19 जून 2016

चमत्कारी बाबा

महाभारत का समय ‘सिर्फ़’ 5-6 हजार वर्ष पुराना है । इसमें इसी के अनुसार एक घटना घटती है । महर्षि व्यास द्वारा बांझ गांधारी को उसकी सेवा और पतिव्रत भाव से प्रसन्न होकर 100 पुत्रों का आशीर्वाद देना । 
बांझ मैंने इसलिये लिखा, क्योंकि धृतराष्ट्र और सुघङा दासी के संयोग से युयुत्स का जन्म हुआ । अतः धृतराष्ट्र निर्बीज था । ऐसा नहीं कह सकते ।
फ़िर महाभारत के ही अनुसार धृतराष्ट्र और गांधारी के संयोग से जो गर्भ ठहरा । वह 9-10-11-12 महीने तक पैदा ही नहीं हुआ ।
तब गांधारी बोली - यह क्या हो रहा है । यह बच्चा जीवित भी है या नहीं ? यह इंसान है या कोई पशु ?
फ़िर हताशा में उसने अपने पेट पर मुक्के मारे । कुछ नहीं हुआ । तब उसने अपने सेवक को छड़ी से पेट पर प्रहार करने को कहा । इससे उसका गर्भपात हो गया और मांस का काला सा लोथड़ा बाहर आया । लेकिन वह इंसानी मांस के टुकड़े जैसा नहीं था । वह कोई बुरी और अशुभ जैसी चीज थी । लोग उसे देखते ही डर गए ।
व्यास को बुलाया गया । उन्होंने मांस के 101 टुकङे करके घङों में तेल और जङी बूटी के साथ तहखाने में एक साल के लिये रख दिया ।
इसीलिए कहा जाता है, गांधारी दो सालों तक गर्भवती रही थी । एक साल गर्भ उसकी कोख में और दूसरे साल तहखाने में रहा था ।
एक साल बाद घङे एक एक कर फ़ूटे । और उनमें 100 पुत्र और 1 पुत्री निकले ।
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अब ध्यान दें, व्यास सिर्फ़ महर्षि थे । और ये समय भी सिर्फ़ 5-6 हजार वर्ष पहले का है । यदि ज्ञान की उच्चता, निम्नता आदि शक्तियों पर बात की जाये । तो महर्षि कोई ज्यादा उच्च स्थिति नही है । ध्यान रहे । व्यास पुत्र शुकदेव ही उनसे अधिक ज्ञान युक्त माने गये ।
यानी कुण्डलिनी का गुरु और सुरति शब्द योग का सदगुरु इनसे कितना उच्च है ? ये सिर्फ़ कल्पना ही की जा सकती है ।
- ये सिर्फ़ मैंने एक ही उदाहरण दिया है । वरना महाभारत में दौने से द्रोणाचार्य, गंगा से 8 वसु ( ये अलग है, बस नदी का स्त्री बनने से यहाँ उल्लेख है ) और कई अन्य चरित्र हैं । जो टेस्ट टयूब बेबी की भांति अर्थात बिना गर्भ के हुये ।
गोरखनाथ अवश्य मछन्दरनाथ की भभूति से घूरे में 12 वर्ष के पैदा हुये थे । क्योंकि भभूति 12 वर्ष तक घूरे में पङी रही ।
महाभारत काल में श्रीकृष्ण द्वारा तो अलौकिक विज्ञान का ऐसा प्रदर्शन तो चमत्कार की हद तक है ।
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अब मेरा प्रश्न है ( फ़िर से ध्यान दें - सिर्फ़ 5-6 हजार वर्ष पहले यह सब हुआ ) निकटतम समय में ( 500 वर्ष पहले ) कबीर से बङा कोई स्वयंसिद्ध प्रत्यक्ष में अब तक नहीं हुआ । और कबीर के द्वारा भी सिर्फ़ मुर्दे जिलाने की ही बात आती है । जो कितनी प्रमाणिक और सत्य है ? ऐसा कोई दावा नहीं हो सकता ।
जबकि आजकल के श्री श्री 1008 कैडर के कम से कम 10 000 सतगुरु ? सीधे हाटलाइन पर परमात्मा यानी सुप्रीमो से वार्ता और सम्बन्ध का दावा करते हैं । शिष्य की स्थिति अनुसार सतलोक में प्लाट या फ़्लैट दिलाते हैं । 
और परमात्मा से ऊपर तो कोई है ही नहीं ।
या है ?
बाजी झूंठ बाजीगर सांचा, साधुन की मति ऐसी ।
कहहिं कबीर जिन जैसी समझी, तिन की मति भयी तैसी । 
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तो ऐसा कोई विज्ञान या उसकी झलक भी इन गुरुज या सदगुरुज ने कभी दिखाई ? मेरा ये कथन भक्क सफ़ेद वस्त्रधारी लाइक बगुला गुरु, सदगुरुओं के लिये है । क्योंकि गेरुआ वालों से ये ज्यादा लम्बी लम्बी डींगे हांकते हैं । और सीधे भले ही नहीं कहते । पर जम्हाई, डकार भी परमात्मा जैसी स्टायल में सोच सोचकर मारते हैं ।
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