10 नवंबर 2013

ओम बन्ना का रहस्य

गुरूजी सादर प्रणाम ! मेरे मन में एक प्रश्न था । वो ये है के हमारे यहाँ राजस्थान में ओम बन्ना का काफी बोलबाला हो रहा है । उनके पीछे की कहानी मैंने दोस्तों से सुनी भी है । और इंटरनेट के जरिये पढ़ी भी है । वो कहानी मैं भेज रहा हूँ । मैं सिर्फ ये जानना चाहता हूँ कि - ये क्या सच हो सकता है क्या ? या फिर यूँ ही लोगो का अन्धविश्वास है । और साथ ही साथ ये भी जानना चाहता हूँ कि इस कहानी या घटना के बारे में आपकी क्या राय है । 
स्टार one पर एक एपिसोड भी इनके बारे में आया था । मैं उसका लिंक यहाँ दे रहा हूँ । साथ ही उनकी कुछ फ़ोटो भी आपेको मेल कर रहा हूँ !
उनके बारे में जो पढ़ा । या सुना है । वो ये है कि जोधपुर अहमदाबाद राष्ट्रीय राजमार्ग पर जोधपुर से पाली जाते वक्त पाली से लगभग 20 km पहले रोहिट थाने का " दुर्घटना संभावित " क्षेत्र का बोर्ड लगा दिखता है । और उससे कुछ दूर जाते ही सड़क के किनारे जंगल में लगभग 30 से 40 प्रसाद व पूजा अर्चना के सामान से सजी दुकाने दिखाई देती हैं । और साथ ही नजर आता है - भीड़ से घिरा एक चबूतरा । जिस पर एक बड़ी सी फोटो लगी । और हर वक्त जलती ज्योति । और चबूतरे के पास ही नजर आती है - एक फूल मालाओं से लदी बुलेट मोटर साईकिल । यह वही स्थान है । और वही मोटर साइकिल । जिसका मैं परिचय कराने जा रहा हूँ ।
यह " ओम बना " का स्थान है । ओम बना ( ओम सिंह राठौड़ ) पाली शहर के पास ही स्थित चोटिला गांव के 

ठाकुर जोग सिंह जी राठौड़ के पुत्र थे । जिनका इसी स्थान पर अपनी इसी बुलेट मोटर साईकिल पर जाते हुए 1988 में एक दुर्घटना में निधन हो गया था । स्थानीय लोगों के अनुसार इस स्थान पर हर रोज कोई न कोई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाया करता था । जिस पेड के पास ओम सिंह राठौड़ की दुर्घटना घटी । उसी जगह पता नहीं । कैसे कई वाहन दुर्घटना का शिकार हो जाते । यह रहस्य ही बना रहता था । कई लोग यहाँ दुर्घटना के शिकार बन अपनी जान गँवा चुके थे । ओम सिंह राठोड की दुर्घटना में मृत्यु के बाद पुलिस ने अपनी कार्यवाही के तहत उनकी इस मोटर साईकिल को थाने लाकर बंद कर दिया । लेकिन दूसरे दिन सुबह ही थाने से मोटर साइकिल गायब देखकर पुलिस कर्मी हैरान थे । आखिर तलाश करने पर मोटर साईकिल वही दुर्घटना स्थल पर ही पाई गई । पुलिस कर्मी दुबारा मोटर साईकिल थाने लाये । लेकिन हर बार सुबह मोटर साईकिल थाने से रात के समय गायब हो दुर्घटना स्थल पर ही अपने आप पहुँच जाती । आखिर पुलिस कर्मियों व ओम सिंह के पिता ने ओम सिंह की मृत आत्मा की यही इच्छा समझ उस मोटर साईकिल को उसी पेड के पास छाया बनाकर रख दिया । इस चमत्कार के बाद रात्रि में वाहन चालको को ओम सिंह अक्सर वाहनों को दुर्घटना से बचाने के उपाय करते व चालकों को रात्रि में दुर्घटना से सावधान करते दिखाई देने लगे । वे उस दुर्घटना संभावित जगह तक पहुँचने वाले वाहन को जबरदस्ती रोक देते या धीरे कर देते । ताकि उनकी तरह कोई और वाहन चालक असामयिक मौत का शिकार न बने । और उसके बाद आज तक वहाँ दुबारा कोई दूसरी दुर्घटना नहीं हुयी ।
ओम सिंह राठौड़ के मरने के बाद भी उनकी आत्मा द्वारा इस तरह का नेक काम करते देखे जाने पर वाहन चालकों व स्थानीय लोगों में उनके प्रति श्रद्धा बढ़ती गयी । और इसी श्रद्धा का नतीजा है कि ओम बना के इस स्थान पर हर वक्त उनकी पूजा अर्चना करने वालों की भीड़ लगी रहती है । उस राजमार्ग से गुजरने वाला हर वाहन यहाँ रुककर ओम बना को नमन कर ही आगे बढ़ता है । और दूर दूर से लोग उनके स्थान पर आकर उनमे अपनी श्रद्धा प्रकट कर उनसे व उनकी मोटर साईकिल से मन्नत मांगते हैं । कौशलेंद्र नागौरिया
Om Banna पर star one पर प्रसारित होने वाले एक serial के episod का link
http://www.youtube.com/watch?v=YGgE8o8KPfw
उत्तर शीघ ही

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