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06 जुलाई 2012

मुझे नींद न आये तेरी याद सताये

श्री सदगुरु महाराज की जय ! कुछ पंक्तियाँ मन में सदगुरु प्रेम वश उमड़ रही थी । तो सोचा कि उन्हें एक कविता रूप दिया जाय ।
केहि बिधि समझाओं एह मन्वा । दिन भर नाच नचावत मोरे तन्वा ।
हठी बहुत एह बाज न आवे । पिय धुन मोहे आन न देवे ।
जब बैठू तोरे दरश की आशा । तब इह बोले अपनी ही भाषा ।
एक जुगत एह खुद ही सुझाये । इह मन कि दो जूति बनाय ।
अपने पिया कि चरनन पहिना्य ।
जबसे एह उपाय हम कीन्हा । सतगुरु आन ह्रदय मह चिन्हा ।
एहि बिधि तुम भी जनो सखि रि । शौह मिलन की एहि रिति रि ।
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राजीव जी ! कोई महाराज जी के वचनों का वीडियो upload करें plz...और आजकल tv में God Particle ( अंश ) विषय का बहुत प्रचार हो रहा है । क्या ये आध्यात्म से जुङा कोई रहस्य है ?
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वैसे आगरा में 2 july 2012 से ही मौसम का मिजाज बदलने लगा था । तापमान में काफ़ी गिरावट आयी थी । फ़िर 6 july 2012 दोपहर 3 बजे तक मौसम कुछ कुछ up down होता रहा । लेकिन कल दोपहर बाद 4 बजे जब मैं लैपटाप के सामने बैठा हुआ फ़ोन पर बात कर रहा था । अचानक भयंकर धमाका हुआ । और ठीक बिजली गङगङाने जैसी आवाज हुयी । इसके साथ ही मेरे दाहिने साइड में खिङकी से बाहर ढेरों बिधुत चिंगारियां सफ़ेद चमकीले फ़ूलों सी हवा में उङने लगी । फ़िर एकदम सूखी जमीन से धूल का गुबार उठा । और चारों तरफ़ धुँआ धुँआ सा हो गया । लेकिन क्योंकि कल दोपहर से ही बादल छाये हुये थे । मैंने यकायक समझा कि तेज बरसात शुरू होने वाली है । इसलिये अपनी लापरवाही के चलते मैंने उधर नहीं देखा ( और आँखों की साइड से ही 

झलक मात्र देखी । दूसरे मेरा ध्यान फ़ोन पर होती महत्वपूर्ण वार्ता पर भी था ) इसके साथ ही आसमान से बूँदे गिरने लगी । और यकायक ठंडी तेज हवा चलने लगी ।
ये घटना अजब संयोग से मुझे जिक्र करने लायक लगी । दरअसल ये आसमानी बिजली की कङकङाहट नहीं थी । बल्कि मेरी खिङकी से दिखते 150 मीटर दूर हाईटेंशन पोल में कोई fault हुआ था । इसके साथ ही बिजली चली गयी थी । पर इनवर्टर की वजह से मुझे पता नहीं लगा । दरअसल मेरे अफ़सोस की वजह ये है कि यदि मैं फ़ोन पर बात नहीं कर रहा होता । तो उसके कई फ़ोटो या वीडियो शूट कर लेता । अजब संयोग ये था कि इसके साथ ही पानी बरसने लगा । वर्षा रानी की सुहानी रिमझिम रिमझिम मन को हरषाने लगी । एक झुलसाती लम्बी तपिश के बाद मधुर संगीत सा सुनाती ये बूँदे मानों छत के नीचे भी तन मन भिगो रही थी । अब मेरा कोई भी काम करने का

मूड खत्म हो गया । और मैं अशोक जी द्वारा गिफ़्ट किये चिप म्यूजिक प्लेयर पर लता जी के सदाबहार मधुर गीत सुनने लगा । इसी बीच फ़िर आश्रम पर फ़ोन से बात हुयी । वहाँ से मुझे पता चला । फ़रबरी 2012 में मंजूर हुआ विधुत कनेक्शन पोल आदि  गाङकर ( अब ) लगा दिया गया है । और आश्रम में बिजली आ गयी है । ये सुनने में छोटी बात लग सकती है । पर बङी बात है । क्योंकि लगभग 2 किमी दूर तक कोई आवादी नहीं है । इसलिये ये जंगल में मंगल होना ही है । खास हमारे शिष्यों के लिये तो ये बहुत खुशी की बात है । क्योंकि उन्हें अपने मोबायल फ़ोन लैपटाप आदि चार्ज करने हेतु पास के गाँव जाना होता था ।
अक्सर ही बरसात मुझे दूर अतीत में किशोरावस्था में ले जाती है । झमाझम बारिश के बीच सुनसान उमङती नदी में छलांग लगाना । नदी के किनारे खेतों से तरबूज तोङकर फ़िर फ़ोङकर खाना । रहस्यमय डरावने

प्रेतवासा । और वहाँ नजर आते इक्का दुक्का दुस्साहसी लोग । या औघङ साधु । बरसात में अक्सर प्रेमिकायें भी याद आती हैं । जो कभी थीं । जो अभी हैं । और आगे ये भी न हों । तब कौन हो ? ये सब मनुष्य मन की स्वाभाविक गतिविधियाँ हैं । प्रेमिकायें ( क्या बहुत सी ? ) ये बहुवचन शब्द आपको उलझन में डाल सकता है । पर ये भी सत्य है । एक सच्ची प्रेमिका के बिना आपका प्रेमी होना मुश्किल है । और एक सच्चे प्रेमी के बिना प्रेमिका भी नहीं हो सकती । इसलिये मैं प्रेम के बजाय मैत्री शब्द अधिक सही समझता हूँ । मित्रता ? जिसकी नींव भी आजकल वास्तव में स्वार्थ पर टिकी होती है । निस्वार्थ एक दूसरे पर निछावर प्रेम एक दूजे के लिये मर मिटने की बात देख पाना शायद असंभव सी है ।
ऐसे ही ठंडे मौसम और भारतीय गीत संगीत की मधुर धुनें मुझे विभिन्न रसों में बहा ले जाती हैं । और मेरे अन्दर गहन शून्यता छाने लगती है । बिना प्रयास ध्यान । अब बैठना मेरे लिये एकदम असंभव है । मेरी आँखें स्वतः बन्द होने लगी । इसलिये हठ छोङकर मैं लेट जाता हूँ । और इस स्थिति से पूर्व परिचित ही 1 मिनट से भी कम समय में मुर्दा हो जाता हूँ । और अगले ही पल अनन्त अंतरिक्ष में पहुँच जाता हूँ । ये स्थिति आपको अति रोमांचक सुखद सी लग सकती है । पर मुझे नहीं । कबीर के ये शब्द याद कीजिये - सुखिया सब संसार है खाये और सोये । दुखिया दास कबीर है जागे और रोये । सन्तों

योगियों के लिये एक लम्बी गहरी मीठी नींद दुर्लभ होती है । बहुत कीमती जैसी होती है । पर बहुत कम नसीब होती है । सहज योग में स्वतः ध्यान गहराने लगता है । और जब आप इसके अच्छे अभ्यासी हो जाते हैं । तब कोई उपाय नहीं कि आप इसको रोक पायें । फ़िर वही मेरे साथ भी होता है । जिस तरह सरकार को किसी सरकारी कर्मचारी की मनोदशा से कोई लेना देना नहीं होता । वह कार्य आदेश कर देती है । ऐसे ही योगियों से भी सत्ता कार्य लेती है ।
काला गहन बेहद शान्त अंतरिक्ष । इस स्थिति की आप ऐसे कल्पना कर सकते हैं । जैसे बेहद ऊँचाई वाले आसमान पर आप निराधार खङे हों । और दूर दूर तक सिर्फ़ तारे चमक रहे हों । फ़िर एक दिशा 

में मेरा स्वतः खिंचाव हो जाता है । और मैं एक सूक्ष्म लोक में पहुँच जाता हूँ । यहाँ कुछ जीवात्माओं के संस्कार अटके हुये हैं । मैं उनमें से बहुतों को जानता हूँ । कुछ तो अभी सशरीर इसी प्रथ्वी पर ही जीवित हैं । आप किसी भी जीव के नंगे संस्कार देख लो । तो हैरानी में पङ जाओगे । OH GOD ! ये अन्दर से ऐसा है । क्योंकि मनुष्य के संस्कार अधिकतर नीच लोकों से ही जुङे होते हैं । अतः वहाँ का दृश्य कुछ भी हो सकता है । खास तौर पर कामुकता से भरा हुआ । आप गौर करें । मैं इसी जीवन से आपको समझाता हूँ । आप स्त्री हैं या पुरुष । ईमानदारी से सोचें । सिर्फ़ एक किमी दूरी वाला भीङ भरा रास्ता तय करने में आप कितनी वासना संचय करते हैं ? 

कितने विपरीत लिंगियों के साथ मानसिक संभोग करते हैं ? शायद अपने से आकर्षक अनाकर्षक सभी के साथ । एक वृद्ध पुरुष भी किशोरियों से लेकर जवान स्त्रियों तक के साथ ऐसी ही कल्पना करता है । यही अन्दर के नंगे संस्कार होते हैं । किसी का धन हङपने की भावना । जलन ।  द्वेष आदि भी ऐसे आंतरिक संस्कार हैं । जो ऊपर से प्रकट नहीं होते । मेरी ये सुन्दर रात ऐसे ही वाहियात जीवात्माओं और उनके नग्न संस्कारों के साथ उन्हें  ( इस संस्कार से ) मुक्त कराने में जाती है ।
कोई 3 बजे मेरी वापिसी हो जाती है । बरसात रात भर कभी कम कभी ज्यादा होती रही । और अभी 7 july 2012 को सुबह 8 बजे लिखते समय तक जारी है । खिङकी से बाहर के दृश्य से सहज अनुमान लगाया जा सकता है । पानी रात भर ही बरसा है ।
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महाराज जी के वीडियो और tv में God Particle ( अंश ) विषय पर भी इसी के साथ साथ ही बताना चाहता था । पर व्यवधान के चलते ये संभव न हो सका । कुछ और जिज्ञासाओं का समाधान भी शेष हैं । उन्हें जल्दी ही पूरा करने की कोशिश होगी । साहेब ।

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सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326