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08 मार्च 2010

जय सतगुरु की जय जय श्री गुरुदेव |

मैंने ये ब्लाग शाश्वत सत्यकीखोज में लगे हुए उन ज्ञान पिपासुओं को ध्यान में रखकर बनाया है । जो सदियों से जीवन का रहस्यमय सत्य जानना चाहते हैं । पर वास्तव में बहुत कम लोग ही सोच पाते हैं कि आखिर हम हैं कौन ? कहाँ से आये हैं ? कहाँ जाना है ? आखिर इस पृथ्वी पर जिसे मृत्यु लोक कहा जाता है । इतनी विषमता क्यों है ? कोई अमीर कोई गरीब । कोई सुखी । कोई दुखी है । इसलिये सामान्यतयाः कोई भी इंसान क्यों न हो । किसी भी देश काल जाति धर्म मजहब का क्यों न हो । सभी के सामने तीन खास प्रश्न है  1 मैं कौन हूँ ? 2 भगवान का असली नाम क्या है ? 3 इस जीवन का लक्ष्य क्या है आदि ? आज से लगभग 7 साल पहले तक द्वैत की 18 साल की पढाई के बाबजूद भी ये प्रश्न और ऐसे प्रश्न समय बेसमय मेरे मन को झिंझोडते रहे । इस बात को आप यूं समझिये कि भूखे का पेट खाली बातों से नहीं भरता ? गुङ की मिठास खाये बिना महसूस नहीं हो सकती ? भगवान है ? नहीं है ? हर एक सामान्य इंसान की तरह । ये दो आस्तिक और नास्तिक अस्तित्व मेरी विचार सत्ता को हिलाते रहते थे । कभी आस्तिक के तर्क प्रबल हो जाते । तो नास्तिक ढेर हो जाता । पर नास्तिक के तर्क भी कम प्रबल नहीं थे । वह प्रत्यक्ष प्रमाण मांगता । तो आस्तिक ढेर हो जाता । आसपास के बुजुर्गों से पूछा । आपने कभी भगवान देखा है ? या आपकी एक दो पीढी पहले किसी ने देखा हो ? तो सदैव उन्हें असहाय भाव से इंकार करते हुये ही पाया । आपको कांफ़ीडेस है कि आप जो पूजा परम्परा । जो आस्तिक हमारे दिमाग में फ़िट कर रहे हो । उसकी कोई ठोस वजह है ? उसका आज कल या आगे चलकर कोई लाभ होगा ? भगवान को देखा जा सकता है । या नहीं ?
क्यों ? मेरे पास उसके लिये बहुत से प्रश्न हैं । मैं उससे समय समय पर बात करना चाहता हूं । पर कहीं कोई जबाब नहीं था । जो हमें सिखाते थे । कि पूजा करो ? परम्परा का पालन करो । वही क्यों करें । इसकी कोई वजह नहीं बता पाते थे । तमाम साधु संत भी मौन मिले । बाबा । भगवान देखने को मिल जायेगा ? हां क्यों नहीं । मेहनत करोगे । अवश्य मिलेगा । आपको मिला ? मौन ? मौन क्यों हो ? जब भी भगवान की बात करता हूं । मौन क्यों हो जाते हो ? सदियों से भगवान भगवान चिल्ला रहे हो । रामायण भागवत करके हमारे कान फ़ोडते हो । पर मैं कहता हूं । किसी को मिला क्या ? तो मौन हो जाते हो । 
ये भगवान के नाम पर इतना अज्ञात सन्नाटा क्यों है ? क्यों नहीं बताते । कोई परमात्मा है ? कोई भगवान है ? किसी ने देखा था । ये इतनी मोटी मोटी धर्म किताबें । किसने । किसके लिये ? और क्यों लिखी ? आप सब बोलते क्यों नहीं हो ?

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सत्यसाहिब जी सहजसमाधि, राजयोग की प्रतिष्ठित संस्था सहज समाधि आश्रम बसेरा कालोनी, छटीकरा, वृन्दावन (उ. प्र) वाटस एप्प 82185 31326