15 नवंबर 2016

ईश्वर - कुछ प्रसिद्ध तथ्य

ऋते ज्ञानान्न मुक्तिः । 
- ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं ।
ओमित्येतदक्षरमपश्यत ।
- ॐ इस ‘अक्षर’ को देखता है ।
स हि सर्ववित सर्वकर्ता, ईद्दशेश्वर सिद्धिः सिद्धा ।
- वह शक्ति निसंदेह सर्वज्ञ और सर्वकर्ता है । इस प्रकार ईश्वर की सिद्धि सिद्ध करते हैं ।
शास्त्रयोनित्वात । (वेदान्त सूत्र)
- शास्त्र योनि होने से उस परमात्मा की सिद्धि है ।
स एव पूर्वेपामपि गुरु, कालेनानवच्छेदात । (पतंजलि योगसूत्र)
- वह पूर्वजों का भी गुरु है । जो काल के फ़ेर में नही आता अर्थात परमेश्वर है ।
- ईश्वर जैसा विषय जो ‘सपर्य्यगाच्छुकमकायमव्रणम’ कहलाता है । उसे भी मनुष्य जानते हैं और बङी खूबी से प्रमाणित करते हैं । यद्यपि वे उससे कभी मिले नही । 

- जब मैं बहुत दूर और गहराई तक सोचता हूँ तो ज्ञात होता है कि ईश्वर सम्बन्धी ज्ञान मनुष्य आप ही आप अपने ह्रदय में पैदा नही कर सकता । क्योंकि वह अनन्त है हमारा मन शान्त है । वह व्यापक है हम एकदेशीय हैं और भी इसी प्रकार समझिये । इससे यह बात स्पष्ट है कि मूल विचारों को हमने स्वयं नही बनाया । किन्तु परमात्मा ने आदिपुरुषों के ह्रदयों में अपने हाथ से छाप लगा दी है ।
दार्शनिक - डिस्कार्टीज (हिस्ट्री आफ़ नेचरलिस)
- अनेक बङे बङे विद्वानों ने कहा है कि उस समय भी कोई नवीन धर्म प्रवर्तक नही हुआ । जब आर्यों सेमेटिकों और तुरानियों ने नया धर्म व नयी सभ्यता का आविष्कार किया था । ये धर्म प्रवर्तक भी केवल धर्म के पुनरुद्धारक थे, मूल शिक्षक नही ।
ब्ले वेटसकी (सीक्रेट डाक्ट्रिन)
- आदिसृष्टि से लेकर आज तक कोई भी बिलकुल नया धर्म हुआ ही नही ।
मैक्समूलर (चिप्स फ़्राम ए जर्मन वर्कशाप)
- अनेक जन्म जन्मान्तरों में प्राणियों ने नाना प्रकार की योनियों में प्रवेश किया है । अवसर आने पर वही संस्कार जाग्रत हो जाते हैं । जैसे प्राणी जल में पङते ही तथा सोते समय संकट में पङते ही तैरने  और उङने लगता है । किन्तु मनुष्य अपनी देह के साथ बिना सिखाये कुछ भी नही कर सकता ।
- चौपङ के प्रसिद्ध खेल का संकेत है गोट भी मर जाने पर 84 घरों में घूमकर पकती अर्थात छुटकारा पाती है ।
- मैं अपने ज्ञान के नेत्रों से देख रहा हूँ कि आर्यावर्त अपनी राजनीति, अपनी सरकार, अपने आचार और धर्म मिश्र, ईरान, यूनान और रोम को दे रहा है । मैं जैमिनि और व्यास को सुकरात और अफ़लातून से पहले पाता हूँ । प्राचीन भारत के महत्व का अनुभव प्राप्त करने के लिये योरोप में प्राप्त किया हुआ विज्ञान और अनुभव किसी काम का नही, इसलिये हमें आर्यावर्त का प्राचीन महत्व जानने के लिये ऐसा यत्न करना चाहिये । जैसा कि एक बच्चा नये सिरे से पाठ पढ़ता है ।
जेकालियट (योरोपिय विद्वान)
- if there is any paradise in the world. i should point out to india.
यदि प्रथ्वी पर कही स्वर्ग है तो मैं कहूँगा - वह भारतवर्ष है ।
मैक्समूलर (what does india teach us)
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