09 जुलाई 2013

गुरुपूर्णिमा 2013

प्रातः स्मरणीय परमपूज्य सदगुरुदेव श्री शिवानन्द जी महाराज परमहंस के तत्वावधान में गुरु पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर चिंताहरण आश्रम मुक्तमंडल में दिनांक 19, 20 तथा 21 जुलाई 2013 को सत्संग एवं दिनांक 22 जुलाई 2013 (गुरुपूर्णिमा) के दिवस पर गुरुपूजन तथा महाभोज (भंडारा) का आयोजन हो रहा है । इस पावन अवसर पर आप सभी भक्तजन सप्रेम आमंत्रित हैं ।

पता -
चिंताहरण आश्रम मुक्तमंडल,
ग्राम - नगला भादों (मुस्तफाबाद रोड)
तहसील - जसराना
जिला - फ़िरोज़ाबाद 
(उत्तर प्रदेश)

तिथि एवं कार्यक्रम -
सत्संग - दिनांक 19, 20 तथा 21 जुलाई 2013
गुरुपूजन तथा महाभोज - दिनांक 22 जुलाई 2013 (गुरुपूर्णिमा)

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक - श्री राकेश शर्मा जी महाराज (दिल्ली)

आश्रम तक आने के लिए आपको सर्वप्रथम बस, ट्रेन अथवा अन्य वाहन के माध्यम से फ़िरोज़ाबाद तक पहुंचना होगा । अगर आप आगरा से आ रहे हैं तो फ़िरोज़ाबाद तक के लिए ट्रेन कम हैं, ऐसे में आप बिजलीघर बस स्टैंड से फ़िरोज़ाबाद के लिए बस ले सकते हैं । टूंडला जंक्शन से फ़िरोज़ाबाद के लिए पर्याप्त ट्रेनें हैं ।
फ़िरोज़ाबाद बस स्टैंड या स्टेशन पहुँचने पर आपको ऑटो मिल जायेगा जो आपको 5 रू. में कोटला चुंगी पहुंचा देगा । कोटला चुंगी से आपको रिक्शा मिलेगा जिससे आपको ठार पूंठा (प्राइवेट बस स्टैंड) पहुंचना है । रिक्शा वाला आपसे 10 रू. लेगा । 
अगर आप चाहें तो बस स्टैंड या स्टेशन से सीधे ठारपूंठा के लिए ऑटो भी कर सकते हैं, पर उसका मूल्य अधिक लगेगा ।
ठार पूंठा पहुँचने पर आपको वही पर खड़ी बसें दिखेंगी जो सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे तक चलती हैं । ये बसें मुस्तफाबाद तक जाती हैं और यही बसें आपको सीधे आश्रम के मोड़ पर उतारेंगी ।
ठार पूंठा से चल कर बस से आपको नगला भादों पर उतरना हैं । आप बस वाले को बता सकते हैं कि नगला भादों आश्रम पर उतरना है तो वह आश्रम के मोड़ पर ही आपको उतारेगा । 
बस से आपका किराया लगभग 25 रू. लगेगा ।
इसी मोड़ पर चलकर आप पहुँच जायेंगे - चिंताहरण मुक्तमंडल आश्रम ।

आरती सदगुरुदेव महाराज जी की

आरती सदगुरु देव नमामी । पारबृह्म सब जग के स्वामी ।  (1)
विधि हरि हर तुम्हरो यश गावे । शेष शारदा तुमको ध्यावे । (2)
राम कृष्ण गुरु के गुण गावे । जय शिवानन्द परधामी । (3)
भव के संकट तारन हारे । काल कर्म गति नाशन हारे । (4)
आये शरण तुम्हारे द्वारे । अलख अगोचर अगम अनामी । (5)
श्रीगुरु चरण कमल की छाया । जाकी शरण जीव जो आया । (6)
करते दूर ताप त्रिय माया । करो दया गुरु अन्तर्यामी । (7)
सत्यनाम गुरु हमको दीना । चंचल मन निश्चल कर दीन्हा । (8)
पायो ज्ञान मोक्ष पद लीन्हा । परम भक्ति पद के अनुगामी । (9)
निसिदिन आरत करों तुम्हारी । सुन लीजे गुरु विनय हमारी । (10)
कहते सच्चिदानन्द पुकारी । बारम्बार सदगुरु देव नमामी । (11)

। जय श्री सद्गुरुदेव महाराज जी की ।
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