05 अगस्त 2018

देवीजी



किसी किसी का जीवन ही मुझे प्रभावित करता है फ़िर यदि वह व्यक्ति आध्यात्मिक हो, और भाग्यवश मुझसे जुङा भी हो, तो ये ‘सोने पर सुहागा’ जैसा ही है। सात वर्ष की आयु से ही स्वस्फ़ूर्त तपस्या में रत हो जाने वाली ‘देवीजी’ के नाम से सुविख्यात बालसाध्वी सुश्री अरुणा देवी एक ऐसा ही आध्यात्मिक व्यक्तित्व है।

देवीजी के सरल सहज निश्छल स्वभाव, भोलापन और वाणी की मधुरता में एक चुम्बकीय आकर्षण है, जो किसी को भी हठात उनकी तरफ़ खिंचने को विवश कर देता है। अपने इसी सरल सौम्य व्यक्तित्व और प्राणिमात्र के प्रति सहज स्नेह से आज हजारों लोग उनसे जुङे हुये हैं, और उनकी कथा सतसंग आदि के माध्यम से प्रभुभक्ति की ओर प्रेरित हुये हैं।

लेकिन देवीजी से मेरा जुङाव और लगाव उनकी आत्म-उपासना और क्रियात्मक समाधि आदि योगों को लेकर हुआ, जबकि वह मुझसे मिलीं।

देवीजी जब बाल्यावस्था में ही तप उन्मुख हुयीं, तो घरवालों ने उन्हें उस एकान्त स्थान से उठाना, डराना चाहा, जहाँ वह तप हेतु बैठी थीं, पर वह बिलकुल भी विचलित नही हुयी, और निर्विघ्न साधनारत रहीं। जबकि उल्टे उनके तप में विघ्न पहुँचाने वालों को कुछ डरावने और अप्रिय अनुभव प्राकृतिक रूप से हुये, और भयभीत होकर उन्होंने इसे नियत की इच्छा मानकर स्वीकार कर लिया।



इसके बाद देवीजी का तप बारह-तेरह वर्ष निर्विघ्न चलता रहा।

तदुपरान्त जानकार लोग अपने धार्मिक अनुष्ठानों में उनसे पधारने का आग्रह और कुछ उपदेश आदि देने का निवेदन करने लगे। तभी बाल्यावस्था की अवस्था में ही उन्होंने कुछ कथा सतसंग जैसे धार्मिक कार्य भी किये। जो आज भी यदाकदा जारी हैं।

देवीजी स्थायी रूप से वृन्दावन में वास करती हैं, और आगरा आने पर अक्सर ही हमारे यहाँ मेहमान होती हैं।

कहते हैं कि कन्या का जन्म लेना घर में लक्ष्मी आगमन के समान ही है। पर किसी भक्तकन्या का जन्म लेना तो जैसे स्वयं देवी का अवतरण होने जैसा ही है। इसलिये मुझे कोई आश्चर्य नही कि घरवालों से लेकर बाहर वाले तक उन्हें ‘देवीजी’ कहकर पुकारते हैं।

या देवी सर्वभूतेषु शक्ति-रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

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कथा सतसंग आदि के आयोजन हेतु देवीजी का संपर्क न.  
78953 91377
 (बात करने का समय शाम 5 बजे।)

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