वर्ण के आधार पर तय होता था और अब कर्ज की जरूरत के अनुसार । जिसे वापस चुकाने में असफल होने पर आपकी संपत्ति जब्त हो जाती है और बैंक धनवान होते चले जाते हैं । 
इस प्रकार से महंगाई बढ़ती चली जाती है और आम व्यक्ति अधिक परिश्रम करके अधिक धन कमाने के लिए लग जाते हैं । अन्य रोजगार के साधन ढूँढने लग जाते हैं और इस महंगाई के कारण बेरोजगारी बढ़ती जाती है । धन के इस भयावह मायाजाल को शक्ति देती हैं वो नीतियां । जो बनायीं जाती हैं  विदेशों में इंटरनेशनल मोनेटरी फण्ड IMF और विश्व बैंक में और जिसके पोषक हैं । सरकार में ऊंचे पदों पर आसीन भृष्ट मंत्री । जो इन नीतियों को देश पर थोपते हैं
https://www.youtube.com/watch?v=hCcPuXVYmKI
अभी भी इन कागज के नोटों का कुछ मूल्य होता है । क्योंकि वो मूर्त रूप में हैं और उनका कागज पर छपाई का मूल्य होता है । पर यह भी अब धीरे धीरे बदलता जा रहा है और ये धन अपने भौतिक रूप से बदल कर आभासी रूप में परिवर्तित किया जा रहा है । ये सभी नोट अब कम्प्यूटरीकृत करके चेक, डिमांड ड्राफ्ट और कैश कार्ड के रूप में बदल दिए जा रहे हैं । डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड इन्ही के रूप हैं । जिनका प्रचालन अब बहुत ही अधिक बढ़ाया जा रहा है । 
इसमें भी आपको क्रेडिट कार्ड के उपयोग करने पर विभिन्न प्रकार की छूट आदि सुविधाएँ दी जा रहीं हैं । ये सब षडयंत्र आपको कर्ज के नीचे दबाने के लिए है । आप कल्पना कीजिये । उस समय की जब सारा धन आभासी दुनिया में हो और प्रत्यक्ष कुछ न हो । आपके सारे खाते कम्प्यूटरीकृत हों और अचानक पूरा कम्प्यूटर तंत्र ठप्प हो जाये । ऐसे में सभी लोगो के खातों की पूरी जानकारी नष्ट हो जाएगी  और आपका आभासी धन भी ।
सभी जगह अराजकता फ़ैल जाएगी और ऐसी स्थिति में इमरजेंसी घोषित करके लोगों को काबू में करने में कोई समस्या नहीं आएगी  क्योंकि धन के अभाव में सभी असहाय हो जायेंगे ।
ऐसा ही जाल इन्श्युरेंस कम्पनियों द्वारा फैलाया गया है । ये कंपनियां आपके फायदे के लिए कम और अपनी जेब भरने के लिए अधिक काम करती हैं । इनका सारा समय ऐसे नियम और शर्तो को बनाने में लगता है । जिससे आपको फंसाया जा सके । ये हमेशा बड़े स्तर पर काम करती हैं । जिससे इन्हें कभी घाटा नहीं होता । ये अप्रत्यशित घटनाओं के नाम पर पैसा बनाती हैं और ये पैसा इन्हें वापस न लौटाना पड़े । 
इसके लिए कम्पनियां पूरी व्यवस्था करती हैं । चाहे इसके लिए इन्हें किसी व्यक्ति को मरवाना ही क्यों न पड़े । जैसा कि हेल्थ इन्श्युरेंस में होता है । अगर कंपनी को घाटा हो रहा हो तो ।
https://www.youtube.com/watch?v=zGKtROmiJL8
अब इसी कड़ी में आगे बढ़ते हैं और आते हैं ।
हमारे जीवन में उपस्थित एक और साधन पर – टीवी ।
टीवी आज के समय में लगभग सभी के घर में है और अधिकता लोगों के घर में डिश या केबल का कनेक्शन है । लोगों के सामने 400-500 चैनल हैं । जिन्हें बदलते हुए भी अगर वे 2 मिनट भी हर एक चैनल को देखते हैं । तो पूरा दिन निकल जायेगा । ये टीवी लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती है और बांधे रखती है । 
ये मनोरंजन का बहुत ही सरल साधन माना जाता है । ये लोगों तक किसी जानकारी अथवा समाचार को एक साथ पहुँचाने का बहुत ही अच्छा साधन है । परन्तु समस्या तब खड़ी होती है  जब साधन का दुष्प्रयोग होने लगे । तब उस स्थिति के विषय में क्या कहा जाये । जब कोई साधन ही दुष्प्रयोग के लिए बनाया गया हो
https://www.youtube.com/watch?v=OdCVRsj38vY)? 
आज के समय में टीवी का प्रयोग जन सामान्य की सोच पर असर डालने के लिए किया जाता है । जिससे उसकी सोच को किसी दिशा में मोड़ा जा सके । सैकड़ों न्यूज़ चैनलों में समाचार दिखाया जाता । इन समाचारों के माध्यम से व्यक्ति निर्णय करता है कि उसके आसपास की स्थिति क्या चल रही है  और उसे क्या कदम उठाना चाहिए । 
ये न्यूज़ चैनल और मीडिया जिसे चाहे अच्छा बना दे और जिसे चाहे बुरा । क्योंकि इनके पास शक्ति है । खबरों को छाँटने की और इन्हें अपने मन माने ढंग से दिखाने की । ये खबर का जो पहलू दिखायेंगे । हमें भी वही बस पता चलेगा और उसी के अनुसार हम निर्णय कर लेंगे । 
इस प्रकार से ये सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर हमारी सोच पर प्रभाव डालते हैं । इसके साथ ही टीवी पर आने वाले प्रत्येक दिन के धारावाहिक किस प्रकार से असर डालते हैं । ये भी समझिये । 
ये धारावाहिक समाज में एक खास वर्ग के लोगों के लिए बनाये जाते हैं । 
उदाहरण के लिए आप किसी भी सास बहु वाले रोज के धारावाहिक को ही लीजिये । ये उन लोगों को अधिक अपनी और आकर्षित करते हैं । जो परिवार से बहुत जुड़े रहते हैं  यानी नारियों को । इन धारावाहिकों को देखकर तो कुछ स्त्रियाँ इतनी बेसुध हो जाती हैं कि घर परिवार का कार्य छोड़कर वे इन्हें देखने बैठ जाती हैं । अगर ये भी मात्र मनोरंजन स्तर तक ही रहता तो भी ठीक था । परन्तु ये परिवार के इस वर्ग विशेष पर इतना अधिक प्रभाव छोड़ता है कि कुछ स्त्रियाँ तो इन्हीं धारावाहिक के पात्रों के विषय में ही हर समय चिंतित रहती हैं कि कहीं कोई घर छोड़ कर चला गया तो कहीं उसकी शादी होनी हैं आदि । 
कहीं कहीं तो महिलाएं आपस में बैठ कर इन्हीं मनगढ़ंत धारावाहिकों के विषय में चर्चा करती रहती हैं और बहुमूल्य समय का नाश करती हैं । किसी न किसी स्तर तक ये धारावाहिक परिवार पर भी असर करते हैं । इसके साथ ही MTV चैनल V, FTV, और VH1 जैसे चैनलों के माध्यम से देश के युवा वर्ग को निशाना बनाया जाता है । और इन चैनलों पर विक्षिप्त तथा अश्लील कार्यक्रम प्रस्तुत किये जाते हैं । इनके माध्यम से युवा वर्ग का चरित्र हरण कर बौद्धिक स्तर को गिरा कर निम्न कर दिया जाता है
https://www.youtube.com/watch?v=Am3crthyJBs 
ऐसी ही स्थिति बाल वर्ग के लिए प्रसारित किये जा रहे कार्यक्रमों की भी है । परी आदि की असत्य कथायें दिखाकर इन्हें कल्पना की दुनिया में डाल दिया जाता है और जिस समय उनकी बुद्धि का विकास सबसे तीव्र गति से होना चाहिए । उस समय इनकी दिशा बदल कर बुद्धि कुंठित कर दी जाती है  और इनमें बहुत सी इच्छाओं का बीज बो दिया जाता है । इनका मूल उद्देश्य देश की युवा शक्ति को क्षीण करना है । टीवी के माध्यम से प्रसारित किया जा रहा सबसे भयावह अस्त्र है । कार्यक्रमों के बीच में अपने वाले प्रचार ये प्रचार कार्यक्रमों के बीच में अनेकों बार दिखाए जाते हैं और इन्हें बार बार दोहराया जाता है । 
अब तो स्थिति ये हो गयी है कि एक निश्चित समय में आने वाले कार्यक्रम में वह कार्यक्रम कम और प्रचार अधिक समय तक आते हैं । ऐसा आप समाचार चैनलों में देख सकते हैं । इससे होता ये है कि हमें कार्यक्रम भूल जाते हैं और प्रचार याद हो जाते हैं । हमें आंतों को सड़ाने वाली मैग्गी और पेप्सी अच्छी लगने लगती है । हमें जानवरों को नहलाने वाले लाइफ बॉय जैसे साबुन अच्छे लगने लगते हैं । हमें 100 रू/किलो मूंगफली छोड़ कर 200 रु/किलो की मूंगफली की खली होर्लिक्स, बोर्नविटा के नाम से अधिक पौष्टिक लगने लगती है और हमें पतले रहने के लिए कॉर्न फ़्लेक्स खाने के आवश्यकता होने लगती है ।
https://www.youtube.com/watch?v=G-QiZu1_HJk
कार्यक्रमों को देखने के बाद फिर आपको 250 रू के साधारण कपडे अच्छे नहीं लगते । क्योंकि कार्यक्रम के पात्रों ने तो अच्छे कपड़े पहने हैं । जिन्हें सभी लोग देखते हैं और अच्छा मानते हैं । तब आपको प्रचार में दिखाए जाने वाले लेविस, रैंगलर, अडिदास और रीबोक जैसे 5000 रू वाले ब्रांड के कपड़े चाहिए । क्योंकि कार्यक्रम के पात्रों ने उन्हीं के जैसे कपड़े पहने थे । ये प्रचार स्पष्ट रूप से आर्थिक स्तर पर प्रभाव डालते हैं और व्यक्ति को कोई वस्तु बार बार यह कहकर दिखाई जाये कि यह अच्छी है । तो वह उसे सच मान लेता है और अंततः जाकर बाज़ार से खरीद लेता है । 
इस प्रकार से ये टीवी द्वारा फैलाया मायाजाल इतना प्रभावी रूप से कार्य करता है कि कोई व्यक्ति समझ ही नहीं पाता और यह देश को पारिवारिक, सामाजिक , आर्थिक, बौद्धिक, राजनीतिक,  धार्मिक और अध्यात्मिक स्तर तक प्रभावित करता है और अपने दुष्प्रयोग से देश को शक्तिहीन बनाता है ।
तकनीकी के इस युग में जानकारी का बहुत महत्व है । जानकारी को सहेज कर रखने में आज के समय में कम्पयूटर का बहुत बड़ा योगदान है । पर ये जानकारी जन जन तक पहुंचे । इसके लिए सूचना तंत्र की आवश्यकता पड़ी । जो इंटरनेट के रूप में आपके सामने है । इसी कड़ी में मोबाइल फ़ोन भी आते हैं । इन सुविधाओं के माध्यम से कोई सन्देश अथवा जानकारी बहुत ही तीव्रता के साथ किसी को भी भेजी जा सकती है । इस सूचना तंत्र में हर प्रकार की अनंत जानकारी आती जाती रहती है । इसी तंत्र में प्रत्येक व्यक्ति से संबंधित उसकी निजी जानकारी भी उपलब्ध रहती है पर उस निजी जानकारी को दूसरों से बहुत सुरक्षित बताया जाता है  और ये होती भी है सुरक्षित साधारण व्यक्ति के लिए पर उस व्यक्ति के लिए नहीं । जिसे इस तंत्र की उचित समझ हो । फिर तो ऐसे लोगों के विषय में क्या कहा जाये  जो इस तंत्र के कर्ता धर्ता ही हैं । 
इंटरनेट एक माध्यम है । उन लोगों के लिए जो इस सूचना तंत्र में सबसे ऊपर बैठे हैं । उन सभी लोगों की जानकारी प्राप्त करने का  जो इस सूचना तंत्र से विभिन्न स्तरों पर जुड़े हैं ।
कुछ ही समय में तीव्रता से प्रचलित हुई सोशल नेटवर्किंग की साइटें जैसे फेसबुक और ट्विटर इसके बहुत ही अच्छे उदाहरण है
https://www.youtube.com/watch?v=zU6NftSp-Zo
इनके माध्यम से इस तंत्र में उच्च स्तर के लोग जान सकते हैं कि आप कौन हैं । कहाँ रहते हैं आपके दोस्त अथवा परिचित कौन व्यक्ति हैं । आप क्या क्या करते हैं आदि ।
ऐसे ही गूगल, जो कि सर्वाधिक उपयोग की जाने वाली साईट है, के माध्यम से ये जान सकते हैं कि कौन व्यक्ति क्या ढूंढता है  और क्या पसंद करता है । इन सभी जानकारियों का प्रयोग ये आपको फ़ंसाने और आपकी सोच को किसी दिशा विशेष में मोड़ने के लिए प्रयोग करते हैं ।
जैसे किसी कंपनी को कोई उत्पाद बाज़ार में लाना है तो ये इंटरनेट की कंपनियां इन्हें ये जानकारी उपलब्ध कराती हैं कि कहाँ के लोगों को क्या पसंद अथवा नापसंद है  और उन लोगों की स्थिति कैसी है । इस जानकारी के आधार पर वे अपनी आर्थिक और प्रचार की नीतियाँ तय करके उत्पाद बाज़ार में लाती हैं । जिससे उसके सफल होने की संभावना अधिकतम हो जाती है । इसी जानकारी के आधार पर इंटरनेट की दुनिया में उतारा गया एक उत्पाद है - अश्लीलता और नग्नता और इसके ग्राहक हैं - युवा वर्ग । 
कुछ स्थानों में इस उत्पाद के पैसे देने होते और इनकी कमाई से ये अश्लीलता परोसने वाली कम्पनियां विश्व भर में बड़ी बड़ी कंप्यूटर सॉफ्ट वेयर बनाने वाली कम्पनियों की कुल आमदनी को भी पीछे छोड़ देती हैं । पर इंटरनेट की दुनिया में ये उत्पाद निःशुल्क उपलब्ध है । अगर कंपनियों को इस माध्यम से कोई लाभ नहीं हो रहा है । इसका अर्थ ये नहीं है कि इससे इनके उद्देश्य की पूर्ति नहीं हो रही । कुछ ही वर्षों में उत्पन्न सम लैंगिकता की कुंठित सोच इसी का परिणाम है । इनका मूल उद्देश्य है  युवा वर्ग का चरित्र हनन कर उन्हें कमजोर करना । जिससे वे मौलिक चिंतन न कर सके और देश को सशक्त बनाने में असमर्थ हो जाएँ ।
https://www.youtube.com/watch?v=RvesLhPifoc 
ऐसा ही एक षड्यंत्र है । वैश्विक पहचान संख्या Universal Identification Number जिसे अमेरिका में सोशल सिक्यूरिटी नंबर कहा जाता है । अब इसे भारत में भी लागू किया जा रहा है  आधार कार्ड के रूप में । इसके अंतर्गत एक रिकार्ड बनाया जाता  है । जिसमें आपको एक नंबर मिलता है और आपसे सम्बंधित आपके परिवार के व्यक्ति, परिजन, आपकी संपत्ति, सभी सम्बंधित खाते, सुविधा और संसाधन सभी का लेखा जोखा एक नंबर से जोड़ दिया जायेगा । 
जिस प्रकार से ये आपकी पहचान को हर प्रकार के बायोमेट्रिक माध्यम से गहराई से रिकॉर्ड करते हैं । अगर आप थोड़ा ध्यान दें तो आपको पता चल जायेगा कि इनके द्वारा प्रयोग में लायी जा रही नीतियां आपको पहचान देने के लिए कम । अपितु आप पहचान छुपा न पाए । इसके लिए अधिक समर्थ हैं । इस नंबर को बनवाने के लिए आपको विभिन्न प्रकार के प्रलोभन दिए जायेंगे और इसके लाभ गिनाये जायेंगे । पर आपको इसके दुष्प्रयोग के विषय में कुछ भी नहीं बताया जायेगा  और इसे पूर्णतः सुरक्षित बताया जायेगा । 
इस नंबर को आवंटित करने का मूल उद्देश्य है । हर व्यक्ति को एक अनन्य संख्या की पहचान देना है । अगर कोई व्यक्ति सरकार के विरुद्ध जाता है और किसी प्रकार की क्रांति लाना चाहता है । तो उस पर नज़र रखकर उसे हर एक सुविधा और साधन से काट कर उसे कमजोर बना देना ही इसका उद्देश्य है और आज के कम्प्यूटरी युग में ये नंबर किसी आपराधिक मानसिकता वाले व्यक्ति के हाथ लग जाये । इसकी भी सम्भावना को नकारा नहीं जा सकता
https://www.youtube.com/watch?v=RjPH5Ezig8A
भारत में देशवासियों को विदेशी पूंजी निवेश से विकास कराने के नाम पर भी ठगा जा रहा है । ये देश के विकास का नहीं । अपितु इसे और भी अधिक गरीब बनाने का षड्यंत्र है । एक तो ये निवेश विदेशी न होकर हमारे देश में रहने वाले भृष्ट लोगों की काली कमाई का धन जिसे किसी अन्य का धन बनाकर विदेशी निवेश के रूप में भारत में लगाया जा रहा है और अगर कोई व्यक्ति एक साधारण सी बात पर थोड़ा सोचे और ध्यान दे कि अगर कोई व्यक्ति निवेश कर भी रहा है  तो हम पर दया करके तो ऐसा कर नहीं रहा होगा । उसका कुछ फायदा तो अवश्य होगा उसे । ये जितना निवेश करेंगे । उससे अधिक धन यहाँ से ले भी जायेंगे । इससे ये पहले से ही धनवान  भृष्ट लोग । जिनका ये धन निवेश के रूप में लगा है और भी धनवान हो जायेंगे  और भारत का धन विदेश जाने के कारण रूपए का मूल्य गिरेगा । महंगाई बढ़ेगी । इससे अंत में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग मारा जायेगा ।
https://www.youtube.com/watch?v=SPElhVyOJM8
इसके साथ ही आयेगा देश में निवेश के रूप में अमेरिकी डालर जो कि पूर्ण रूप से खोखली मुद्रा है । इसका मूल्य मात्र अमेरिका के दबदबे के कारण है । क्योंकि अमेरिकी सरकार कहती है कि इसका मूल्य है । जिसके पास जितना अमेरिकी डालर है । वो व्यक्ति उतना ही कर्ज में है । यही कारण है कि अमेरिका की आर्थिक स्थिति बहुत तीव्रता से गिरती जा रही है
https://www.youtube.com/watch?v=LCYoq8lVkzA
अगर ये कर्ज रुपी मुद्रा भारत में निवेश की जाती है  तो ये भारत के आर्थिक तंत्र से अपना मूल्य बनाएगी । इससे पुनः रुपये का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी । पर इन सबके साथ ही देश में आएंगी । बहु ब्रांड वाली खुदरा व्यापार करने वाली कंपनियाँ । जैसे वालमार्ट जो पहले से ही दूसरे देशों में गरीबी लाने के लिए बदनाम हैं । और इन्हीं के पीछे होंगी  टीवी केबल चैनल की कंपनियाँ । जो अन्य विदेशी कंपनियों के साथ सांठ गाँठ करके आयेंगी और सस्ते दामों पर टीवी चैनल उपलब्ध कराएंगी । सरकार के द्वारा केबल टीवी का डिजिटल उन्नतीकरण Digitization इन्हीं के लिए कराई गयी सुविधा है । जब इनके प्रलोभन में आकर लोग इनकी सुविधाओं को लेने लगेंगे । तब ये दिन भर इन्हीं विदेशी कंपनियों के प्रचार दिखाएंगी और उन्हें अच्छा बतायेंगी । जिससे उनके जाल में लोग फंसकर उन विदेशी कंपनियों के खाद्य पदार्थ । कपड़े और अन्य उत्पाद सुविधायें आदि लेने लगेंगे और पुनः हमारे देश का धन दूसरे देश में जायेगा । ये विदेशी कंपनियाँ पहले ही भारत में जैविक रूप से संवर्धित अन्न प्रचालन में ला चुकी हैं । 
किसानों को ठग कर कि इसमें खाद कम लगती है और कीड़े भी नहीं लगते । उत्पादन अधिक है आदि । जिसे खाकर लोग विभिन्न प्रकार की व्याधियों विकारों से समस्या में हैं । इसके साथ ही ये खेत में विभिन्न प्रकार की रासायनिक खाद डलवाकर और पारंपरिक फसल चक्र को भृष्ट कर खेत की उर्वरता को सीमित कर देंगे । जिससे एक निश्चित प्रकार की फसलें ही मात्र पैदा हो सकें और विविधता नष्ट हो जाये । इसके बाद ये कुपोषण के शिकार लोगों को पोषण प्राप्त करने के लिए मांसाहार की सलाह देंगे । अपने खाद्य पदार्थों में देशी गायों को मरवाकर गो मांस बेचेंगे । ऐसा ये इसलिए करेंगे । क्योंकि इन्हें पता है कि मात्र भारत की गायों में ऐसे खास अनुवांशिक गुण हैं । जिनके कारण उससे प्राप्त होने वाले पञ्च गव्यों से अनेकों प्रकार के रोग ठीक हो जाते हैं । ऐसा करने से ये लोगों को रोग ग्रस्त कर विदेशी मेडिकल सुविधाओं को भी निवेश के माध्यम से देश में लायेंगे । इस प्रकार इस विदेशी निवेश के अंतहीन कुचक्र में फँसकर रुपये का अवमूल्यन कराता जायेगा और देश गरीब से गरीब होता जायेगा
https://www.youtube.com/watch?v=GA5HWoevE74
इन विदेशी कम्पनियों द्वारा फैलाया गया एक अत्यंत भयावह जाल है - जैविक संवर्धन का । ऐसा करके ये लोग प्रकृति के साथ खेल खेलना चाहते हैं । ये कम्पनियां पेड़ पौधों अनाज के बीजों और पशु आदि के अनुवांशिक गुणों को बदल कर जैविक रूप से संवर्धित प्रजाति पैदा करते हैं । इन पैदा कराई गयी प्रजातियों में अच्छाइयां कम और बुराइयाँ अधिक होती हैं । ऐसा ये मात्र अपने फायदे के लिए करते हैं और लोगों को इनकी अच्छाइयां मात्र बता कर ठगते हैं
http://www.youtube.com/watch?v=-5gyWRrfkbE
उदाहरण के लिए अनाज के लिए ये जो बीज उपलब्ध कराते हैं । उमसे आपको ये लालच देते हैं कि इसमें कम लागत में अधिक उत्पादन होगा  और इसमें कीड़े आदि नहीं लगेंगे । किसान इनके लालच में आकर इन्हें खरीद लेता है  और अपने खेत में लगाता है । इन बीजों को लगाने के लिए कम्पनियां पुनः विभिन्न प्रकार की रासायनिक खादों को उपयोग करने के लिए बोलती हैं । इन बीजों में या तो यह होता है कि नयी उगी हुई फसल में पुनः उस फसल को उगाने के लिए या तो बीज नहीं होते या अगर बीज होते भी हैं तो उनमें कोई क्षमता नहीं होती । अथवा अगर आप इनके द्वारा बताये गए निर्देश से फसल उगाते हैं तो आपके खेत की उर्वरक क्षमता सीमित हो जाती है । जिससे आप मात्र कुछ ही प्रकार की फसलों को उगा सकते हैं । जैसे सोयाबीन की फसल । ये सोयाबीन की फसल विदेशों से यहाँ लायी गयी । क्योंकि विदेशों की कम उर्वरक धरती पर इस फसल का उत्पादन करने से वहाँ की उर्वरक क्षमता बहुत ही सीमित हो गयी ।
क्योंकि वहाँ सोयाबीन का प्रयोग सूअरों तथा भैंसों के चारे के रूप में किया जाता है । जिससे उनमें मांस की मात्रा बढ़ती है और उन देशों में मांसाहार का प्रचलन अधिक है । इसलिए वहाँ सोयाबीन की आवश्यकता होती ही है । ऐसे में उन्होंने ने भारत की और देखा । जहां की धरती अत्यंत उर्वरक क्षमता वाली है । यहाँ का किसान अधिक उत्पादन के लालच में आकर इसे उगाता है और 10 वर्ष के बाद 11वे वर्ष उसकी भूमि कपास के अलावा अन्य किसी फसल को उगने की क्षमता नहीं रखती । 
सोयाबीन का उत्पादन इतना अधिक बढा दिया गया है विश्व भर में कि अब इसे मनुष्य के खाने योग्य घोषित कर खपाया जा रहा है । भारत में सूरजमुखी और सोयाबीन के तेल का अत्यधिक प्रचालन है । जो कि एक षड्यंत्र के अंतर्गत फैलाया गया है । ये दोनों तेल मनुष्य के खाने योग्य नहीं हैं । इन्हीं के कारण हमारे देश में इतने अधिक दिल के रोग और मधुमेह रोगी बढ़ते जा रहे हैं । ऐसा ही कुछ कार्य ये कम्पनियां पशु पालन के क्षेत्र में भी कर रही हैं
https://www.youtube.com/watch?v=fE7SqkFv03M
ये गाय तथा भैंसों के शुक्राणुओं में अनुवांशिक बदलाव कर एक नए प्रकार की प्रजाति बना रही हैं । जो कि अधिक दूध का उत्पादन करें  और साथ ही साथ उनमे अधिक चर्बी हो । ऐसा ये गाये भैंस के लिए उपयोग में लाये जा रहे बीजों में सूअर की जाति के गुण डालकर कर रहे हैं । अब ऐसे में इनके द्वारा दिए जा रहे दूध में किसके गुण रहेंगे ? स्पष्ट है । सूअर के ही रहेंगे । जिस गाय को हमारे देश में माता के रूप में पूजा जाता है । और उससे प्राप्त होने वाला पञ्च गव्यों को अमृत स्वरुप समझा जाता है । जिनमे अनगिनत रोगों का नाश करके हष्ट पुष्ट करने की क्षमता होती है । अब उस गौ माता और सूअर में कोई भेद नहीं रह जायेगा । बस बाहरी रूप से वह कुछ कुछ गाये के जैसी दिखेगी और अंदरूनी रूप में वो सूअर ही होगी । https://www.youtube.com/watch?v=yqMLtY_LQG4
इस प्रकार से ये कम्पनियां अनेकों प्रकार के नए रोग उत्पन्न कर रही है और करेंगी । और इसका कारण ये कुपोषण बतायेंगी । इस प्रकार ये भारतीयों में भृम फैलाएंगी कि शाकाहार में कम पोषक तत्व है और इसकी पूर्ति के लिए मांसाहार आवश्यक है । ऐसा करके ये देश में बहुतायत में कत्ल खाने खुलवायेंगी और वहाँ इन्हीं पशुओं को कटवाएंगी । ऐसे इन्हें अपने वैश्विक मांसाहार के व्यवसाय में लाभ होगा । https://www.youtube.com/watch?v=fAXiZvfVP-g
यही वो कंपनियां है । जो बीमारी फैलाती हैं और इन्हीं से सम्बंधित कंपनियां हैं । जो दवाइयों का व्यापार करती हैं । इन्हीं से सम्बंधित संस्थान है । जो अंग्रेजी पद्धति के चिकित्सकों को पढ़ाते हैं और यही वो चिकित्सक हैं । जो इनके द्वारा बनाई गयी दवाइयों को रोगियों के लिए लिखते हैं । इनके मूल में है । वे लोग जो अधिक से अधिक धन अर्जित कर शक्ति का केंद्रीकरण करना चाहते हैं और बीमारी और अन्य साधनों के प्रयोग से लोगों को मार कर उनके संसाधन और संपत्ति पर स्वामित्व प्राप्त करना चाहते हैं । https://www.youtube.com/watch?v=LZs1V8mpcoY

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एक अत्यंत नीच रहस्यमय दुनिया - इलुमिनाटी 2
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.com/2012/12/2.html

एक अत्यंत नीच रहस्यमय दुनिया - इलुमिनाटी 2

ये सभी जानकारी आपको सोचने के लिए विवश कर रही होंगी कि - ये कुचक्र अंततः चलता कैसे जा रहा है ? इसका उत्तर किसी भी व्यक्ति के जीवन जीने के मूल सिद्धांत पर टिका हुआ है – शिक्षा और धर्म । 
ये षड्यंत्र इतने बड़े स्तर का है कि इसने मूल तक अपनी जड़ें गाड़ ली हैं । आज की शिक्षा व्यवस्था और धार्मिक संस्थान भी इनके आधीन हैं । जितने भी प्रख्यात विदेशी विश्वविद्यालय हैं । सभी के साथ में कुछ गुप्त संस्था भी चलती हैं । इन विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकतर व्यक्ति समर्थ और शक्तिशाली होते हैं । कोई किसी राज परिवार से सम्बंधित होता है तो कोई अत्यंत बुद्धिमान होता है तो किसी के पास बहुत धन होता है । ये गुप्त संस्थाएं ऐसे ही व्यक्तियों की ताक में रहती हैं और उन्हें विभिन्न माध्यमों से फंसा लेती हैं और अपने मनचाहे प्रयोग में लेती हैं । चाहे फिर वो व्यक्ति कोई राजनीतिक विषय पर पढ़ाई कर रहा हो  या आर्थिक विषय पर  या वह चिकित्सा विज्ञान पढ़ रहा हो या अभियांत्रिकी । 
इस प्रकार वो हर देश और क्षेत्र में अपने द्वारा नियंत्रित व्यक्तियों को डाल देती हैं । जो अंत में इस वैश्विक षड्यंत्र में सहायता करते हैं । यही वो लोग होते हैं जो बाद में देश को संभालते है । कोई आर्थिक मंत्री बनता है । तो कोई कानून मंत्री । कोई प्रधानमंत्री बनता है तो कोई बड़ा व्यवसायी ।
ऐसे लोगों पर नज़र रखने के लिए होती हैं - गुप्तचर एजेंसियां ।
गुप्तचर एजेंसियों का कार्य होता है । पूरे देश के लोगों को नियंत्रित करके रखना  और देश पर नियंत्रण कर रहे लोगों को भी देखना । अगर उन्हें कोई ऐसी संभावना दिखती है कि देश में किसी प्रकार की क्रांति आ सकती है । जिससे ये पूरा तंत्र बिगड़ जाये और ये मायाजाल नष्ट हो जाये । तब ऐसी स्थिति में ये उत्तरदाई व्यक्ति को विभिन्न प्रकार के हथकंडे प्रयोग में लाकर नियंत्रण में रखती हैं और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें मरवाती भी है । आपने इसके कई उदाहरण देखे होंगे । जैसे राजीव गाँधी और सोनिया गाँधी
https://www.youtube.com/watch?v=79TX3jXBnpU
देश भर में होने वाले आतंक उपद्रव भी इन्हीं कारणों से होते हैं । जिससे देश के आर्थिक तंत्र और देशवासियों पर असर पड़े और वो नियंत्रित रहे हैं  और कारण का चिंतन न कर पायें । 
अगर आप सोचते हैं कि धार्मिक संस्थान इससे अछूते हैं तो ऐसा भी नहीं है । ईसाइयों को नियंत्रण में करने वाला एक व्यक्ति है - पोप  जिसकी बात अधिकतर ईसाई मानते हैं । इसी प्रकार मुस्लिम विभिन्न प्रकार की जमात के प्रमुखों की बाते मानते हैं या कुछ इस्लामी संस्थाओं की । ये सभी लोग उसी षड्यंत्र के अंतर्गत नियंत्रित हैं । यही वो लोग हैं जो लोगों को पहले तो धर्म के नाम पर भयभीत करते हैं और फिर उनकी भावनाओं से खेलकर उन्हें अच्छे परिणाम बता कर भड़काते हैं और दंगे उपद्रव आतंक आदि फैलाते हैं । https://www.youtube.com/watch?v=ez1eoJqI2Ns
विभिन्न मनोवैज्ञानिक संस्थाएं लोगों के व्यवहार आदि पर शोध करते हैं और उनकी निगरानी करते हैं । उनकी उचित कमजोरी मिलने पर उनका शोषण करते हैं ।
हमें आधुनिक विज्ञान और समय की आवश्यकता बताकर विभिन्न स्तरों पर ठगा जाता है । हमसे कहा जाता है कि पारंपरिक ज्ञान और परम्परा मूर्खतापूर्ण है और अब नयी विधियों की आवश्यकता है । कार्य करने के लिए । ऐसा करने से प्रकृति को बहुत हानि पहुंची है । सबसे अधिक हानि हुई है रासायनिक प्रयोगों से । साबुन डिटर्जेंट शैम्पू आदि के प्रयोगों से अनेक चर्म रोग पैदा हो गए हैं । कीटनाशक के प्रयोगों से खाद्य सामग्री फल सब्जी आदि विष समान हो गयी हैं । रासायनिक उर्वरक के प्रयोगों से भूमि की प्राकृतिक क्षमता नष्ट चुकी है । फैक्टरियों, मोटर वाहनों से निकलने वाला विषैला धुआँ सभी और फ़ैल रहा है । जिससे अनेकों प्रकार के स्वांस सम्बंधित विकार हो रहे हैं । ये रसायन बनाने वाली विदेशी कम्पनियां जिन्हें देखकर लोगों को ऐसा लगता है कि ये रासायनिक खाद बनाने की कंपनी है । वास्तव में वो कम्पनियां होती है । जो युद्ध के समय प्रयोग की जाने वाले रासायनिक अस्त्रों के लिए विषैले रसायन बनाती हैं और दूसरे स्थानों में ये कम्पनियां भोले भाले लोगों पर इन रसायनों का प्रयोग करती हैं । जिसे बाद में दुर्घटना का नाम दे देती हैं । क्योंकि कोई व्यक्ति जान बूझ कर अपना जीवन संकट में नहीं डलवाएगा । ऐसी एक दुर्घटना भारत में यूनियन कार्बाइड, भोपाल में घटी । https://www.youtube.com/watch?v=bBx8jyHQysI
तेल, खनिज भण्डार और अन्य ऊर्जा के साधनों पर इनकी ये आधुनिकता का ढोंग रुक जाता है और मात्र 20 वर्ष में जो अन्य तकनीक इतनी विकसित हो गयी । वहीं ऊर्जा बनाने के लिए प्रयोग की जाने वाली तकनीक अभी भी 200 वर्ष पुरानी ही है । तेल और कोयला अभी भी ऊर्जा बनाने के लिए प्रयोग में लिया जा रहा है और प्रकृति में हो रही हानि के नाम पर झूठ ही चिल्लाने वाले लोग इस तकनीक को बदलने की कोई बात नहीं करते हैं और कहते हैं कि इसका उचित विकल्प अभी अस्तित्व में नहीं है और इससे भी अधिक हानिप्रद रेडियो धर्मी नाभिकीय संयंत्र का प्रचार और तीव्रता से कर रहे हैं । 
इसके प्रचार के समय ये आपसे रूस के चर्नोबाइल और जापान के फुकुशीमा की घटनायें नहीं बताते हैं । सन 1989 से हमारे देश में ऊर्जा बनाने की ऐसी तकनीक है जो निःशुल्क ऊर्जा का उत्पादन करती है । भारत के ही कैगा नाभिकीय संयंत्र । 
कर्नाटक के भूतपूर्व डायरेक्टर डॉ. परमहंस तिवारी द्वारा बनाया गया ये जनरेटर किसी भी प्रकार के बाह्य संसाधन अथवा प्रत्यक्ष ऊर्जा स्रोत के प्रयोग के बिना ही पर्याप्त मात्र में ऊर्जा देने में सक्षम है । जो कि एक घर को बिजली दे सकता है पर भारत में उचित आर्थिक सहायता के आभाव में उन्हें ये प्रोजेक्ट विदेश ले जाना पड़ा । जहां इस पर आगे का कार्य किया जा रहा है । ऐसे कार्यों को एक षड्यंत्र के अंतर्गत सहायता के अभाव में डाला जाता है । जिससे लोगों की ऊर्जा के संसाधनों पर निर्भरता बनी रहे और विदेशो से तेल, कोयला और नाभिकीय सयंत्र की तकनीक को हमारे देश में बेचा जा सके और भारत का धन विदेशों तक पहुँचाया जा सके ।
यहाँ तक कि भारत में ऐसी बुद्धि वाली प्रतिभाओं तक को ऐसे ही फंसाया जाता है और विदेशों में पहुँचाया जाता है । जिससे हमारा देश समृद्ध और शक्तिशाली न हो सके और ये प्रतिभाएं उनके देश के लिए कार्य करें ।
 भारत में बनाये गए उच्च स्तर के तकनीकी शिक्षा संस्थान IIT इसीलिए भारत में बनाये गए हैं । इनका फण्ड विदेशो से यहाँ आता है । इसी कारण ये उच्च स्तर की सुविधायें बहुत सस्ते में उपलब्ध कराने में समर्थ होते हैं । यहाँ पर जाने वाली प्रतिभाओं के दिमाग में वहाँ के अध्यापक पहले से ही विदेशों के सपने भर देते हैं और वहाँ पर पढ़ाये जाने वाले कोर्स इतने आधुनिक पाठ्यक्रम के होते हैं कि उनका उपयोग भारत में किया ही नहीं जा सकता । इसलिए उनके पास अन्य कोई मार्ग ही नहीं रह जाता और उन्हें विदेशों में ही जाकर कार्य करना पड़ता है https://www.youtube.com/watch?v=I_FE8dkWQoo
अब जब उन्हें लग रहा है कि युवा कुछ जागृत हो रहा है और स्वदेशी की भावना जागृत हो रही है । तब इन्होंने ये फंड कम कर दिए और शिक्षा का स्तर लगातार गिराया जा रहा है ।
भारत की सरकार इन विदेशी शक्तियों के कारण यहाँ पर शिक्षा के स्तर को गिरा रही है और प्राथमिक कक्षा से ही बच्चों की पढ़ाई के पाठ्यक्रम को सरल करती जा रही है । अब तो बच्चों को ये सुविधा भी दी जा रही है कि बिना परीक्षा पास किये ही अगली कक्षा में डाल दिया जाता है । गणित और विज्ञान की पढाई को और अधिक सरल कर दिया जा रहा है और तकनीक के क्षेत्र में भारत को अक्षम बनाया जा रहा है । ये आप कुछ ही वर्षों में तकनीकी शिक्षण संस्थानों की प्रवेश परीक्षा के पर्चों के देखकर भी समझ सकते हैं कि कैसे पहले के समय में ये प्रश्न पत्र कितने अधिक कठिन होते थे और अब पहली की अपेक्षा अत्यंत सरल होते जा रहे हैं । http://www.youtube.com/watch?v=4DQpfY8n2SY
ये सभी प्रकार के षड्यंत्र एक बहुत बड़े कुचक्र की तरह एक दूसरे पर निर्भर हैं । अगर आप एक के पीछे एक को ढूँढने जायेंगे । तब आपके सामने आयेगी एक अत्यंत नीच रहस्यमय दुनिया । जो आपको समय में पीछे ले जाएगी । 
सन 1776 में जब इसका उदगम हुआ । उस देश में जो कि एक समय लगभग पूरे विश्व को अपना गुलाम बना चूका है - ब्रिटेन । एक गुप्त संगठन बना ।
जिनका नाम पड़ा – इलुमिनाटी Illuminati
इनका चिन्ह है । एक त्रिभुजाकार पिरामिड की संरचना । जिसके ऊपर एक आँख होती है ।
इनका लक्ष्य है । हर एक प्रकार के धर्म, शासन और निजी संपत्ति के स्वामित्व को नष्ट कर वैश्विक सरकार बनाना और एक केंद्रीय सत्ता का पूरे विश्व के धन संसाधन संपदा में एकाधिकार । इसके लिए पूरे विश्व के लोगों को एक अनन्य वैश्विक पहचान दी जाएगी और एक वैश्विक मुद्रा चलेगी ।
इन्हीं के द्वारा बनाया गया एक धर्म चलेगा और हर एक व्यक्ति पर निगरानी रखी जाएगी । ये पूरे विश्व को इस प्रकार नियंत्रित करेंगे । जिससे कि आम जनता गुलाम बनकर रह जाएगी और पूरा जीवन काम करते करते ही निकाल देगी ।
इस प्रकार से कोई भी व्यक्ति स्वयं के विषय में चिंतन न कर पायेगा और अध्यात्म से दूर होकर इस कुचक्र में हमेशा के लिए फसा रह जायेगा । अगर आप सोचे रहे हैं कि ये सब व्यर्थ की बाते हैं तो अपने आसपास की दुनिया में देखिये । ये सारे काम जो आप करते हैं । इन्हें आप क्यों कर रहे हैं ? 
आप इन्हें किसी निश्चित प्रकार से ही करने के लिए क्यों बाध्य हैं ? आपके ऊपर शासन कौन कर रहा है और क्या आप उनके द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों से खुश हैं ? अगर नहीं  तो ये ऐसा निर्णय क्यों लेते हैं ? 
ऐसा करने के लिए इन्हें कौन बाध्य करता है ? जब आप इन सबको समझेंगे । तब आपको पता चलेगा इस वैश्विक शासन का ढांचा पहले से ही बुना जा चूका है । 
वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (WHO) वर्ल्ड ट्रेड आर्गेनाईजेशन (WTO), वर्ल्ड बैंक, यूनाइटेड नेशन्स, आदि । 
ये सभी नीतियाँ यही वैश्विक संस्थाएँ बनाती हैं । ये संस्थाएं पूरे विश्व में सारे संसाधनों पर स्वामित्व प्राप्त करना चाहती हैं । भारत विश्व भर में सबसे अधिक संसाधनों और संपदाओं का स्रोत है और ऐसे में इन संस्थानों के सबसे बड़े शत्रु हैं । इन संसाधनों और संपदाओं को प्रयोग करने वाले यानी कि भारत में रहने वाले देशवासी । जो इनका प्रयोग कर रहे हैं ।
इसलिए ये भारत में ऐसी नीतियों को लागू करवा रहे हैं । जिससे देशवासी आर्थिक रूप से शक्तिहीन हो जाएँ WHO विश्व भर में और भारत में भी दवाएं भिजवाता है और बच्चों को विभिन्न प्रकार के टीके लगवाता है । ये टीके समय के साथ आगे बढ़ते हुए अनुवांशिक गुणों को बदलते हैं । आगे आने वाली पीढ़ियों में नए प्रकार को रोग पैदा करने लगते हैं । ऐसे ही एड्स भी एक प्रायोगिक परिक्षण का परिणाम है । जिसके द्वारा विश्व में जनसँख्या पर नियंत्रण पाया जा सके । इसी षड्यंत्र के अंतर्गत आते है । 
एक समय के दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति – बिल गेटस जो कि माइक्रोसॉफ्ट कंपनी के मालिक हैं । ये वही कम्पनी है । जिसके सॉफ्टवेर से दुनिया के 95% कम्प्यूटर चलते हैं और कुछ ही समय पहले इसी कंपनी ने स्काइप नाम की कंपनी को ख़रीदा है । जो कि कंप्यूटर के माध्यम से बात करने का सबसे प्रचलित सॉफ्टवेर बनाती है और इसे खरीदने के कुछ ही समय पहले माइक्रोसॉफ्ट ने एक पेटेंट लिया है कि किस प्रकार से स्काइप की सहायता से गुप्त रूप से किसी के द्वारा की जा रही बात को कैसे रिकॉर्ड किया जाये । इन्ही बिल गेटस के द्वारा अभी कुछ ही समय पहले अंग्रेजी वैज्ञानिकों को 10 करोड़ डॉलर दिए गए हैं । जैविक संवर्धित फसलों के ऊपर कार्य करने के लिए ।
http://www.bbc.co.uk/news/science-environment-18845282
गेटस के द्वारा करोड़ों डॉलर एक बहुत ही विशाल बीज कोष में भी लगाये जा रहे हैं । जहाँ पर फसलों के बीज अपने मूल शुद्ध रूप में सुरक्षित रखे जाते हैं कि अगर पूरे विश्व से शुद्ध रूप के बीज नष्ट हो गये । जैविक संवर्धित बीजों के कारण । जो कि रोग और नपुंसकता फ़ैलाने के लिए प्रचारित करे जा रहे हैं । जिससे कि जनसँख्या पर नियंत्रण पाया जा सके  तो ये शुद्ध बीजों को फिर से वापस लाने के लिए या कम रोगकारक बीज बेच सके ।
http://www.globalresearch.ca/doomsday-seed-vault-in-the-arctic/23503
कुछ वर्षों से ये बिल गेटस भारत में भ्रमण कर रहे हैं । यहाँ के किसानों को जैविक संवर्धित अन्न के फायदे बताने के लिये और शायद भारत से विविध प्रकार के अन्नों के बीज एकत्र करने के लिए भी । पढ़िए कि ये लोग किस रूप में  मृत्यु का अनुबंध बांटते हैं ।
http://foodfreedomgroup.com/2012/04/18/bill-gates-47500-paralysis-cases/
ये काग़ज के नोटों को धन के रूप में प्रस्तुत करने का मायाजाल भी इसी वैश्विक षड्यंत्र के अंतर्गत फैलाया गया है । जिसके द्वारा वर्ल्ड बैंक पूरे विश्व के संसाधनों को ब्याज के रूप में हथियाना चाहता है । भारत सरकार ने देश की खदानें, भूमि, और यहाँ तक कि एक नदी और पहाड़ भी विदेशियों को बेच दिए हैं  और अभी भी भारत वर्ल्ड बैंक के कर्ज में हैं ।
https://www.youtube.com/watch?v=D8cBH93pQlw
ये उसी ब्रिटेन की नीतियाँ हैं । जिसने एक समय में प्रत्यक्ष रूप से पूरे विश्व को अपना गुलाम बनाया था और अब भी अप्रत्यक्ष रूप से अपना गुलाम बनाया हुआ है और यह पूरा कार्य वो अमेरिका को आगे करके करता है । इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है कि अमेरिका आज तक सर्वाधिक सबसे शक्तिशाली देश माना जाता है और पूरे विश्व में अमेरिकी डॉलर को ही मुद्रा के मानक के रूप में लिया जाता है । पर तब भी पूरे विश्व में सर्वाधिक शक्तिशाली मुद्रा ब्रिटेन का पौंड ही रहती है । इस प्रकार से जो तंत्र आपके सामने फैला हुआ है । ये एक मायाजाल है । जिसकी लत आपको डलवा दी गयी है । इसमें फंसने के लिए आप स्वयं उत्तरदायी है और इससे निकलना भी आपको ही पड़ेगा ।
अन्य आवश्यक जानकारी -
- रिलायंस रोथ्स्चाइल्ड Illuminati में अनुबंध । तेल कुँओं में अधिकार । भारत के बहुत बड़े तेल भंडार को ब्रिटेन की कंपनी (रोथ्स्चाइल्ड ?) बेचने का प्रयास
http://articles.economictimes.indiatimes.com/2012-06-21/news/32352261_1_textile-industry-textile-business-naroda-factory
- रोथ्स्चाइल्ड – भारती एयरटेल, वालमार्ट, एयरटेल मनी Digital Currency http://www.indianexpress.com/oldStory/55255/
http://www.business-standard.com/india/news/understandingbharti-walmart-venture/489001/
- वॉरेन बुफे भारत में इंश्युरेंस कंपनी लांच करने आये । 
http://www.reuters.com/article/2011/03/16/buffett-india-idUSSGE72F01920110316
- गेटस । रोकेफेल्लर भारत में ।
http://www.youtube.com/watch?v=dZsqUgVbPu8
- ये सभी ऊंचे व्यवसायिक घरानों के व्यक्ति हैं । जो Illuminati की श्रृंखला में बहुत ऊपर आते हैं और इस समय की इस नयी वैश्विक व्यवस्था की प्रमुख है - ब्रिटेन की रानी क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय ।
- ये कुछ लोगों की लिस्ट हैं । जो इस षड्यंत्र से जुड़े हुए हैं । जिसमे लक्ष्मी निवास मित्तल भी हैं । http://socioecohistory.wordpress.com/2012/04/23/current-membership-list-of-the-illuminati-committee-of-300/
- इस पूरी भृष्ट व्यवस्था के कर्ता धर्ता हैं । रोथ्स्चाइल्ड परिवार जो कि पूरे विश्व के इस समय के सबसे धनवान लोग हैं
http://www.carlg.org/engwarindustry2.html
- जीडीपी (GDP) क्या है ?
https://www.youtube.com/watch?v=j5y5FvejSgU
- एफ डी आई (FDI) का सत्य
https://www.youtube.com/watch?v=bdZJkrf-m0k
- प्रजा आधीन राजा (Right To Recall Group) –
http://www.righttorecall.info 
झूठे आंदोलनों । झूठे देश भक्तों । राष्ट्रवादियों और धर्मवादियों का सच यहाँ जाने । https://youtube.com/righttorecallgroup 

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एक अत्यंत नीच रहस्यमय दुनिया - इलुमिनाटी 1
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.com/2012/12/1.html

21 नवंबर 2012

ILLUMINATI या अदृश्य रहस्यमय शैतान


क्या है ये - ILLUMINATI ? हालीवुड अभिनेता अर्नाल्ड श्वाजनेगर है इसका प्रमुख सदस्य । और सबसे ज्यादा पैसा देता है ILLUMINATI को । TV शो BIG BOSS में भी देखा होगा । आपने ये त्रिभुज और उसके बीच में बनी ये रहस्यमय आंख । ये कहती है । दुनियां का प्रत्येक व्यक्ति हमारी नजर में  है । 

पर क्यों ? इसके पीछे बङी सनसनी खेज कहानी है । इसका लेखा जोखा हिन्दी में पेश करने की शीघ्र कोशिश रहेगी । बस कुछ लिंक्स इकठ्ठे करने शेष है । आप में से कोई भी इसके बारे में जानकारी रखता हो । तो मुझे ई मेल करे । उसकी पहचान उसी की इच्छानुसार गुप्त या प्रकट रखी जायेगी । इन फ़ोटो चार्ट को कापी करके कम्प्यूटर में बङा करके देखें ।
illuminati-news.com
december2012thefacts.com
ILLUMINATI IN INDIA.mp4 - YouTube ► 2:53► 2:53
Illuminati - Wikipedia, the free encyclopedia
The Illuminati ( plural of Latin illuminatus  " enlightened " ) is a name given to several groups, both real ( historical ) and fictitious. Historically the name refers to the ...
The Illuminati - plural of Latin illuminatus  " enlightened 


20 नवंबर 2012

हिन्दू नरक कैसा होता है ? जीते जी देखेगा ।


आज मैं कट्टर हिन्दू होने के नाते देशद्रोहियों के तलवे चाटने वाले केजरीवाल के अंध भक्तो के आगे 1 चुनौती रखता हूँ । अरविन्द केजरीवाल से कृपा करके नीचे दिए गए सवालों का जवाब हासिल करके सबूतों के साथ मुझे दें कि केजरीवाल और उसकी गैंग के क्या विचार है ?
1 Uniform Civil Code - Uniform civil Code पर केजरीवाल की क्या राय है ? यूनिफार्म सिविल कोड का मतलब है कि कानून सभी के लिए 1 समान होना चाहिए । हिन्दू + सिख + जैन + बौद्ध के लिए अलग । और मुस्लिम के लिए अलग कानून नहीं चलेगा । अगर केजरीवाल के गुर्गे यह कहते है कि - BJP ने यूनिफार्म सिविल कोड क्यों लागू नहीं किया ? तो जवाब है कि - BJP ने कोशिश की थी । लेकिन उसकी सहयोगी पार्टी जैसे कि JDU जैसी पार्टियों ने इसमें रोड़ा अटकाया । और कांग्रेस ने भी खूब रोड़ा अटकाया ।
2 Border Security - देश की सीमा को पूरी तरह से सील करने पर केजरीवाल की क्या राय है ? देश में अगर कोई भी घुसपैठ करता हुआ दिखाई दिया । तो देखते ही गोली मार देने का कानून हो । देश की सीमा को 8 मीटर ऊँची और 400 मिमी मोटी दीवार की सुरक्षा । ताकि पडोसी देशों से कोई घुसपैठ ना कर सके ( अमेरिका और इजरायल के आधार पर )
3 POTA - आतंकवाद से लड़ने के लिए POTA कानून जैसा सख्त कानून पर उसकी क्या राय है ? 
4 Fertility Rate Control Act - Fertility rate control act पर केजरीवाल की क्या राय है ? इस कानून के तहत किसी भी परिवार में 2 से अधिक बच्चे हैं । उसको किसी भी तरह की सरकारी सहायता नहीं मिलेगी ( चीन के आधार पर ) 

5 बंगलादेशी घुसपैठियो के साथ क्या करना चाहिए ? यह सवाल भी बहुत अहम है । देश में 5 करोड़ से ज्यादा घुसपैठिये देश को अंदर ही अंदर चूस रहे हैं । उनको बांग्ला देश वापस भेजने पर केजरीवाल के क्या विचार है ? 
6 कश्मीर में हिन्दुओं को वापस कैसे बसाया जाए ? इस पर केजरीवाल की क्या राय है ? मेरे हिसाब से देश के सभी रिटायर्ड हिन्दू सिख सैनिकों को कश्मीर में भेज देना चाहिए । ताकि वो लोग कश्मीर में अपनी पकड़ बना सकें । और जब हालत काबू में हों । तो हिन्दुओं को वहाँ बसाना शुरू कर सकें ।
- केजरीवाल के अंध भक्त और उसके गुर्गों से सिर्फ इतना कहना चाहता हूँ कि कृपया करके मेरे इस 6 मुद्दों पर अपनी राय व्यक्त करें । मैं यह 6 सवाल

पहले ही केजरीवाल और उसकी गैंग के आगे रख चूका हूँ । और उसका कोई भी जवाब अभी तक नहीं मिला है । केजरीवाल तुम्हारा नेता बन चूका है । नेता का कर्त्तव्य है कि अपनी जनता को उसके सवालों के जवाब दे । उम्मीद करता हूँ । आप लोग केजरीवाल से यह सभी मुद्दों पर बातचीत करके रिकार्डिंग करके हम तक पहुंचा देंगे ।
और हाँ ! अगर आप अपने सेक्युलर घटिया विचार टिप्पणी के तौर पर छोडने की सोच रहे हैं । तो आपको बस करने में 2 सेकंड लगेंगे । और आपकी टिप्पणी डिलीट करने में 1 सेकंड । तो अपना समय बर्बाद न करें  । जय श्री राम । ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ।
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
अब आप अपने घर में ही भगवान की पूजा नहीं कर पायेंगे । श्रद्धा के साथ मंदिर नहीं जा पायेंगे । घर में नकारात्मक उर्जा को हटाने के लिए आप घर

में हवन नहीं करवा पायेंगे । स्कुलों और सामाजिक संस्थानों से भगवान की फोटो हटा दी जायेगी । हिन्दू अपने देवी देवताओं का स्मरण नहीं कर पाएंगे । रामचरित मानस का पाठ नहीं करवा पायेंगे । अब ऐसा होने जा रहा है देश में । और यह शुरुआत महाराष्ट्र से कांग्रेस कर चुकी है । महाराष्ट्र में कांग्रेसी सरकार  " अंध श्रद्धा निर्मूलन विधेयक  "  नाम का कानून ला रही है । जिसका मकसद सभी धार्मिक श्रद्धाओं पर प्रतिबंध लगाना है । कांग्रेस महाराष्ट्र के बाद इस कानून को पुरे देश में लागु करने वाली है । देश के काले अंग्रेजों ने महाराष्ट्र की धरती से सेकुलरिज्म के नाम पर हिन्दू मान्यताओं पर आघात लगाना शुरू कर दिया है । इस क़ानून की सहायता से कांग्रेस पूरे देश से हिन्दुओं को 

ख़त्म करके विपक्ष को ही ख़त्म कर देना चाहती है । इस कानून में हिन्दुओं के लिए सारे प्रतिबंध हैं । लेकिन मुसलमानों के नाम पर सरकार चुप है । सरकार हिन्दू धर्म को कानून से बांधना चाहती है । और बाकी धर्मों को खुली छूट देना चाहती है ।
http://www.youtube.com/watch?v=fea8BydNBoU
अब देगा । कोई सेकूलर कीड़ा । इस बात का जवाब ? ज्यादा से ज्यादा शेयर करें । यदि इस देश में भविष्य में रहना है । और अपने भगवान की आराधना करनी है । नहीं तो दलालों की कांग्रेस पार्टी तो हिन्दुओं को खत्म करने की पूरी तैयारी कर ही चुकी है । कांग्रेस भगाओ । हिन्दुत्व बचाओ ।
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=4511551041119&set=a.1094209689721.14548.1660943179&type=1&theater
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
हैदराबाद की चार मीनार के नीचे है - भाग्य लक्ष्मी मंदिर । जिसे हटाने के लिए वहाँ का सांसद तक मुस्लिमों का साथ दे रहे हैं । लेकिन अभी तक सिर्फ " टी रजा सिंह  " डटे हुवे हैं । और पुलिस भी लगी हुई है । उन्हें रोकने के

लिए । इसी वजह से मुस्लिम लगातार हिन्दुओं के घरों को जला रहे हैं । और दंगा कर रहे हैं । लेकिन अभी तक किसी भी संगठन ने इस बारे में कुछ नहीं बोला है । क्योंकि न्यूज़ चैनल कुछ बता नहीं रहे हैं । इस बार तो हो सकता है कि इस बारे में उन्हें कुछ पता ना हो । और कोई हिन्दू भी मदद नहीं कर सकता । क्योंकि वो हैदराबाद में नहीं है । लेकिन हम मदद के लिए संगठनों को तैयार कर सकते हैं । सिर्फ 1 काल करके । हिन्दू लोगों के लिए हेल्प लाइन नंबर और न्यूज़ चैनल के नंबर नीचे दिए हैं । हिन्दू हेल्प लाइन पर काल करना है । और पूछना है कि आप हैदराबाद के हिन्दुओं की मदद क्यों नहीं कर रहे हो ? और न्यूज़ चैनल पर पूछना है कि हैदराबाद की न्यूज़ को क्यों नहीं दिखा रहे हो । आपका इतना सा सहयोग हैदराबाद के हिन्दुओं की मदद कर सकता है । चुप न बैठे । सिर्फ 1 काल करें । और इस मैसेज को सबको फ़ारवर्ड करें । हिन्दू हेल्प लाइन नंबर - 020-66803300  & 07588682181
email - contacthhl@gmail.com
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
भारत के शांति दूत ? इजरायल को कोस रहे हैं । फ़िलिस्तीन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं । हमेशा की तरह किसी मुस्लिम देश को कुछ होता है । तो यहाँ के शांति दूत ? लग जाते है - इंसानियत का ढोल बजाने ।
उस समय ये कौन से बिल में छिपे थे । जब वही फ़िलिस्तीन युद्ध विराम के समय राकेट के ऊपर राकेट दाग रहा था । और इजरायल चुप बैठा था ? और जब युद्ध विराम के बाद इजरायल आग बरसा रहा है । तो इन्हें मानवता याद आई । हमेशा की तरह ये कायर ? तथाकथित  " बच्चों 

और औरतों " को सामने करते हैं । अरबी बोटियों पर पलने वाली INDIAN TRP मीडिया नमक का कर्ज अदा करने में लगी है । अक्ल के अंधे कुछ अब्दुल्ले भी सेक्युलर बन सुर में सुर मिला रहे हैं । जबकि उन्हें इजरायल फ़िलिस्तीन का ABCD तक नहीं पता । हमारी अंग्रेजी मीडिया बार बार अपनी हेडलाइन में बच्चे और औरतों का नाम ले रही है । उन्हें ये आंकडे कहाँ से मिले ? उन्हीं झूठे फ़िलिस्तीन मीडिया वालों से ? उन्होंने कहा । इन्होने छापा । युद्ध तो युद्ध होता है । जब फ़िलिस्तीन ने कोई नियम का पालन नहीं किया । तो इजरायल क्यों करें ? कोई सेकुलर जवाब देगा ?
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ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
आज हिन्दू उस चौराहे पर खड़ा है । जहाँ उसे आत्ममंथन करने की बहुत जरुरत है । अगर हिन्दुओ ने 1 होकर आज धर्म निरपेक्ष का दामन नहीं छोड़ा । तो हिन्दू जीते जी नरक कैसा होता है ? वो देखेगा । आज मैं सभी हिन्दुओं से कहना चाहता हूँ । आज मैं देश के सभी दलितों और पिछड़े वर्ग के हिन्दुओं से क्षमा मांगता हूँ । जो कुछ भी उनको फर्जी ब्राह्मणों के कारण सहना पड़ा । आज अगर हिन्दू 1 नहीं हुआ । तो वो दिन ज्यादा दूर नहीं है । जब भारत में पाकिस्तान जैसे हालत होंगे । और हिन्दुओ की माँ बहन बेटियों को जबरदस्ती इस्लाम कबूल करवाया जायेगा । और हिन्दुओं की हत्या की जाएगी । उस समय मुसलमान यह नहीं देखेगा कि - आप ब्राह्मण हो । या दलित । उनकी नज़रो में आप सिर्फ और सिर्फ काफ़िर होंगे । यह बात मात्र हिन्दुओं पर लागू नहीं होती । यह बात सभी दुसरे धर्मो के लिए भी है । सबसे अच्छा उदाहरण आज की तारीख में पाकिस्तान । बांग्लादेश है । और अगर अपने भारत देश में देखना है । तो - असम । पाकिस्तान । हैदराबाद है । मीडिया वाले आपको कभी सच नहीं बताने वाले । अगर ऐसा होता । तो आज तक सच देश के आगे होता । असम में दंगे हुए । मीडिया चुप रही । हैदराबाद में दंगे हुए । मीडिया चुप रही । उत्तर प्रदेश में दंगे हुए । मीडिया चुप रही । आप क्या अपेक्षा कर सकते हो । उन सभी धर्मनिरपेक्ष लोगो से । जो हिन्दू सिख को गालियाँ देने में धर्म निरपेक्षता समझते हैं ? अगर किसी को भी मेरे इस लेख से आपत्ति है । तो कृपया करके अपनी आपत्ति तथ्यों पर टिप्पणी देकर दर्ज करें । अगर आपको कोई भी ज्ञान नहीं है । इस बारे में । तो अपने ऊपर 1 कृपा करना । भारत का इतिहास सही से पड़ लेना । 1947 से 2012 तक मुसलमान कितनी तेजी से फैले ? या यह देख लेना । हिन्दुओं का पाकिस्तान और बांग्लादेश में क्या हाल हुआ ? वो देख लेना । कश्मीर की कहानी पूरी तरह से पढ लेना । असम में क्या हुआ । वो देख लेना ? हैदराबाद में क्या हुआ । वो देख लेना ? अगर तब भी यकीन ना आये । तो मुस्लिम बहुल इलाको में 2-3 महीने रहकर देख लेना ( हिन्दू बनकर ) जागो हिन्दुओ जागो ।
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=301352099981101&set=a.214329212016724.47174.214240438692268&type=1&theater
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
A heart breaking photo from Palestine after Israel's missile rain .In Palestine 80% kids are suffering from mental depression and anxiety.
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
One man was searching for something in his safe for hours.
Wife - What are you searching for ?
Husband - I give up. I was searching for our marriage papers.
Wife - But why ?
Husband - I was searching for the expiry dates .

15 नवंबर 2012

काम दग्ध जे जोगी करै

1 जमाना था कि हमने ऐसी कथाएं लिखी थीं कि जब बुद्ध को ज्ञान हुआ । तो देवता उतरे आकाश से उनके चरणों में सिर झुकाने । जब महावीर जागे । तो फूल बरसे आकाश से । देवता आये सुनने । क्योंकि था । जब कोई व्‍यक्‍ति परम आनंद को उपलब्ध होगा । तो देवताओं को भी ईर्ष्या होगी । क्योंकि देवता अभी परम आनंद के उपलब्ध नहीं हैं । पुण्य का फल भोग रहे हैं । फल चुक जायेगा । कल, वापिस लौट आना पड़ेगा । उनका सुख कितना ही लंबा हो । अस्थायी है । शाश्वत सुख तो वही जानता है । जो नाथ के सदा संग हो गया । अभी वे सदा संग नहीं हैं ।
अरधै जाता उरधै धरै । काम दग्ध जे जोगी करै ।
बड़ा बहुमूल्य सूत्र है - अरधै जाता उरधै धरै । काम दग्ध जे जोगी करै ।
उस योगी का काम दग्ध हो जाता है । जो अपने आनंद को नीचे नहीं जाने देता । ऊपर ले जाता है । अरधै जाता उरधै धरै !
जो नीचे की तरफ बह रहा है । उसी रस को ऊपर की तरफ उठाने लगता है ।
3 शब्द समझ लेना । एक है - काम । काम है । सुख नीचे की तरफ बहता हुआ । दूसरा शब्द है - प्रेम । प्रेम है । सुख मध्य में अटका हुआ । न नीचे जा रहा है । न ऊपर जा रहा है । और तीसरा शब्द है - प्रार्थना । प्रार्थना है । सुख ऊपर जाता हुआ । ऊर्जा वही है । काम में वही ऊर्जा नीचे की तरफ जाती है । प्रेम में वही ऊर्जा बीच में थिर हो जाती है । प्रार्थना में वही ऊर्जा पंख खोल देती है । आकाश की तरफ उड़ने लगती है । इसलिए मैंने कहा है - संभोग और समाधि संयुक्त हैं । एक ही ऊर्जा है । एक ही सीढ़ी है । नीचे की तरफ जाओ तो संभोग । ऊपर की तरफ जाओ तो समाधि । और दोनों के मध्य में प्रेम है । प्रेम द्वार है । प्रेम दोनों का द्वार है । प्रेम संभोग का भी द्वार है । अगर तुम्हारी ऊर्जा नीचे की तरफ जा रही है । तो प्रेम संभोग का द्वार बन जायेगा । और अगर तुम्हारी ऊर्जा ऊपर की तरफ जा रही है । तो प्रेम समाधि का द्वार बन जायेगा । प्रेम बड़ा अदभुत है । सेतु है । क्योंकि मध्य है । अरधै जाता उरधै धरै...
वह जो नीचे की तरफ ऊर्जा बह रही है कामवासना में । अब धीरे धीरे जागो । उसी ऊर्जा को ऊपर की तरफ ले चलना है । और जिस ऊर्जा को ऊपर ले जाना हो । उससे लड़ना मत । क्योंकि जिससे तुम लडे । उससे संबंध छूट जाता है । जिससे तुम लड़े । उससे तुम भयभीत हो जाते हो । जिससे तुम लड़े । उसका तुम दमन कर देते हो । और जिसका दमन हो जाता है । उसका ऊर्ध्वगमन नहीं हो सकता ।
इसलिए गोरख ने और गोरख के पीछे चलने वाले नाथ पंथियों ने कामवासना का दमन नहीं कहा - कामवासना का ऊर्ध्वगमन । भेद समझ लेना । तुम्हारे तथाकथित धार्मिक गुरु कामवासना का दमन सिखाते हैं -दबा डालो...। दबाने से क्या होगा ? कामवासना को निखारना है । दबाना नहीं । कामवासना हीरा है कीचड़ में पड़ा । कीचड़ धो डालनी है । मगर हीरा थोड़े ही फेंक देना है । कीचड़ के कारण हीरा मत फेंक देना । नहीं तो पीछे बहुत पछताआगे । और यही हालत तुम्हारे साधुओं की है । उनकी हालत तुमसे बदतर हो गयी है । तुम्हें हीरा नहीं मिला । क्योंकि तुम्हारा हीरा कीचड़ में पड़ा है । उनने कीचड़ छोड़ दी । साथ हीरा भी छूट गया । धोबी के गधे हो गये हैं । न घर के न घाट के । दुविधा में दोई गये, माया मिली न राम । समाधि का कुछ पता नहीं चल रहा है । संभोग से जो थोड़े बहुत सुख की कभी झलक, किरण मिलती थी । वह भी दूर हो गयी । इसलिए 24 घंटे चित्त उनका रुग्ण है । कहीं भी जडें न रहीं । जमीन से जड़ें उखाड़ लीं । और आकाश में जड़ें जमाने का राज नहीं आया
राज इस बात में है - हीरे को निखारना है । साफ करना है । कीचड़ को धो डालना है । कीचड़ से कमल हो जाता है । तो कीचड़ से घबड़ाओ मत । इसलिए कमल का 1 नाम है - पंकज । पंकज का अर्थ होता है - पंक से जो हो जाये । कीचड़ से जो हो जाये । कीचड़ से कमल हो जाता है । इतना बहुमूल्य, इतना प्यारा रूप, इतना सौंदर्य प्रगट हो जाता है । काम की कीचड़ में राम का कमल छिपा है । अरधै जाता उरधै धरै...
इसलिए जागो । समझो । काम की ऊर्जा को पहचानो । उसके साक्षी बनो । लड़ो मत । दुश्मनी नहीं । मैत्री करो । मित्र को ही फुसलाया जा सकता है ऊपर जाने के लिये । हाथ में हाथ लो काम ऊर्जा का । ताकि धीरे  धीरे तुम उसे प्रेम में रूपांतरित करो । पहले तो काम को प्रेम में रूपांतरित करना होगा । फिर प्रेम को प्रार्थना में । ऐसे ये 3 सीढ़ियां पूर्ण हो जायें । तो तुम्हारे भीतर सहस्रार खुले । शून्य गगन में उस बालक का जन्म हो ।
खयाल रखना, काम से भी बच्चों का जन्म होता है । संभोग से भी बच्चे पैदा होते हैं । और समाधि से भी बालक का जन्म होता है । वह बालक तुम्हारी अंतरात्मा है । वह बालक तुम्हारा भव्य रूप है । दिव्य रूप है । जैसे तुम्हारे भीतर कृष्ण का जन्म हुआ । कृष्णाष्टमी आ गयी । तुम्हारे भीतर बालक कृष्ण जन्मा ।
गगन सिषर महि बालक बोले । ताका नांव धरहुगे कैसा ।
अरधै जाता उरधै धरै । काम दग्ध जे जोगी करै ।
और वही योगी काम को दग्ध कर पायेगा । जो नीचे जाती ऊर्जा को ऊपर की तरफ संलग्न कर लेता है । लड़ने की बात नहीं है ।
तजै अल्यंगन काटै माया ।
जो क्षुद्र है । नीचा है । जो तुमसे बाहर है । उससे धीरे धीरे अपना आलिंगन छोड़ो । धीरे  धीरे उसमें अर्थ है । यह बात छोड़ो । उसमें अर्थ है नहीं । अर्थ तुम्हारे भीतर छिपा है । ओशो

14 नवंबर 2012

गलत सलत दोहा लिखा है - डा. श्याम गुप्त


डा. श्याम गुप्त पोस्ट " लाखों लोग इस फ़ोकटिया सतसंग को सुन रहे हैं । " पर  टिप्पणी ।
तात स्वर्ग अपवर्ग धरि धरिय तुला एक अंग । तूल ना ताहि सकलि मिल जो सुख लव सतसंग ।
गलत सलत दोहा लिखा है । मेरे विचार से सही है ।
तात वर्ग,अपवर्ग सुख,धरिय तुला इक अंग । तुले न ताही सकल मिलि,जो सुख लव सतसंग ॥
- वर्ग यहाँ सांसारिक सुख और अपवर्ग = उस दुःखदायी जन्म से विमुक्ति...अर्थात सतसंग सांसारिक एवं पारलौकिक दोनों सुखों से बढकर है ... अब क्यों.. यह तो बहुत बड़ा तात्विक दर्शन है...सतसंग करिए और जानिये ....
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
डा. श्याम गुप्त जी ! त्रुटि की तरफ़ ध्यान दिलाने हेतु धन्यवाद । तात वर्ग अपवर्ग सुख में वर्ग के स्थान पर " स्वर्ग " और सुख के स्थान पर " धरि " और तुले ना ताही सकलि मि्लि में खास तुले के स्थान पर - तूल ।

वास्तव में गलत लिख गया है । आपका दोहा सही है । इसमें मेरे द्वारा लिखा गया शब्द " तूल " भृमित कर सकता है । क्योंकि तूल का अर्थ जोर होता है । और मैं इस बात से भी सहमत हूँ कि यथासंभव लिखने और बोलने में शुद्धता होनी ही चाहिये । और मैं यह भी मानता हूँ कि सुख के स्थान पर गलती से धरि लिख गया । लेकिन साधुओं का मामला थोङा अलग हो जाता है । आप गौर करें । तो तुलसीदास ने रामचरित मानस में कहीं क्ष अक्षर का उपयोग नहीं किया । इसकी जगह सभी स्थानों पर छ ही लिखा है । इसी तरह कहीं भी श अक्षर नहीं आया है । इसकी भी जगह स या ष का प्रयोग हुआ  है । ण अक्षर का उपयोग भी नहीं किया । इसकी जगह न लिखा है । चलिये कुछ उदाहरण देखते हैं ।
( लछिमन ? ) समुझाए बहु भाँति । पूछत चले लता तरु पाँती ।
पूरक नाम राम सुख ( रासी ? ) । मनुज चरित कर अज ( अबिनासी ? ) ।
लै ( दच्छिन ? ) दिसि ? गयउ गोसाईं । बिलपति अति कुररी की नाईं ।
जो अगम सुगम सुभाव निर्मल असम सम ( सीतल ? ) सदा ।
जो अगम और सुगम हैं । निर्मल स्वभाव हैं । विषम और सम हैं । और सदा शीतल ( शांत ) हैं ।
तात तीनि अति प्रबल खल काम क्रोध अरु लोभ । मुनि बिग्यान धाम मन करहिं निमिष महुँ ( छोभ ? ) ।
ते फल ( भच्छक ? ) कठिन कराला । तव भय डरत सदा सोउ काला । 
उन फलों का भक्षण ? करने वाला कठिन और कराल काल है । वह काल भी सदा आपसे भयभीत रहता है ? ( छमब ? ) आजु अति अनुचित मोरा । कहउँ बदन मृदु बचन कठोरा ।
मेरे इस अत्यन्त अनुचित बर्ताव को क्षमा ? कीजिएगा । मैं कोमल ( छोटे ) मुख से कठोर ( धृष्टता पूर्ण ) वचन कह रहा हूँ । अबिनय बिनय जथारुचि बानी । ( छमिहि ? ) देउ अति आरति जानी ।
अविनय या विनय भरी जैसी रुचि हुई वैसी ही वाणी कहकर सर्वथा ढिठाई की है । हे देव ! मेरे आर्तभाव ( आतुरता ) को जानकर आप क्षमा ? करेंगे ।
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
मैंने गीता प्रेस गोरखपुर आदि से प्रकाशित रामायण और श्रीमद भगवत गीता का अर्थ व्याख्या देखी है । जो

मुझे पक्का पता है । कई स्थानों पर एकदम गलत है । लेकिन मेरे पास कम से कम अभी तो समय का बेहद अभाव है । और इस तरह के सही गलत अन्तर को बताती हुयी पाण्डुलिपि खुद तैयार करना एक लम्बे समय की मांग करता है । और मैं कोई विद्वान या लेखक नहीं । बल्कि आंतरिक ज्ञान का साधक हूँ । जिसकी जिम्मेदारी अन्य अनेकानेक जीवों को चेताने आगे बढाने की भी है । अतः सार ये कि साधु अपने ही तरीके से बात करते हैं । कैसे ? आपने जो वर्ग का अर्थ - सांसारिक सुख । और अपवर्ग का अर्थ  - उस दुःखदायी जन्म से विमुक्ति । लिखा है । वह सांसारिक भावों में ठीक है । पर गूढ अर्थों में एकदम गलत । क्योंकि स्वर्ग किसी भी मनुष्य के लिये बहुत बङी चीज होता है । और आत्म ज्ञानियों के लिये - पीकदान । शास्त्रों में वर्णित मोक्ष ( 4 प्रकार की मुक्ति ) मनुष्य के लिये  बहुत बङी चीज है । पर सुरति शब्द योग वालों के लिये - काल माया द्वारा फ़ैलाया गया छल । नाटक । आत्म ज्ञानी मुक्ति नहीं मुक्त शब्द का प्रयोग करते हैं । और इन दोनों में जमीन आसमान से भी बङा अन्तर है  । अन्तर तो इससे भी कहीं बहुत बहुत बहुत ज्यादा है । पर अफ़सोस आप इससे बङे अन्तर के स्थान और तुलनात्मक स्थितियों से परिचित नहीं हैं । कर्म धर्म दोऊ बटें जेबरी । जहाँ मुक्ति भरती पानी । सो गति बिरले जानी । अतः मैंने जो वर्ग को ( अर्थ में  । दोहे में नहीं )  स्वर्ग लिखा । वो सही है । और अपवर्ग को स्वर्ग या स्वर्गिक सुखों से भी ऊपर की मुक्ति स्थितियाँ । वह भी सही है । ये दोहा देखिये - अनुज वधू भगिनी सुत नारी । सुन सठ कन्या सम ए  ( चारी ? ) । इस दोहे में चारी शब्द का अर्थ विचार या मान्यता है । बताईये चारी का अर्थ किसी भी तरीके से यह निकलता है ? अब ये दोहा देखिये -  आकर चार लक्ष चौरासी । जोनि भृमित यहि जिव अविनाशी । इसमें - चार लक्ष चौरासी का मतलब क्या है ? 4 लाख 84 ? क्या ये गिनती 4 लाख 84  संख्या को बता रही है ? ये बता रही है । 4 प्रकार की 84 लाख योनियां । अब देखिये । क्यों है स्वर्ग महत्वहीन - एहि तन करि फ़ल विषय न भाई । स्वर्ग हू स्वल्प अन्त दुखदायी । थोङे समय का है स्वर्ग । और अन्त में अधोगति । यानी वही 84 लाख योनियां । और  देखिये - राम बुलाबा भेजिया । दिया कबीरा रोय । जो सुख है सतसंग में । सो बैकुण्ठ न होय । तो मेरे उस लेख का सार - असली सतसंग क्या और कैसे ? बताना था । कहते हैं । घर का बना असली खोआ का लड्डू टेङा मेङा अर्थात तरीके से गोल सजावटी न हो । तो भी बाजारी मिलावटी से ? ज्यादा मजा देता है । ये साधुओं की फ़क्कङता होती है । इसलिये अब इसी मुख्य बात पर बात करते हैं । जैसा कि स्वयं आपने लिखा - अब क्यों ? यह तो बहुत बड़ा ? तात्विक दर्शन है ? सतसंग करिए । और जानिये ।
मेरे लिये सतसंग  ( वो भी असली ) बहुत बङा तात्विक दर्शन नहीं है । बल्कि बहुत बहुत बहुत छोटा सा ( आपके ही अनुसार ) तात्विक दर्शन है । अब इसी बहुत बङे तात्विक दर्शन ? को मैं 13 साल के बच्चों से लेकर 90 साल तक के वृद्धों को बङी आसानी से कराता हूँ । और ये सच्चे सदगुरु की कृपा से ही संभव है । मेरे उस लेख का सार यही था । तुलसीदास ने मानस में ही लिखा है - गो गोचर जहाँ लगि मन जाई । सो सब माया जानो भाई । यानी इंद्रियां ( गो ) और उनके विचरने के स्थान ( गोचर ) और जहाँ तक ये मन जाता है । वह सब सत्य ज्ञान नहीं । बल्कि माया है । काल और मन एक ही बात है । देखिये - काल काल सब कोइ कहे । काल न जाने कोय । जेती मन की कल्पना । काल कहावे सोय । अब देखिये ये काल कहाँ तक जाता है - सार शब्द जब आवे हाथा । तब तब काल नवावे माथा । सार शब्द निज सार है । कहूँ वेद तोय सार । पाईये सो पाईये । बाकी काल पसार । परमात्मा जब आदि सृष्टि से पूर्व की अवस्था में था । और उसमें पहली स्फ़ुरणा ( संकुचन ) हुयी । तब ये प्रथम शब्द प्रकट हुआ । जो वास्तव में 1 अनोखी ध्वनि है । इसी ध्वनि से । अलग अलग सृष्टि स्तरों पर । सृष्टि मंजिलों पर । बहुत तेज वायव्रेशन हो रहा है । जिससे अन्य अनेक धुनात्मक शब्दों - ॐ । सोहं । राम । शिवोहम आदि स्थितियों सृष्टियों का निर्माण हुआ है । तो मेरे कहने का मतलब ये काल उस सार शब्द तक जाता है । जिसे निःअक्षर भी कहा जाता है । यही मनुष्य जीवन का वास्तविक लक्ष्य भी है । और इसी के मिलने को आवागमन से मुक्त होना कहा गया है । क्योंकि सार शब्द के साथ ही परमात्मा से साक्षात्कार हो जाता है ।
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
मित्रो ! देश के 1 भी राष्ट्रीय TV चैनल और अखबार ने डा स्वामी के इस प्रेस कांफ्रेंस को नहीं दिखाया था । इस बात से ही आप समझ सकते हैं कि देश की मीडिया देशद्रोही है । कृपया इस वीडियो को देखें । और अपने मित्रो से शेयर करें । देश का मीडिया देशद्रोही है । इसलिए लोगों को जगाने का काम हम लोगों को ही करना पड़ेगा ।

आज डा सुबृमनियम स्वामी ने सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी की फर्जी कंपनियों के बारे में प्रेस वार्ता में खुलासा किया । डा स्वामी ने विभिन्न इंडियन पेनल कोड IPC की धाराओं के बारे में भी बताया । जिनके अंतर्गत सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी दोषी है । डा स्वामी ने राहुल गांधी के स्विट्जरलैंड के ज्यूरिख के पिक्टेट बैंक में खाता होने का सनसनीखेज खुलासा करने के साथ ही आरोप लगाया है कि गांधी खानदान ने विभिन्न देशों में दर्जनों फर्जी कंपनियों बनाई । अरबों का धन बटोरा । फिर कंपनी बंद कर दी । कांग्रेस के धन से दिल्ली का हेराल्ड हाउस कौड़ियों के भाव खरीदा । जिसकी बाजार कीमत 6 000 करोड़ से अधिक है । डा स्वामी ने कहा कि इनकी कंपनियों में विदेशी निवेश भी हुआ है । इसलिए इसकी जांच SIT से की जानी चाहिए । डा स्वामी ने कहा कि उन्होंने अभी 27 में से केवल 2 कंपनियों के बारे में जानकारी दी है । आगे जाकर वो सभी कंपनियों और उसमे हुए अनियमित्ताओं के बारे में जानकारी देगे । डॉ स्वामी कहते हैं कि सोनिया गाँधी और राहुल गाँधी को इस्तीफा देना चाहिए ।
डा स्वामी यह भी बताते हैं कि किस प्रकार से सोनिया गाँधी विभिन्न घोटालो में संलिप्त है । और किस प्रकार से सोनिया गाँधी ने अनेको ऐसे काम किये हैं । जिसके लिए उन्हें कानूनी तौर पर सजा मिलनी चाहिए । डा स्वामी कहते हैं कि सोनिया गाँधी का चोरी करने का इतिहास रहा है । सबसे पहले इंश्योरेंस एजेंट बनकर चोरी किया । फिर मारुति का टेक्नीकल डायरेक्टर बनकर चोरी किया । फिर वो झूठे तरीके से वोटर बन गयी । राहुल गाँधी जब पैदा हुआ । तो उसको इटालियन नागरिक बना दिया । तो इस तरह से सब कुछ मिलाकर यह देश का सबसे महा भृष्ट परिवार है । यह और इस परिवार की पोल खोलने की प्रक्रिया आज से उन्होंने शुरु कर दी है । वो कहते हैं कि वो केजरीवाल की तरह केवल आरोप लगाकर भागने वाले नहीं हैं । वो इन आरोपों को न्यायालय में ले जायेंगे । और इन मुद्दों को अंत तक ले जायेंगे ।
अगर पूरा पोस्ट नहीं पढ़ सकते । तो यहाँ पर क्लिक करें । 
http://www.youtube.com/watch?v=RfQohTipfkg
ƸӜƷƸӜƷƸӜƷ
- Have been crucified with Christ; it is no longer I who live, but Christ who lives in me; and the life I now live in the flesh I live by faith in the Son of God, who loved me and gave himself for me ~ Galatians 2.20
- O my heart! the Supreme Spirit, the great Master, is near you: wake, oh wake ! Run to the feet of your Beloved: for your Lord stands near to your head .You have slept for unnumbered ages; this morning will you not wake ? Kabir
- Nothing can dim the light that shines from within…” Rise and shine my lovely friends . All the love and light 

11 नवंबर 2012

तुम्हें तो 1400 साल से किसी अल्लाह का पता चला

चर्चामंच से सोमवारीय चर्चा में इस लेख का लिंक मिला ।
- हमें विस्तार से पता होना चाहिए कि AA इस्लाम के अनुसार मुसलमानों को गैर मुसलमानों के साथ कैसे संबंध रखने चाहिए और कैसे उनके साथ इस्लामी शरी'अत के अनुसार जीवन व्यतीत करना चाहिये ?
A सब तारीफें अल्लाह के ही लिए हैं ?
B पहली बात तो यह कि इस्लाम दया और न्याय का धर्म है ? इस्लाम के लिए इस्लाम के अलावा अगर कोई और शब्द इसकी पूरी व्याख्या कर सकता है । तो वह है - न्याय ?
मुसलमानों को आदेश है कि - C ग़ैर मुसलमानों को ज्ञान । सुंदर उपदेश । तथा बेहतर ढंग से वार्तालाप से बुलाओ ।  ईश्वर ? कुरआन में कहता है (अर्थ की व्याख्या)
29-46 D और किताब वालों से बस उत्तम रीति से वाद विवाद करो । रहे वे लोग जो उनमें ज़ालिम हैं । उनकी बात दूसरी है ? और कहो - E हम ईमान लाये उस चीज़ पर ? जो हमारी ओर  अवतरित हुई और तुम्हारी ओर भी अवतरित ? हुई ।
F और हमारा पूज्य और तुम्हारा पूज्य अकेला ही है और हम उसी के आज्ञाकारी हैं ?
9-6 और यदि मुशरिकों (G जो ईश्वर के साथ किसी और को भी ईश्वर अथवा शक्ति मानते हैं) में से कोई तुमसे शरण मांगे तो तुम उसे शरण दे दो । यहाँ तक कि वह अल्लाह की वाणी सुन ले । फिर उसे उसके सुरक्षित स्थान पर पंहुचा दो ।
H क्यों वे ऐसे लोग हैं । जिन्हें ज्ञान नहीं है ?
इस्लाम यह अनुमति नहीं देता है कि 1 मुसलमान किसी भी परिस्थिति में किसी गैर मुस्लिम (जो इस्लाम के प्रति शत्रुता पूर्ण व्यवहार नहीं करता ?) के साथ बुरा व्यवहार करे ।
J इसलिए मुसलमानों को किसी ग़ैर मुस्लिम के खिलाफ आक्रमण की या डराने की या आतंकित करने या उसकी संपत्ति गबन करने की या उसे उसके सामान के अधिकार से वंचित करने की या उसके ऊपर अविश्वास करने की या उसे उसकी मजदूरी देने से इंकार करने की या उनके माल की कीमत अपने पास रोकने की (जबकि उनका माल खरीदा जाए) या अगर साझेदारी में व्यापार है । तो उसके मुनाफे को रोकने की अनुमति नहीं है ।
इस्लाम के अनुसार यह मुसलमानों पर अनिवार्य है । गैर मुस्लिम पार्टी के साथ किया करार या संधियों का सम्मान करें । 1 मुसलमान अगर किसी देश में जाने की अनुमति चाहने के लिए नियमों का पालन करने पर सहमत है (जैसा कि वीसा इत्यादि के समय) और उसने पालन करने का वादा कर लिया है । तब उसके लिए यह अनुमति नहीं है कि K उक्त देश में शरारत करे । किसी को धोखा दे । चोरी करे । किसी को जान से मार दे अथवा किसी भी तरह की विनाशकारी कार्रवाई करे । इस तरह के किसी भी कृत्य की अनुमति इस्लाम में बिलकुल नहीं है ।
अल शूरा 42-15 अर्थ की व्याख्या  - और मुझे तुम्हारे साथ न्याय का हुक्म है । L हमारे और आपके प्रभु ? 1 ही है । हमारे साथ हमारे कर्म हैं और आपके साथ आपके कर्म ।
इस्लाम यह अनुमति अवश्य देता है कि M अगर ग़ैर मुस्लिम मुसलमानों के खिलाफ युद्ध का एलान करें । उनको उनके घर से बेदखल कर दें अथवा इस तरह का कार्य करने वालों की मदद करें । तो ऐसी हालत में मुसलमानों को अनुमति है । ऐसा करने वालों के साथ युद्ध करे और उनकी संपत्ति जब्त करें ।
60-8 N अल्लाह तुम्हें इससे नहीं रोकता है कि तुम उन लोगों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनके साथ न्याय करो । जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया और ना तुम्हें तुम्हारे अपने घर से निकाला । निस्संदेह अल्लाह न्याय करने वालों को पसंद करता है ?
60-9 अल्लाह तो तुम्हें केवल उन लोगों से मित्रता करने से रोकता है । O जिन्होंने धर्म के मामले में  तुमसे युद्ध किया और तुम्हें तुम्हारे अपने घरों से निकाला और तुम्हारे निकाले जाने के सम्बन्ध में सहायता की । जो लोग उनसे मित्रता करें । वही ज़ालिम हैं ।
क्या इस्लाम काफिरों का क़त्ल करने का हुक्म देता है ? कुछ लोग इस्लाम के बारे में भ्रांतिया फ़ैलाने के लिए कहते हैं कि इस्लाम में गैर मुसलमानों को क़त्ल करने का हुक्म है । P इस बारे में ईश्वर के अंतिम संदेष्ठा महापुरुष मुहम्मद (स.) की कुछ बातें लिख रहा हूँ । इन्हें पढ़कर फैसला आप स्वयं कर सकते हैं ।
Q - जो ईश्वर और आखिरी दिन (क़यामत के दिन) पर विश्वास रखता है । उसे हर हाल में अपने मेहमानों का सम्मान करना चाहिए । अपने पड़ोसियों को परेशानी नहीं पहुँचानी चाहिए और हमेशा अच्छी बातें बोलनी चाहिए अथवा चुप रहना चाहिए । Bukhari, Muslim
R - जिसने मुस्लिम राष्ट्र में किसी ग़ैर मुस्लिम नागरिक के दिल को ठेस पहुंचाई । उसने मुझे ठेस पहुंचाई । Bukhari
- जिसने 1 मुस्लिम राज्य के गैर मुस्लिम नागरिक के दिल को ठेस पहुंचाई । मैं उसका विरोधी हूँ । S और मैं न्याय के दिन उसका विरोधी होऊँगा । Bukhari
T - न्याय के दिन से डरो ? मैं स्वयं उसके खिलाफ शिकायत कर्ता रहूँगा ? जो 1 मुस्लिम राज्य के  गैर मुस्लिम नागरिक के साथ गलत करेगा या उस पर उसकी जिम्मेदारी उठाने की ताकत से अधिक जिम्मेदारी डालेगा अथवा उसकी किसी भी चीज़ से उसे वंचित करेगा । Al-Mawardi
- अगर कोई किसी गैर मुस्लिम की हत्या करता है । जो कि मुसलमानों का सहयोगी था । तो उसे स्वर्ग तो क्या स्वर्ग की खुशबू को सूंघना तक नसीब नहीं होगा । Bukhari
एवं पवित्र कुरआन में ईश्वर कहता है कि - इसी कारण U हमने इजरायल की संतान के लिए लिख दिया था कि - जिसने किसी व्यक्ति को किसी के ख़ून का बदला लेने या धरती में फ़साद फैलाने के जुर्म के अतिरिक्त किसी और कारण से मार डाला । तो मानो, उसने सारे ही इंसानों की हत्या कर डाली और जिसने उसे जीवन प्रदान किया । उसने मानों सारे इंसानों को जीवन प्रदान किया । V उनके पास हमारे रसूल (संदेशवाहक) स्पष्‍ट प्रमाण ला चुके हैं ? फिर भी उनमें बहुत से लोग धरती में ज़्यादतियाँ करने वाले ही हैं । 5-32 - शाहनवाज़ सिद्दीकी
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इस लेख पर कुछ टिप्पणियां ।
Shah Nawaz  - अब तो आपको पता चल ही गया होगा कि इस्लाम किसके साथ युद्ध करने का हुक्म देता है ? W अगर कोई मेरे घर अथवा मेरे देश पर आक्रमण करेगा । तो मैं अवश्य ही कुरआन ए करीम का अनुसरण करते हुए उनकी गर्दने उतारूंगा और उनके पोर पोर पर चोट पहुंचाऊंगा ।
safat alam taimi - बड़ा अच्छा लेख प्रस्तुत किया शाहनवाज़ भाई आपने । X लोगों को बस आपत्ति करना आता है । समझने के इच्छुक हों तब ना ? और विरोध भी कर रहे हैं किसका ? अपनी ही धरोहर का ?
safat alam taimi  - 1 Y कुरआन शान्ति का संदेश देता है ? इस्लाम का उद्देश्य पूरे संसार में शान्ति स्थापित करना है ? Z इस्लाम हर धर्म का सम्मान करता है ? क़ुरआन में इंसानी जानों का सम्मान इतना किया गया है कि उसने किसी 1 व्यक्ति (चाहे उसका धर्म कुछ भी हो) की हत्या को सारे संसार की हत्या सिद्ध करता है । जो कोई किसी इंसान को जबकि उसने किसी की जान न ली हो । अथवा धरती में फसाद न फैलाया हो की हत्या करे । तो मानो उसने प्रत्येक इंसानों की हत्या कर डाला और जो कोई 1 जान को (अकारण कत्ल होने से) बचाए । तो मानो उसने प्रत्येक इंसानों की जान बचाई । सूर । माईदा । आयत 32
और मुसलमान जिस नबी को अपनी जान से अधिक प्रिय समझते हैं । A1 वह प्रत्येक संसार के लिए ? दयालुता बनकर आये थे B1  (हे मुहम्मद) हमने आपको सम्पूर्ण संसार के लिए दयालुता बनाकर भेजा है । सूर । अंबिया 107 मुहम्मद सल्ल के प्रवचनों में आता है - जो कोई इस्लामी शासन में रहने वाले गैर मुस्लिम की हत्या कर दे । वह स्वर्ग की बू तक न पाएगा । सही । बुख़ारी ।
देखा ! यह है इस्लाम की शिक्षा ? और हम सब इसी पर 100 % विश्वास रखते हैं । 1 मुस्लिम कभी किसी गैर मुस्लिम को गैर मुस्लिम होने के नाते किसी प्रकार का कष्ट नहीं पहुंचा सकता । इसलिए कि वह जानता है ? कि हम सब 1 ही माता पिता का संतान हैं ?
2 ज़रा आप C1 मुहम्मद सल्ल की आदर्श जीवनी ? का अध्ययन करके देख लीजिए । उनके शत्रुओं ने उनको और उनके अनुयाइयों को निरंतर 21 वर्ष तक हर प्रकार से सताया । कितनों को जान से मार दिया । घर से निकाला । लेकिन सबको सहन करते रहे । D1 यहाँ तक कि 21 वर्ष तक अत्याचार सहते सहते जब अन्त में मक्का पर विजय पा चुके ? तो सार्वजनिक क्षमा की घोषणा कर दी । जिसका परिणाण यह हुआ कि मक्का विजय के वर्ष उनके अनुयाइयों की संख्या 10 000 थी । तो 2 वर्ष में ही 1 अन्तिम हज के अवसर पर 1 लाख 40 हज़ार हो गई । क्यों ? वह सोचने पर विवश हुए कि जिस इंसान को हमने 21 वर्ष तक चैन से रहने नहीं दिया । हम पर क़ाबू पाने के बाद हमारी क्षमा की घोषणा कर रहा है । मानो यह स्वार्थी नहीं । बल्कि हमारी भलाई चाहता है ।
सुलभ § सतरंगी said - उपरोक्त सन्दर्भ से 1 बात तो स्पष्ट है कि बांग्ला देश, पाकिस्तान या ऐसे देश के सरकार (लोग) दोज़ख के भागी है । इस्लामी शासन के अंतर्गत उन्होंने थोडा भी अन्याय किया तो वे स्वर्ग की खुशबू से वंचित रहेंगे ।
2 शाहनवाज जी ! त्वरित जवाब लिखने के लिए आपका शुक्रिया । कुछ ऐसी ही बातें हमारे उस्ताद ने भी बताई थी । जैसे सफ़र में हों । तो रोज़ा रखना जरुरी नहीं है इत्यादि । E1 मेरे अधिकाँश दोस्त मुस्लिम ही हैं । मगर वे इस्लाम के बारे में 0 या थोड़ी जानकारी रखते हैं ? ठीक उसी प्रकार अधिकांश हिन्दू विभिन्न रिवाज, नियम और ग्रंथों के बारे में सही जानकारी नहीं रखते ।
बहरहाल आप तो हम जैसे नास्तिकों को ‘काफिर’ समझते हैं ? जबकि मैं मानवता का सेवक हूँ । मेरी समस्या 1 ही है । किसी भी धर्म ग्रन्थ में आस्था नहीं । हाँ ! कुछ अच्छी बातें जरुर उठा लेता हूँ  सभी किताबों से । जैसे मैंने कुरआन/हदीस से 1 पंक्ति लिया - अमानत में खयानत नहीं करनी चाहिए । पुराने वेद से लिया - सर्व धर्म समभाव । वसुधैव कुटुम्बकम ।
गीता से लिया - परिवर्तन संसार का नियम है । इत्यादि और इसे गाँठ बाँध लिया । मुझे विश्वास है । कुरआन या अन्य अच्छे धर्म ग्रन्थ का पालन किये बगैर भी मैं अच्छी जिंदगी बसर कर सकता हूँ । सबको साथ लेकर चल सकता हूँ । इसके लिए मुसलमान कहलाना जरुरी नहीं है ? मैं अपने देश से इतर किसी धर्म को नहीं मानता हूँ । यही मेरी सुन्दरता का राज है । लेकिन जिद्दी लोगों को समझाना अपना फ़र्ज़ (नागरिक धर्म) समझता हूँ ।
2 why most of the terrorists all over the world are muslim ?
ऐसा कहना पूर्णत: सत्य नहीं है । आज भी विभिन्न देशों में विभिन्न पंथों के लोग आतंकवाद में लिप्त हैं ।
F1 परन्तु फिर भी जो आतंकवाद आज मुस्लिम समाज में पनप रहा है । वह चिंता का विषय है । दरअसल इसके पीछे लम्बी कहानी है । अमेरिका और इजरायल जैसे देश एवं कुछ सांप्रदायिक संगठन काफी सालों से कुछ मुस्लिम देशों/समाज को समाप्त अथवा पराजित करने जैसी कोशिश में लगे हुए हैं । इससे 1 कशमकश की स्थिति बन गई है और इस कारण मुस्लिम युवाओं में 1 असंतोष की भावना घर कर रही है और इसी का फायदा आतंकवादी संगठन उठा रहे हैं । वहीं अशिक्षा और बेरोज़गारी भी इसका 1 महत्त्वपूर्ण कारण है । G1 अशिक्षा के कारणवश बहुत ज्यादा मुसलमानों को मालूम ही नहीं है कि इस्लाम की क्या शिक्षाएं हैं ? और इसी का फायदा उठाकर आतंकवादी संगठन लोगों को बेवक़ूफ़ बनाकर अपनी योजनाओं में शामिल कर लेते हैं ।
http://sandesh.premras.com/2010/04/blog-post_14.html
गैर मुसलमानों के साथ संबंधों के लिए इस्लाम के अनुसार दिशा निर्देश ।
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AA इसी लेख पर मुस्लिम टिप्पणी में लिखा है कि - हम सब 1 ही माता पिता की संतान हैं ? फ़िर 1 ही माता पिता के मुस्लिम और गैर मुस्लिम 2 प्रकार की संतानें कैसे हो सकती हैं ?
A सब तारीफें अल्लाह के ही लिए हैं ? क्या ओलम्पिक में कोई गोल्ड मैडल जीता है अल्लाह ने या सचिन का रिकार्ड तोङ दिया या फ़िर 1400 साल के अल्लाह ने ऐसा कोई काम किया । जिसके लिये उसे नोबल प्राइज मिले ? दरअसल ये लिखना ही संकीर्णता का परिचायक है और धार्मिक वैमनस्यता का कारण और मूर्खतापूर्ण इस्लामी कट्टरता की जङ भी ?
B पहली बात तो यह कि इस्लाम दया और न्याय का धर्म है ?
- और बाकी धर्म क्या क्रूरता और अन्याय के धर्म हैं ? क्या 1400 साल पहले इंसान दया और न्याय से परिचित नहीं था । बहुत पीछे मत जाओ, ईसामसीह महावीर और बुद्ध को ही ले लो । क्या 1400 साल पहले धरती पर आदिमानव काल चल रहा था । जो नंगे पुंगे इंसान हू हा ऊ ऊ  बू बू  चिल्लाते फ़िरते थे ।
C ग़ैर मुसलमानों को ज्ञान, सुंदर उपदेश, ग़ैर मुसलमानों को (धार्मिक ज्ञान) ज्ञान, सुंदर उपदेश बाद में करना । पहले मुसलमानों को ही सुधार लो । उन्हें ठीक से नहाना धोना ही सिखा दो । पढना लिखना ही सिखा दो । ये मैं नहीं कह रहा । आपने (लेख लेखक) ही लिखा है । क्या लिखा । देखें G1 क्योंकि आप देख सकते हैं । वैश्विक % में गैर मुस्लिम कितने अधिक शिक्षित सफ़ाई पसन्द सलीके वाले और प्रेमपूर्ण व्यवहार करने वाले हैं । जबकि तमाम मुस्लिम आबादी आज भी आदिवासी कबीलाई जंगलियों के समान आचरण वाली है ।
D और किताब वालों से बस उत्तम रीति से वाद विवाद करो । पर और (धार्मिक किताब वालों) से वाद विवाद कर ही कहाँ पाओगे । तुम्हारी किताब तो हिन्दुओं की योग धर्म विज्ञान छोङो नैतिक शिक्षा, सद उपदेश जैसी मामूली किताबों के आगे ही नहीं ठहर पायेगी । क्या तुम्हारी अक्ल पर  ताला लगा है । जिनको तुम अल्लाह का उपदेश कहते हो । किसी भी चौराहे नुक्कङ पर बैठे निठल्ले नाकारा लोग भी इससे सुन्दर उपदेश करते हैं न कि उलझाऊ - फ़िर हमने चांद को आसमान में उल्टा लटका दिया । उसमें एक बुढिया को नीचे जमीन घूरने के लिये बैठा दिया । फ़िर हमने सोचा और 1 सूरज भी बना दिया ।
E क्या चीज थी ये ? बङा  संस्पेंस क्रियेट हो गया ।
F अच्छा बता रहे हो कि तुम्हें अब (1400 साल से) पता चला । वैसे 1 ही है फ़िर हमारा तुम्हारा क्यों कहते हो ? शायद तुम्हें नया नया पता चला । इसीलिये बताने को परेशान हो पर हम तो बहुत पहले बहुत पहले से ही जानते हैं । वह 1 ही है और उसको कहते हैं - परमात्मा ।
G ये क्या और किनके बारे में बात हो रही है । कोई बता सकता है ?
H निश्चय ही इस आयत में मूर्ख पाकिस्तानियों के बारे में अल्लाह ने बताया है ।
I &J  और वैसे ऐसी अनुमति और कौन सा धर्म देता है ? मैं कहता हूँ । सब कुरआन रामायण बाइबल गीता आदि इंसान लङाऊ पोथन्ने उठाकर रख दो ।
आपको मालूम होगा अम्बेडकर ने ब्रिटिश संविधान की नकल कर ही भारतीय संविधान लिखा है । उसमें भी ऐसी ऐसी धारायें हैं । जिनको पढ़कर अच्छे अच्छे बिगङैल भूत भी शांति दूत बन जायेंगे । वो किसी अल्लाह की वाणी या उपदेश से प्रभावित होकर नहीं बल्कि डर की वजह से ।
इसकी धाराओं में 4 प्रकार की सजा का विधान है । वो भी किसी कयामत वाले दिन नहीं ? अभी का अभी, तुरन्त । किसी की जेब काट कर देख लो ।
1 इतने दिन या साल की सजा । 2 इतने रुपये का जुर्माना ।
3 सजा और जुर्माना दोनों । 4 न्यायाधीश के विवेकानुसार ।
K 1 हालीवुड फ़िल्म में अमेरिका आदि किसी देश में किसी जेल का अजीब नियम है । वहाँ अपराधी को लगभग 3 फ़ुट ऊँचाई और 3 वर्ग फ़ुट के जालीदार पिंजरें में रखते हैं । सुबह सुबह इनको पिंजरे से निकालकर पैंट हटवाकर प्रष्ठ भाग में जोर से डंडा मारते हैं । इस्लाम ने अनुमति दे भी दी । तुम्हारी हिम्मत है किसी पराये देश में या स्वदेश में ऐसा कर सको ? अल्लाह तो जो करेगा, कयामत के दिन करेगा । ये तुरन्त हाथ धोकर पीछे पङ जायेंगे ।
L ये बात मुसलमान जोर देकर क्यों बताते हो । क्या हिन्दू कहते हैं कि - भगवान अलग अलग हैं । तुम्हें तो 1400 साल से किसी अल्लाह का पता चला । आदि सृष्टि से ही ग्रन्थों में परमात्मा और सृष्टि ज्ञान की पुस्तकों की भरमार है ।
M मेरे गांव का चौधरी जिसने कोई कुरआन बाइबल रामायण कभी नहीं पढी सुनी । अगर कोई उससे गलत बात की चूँ भी कर दे । तो लठ्ठ उठा कर बेहिसाब मारता है ।

N ये व्यवहार तो कोई मन्द बुद्धि इंसान भी जानता समझता है । अल्लाह क्या मन्द बुद्धि है या फ़िर शायद मुसलमानों को समझता होगा । और इसका मतलब क्या है - जिन्होंने तुमसे धर्म के मामले में युद्ध नहीं किया ? ये अल्लाह प्रेम का धर्म सिखाता है या युद्ध का धर्म ?
O जिन्होंने धर्म के मामले में तुमसे युद्ध किया - अब जबरदस्ती अपना जैसा धर्म लोगों को बताओगे तो युद्ध नहीं तो और क्या होगा । 1400 साल से तुम यही तो कर रहे हो । कोई निर्णय निकला ?
P ईश्वर के अंतिम संदेष्ठा महापुरुष मुहम्मद (स.) - यह बात मुसलमान किस आधार पर कहते हैं । मेरी समझ में नहीं आता । जबकि तुम उन्हें किसी ईश्वर का संदेष्टा कहते हो ।
इंसान ने जन्नत और 72 हूरों का इंतजाम यहीं कर लिया । बस थोङे हाथ पैर हिलाओ । थोङी (शिक्षा की) इबादत तो करो ।
Q इससे अधिक फ़ालतू बात (यदि किसी धार्मिक ईश्वरीय ग्रन्थ को ये मामूली बात भी बतानी पङे) मैंने आज तक नहीं सुनी । क्योंकि इतना तो गली में घूमने वाली पागल औरत भी समझती है । इससे तो ऐसा लगता है कि - अल्लाह मुसलमानों को एकदम जाहिल गंवार समझता है ।
R अल्लाह से पूछो कि 1400 साल से बहुत पहले भी ये दुनियां मजे से चल रही थी और कुरआन मुसलमान के न होने से और बढ़िया ही चल रही थी । फ़िर इसने मुसलमान और कुरआन का एकदम बेकार बखेङा फ़ैलाया ही क्यों ? किसी मुसलमान या मुस्लिम राष्ट्र की जरूरत ही क्या थी ? आज जो मुसलमान नहीं या कुरआन नहीं पढते । वो क्या अच्छे इंसान नहीं हैं ?
S और मैं न्याय के दिन उसका विरोधी होऊँगा - अल्लाह ! तुमने यही बात करके अशांति फ़ैलायी । साइंस के अनुसार सृष्टि 4 अरब साल से है और तुम जो करोगे । न्याय के दिन ही करोगे ? अभी क्या बात है ? तुरन्त करते चलो । इतना काम इकठ्ठा क्यों कर रहे हो । इंसान (न्यायाधीश) 4-6 साल में ही फ़ैसला कर देते हैं ।
T न्याय के दिन से डरो ?
अल्लाह ! तुम दूसरों को क्या डराते हो । इंसान भी अपने बच्चों को प्यार मुहब्बत अच्छा जीवन सिखाता है । अगर वह गलती पर है । तो उसे सही रास्ता दिखाता है और तुमने ये कयामत के दिन जन्नत और 72 हूरों की बात क्या चलाई । दुनियां में अन्याय अधर्म का हाहाकार मचा दिया । हिन्दू सन्तों ने इंसान के लिये यहीं स्वर्ग बना दिया और जीते जी ही बहुतों को परमात्मा से मिला दिया । विश्वास नहीं होता । तुम्हारे इसी स्वर्ग (और उससे बहुत ऊपर भी) सहज योग वाले जाते हैं ।
V उनके पास हमारे रसूल (संदेशवाहक) स्पष्‍ट प्रमाण ला चुके हैं ? क्या प्रमाण है इस बात का कि मुहम्मद अल्लाह का संदेशवाहक थे ?
W जो तुम करोगे, वही दूसरों को भी करना आता है । सभी घी की चुपङी  रोटी खाते हैं ।
X लोगों को बस आपत्ति - यही ईसाई, मुसलमानों को समझाना चाहता हूँ । यदि तुम समझो । सनातन धर्म में वो समृद्ध सिद्ध ज्ञान विज्ञान मौजूद है कि आँखें खुल जायें । तुम्हें अल्लाह और जन्नत की हकीकत (कयामत के दिन नहीं) जीते जी ही आसानी से पता चल जाये ।
Y फ़िर भी लोग समझ नहीं पाते । अल्लाह ! वैसे एकाध जगह शांति हुयी कि नहीं ? मुझे तो स्वयं मुसलमानों में ही घोर अशांति के सिवाय कुछ दिखायी नहीं देता ।
Z इस्लाम हर धर्म का सम्मान करता है ? पर मुझे लगता है । सिर्फ़ फ़टे में टांग अङाता है । क्योंकि  कोई पूछता नहीं । इसलिये अपना महत्व साबित करने के लिये चिल्लाता है ।
A1 चलो झूठा ही सही मान लिया । फ़िर मुहम्मद को मानने वाले क्या कर रहे हैं ? द्वेष और  नफ़रत हिंसा खून खराबा । ये बात कभी सोची तुमने ?
B1 हे मुहम्मद ) हमने आपको ?.. बस सारे संसार में झगङे की जङ ऐसे ही सम्बोधन युक्त लाइनें हैं । जिनमें किसी 1 व्यक्ति को ठेका सा दे दिया । इतिहास गवाह है । हरेक समय में बिना किसी धार्मिकता के ऐसी ऐसी महान हस्तियां हुयी हैं । जिन्होंने जातिवाद की मूर्खतायुक्त संकीर्णता से एकदम दूर विश्व में सदभावना मानवता और भाईचारे का दिव्य अनमोल संदेश फ़ैलाया ।
C1 मुहम्मद सल्ल की आदर्श जीवनी ? इससे ज्यादा आदर्श वाली कम से कम 1 लाख जीवनी बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के मानवीय इतिहास में उपलब्ध है ।
D1 ये बात वाकई महत्वपूर्ण है । अगर मुसलमानों को जरा भी समझ आ जाये । अगर वे मुहम्मद के इसी आचरण पर चलकर इस्लाम का प्रचार करें । तो बिना (धर्म परिवर्तन के) मुसलमान बने ही कमाल का भाईचारा फ़ैलेगा और जन्नत मरने के बाद कयामत के दिन नहीं ? यहीं जीते जी जिन्दगी भर को तो होगी ही पर क्या खुद मुसलमान ही ऐसा आचरण करते हैं ?
E1 मगर वे इस्लाम के बारे में 0 या थोड़ी जानकारी रखते हैं ? खुद मुसलमानों को ही इस्लाम की जानकारी नहीं तो ये सिखाने वाले पहले इन्हें ही क्यों नहीं सिखाते ।
F1 आप देख सकते हैं । ये उत्तर जान बूझ कर सत्य को नकारने जैसा है । जैसे आँखों देखी मक्खी निगलना, सरासर और सफ़ेद झूठ बोलना ।
G1 अशिक्षा के कारणवश बहुत ज्यादा मुसलमानों को मालूम ही नहीं है कि इस्लाम की क्या शिक्षाएं हैं ? ..क्या बात है । फ़िर पहले अपना ही घर सुधार लो औरों की फ़िक्र बाद में करना । 

10 नवंबर 2012

प्रेम कोई लेन देन का मामला नहीं

तजै अल्यंगन काटै माया । ममता, मोह, लोभ धीरे धीरे छोड़ो । क्योंकि तुम जिस चीज को बाहर पकड़े हो । वह तो मौत छीन लेगी । उसे मौत से छीनने के पहले छोड़ दो । तो तुम्हारा बड़ा पुरस्कार है । तुम फिर धन्यभागी हो । क्योंकि जो मौत के पहले ही चीजों को छोड़ देता है । उसकी फिर मौत नहीं आती । फिर उसके पास कुछ बचता ही नहीं । जो मौत छीन ले जाये । उसने खुद ही छोड़ दिया । इसी का नाम संन्यास है । और छोड़ने का अर्थ भागना नहीं है । जो भागता है । वह तो पकड़े है । इसीलिए भागता है । नहीं तो भागेगा क्यों ? अगर कोई पत्नी को छोड्कर जंगल भागता है । उसका मतलब पत्नी को पकडे हुए है । नहीं तो डर क्या है । भय क्या है ?
मैं अपने संन्यासी को कहता हूं - जहां हो । वहीं छोड़ा जा सकता है । भागने की बात तो भूल भरी है । भागना कायरता है । छोड़ना भागने से नहीं होता । छोड़ना जागने से होता है । सिर्फ जागकर देखो । धीरे धीरे होश सम्हालो । और तुम पाओगे । उस होश के प्रकाश में जो व्यर्थ है । व्यर्थ दिखाई पड़ जायेगा । और जो व्यर्थ दिखाई पड़ गया । उस पर तुम मुट्ठी बांधकर न रख सकोगे । उससे आलिंगन छूट जायेगा ।
तजै अल्यंगन काटै माया । ताका बिसनु पषालै पाया ।
उसका पैर दबाने विष्णु आ जाते हैं । हिम्मत के वचन हैं । जिसने कहे होंगे । जरूर हिम्मतवर आदमी था । इसलिए गोरख को मैं नहीं छोड़ पाता । 4 में गिनती मुझे करनी पड़ती है । विष्णु से पैर दबवा दे जो लोगों के । उसकी कुछ तो हिम्मत है । कुछ तो साहस है । कोई साधारण आदमी नहीं है ।
मरौ वे जोगी मरौ । मरौ मरन है मीठा ।
तिस मरणी मरौ । जिस मरणी गोरष मरि दीठा ।
प्रेम में मरना होता है । प्रेम मृत्यु है । और जो मरता है । वही पाता है - शाश्वत को । अमृत को ।
यह न रहीम सराहिये । लेन देन की प्रीति ।
प्रानन बाजी राखिये । हार होय के जीत ।
यह न रहीम सराहिये । देन लेन की प्रीति ।
प्रानन बाजी राखिये । हार होय के जीत ।
जीतो कि हारो । प्राण बाजी पर लगाने होंगे तो ही । यह प्रेम कोई लेन देन का मामला नहीं है । यह कोई व्यवसाय नहीं है । तुम अपना पूरा दाव पर लगा देते हो । यह जुए का दाव है ।
रहिमन मैन तुरंग चढ़ि । चलिबो पावक माहि ।
प्रेम पंथ ऐसो कठिन । सब कोऊ निबहत नाहिं ।
रहीम ने कहा - रहिमन मैन तुरंग चढ़ि...। जैसे कोई मोम का घोड़ा बना ले । मोम के घोड़े पर बैठकर आग में से गुजरे ।
रहिमन मैन तुरंग चढ़ि । चलिबो पावक माहि ।
मोम के घोड़े पर बैठकर आग से निकलना जितना कठिन है । एक तो मोम का घोड़ा और फिर आग । निकल कहाँ पाओगे । निकल कैसे पाओगे ? घोड़ा तो गल ही जायेगा ।
रहिमन मैन तुरंग चढ़ि । चलिबो पावक माहि ।
प्रेम पंथ ऐसो कठिन । सब कोऊ निबहत नाहिं ।
ऐसा है प्रेम का पंथ । ऐसा कठिन है । क्योंकि जो मरने को राजी हैं । वे ही केवल प्रेम में प्रवेश कर पाते हैं ।
मरौ वे जोगी मरौ । मरौ मरन है मीठा ।
लेकिन बड़ी मिठास है इस मृत्यु में । जो ध्यान की मृत्यु मर जाये । इससे ज्यादा और अमृत पूर्ण कोई अनुभव नहीं है । क्योंकि उस मृत्यु में मर कर ही पता चलता है कि अरे, जो मरा वह मैं था ही नहीं । और जो बच गया है मरने के बाद भी । वही मैं हूं । सार सार बच रहता है । असार असार जलकर राख हो जाता है ।
मैं भी मृत्यु सिखाता हूं ।
मरौ वे जोगी मरौ । मरौ मरन है मीठा ।
तिस मरणी मरौ । जिस मरणी गोरष मरि दीठा ।
गोरख कहते हैं - मैंने मरकर उसे देखा । तुम भी मर जाओ । तुम भी मिट जाओ । सीख लो मरने की यह कला । मिटोगे तो उसे पा सकोगे । जो मिटता है । वही पाता है । इससे कम में जिसने सौदा करना चाहा । वह सिर्फ अपने को धोखा दे रहा है । ऐसी 1 अपूर्व यात्रा आज हम शुरू करते हैं । गोरख की वाणी मनुष्य जाति के इतिहास में जो थोडी सी अपूर्व वाणिया हैं । उनमें 1 है । गुनना, समझना, सूझना, बूझना, जीना । और ये सूत्र तुम्हारे भीतर गूंजते रह जायें ।
हसिबा खेलिबा धरिबा ध्यानं । अहनिसि कथिबा ब्रह्मगियान ।
हंसै षेलै न करै मन भंग । ते निहचल सदा नाथ के संग ।
मरौ वे जोगी मरौ । मरौ मरन है मीठा ।
तिस मरणी मरौ । जिस मरणी गोरष मरि दीठा ।

08 नवंबर 2012

मन से भी अधिक गतिमान किंतु अचल भी


कुछ तकनीकी कारणोंवश और ब्लागस्पाट का स्पेस कम होने से मेरे नवीनतम लेख अब यहाँ उपलब्ध होंगे । इस ब्लाग में योग बिज्ञान आधारित सिर्फ़ बैज्ञानिकता से परिपूर्ण लेख ही होंगे । अन्य विषयों का इसमें कोई स्थान नहीं होगा । क्लिक करें ।
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वेद हिन्दू सनातन धर्म का आधार स्तम्भ हैं । परन्तु दुर्भाग्य से आधुनिक एवं कलुषित शिक्षा प्रणाली के कारण आज अत्यधिक पढ़े लिखे लोग भी धार्मिक एवं परम पवित्र वेद के बारे में बहुत ही कम जानते हैं । वेद " विद " शब्द से बना है । जिसका अर्थ है - ज्ञान या जानना । अथवा - ज्ञाता या जानने वाला । सिर्फ जानने वाला । और जानकर जाना परखा ज्ञान । अनुभूत सत्य । जाँचा परखा मार्ग ही वेद है ।
और हमारे इसी वेद में संकलित है - बृह्म वाक्य । वेद मानव सभ्यता के सबसे पुराने लिखित दस्तावेज हैं ।
इनमे से वेदों की 28 000 पांडुलिपियाँ भारत में पुणे के " भंडारकर ओरिएंटल रिसर्च इंस्टीटयूट " में रखी हुई हैं । जिनमे ऋग्वेद की 30 पांडुलिपियाँ बहुत ही महत्वपूर्ण हैं । जिन्हें यूनेस्को ने विरासत सूची में शामिल किया है । यूनेस्को ने ऋग्वेद की 1800 से 1500 ई.पू. की 30 पांडुलिपियों को सांस्कृतिक धरोहरों की सूची में शामिल किया है । और यूनेस्को की 158 सूची में भारत की महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की सूची 38 है । वेद को " श्रुति " भी कहा जाता है । और श्रुति शब्द श्रु धातु से शब्द बना है । श्रु - यानी सुनना ।
कहते हैं । इसके मन्त्रों को ईश्वर ( बृह्म ) ने प्राचीन तपस्वियों को अप्रत्यक्ष रूप से सुनाया था । जब वे गहरी तपस्या में लीन थे । सर्वप्रथम ईश्वर ने 4 ऋषियों को इसका ज्ञान दिया - अग्नि । वायु । अंगिरा और आदित्य । वेद वैदिक काल की वाचिक परम्परा की अनुपम कृति हैं । जो पीढ़ी दर पीढ़ी पिछले 6-7000 ईस्वी पूर्व से चली आ रही है । विद्वानों ने संहिता । ब्राह्मण । आरण्यक और उपनिषद इन चारों के संयोग को समग्र वेद कहा है । और ये चारों भाग सम्मिलित रूप से श्रुति कहे जाते हैं । बाकी ग्रन्थ स्मृति के अंतर्गत आते हैं । संहिता इसका मन्त्र भाग है । वेद के मन्त्रों में सुंदरता भरी पड़ी है । वैदिक ऋषि जब स्वर के साथ वेद मंत्रों का पाठ करते हैं । तो चित्त प्रसन्न हो उठता है । जो भी सस्वर वेद पाठ सुनता है । वो मुग्ध हो उठता है ।
ब्राह्मण - ब्राह्मण ग्रंथों में मुख्य रूप से यज्ञों की चर्चा है । और वेदों के मंत्रों की व्याख्या है । तथा यज्ञों के विधान और विज्ञान का विस्तार से वर्णन है । मुख्य ब्राह्मण 3 हैं - 1 ऐतरेय  2  तैत्तिरीय 3 शतपथ ।
आरण्यक - संस्कृत में वन को कहते हैं - अरण्य । इसीलिए अरण्य में उत्पन्न हुए ग्रंथों का नाम पड़ गया - आरण्यक । मुख्य आरण्यक 5 हैं - 1 ऐतरेय 2 शांखायन 3 बृहदारण्यक 4 तैत्तिरीय 5 तवलकार ।
उपनिषद - उपनिषद को वेद का शीर्ष भाग कहा गया है । और यही वेदों का अंतिम सर्वश्रेष्ठ भाग होने के कारण " वेदांत " कहलाए । उपनिषद में - ईश्वर । सृष्टि और आत्मा के संबंध में गहन दार्शनिक और वैज्ञानिक वर्णन मिलता है । उपनिषदों की संख्या 1180 मानी गई है । लेकिन वर्तमान में 108 उपनिषद ही उपलब्ध हैं । जिनमें से मुख्य उपनिषद हैं - ईश । केन । कठ । प्रश्न । मुंडक । मांडूक्य । तैत्तिरीय । ऐतरेय । छांदोग्य । बृहदारण्यक । श्वेताश्वर । असंख्य वेद शाखाएँ । ब्राह्मण ग्रन्थ । आरण्यक और उपनिषद विलुप्त हो चुके हैं । और वर्तमान में ऋग्वेद के 10 । कृष्ण यजुर्वेद के 32 । सामवेद के 16 । अथर्ववेद के 31 उपनिषद उपलब्ध माने गए हैं ।
वैदिक काल - प्रोफेसर विंटरनिटज मानते हैं कि - वैदिक साहित्य का रचना काल 2000-2500 ईसा पूर्व हुआ था । दरअसल वेदों की रचना किसी 1 काल में नहीं हुई । अर्थात यह धीरे धीरे रचे गए । और अंतत: माना यह जाता है कि पहले वेद को 3 भागों में संकलित किया गया - ऋग्‍वेद । यजुर्वेद । सामवेद । जि‍से वेद त्रयी भी कहा जाता था । ऐसी मान्यता है कि वेद का वि‍भाजन भगवान राम के जन्‍म के पूर्व पुरुरवा ऋषि के समय में हुआ था । और बाद में अथर्व वेद का संकलन ऋषि‍ अथर्वा द्वारा कि‍या गया । दूसरी ओर कुछ लोगों का यह भी मानना है कि भगवान कृष्ण के समय द्वापर युग की समाप्ति के बाद महर्षि वेद व्यास ने वेद को 4 प्रभागों संपादित करके व्यवस्थित किया । इन चारों प्रभागों की शिक्षा 4 शिष्यों - पैल । वैशम्पायन । जैमिनी और सुमन्तु को दी । और उस कृम में ऋग्वेद - पैल को । यजुर्वेद - वैशम्पायन को । सामवेद - जैमिनि को । तथा अथर्ववेद - सुमन्तु को सौंपा गया । अगर इस गणना को ही मान लिया जाये । तो भी लिखित रूप में आज से 6508 वर्ष पूर्व पुराने हैं - वेद । और इस तथ्य को भी नकारा नहीं जा सकता है कि कृष्ण के आज से 5112 वर्ष पूर्व होने के पुख्ता प्रमाण ढूँढ लिए गए हैं ।
वेद के कुल 4 विभाग हैं - ऋग्वेद । यजुर्वेद । सामवेद । अथर्ववेद । 1 ऋग - स्थिति । 2 यजु - रूपांतरण । 3 साम - गति‍शील । 4 अथर्व - जड़ । ऋक को धर्म । यजुः को मोक्ष । साम को काम । अथर्व को अर्थ भी कहा जाता है । इन्ही चारों के आधार पर - धर्मशास्त्र । अर्थशास्त्र । कामशास्त्र और मोक्ष शास्त्र की रचना हुई । ऋग्वेद - ऋक अर्थात स्थिति और ज्ञान । इसमें 10 मंडल हैं । और 1 028 ऋचाएँ । ऋग्वेद की ऋचाओं में देवताओं की प्रार्थना । स्तुतियाँ । और देवलोक में उनकी स्थिति का वर्णन है । इसमें 5 शाखाएँ हैं - शाकल्प । वास्कल । अश्वलायन । शांखायन । मंडूकायन ।
यजुर्वेद - यजुर्वेद का अर्थ । यत + जु = यजु । यत का अर्थ होता है - गतिशील । तथा जु का अर्थ होता है - आकाश । इसके अलावा कर्म । श्रेष्ठतम कर्म की प्रेरणा । यजुर्वेद में 1975 मन्त्र और 40 अध्याय हैं । इस वेद में अधिकतर यज्ञ के मन्त्र हैं । यज्ञ के अलावा तत्व ज्ञान का वर्णन है । यजुर्वेद की 2 शाखाएँ हैं - कृष्ण और शुक्ल ।
सामवेद - साम अर्थात रूपांतरण और संगीत । सौम्यता और उपासना । इसमें 1875 ( 1824 ) मन्त्र हैं । ऋग्वेद की ही अधिकतर ऋचाएँ हैं । इस संहिता के सभी मन्त्र संगीतमय हैं । गेय हैं । इसमें मुख्य 3 शाखाएँ हैं । 75 ऋचाएँ हैं । और विशेषकर संगीत शास्त्र का समावेश किया गया है ।
अथर्ववेद - थर्व का अर्थ है - कंपन । और अथर्व का अर्थ - अकंपन । ज्ञान से श्रेष्ठ कर्म करते हुए जो परमात्मा की उपासना में लीन रहता है । वही अकंप बुद्धि को प्राप्त होकर मोक्ष धारण करता है । अथर्ववेद में 5987 मन्त्र और 20 कांड हैं । इसमें भी ऋग्वेद की बहुत सी ऋचाएँ हैं । इसमें रहस्यमय विद्या का वर्णन है ।
उक्त सभी में परमात्मा । प्रकृति और आत्मा का विषद वर्णन और स्तुति गान किया गया है । इसके अलावा वेदों में अपने काल के महापुरुषों की महिमा का गुणगान व उक्त काल की सामाजिक । राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थिति का वर्णन भी मिलता है ।
6 वेदांग  ( वेदों के 6 अंग ) - 1 शिक्षा 2 छन्द 3 व्याकरण 4 निरुक्त 5 ज्योतिष 6 कल्प ।
6 उपांग - 1 प्रतिपद सूत्र 2 अनुपद 3 छन्दोभाषा ( प्रातिशाख्य ) 4 धर्म शास्त्र 5 न्याय 6  वैशेषिक ।
6 उपांग ग्रन्थ उपलब्ध हैं । इसे ही षड दर्शन कहते हैं । जो इस तरह हैं - सांख्य । योग । न्याय । वैशेषिक । मीमांसा । वेदांत ।
वेदों के उप वेद - ऋग्वेद का आयुर्वेद । यजुर्वेद का धनुर्वेद । सामवेद का गंधर्व वेद । अथर्ववेद का स्थापत्य वेद । ये क्रमशः चारों वेदों के उप वेद बतलाए गए हैं ।
आधुनिक विभाजन - आधुनिक विचारधारा के अनुसार 4 वेदों का विभाजन इस प्रकार किया गया - 1  याज्ञिक 2 प्रायोगिक 3 साहित्यिक । वेदों का सार है - उपनिषद । और उपनिषदों का सार - गीता को माना है । इस कृम से वेद । उपनिषद और गीता ही धर्म ग्रंथ हैं । दूसरा अन्य कोई नहीं । स्मृतियों में वेद वाक्यों को विस्तृत समझाया गया है । जबकि वाल्मिकी रामायण और महाभारत को इतिहास तथा पुराणों को पुरातन इतिहास का ग्रंथ माना है । विद्वानों ने भी वेद । उपनिषद और गीता के पाठ को ही उचित बताया है । ऋषि मुनियों को दृष्टा कहा गया है । और वेदों को ईश्वर वाक्य । वेद ऋषियों के मन या विचार की उपज नहीं है । और ऋषियों ने वह लिखा । या कहा । जैसा कि उन्होंने पूर्ण जागृत अवस्था में देखा । सुना और परखा । मनु स्मृति में श्लोक II.6 के माध्यम से कहा गया है कि - वेद ही सर्वोच्च और प्रथम प्राधिकृत है । और वेद किसी भी प्रकार के - ऊँच नीच । जात पात । महिला पुरुष आदि के भेद को नहीं मानते । ऋग्वेद की ऋचाओं में लगभग 414 ऋषियों के नाम मिलते हैं । जिनमें से लगभग 30 नाम महिला ऋषियों के हैं ।

जन्म के आधार पर जाति का विरोध ऋग्वेद के पुरुष सुक्त X.90.12 व श्रीमद भगवत गीता के श्लोक IV.13  XVIII.41 में मिलता है ।
श्रुतिस्मृतिपुराणानां विरोधो यत्र दृश्यते । तत्र श्रौतं प्रमाणन्तु तयोद्वैधे स्मृति‌र्त्वरा ।
अर्थात - जहाँ कहीं भी वेदों और दूसरे ग्रंथों में विरोध दिखता हो । वहाँ वेद की बात की मान्य होगी । वेद व्यास । प्रकाश से अधिक गतिशील तत्व अभी खोजा नहीं गया है । और न ही मन की गति को मापा गया है । परन्तु हमारे ऋषि मुनियों ने मन से भी अधिक गतिमान । किंतु अविचल ( अचल ) का साक्षात्कार किया । और उसे - वेद वाक्य या " बृह्म वाक्य " बना दिया ।
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उड़ते विमान में दी धमकी - इस्लाम कबूल करो । वरना ?
http://navbharattimes.indiatimes.com/passenger-triggers-panic-says-accept-islam-or-i-will-blow-up--/articleshow/17132887.cms.

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