आत्मा परमात्मा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
आत्मा परमात्मा लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

25 जून 2011

आत्मा मुक्त रूप में बहुत शक्तिशाली होती है

आत्मा के मुख्य रूप से पाँच प्रकार होते हैं । परमात्मा । आत्मा । शिव आत्मा । बृह्म आत्मा और जीव आत्मा
परमात्मा के विषय में प्रायः सभी अपने अपने स्तर से जानते ही है । सबकी मालिक और साहिब के नाम से पुकारी जाने वाली ये शक्ति सर्वोपरि ही है । और सबसे परे है । इसी की सत्ता सर्वत्र है । और दृश्य अदृश्य सभी कुछ इसी से है । लेकिन कमाल की बात है । परमात्मा को किसी से कुछ भी लेना देना नहीं है ।
मैं जिस निर्वाणी ध्वनि रूपी और शरीर के अंतर आकाश में स्वतः गूँजने वाले नाम का जिक्र करता हूँ । वह हँस दीक्षा के समय उल्टे रूप में दिया जाता है । तुलसीदास जी ने इसी के लिये कहा है -
उल्टा नाम जपा जग जाना । वाल्मीकि भये बृह्म समाना ।
ये उल्टा नाम सामान्य स्थिति में प्रत्येक 4 सेकेंड में 1 बार हमारे शरीर में उतरती चेतनधारा में स्वतः आ जा रहा है इस तरह 24 घंटे में इसकी गिनती 21600 बार हो जाती है ।
भाव पूर्ण ढंग से सुमिरन करते करते जब ये नाम सूक्ष्मता को प्राप्त होकर बृह्म में ऊपर उठता है । तब ये उल्टे से सीधा हो जाता है । और आत्मा मुक्त आकाश में अति आनन्द का अनुभव और विभिन्न रोमांचक स्थलों की सैर करती हुयी हँसो..हँसो कहती हुयी यात्रा करती है । और ज्यों ज्यों ऊपर उठती जाती है । ये सूक्ष्म होती जाती है ।

सुमिरन द्वारा साधक इस नाम को जितना सूक्ष्म कर लेता है । उतना ही गहरा ध्यान समाधि को प्राप्त करता है । उतने ही विलक्षण अनुभव उसे होते हैं । और सबसे अंत में सार शब्द पर पहुँचकर जो वास्तविक नाम है । ये परमात्मा का साक्षात्कार करती है । जिसके लिये कबीर साहब ने कहा है - आङा शब्द कबीर का । डारे पाट उखाङ ।
मतलब ये जन्म मरण रूपी जीवन चक्की का पाट ही उखाङ कर फ़ेंक देता है । इस तरह ये हँस दीक्षा से परमात्मा तक का सफ़र मैंने संक्षेप में बताया ।
इसके बाद सिर्फ़ आत्मा मुक्त रूप में बहुत शक्तिशाली होती है । क्योंकि इसमें कोई भी भाव नहीं जुङा है । और ये हर तरह से निर्विकार है । इसकी अखिल सृष्टि में सर्वत्र गति होती है । ये परमात्मा से कभी भी मिल सकती है । खास बात यह होती है कि इसमें देव बृह्म जीव शिव आदि कोई भी भाव नहीं जुङा होता ।
शिव आत्मा - अर्थात सबके अन्दर जो चेतन शक्ति कार्यरत है । और सदा ही कल्याणकारी शक्ति है । शिव शक्ति है । और जो सबका ही आत्मा भी है । वही  शिव आत्मा है । इसी आत्मा के योग को शिव योग भी बोला जाता है । इससे ठीक ऊपर सार शब्द है । और उससे ऊपर परमात्मा ।
बृह्म आत्मा को जानना कोई अधिक कठिन नहीं है । बृह्म सत्ता के अंतर्गत आने वाली आत्माओं को बृह्म आत्मा कहते हैं ।
फ़िर देव आत्मा महा आत्मा सिद्ध आत्मा आदि बहुत प्रकार हो जाते हैं । जो सब बृह्म के अंतर्गत ही आते हैं ।
जीव आत्मा के बारे में आप सभी जानते ही हो । जीव या जीवन या किसी भाव में जीने की इच्छा भाव जुङने से आत्मा जीव आत्मा हो जाती है ।

आत्मा के बारे में सबसे बङा रहस्य यह है । जो आज मैं पहली बार बता रहा हूँ कि डर उत्पन्न होने से इसमें मैं या जीव भाव पैदा होता है । डर भाव उत्पन्न होने से इसमें एक संकुचन पैदा होता है । जिससे ये सिकुङती है । और निडरता निर्भयता से ये फ़ैलती है । विस्तार लेती है ।
इच्छा पैदा होते ही इसमें आवरण बनने लगते हैं । और तम भाव पैदा होने से इसका प्रकाश और शक्ति इच्छाओं से बने आवरण के अनुसार न्यूनतम हो जाती है । आत्मा परमात्मा को जानने का सरल और सहज उपाय निर्वाणी नाम ही है ।
कुछ लोग ये कहते हैं कि ये बात सच है । इसको हम किस तरह मानें ?
इसका उत्तर यही है भाई ! कोई आपके शरीर के अन्दर और सभी मनुष्यों के शरीर के अन्दर ध्वनि रूपी नाम को किसी जादू से तो प्रकट नहीं कर सकता । चाहे वह हिन्दू मुसलमान सिख ईसाई यहूदी पारसी कोई क्यों न हो ।
सदगुरु से ही यह नाम मिला है । इसकी पहचान क्या है ?
यह नाम किसी न किसी रूप में विभिन्न अनुकूल परिवर्तन आपके जीवन में लाने लगता है । और ध्यान सुमिरन के समय आपको दिव्य अनुभव होने लगते हैं । लेकिन यहाँ एक बात स्पष्ट करना जरूरी है कि ये सत्यनाम साधक का ( भव ) रोग दूर करता है । अतः संस्कार के अनुसार सुख दुख दोनों के ही अनुभव होते हैं । क्योंकि साधक के संस्कार जलते है । अतः जिस प्रकार इलाज के दौरान कभी कभी कष्ट भी होता है । उसी प्रकार संस्कार के अनुसार आपको सुमरन से भी ऐसा ही अनुभव हो सकता है ।
लेकिन कुछ समय के सुमरन के उपरांत नाम आपको सुखी करने लगता है ।
निज अनुभव तोहि कहूँ खगेसा । बिनु हरि भजन न मिटे कलेशा
उमा कहहुँ मैं अनुभव अपना । सत हरि नाम जगत सब सपना
राम एक तापस तिय तारी । नाम कोटि खल जीव उद्धारी ।

मेरे बारे में

मेरी फ़ोटो
सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326