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06 फ़रवरी 2012

बुद्ध ने ऐसा भी क्या कह दिया ?

बुद्ध ने संसार को जीवन के 4 आर्य सत्य दिये । उनकी देशना सर्वकालिक है । वे 2500 वर्ष पूर्व हुये ।
बुद्ध ने 4 आर्य सत्यों की घोषणा की -
1 दुख है । मनुष्य दुखी है । 2 मनुष्य के दुख का । उसके दुखी होने का कारण है । क्योंकि दुख अकारण तो होता नहीं । 3 दुख का निरोध है । दुख के कारणों को हटाया जा सकता है । दुख मिटाने के साधन है । वे ही आनन्द को पाने के साधन है । 4 दुख निरोध की अवस्था है । एक ऐसी दशा है । जब दुख नहीं रह जाता । दुख से मुक्त होने की पूरी संभावना है ।
बुद्ध कहते हैं - जन्म दुख है । जवानी दुख है । मित्रता दुख है । प्रेम दुख है । रोग दुख है । सम्बन्ध दुख है । असफलता तो दुख है ही । सफलता भी दुख है ।
और कहा - अप्प दीपो भव - अपने दीये स्वयं बनो ।
और कहा - आकाशे च पदं नत्थि । समणों नत्थि बाहरे - आकाश में पथ नहीं होता । और जो बाहर की तरफ

दौड़ता है । वह ज्ञान को उपलब्ध नहीं हो सकता ।
और कहा - दुख के कारण व्यक्ति के मन में होते हैं । बाहर खोजने गये । तो गलती हो गई ।
और कहा - जितनी हानि द्वेषी की द्वेषी या बैरी बैरी की करता है । उससे अधिक बुराई गलत मार्ग पर लगा हुआ चित्त करता है । दुश्मन से डरने की जरूरत नहीं है । चित्त से डरना चाहिए । क्योंकि गलत दिशा में जाता हुआ चित्त ही हानि पहुंचाता है ।
बुद्ध ने धम्मपद में कहा  - ससुखं वत । जीवाम  वेरिनेसू स्वेरिनो । वेरिनेसू मनुस्सेसू विहराम अवेरिनो । वैरियो के बीच अबैरी होकर । अहो हम सुख पूर्वक जीवन बिता रहे हैं । बैरी मनुष्यों के बीच अवैरी होकर हम विहार करते हैं ।
और कहा - सोचो । नाम मात्र के मूल्य के लिए अमूल्य को मिटाने चले हो । असार के लिए सार को गंवाते हो । दृष्टि बदल गयी । तो सब बदल गया । व्याख्या बदल गयी । तो सब बदल गया ।
धम्मपद ने एक स्वर्ण नियम दिया है - जो तुम अपने लिए चाहते हो । उससे अन्यथा दूसरे के लिए मत करना ।
और कहा - अतानं उपमं कत्वा न हत्रेय न घातये । अर्थात अपने समान ही सबको जानकर न मारे । न किसी को मारने की प्रेरणा दें ।
और कहा - जो बाल्यावस्था में बृह्मचर्य का पालन नहीं करते । युवावस्था में धन नहीं कमाते । वे वृद्धावस्था में चिंता को प्राप्त होते हैं ।
बुद्ध जेतवन में ठहरे थे । उनके साथ 500 भिक्षु थे । जो आसंशाला में बैठे रात को बाते कर रहे थे । उनकी बात

साधारण लोगों जैसी थी । बुद्ध मौन बैठे उन्हें सुन रहे थे । वे बातों में इतने तल्लीन थे कि बुद्ध को भूल ही गये । कोई कह रहा था - उस गाँव का मार्ग बड़ा सुन्दर है । उस गाँव का मार्ग बड़ा खराब है । उस मार्ग पर छायादार वृक्ष है । स्वच्छ सरोवर भी है । और वह मार्ग बहुत रूखा है । उससे भगवान बचाये । कोई कह रहा था - वह राजा अदभुत है । और वह नगर सेठ भी अदभुत और बड़ा दानी । उस नगर का राजा  कंजूस । और नगर सेठ भी कंजूस । वहाँ तो कोई भूल कर पैर न रखे । इसी प्रकार की बातें हो रही थी । बुद्ध ने  सुना । चौके । हँसे । भिक्षुओं को पास बुलाया ।
और कहा - भिक्षु होकर भी बाह्य मार्गों की बात करते हो । समय थोड़ा है । और करने को बहुत है । बाह्य मार्गों पर जन्म जन्म भटकते रहे हो । अब भी थके नहीं । अंतर्मार्गों की सोचो । सौन्दर्य तो अंतर्मार्गों में है । शरण भी खोजनी हो । तो वहाँ खोजो । क्योंकि दुख निरोध का वही मार्ग है ।
और कहा - भिक्षुओं मग्गानुट्ठगिको सेट्टो । यदि श्रेष्ठ मार्ग की बात करनी है । तो आर्य अष्टांगिक मार्ग की बात करो । यह तुम किन मार्गों की बात करते हो । तब उन्होंने गाथा कही ।
और कहा - भीतर आने के बहुत मार्गों में 8 अंगों वाला मार्ग श्रेष्ठ है ।
बुद्ध ने दुख निरोध के 8 सूत्र दिए ।


1 सम्यक दृष्टि - सम्यक दृष्टि का अर्थ है कि जीवन में अपना दृष्टिकोण ऐसा रखना कि जीवन में सुख और दुख आते जाते रहते हैं । यदि दुख है । तो उसका कारण भी होगा । तथा उसे दूर भी किया जा सकता है ।
2 सम्यक संकल्प - इसका अर्थ है कि मनुष्य को जीवन में जो करने योग्य है । उसे करने का । और जो न करने योग्य है । उसे नहीं करने का दृढ़ संकल्प लेना चाहिए ।
3 सम्यक वचन - इसका अर्थ यह है कि मनुष्य को अपनी वाणी का सदैव सदुपयोग ही करना चाहिए । असत्य । निंदा । और अनावश्यक बातों से बचना चाहिए ।
4 सम्यक कर्मांत - किसी भी प्राणी के प्रति मन । कर्म या वचन से हिंसा न करना । जो दिया नहीं गया है । उसे नहीं लेना । दुराचार और भोग विलास दूर रहना ।
5 सम्यक आजीव - गलत । अनैतिक । या अधार्मिक तरीकों से आजीविका प्राप्त नहीं करना ।
6 सम्यक व्यायाम - बुरी और अनैतिक आदतों को छोडऩे का सच्चे मन से प्रयास करना । सदगुणों को ग्रहण करना । व बढ़ाना ।
7 सम्यक स्मृति - इसका अर्थ है कि यह सत्य सदैव याद रखना कि यह सांसारिक जीवन क्षणिक और नाशवान है ।
8 सम्यक समाधि - ध्यान की वह अवस्था । जिसमें मन की अस्थिरता । चंचलता । शांत होती है । तथा विचारों का अनावश्यक भटकाव रुकता है ।
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पढ लिया । बाबा बुद्ध ने क्या कहा ? क्या कहने से बच गया ? ध्यान रहे । बुद्ध मेरी कोई भैंस नहीं खोल ले गये । 


उसे कोई खोल भी नहीं सकता । क्योंकि दरअसल मेरे घर भैंस है ही नहीं ।
अब सुनिये । राजीव बाबा ने क्या कहा - मुझे बङी हैरत होती है । लोगो के पास सोचने वाला उपकरण है भी । या नहीं । क्या है । इन उपदेशों में ? चलिये । एक प्रयोग करिये । एक ग्रामीण टायप व्यक्ति से । जो थोङा ही समझदार हो । जिसने किसी बुद्ध को पढना तो दूर । सुना भी न हो । उससे सादा सफ़ल मगर उच्च जीवन के सूत्र पूछिये । और ये सूत्र बतौर रिकार्ड अपने पास प्रतिलिपि रखें । मेरी गारंटी और वारंटी दोनों हैं । वो आपके ठीक ऐसे 8 क्या 80 सूत्र बता देगा । सामान्य नैतिक शिक्षा ।
मेरे घर के पास ही एक सदैव का निठल्ला । कामचोर । हरामखोर ( उसकी बीबी ने ये उपाधियाँ दी हैं । ये न सोचना मैं कह रहा हूँ ) महान व्यक्तित्व है । और एक सब प्रकार दुश्चरित्रा ( ये भी लोग कहते हैं । मैं नहीं कह रहा ) कुटिल । जटिल औरत है । मुझे इन दोनों महान हस्तियों के वचन सुनकर बहुत ही हैरत होती है । सच कह रहा हूँ । इसमें मजाक या व्यंग्य की कतई टोन नहीं हैं । वे ऐसे सद उपदेश देते हैं । उच्च जीवन का ऐसा

दर्शन शास्त्र बताते हैं कि अच्छे अच्छे PhD भी चकरा जायें ।
सारी भाईयों ! किसी की आलोचना । कटु आलोचना । मेरा लक्ष्य नहीं । पर विचार करिये । इनमें ऐसी क्या खास बातें हैं ? जो हमारे ही घर के आदरणीय बुजुर्ग नहीं जानते थे । गौ धन गज धन बाजि धन और रतन धन खान । जब आवे सन्तोष धन । सब धन धूर समान ।
अतः हमें किसी बुद्ध की जरूरत नहीं होती । जो हम अपने ( आज उपेक्षित ) बुजुर्गों को सर आँखों पर बैठाते । उन्हें पूरा पूरा मान सम्मान देते । तो उनके पास ऐसे ज्ञान का भण्डार भरा पङा था ।

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हो सकता है । मैं गलत होऊँ । पर मेरे ख्याल से सम्यक का अर्थ है - मध्यम । मध्यम मार्ग । यानी 50% । न 100% । न 1% । बीच में । सम । जिसको दूसरे अर्थों में कह सकते हैं - समझौता । फ़िर भी मैं सम्यक के अर्थ को लेकर कनफ़्यूज्ड था । लिहाजा मैंने इंटरनेट पर उपलब्ध शब्दकोश का उपयोग किया । और हिन्दी से इंगलिश टूल का उपयोग करते हुये सम्यक शब्द कापी पेस्ट करके सर्च बटन क्लिक किया । आप भी इस वेवसाइट साइट पर जाने के लिये इसी लाइन पर क्लिक कर सकते हैं तो उस साइट ने अंग्रेजी में ये अर्थ बताया - middle of the raod । न दायें चलो । न बाँये चलो । बीच सङक पर चलो । डांट वरी । LIC जीवन बीमा पालिसी । इधर आपका अन्त । ( उधर ) बीबी को भुगतान तुरन्त ।
खैर आपको मालूम ही है । मेरी हिन्दुस्तानी अंग्रेजी कितनी अच्छी है ? ये शब्द raod देखकर मेरी अंग्रेज बुद्धि भी

चकरा गयी । ये उसी साइट पर आता है । गौर से देखें । मैंने सोचा । शायद कोई नया शब्द हो । मैंने फ़िर से केवल इसी शब्द को अंग्रेजी से हिन्दी टूल द्वारा कापी पेस्ट कर सर्च किया । परिणाम आया - बाबा क्या स्कूल के पीछे पढा था ? जो लिखना भी नहीं आता । raod नहीं road है ।
खैर..फ़िर मुझे ओशो बाबा याद आये । जिनके विचार कुछ ऐसे थे ।
और ओशो ने कहा - तुम लोगों को देखते हो । वे दुखी हैं । क्योंकि उन्होंने हर मामले में समझौता किया है । और वे खुद को माफ नहीं कर सकते कि उन्होंने समझौता किया है । वे जानते हैं कि वे साहस कर सकते थे । लेकिन वे कायर सिद्ध हुए । अपनी नजरों में ही वे गिर गए । उनका आत्म सम्मान खो गया । समझौते से ऐसा ही होता है ।
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और ये भी किसी ने कहा - Your pajamas have duckies on them. Why did you switch from choo - 


choos ? YOU CAN GIVE A BETTER ANSWER
- early to bed early to rise, a man makes healthy wealthy and wise
और चलते चलते - एक आदमी के बच्चा नहीं होता था । सारी ! उसकी औरत के बच्चा नहीं होता था । डाक्टर के पास गये । उसने कहा । तुम्हें जो रोग है । उसकी दबा तो नहीं बनी । तुम्हारी एक ग्रन्थि में कमी है । इसलिये तुम अपने पूर्वज बन्दर की ग्रन्थि लगवा लो । बच्चा हो जायेगा ।
वह बोला - लगा दो । 9 महीने बाद ।
वह आदमी बैचेन सा आपरेशन थियेटर के बाहर टहल रहा था । जैसे ही डाक्टर निकल कर आया । उसने पूछा - लङका या लङकी ?
डाक्टर बोला - लङका लङकी तो तब पता चलेगा । जब वो हाथ में आयेगा । पैदा होते ही वो सीलिंग फ़ैन पर चढ गया ।

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सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326