21 जून 2016

संवत्सर गणना

संवत्सर ‘वर्ष’ के लिए प्रयुक्त होने वाला संस्कृत उदभूत हिन्दी शब्द है । कुल 60 संवत्सर होते हैं । जिनके पृथक पृथक नाम हैं । जब 60 संवत्सरों का चक्र पूरा होता है । तब पुनः पहले संवत्सर से आरंभ होता है । चूँकि ये संवत्सर बृहस्पति की सूर्य की परिधि में गति के आधार पर बने हैं । अतः कभी कभी चक्र में से 1 संवत्सर कम भी हो जाया करता है । क्योंकि बृहस्पति का परिधि काल 12 महीनों से जरा कम है । ये 60 संवत्सर 20-20 के 3 समूहों में बंटे हैं । पहले 20 ‘प्रभव से अव्यय तक’ ब्रह्मा के अधीन हैं । अगले बीस 20 ‘सर्वजीत से से पराभव तक’ विष्णु के अधीन हैं । और अन्तिम 20 ‘प्ल्वंग से क्षय तक’ शिव के अधीन हैं । 

Samvatsara ( संवत्सर ) is a Sanskrit term for ‘year’ In the Hindu calendar, there are 60 Samvatsaras, each of which has a name Once all 60 samvatsaras are over, the cycle starts over again On occasion, one will be skipped, as the count is based on the zodiac position of Jupiter, whose period around the Sun is slightly less than 12 years
( the full cycle of 60 covers five Jovian years )
The sixty Samvatsaras are divided into 3 groups of 20 Samvatsaras each The first 20 from Prabhava to Vyaya are assigned to Brahma The next 20 from Sarvajit to Parabhava to Vishnu and the last 20 to Shiva


                                       ये 1 से 20 तक ‘प्रभव से अव्यय तक’ ब्रह्मा के अधीन हैं । 


                                   ये 21 से 40 तक ‘सर्वजीत से से पराभव तक’ विष्णु के अधीन हैं । 
                                         ये 41 से 60 तक ‘प्ल्वंग से क्षय तक’ शिव के अधीन हैं । 

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