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24 जनवरी 2012

सहज योग फ़ुल आटोमैटिक सिस्टम है

जय गुरुदेव । 29  प्रश्न - श्री स्वामी जी महाराज ! मन को कैसे स्थिर किया जाय ?
उत्तर - मन को स्थिर करने के लिये मन को प्रतिदिन श्री स्वामी जी महाराज के नाम के भजन । सुमिरन । सेवा । पूजा । आरती । दर्शन । ध्यान में नियमित नियमानुसार लगाना चाहिये । प्रतिदिन ध्यान करना चाहिये । ध्यान करने का सुन्दर समय है । सुबह का बृह्म मूहूर्त । बृह्म मूहूर्त में उठकर निश्चित रूप से ध्यान । सुमिरन करना चाहिये । ऐसे नियम के साथ थोडा शास्त्र पाठ । यानी अपने श्री सदगुरू देव जी महाराज की लिखी पुस्तकों का अध्ययन करने से मन सहज ही एकाग्र हो जाता है । ध्यान के बाद कम से कम आधा घण्टा गुरू भाव में चुपचाप बैठना जरूरी है । ध्यान के तुरन्त बाद मन को किसी सांसारिक कार्य में नहीं लगाना चाहिये । उसमें बहुत हानि होती है ।
जय गुरुदेव !
1 राजीव भैया मैं तो ध्यान के बाद तुरन्त उठ जाता हूँ । क्योंकि सुबह इतना टाइम नहीं होता है । तो क्या इससे हानि होगी ?
ans - जैसा कि मैंने इस प्रश्नोत्तरी के ही एक लेख के अन्त में लिखा - ये प्रश्न उत्तर हमारे यहाँ के नहीं हैं । हालांकि किसी तरह इंसान इन नियमों पर चल सके । तो निसंदेह ये नियम किसी इंसान को अच्छा साधक और उत्तम भक्त बना सकते हैं । लेकिन अगर गौर से सोचें । तो इन नियमों का पालन करना आज के समय में शायद किसी के लिये संभव नहीं हैं । सही और भाव भक्ति में तो पूरे भाव से लिया गया

एक बार का नाम भी अत्यन्त फ़लदाई है - स्वांसा खाली जात है तीन लोक का मोल । और सही भक्ति में कभी भी किसी प्रकार की हानि नहीं होती । जो चीटीं की भी पग ध्वनि सुनता है । उसे क्या इतना भी मालूम न होगा कि आपके पास बैठने का निश्चित समय है । इसलिये वह आपको हर तरह सहयोग ही करता है । न कि अत्याचार । परमात्मा दयालु है । आतंकवादी नहीं । बस उसका नियम बेहद सख्त है । दूसरे मैंने कई बार कहा - सहज योग फ़ुल आटोमैटिक है । एक बार सच्चे गुरु से नाम मिल जाने पर ये पूरी व्यवस्था अपने हाथ में ले लेता है । ये आपको खुद ध्यान पर बैठा भी देगा । उठा देगा । आपकी दीक्षा को कुछ महीने होने को आये । आपने महसूस किया होगा । ये ज्ञान आपको तेजी से बदलकर सार्थकता की ओर ले जा रहा है । और मुझसे जुङने के बाद आपके अन्दर एक व्यापक बदलाव हो भी चुका है । अगर आपने अभी तक इस बिन्दु पर ध्यान नहीं दिया । तो अब देकर देखना । जो लोग बिना दीक्षा के भी मुझसे जुङे हैं । उनके अन्दर भी एक क्रान्तिकारी परिवर्तन आ चुका है । अगर उन्होंने कभी इस तरफ़ ध्यान नहीं दिया । तो अब अपनी स्थिति का आंकलन करें । निश्चय ही उनमें भी आमूलचूल बदलाव हो चुका है । सहज योग में सिर्फ़ एक बात महत्वपूर्ण है । परमात्मा के प्रति गहरा प्रेम भाव ।  वह सिर्फ़ भाव का भूखा है । इसे ही बनाये रखें । बहुत जल्द लाभ होने लगेगा ।
2 मेरे पास श्री स्वामी जी महाराज की आरती नहीं है । कृपया आप मुझे मेल कर दे ।


ans - आरती वाला फ़ोटो इसी लेख के साथ प्रकाशित कर रहा हूँ । अलग से आरती भी प्रकाशित करूँगा । पर ये आवश्यक नहीं है कि इसको आप जबरन नियम बनायें । हाँ लेकिन शाम को नियमित आरती करने से ध्यान और सांसारिक स्थितियों में काफ़ी लाभ होगा । बस ये ध्यान रखें । गुरु की पूजा आलमारी देवी देवताओं के साथ नहीं होनी चाहिये । यानी एक ही आलमारी में रख दो । गुरु का स्थान बहुत ऊँचा है । एक ही कमरे में । या एक ही आलमारी के ऊपर नीचे खानों में ऐसी व्यवस्था करने पर विशेष ध्यान रखें कि गुरु का चित्र इनसे ऊपर हो । वैसे तो गुरु को प्रणाम या सुमरन करने से सभी उसमें आ जाते हैं । क्योंकि गुरु ज्ञान स्वरूप होते हैं । अतः फ़िर अन्य की पूजा आरती आदि की आवश्यकता ही नहीं । फ़िर भी जन्म जन्म के संस्कारवश लोग इसको एकदम छोङते हुये घबराते हैं । और हम किसी से छोङने को कहते भी नहीं । जब तक उनमें आंतरिक रूप से खुद परिवर्तन न हो । इसलिये आप किसी देवता भगवान आदि की पूजा आरती करते भी हैं । तो उसे बाद में करें । तभी सही लाभ होगा । वरना ये ठीक इसी तरह होगा । रेल के डिब्बों के सबसे पीछे इंजन डिब्बों की तरफ़ ही मुँह करके जोङा जाये । तो फ़िर रेल कैसे चलेगी । ध्यान के वक्त भी आपको पूर्व में भाव प्रार्थना 


आदि करने की आदत है । तो उस वक्त सिर्फ़ गुरु से ही करें । अगर देवी भी मनाई । देवा भी मनाया । भगवान भी मनाया ।  गुरु भी मनाया । तो फ़िर कुछ हाथ नहीं आयेगा । एकहि साधे सब सधे । सब साधे सब जाहि ।
3 मैं अभी नया साधक हूँ । मुझे ये बताये कि दिन में काम करते हुए भजन कैसे करें ।
ans - ये प्रश्न आपका तभी तक रहने वाला है । जब तक ध्यान में सही प्रविष्टि और भजन पर पकङ नहीं हो जाती । एक बार भजन आपको पकङ लेगा । तो मजाक नहीं कर रहा । वह लेट्रीन में भी आपसे नाम सुमरन करायेगा । ऊपर ही मैंने कहा - सहज योग फ़ुल आटोमैटिक सिस्टम है । बस साधक स्थिति अनुसार कुछ समय अवश्य लग जाता है । फ़िर भी आप ये जरूरी नहीं कि हर समय भजन की टेंशन पाल लें । बस फ़ुरसत के समय ठीक उसी तरह सुस्ताये । जैसे कठिन परिश्रम के बाद मजदूर  सुस्ताता है । और गौर करें । उस समय उसका ध्यान कहाँ जाता है ? वह तेजी से चलती सांसों को ठहराव देता हुआ फ़िर अपने आपको रीचार्ज करता है । बस यही भजन है । फ़र्क इतना है । वह अनजाने में करता है । और सतनाम दीक्षा  प्राप्त न होने से अधिकारी नहीं है । आप इसको जानते हुये करोगे । और इसके अधिकारी हो । इसलिये आपकी  एक एक सांस ( जिस पर आपने ध्यान दिया ) खाते में लिखी जायेगी । जिसका सुमरन फ़ल निश्चय ही आपको प्राप्त होगा । वैसे काम करते हुये भजन करने के सन्तमत में कुछ प्रसिद्ध

उदाहरण हैं । जैसे - पनिहारिने सर पर मटकी रखे । बिना उसे पकङे आराम से बातें भी करती हुयी चलती है । और मटकी को ध्यान द्वारा संभाले रहती हैं । स्त्रियों द्वारा ओखली में धान आदि कूटना । और बातचीत करना । ड्राइविंग करते वक्त गाने सुनना । और ड्राइविंग का भी ध्यान रखना आदि बहुत से उदाहरण हो सकते हैं । जिनमें अभ्यस्त हो जाने पर इंसान खतरनाक स्थिति में भी मौज से बातचीत और वह काम भी करता रहता है । श्रीकृष्ण तो यहाँ तक कहते हैं - अर्जुन युद्ध कर । और निरन्तर भजन कर ।
4 श्री स्वामी जी महाराज कहते है कि - अपने परिवार की अच्छी व्यवस्था करें । उनके अच्छे खाने पीने व अच्छी पढाई की व्यवस्था करें । तो क्या इन सबको ईश्वर से चाहना । या कामना करना 


गलत है  । यदि वो अभी इतना करने के योग्य नहीं है । क्योंकि परिवार की जिम्मेदारी भी तो निभानी है ।
ans - अभी की स्थिति में आप सब ईश्वर के लिये बच्चे के समान हो । इसलिये ईश्वर से कोई भी कामना करना गलत नहीं है । लेकिन ध्यान रहे । ईश्वर के बहुत सारे बच्चे हैं । इसलिये देते समय वह कर्म सिद्धांत पर ही देता है । जो भी जिस लायक है । वह उसे निश्चित देता है । लेकिन बहुत से आलसीपने में सिर्फ़ ईश्वर से बिना कुछ करे । माँगते हैं । उन्हें वह ठेंगा दिखाता है । इसलिये इस मामले में सत्ता का नियम बहुत सख्त है । जो भी प्राप्त होगा । कर्मफ़ल या भक्तिफ़ल के आधार पर ही प्राप्त होगा । इन दो के अतिरिक्त तीसरा कोई उपाय है ही नहीं । मैं आपको झूठी तसल्ली देने के लिये झूठ नहीं बोल सकता । वह एक बार को आपकी वाकई मजबूर स्थिति हो जाने पर लोन के समान सहायता अवश्य करता है । मगर मय ब्याज के वसूल भी कर लेता है । अटल सत्य यही है कि - मुफ़्त में नान रिफ़ंडेबल वह 1 रुपया भी किसी को नहीं देता । चाहे चिल्ला चिल्लाकर मर क्यों न जाओ । उसका ला एण्ड आर्डर बङा सख्त है भैया । इस दृष्टिकोण से ? 1 नम्बर का कंजूस भी है । दस साल तो मुझे हो गये नौकरी करते । 1 भी सैलरी नहीं मिली । कहा 1 टाइम पास बीबी ही दे दो । तो उत्तर मिला - अगले जन्म में ।


5 कृपया मुझे ये भी बताये कि मेरा ध्यान सही राह पर चल रहा है । या नहीं ? मैं ध्यान के प्रारंभ में आँखों व कानों को अपनी उंगलियों व अंगूठे से बंद करता हूँ । तो मुझे सर की नसों की सनसनाहट की अलावा एक ध्वनि सुनाई देती है । वो क्या है ? आप तो ये आसानी से जान सकते है । भैया मेरे ज्यादातर प्रश्न व्यक्तिगत होते हैं । फिर भी समय निकाल कर जवाब देने की कृपा करें । मेरे और भी प्रश्न हैं । जो बाद में मेल करूँगा । गुरूजी की कृपा से मुझे अपने मन व वासना पर काफी नियंत्रण लगने लगा है । विष्णु ।

ans - जैसा कि मैंने ऊपर ही कहा । सहज योग फ़ुल आटोमैटिक होता है । यह आपको गलत राह चलने ही नहीं देगा । यह ठीक इसी कम्प्यूटर की तरह होता है । जहाँ एक अक्षर भी गलत लिख जाने पर वह तुरन्त सन्देश देता है कि - यह गलत है । सही करिये । इसलिये आप सहज योग को सहजता से यानी आराम आराम से बेताल्लुक मौज में करिये । यह खुद आपको बहुत से उत्तर देगा । बस कुछ समय लगेगा । और आपको सुमरन करते रहना होगा । अच्छी लगन भाव भक्ति से सुमरन करने पर विभिन्न आकाशवाणियाँ ( ध्वनियाँ ) पहले कुछ क्षीण और अस्पष्ट सी सुनाई देती हैं । जो भक्ति ध्यान गहराने के साथ अधिकाधिक स्पष्ट होती जाती है । नसों की सनसनाहट कालचक्र के रथ की ध्वनि है । और विभिन्न ध्वनियाँ उसी अक्षर ( झींगुर जैसी ध्वनि ) से प्रकट हो रही हैं । प्रारम्भ में यह परिणाम भी उत्साहजनक हैं । ध्वनि का प्रकट होना अच्छे संकेत देता है । आपके प्रश्न कैसे भी हों । मेरे लिये महत्वपूर्ण हैं । अतः आप कभी संकोच न करें ।

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सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326