22 फ़रवरी 2011

कुछ अपने अनुभव


नमस्कार राजीव जी । बिलम्ब के लिये माफ़ कीजियेगा । एक्चुअली कुछ दिनों से मेरा डाटा कार्ड काम नहीं कर रहा था । इसलिये रिप्लाई नहीं कर सका । यहाँ कुछ अपने अनुभव लिख रहा हूँ । जो मेरे साथ घटित हुये ।
No-1 एक बार मैं सोया हुआ था कि एकदम नींद से मेरी आँख खुली । तो पाया । अपने माथे के दाँयी तरफ़ किसी का हाथ मेरे सिर पर था । जैसे कोई प्यार से थपकी दे रहा हो । एकदम से रियल में हो रहा था सब कुछ । मैं 2 मिनट को हिला भी नहीं । और जैसे था । वैसे ही लेटा रहा । क्योंकि मेरे रोंगटे खङे हो गये थे । जब होश संभाला । तो एकदम से सिर घुमाया कि कौन है ? पर मैं अकेला था । कुछ समझ में नहीं आया कि ये क्या हुआ है मेरे साथ । एक्चुअली मैं अकेला ही सोता हूँ । और मेरे रूम का डोर अन्दर से बन्द रहता है । इसलिये किसी के आने का भी कोई सवाल नहीं था । और ना में उस वक्त आधी नींद में था । और न ही कोई सपना देख रहा था । ये एकदम असल में महसूस की हुयी घटना थी मेरे साथ ।
No-2 अध्यात्म की ओर मेरा रुझान पिछले 7-8 सालों से बहुत बढ गया है । और मुझे महसूस होता है कि मुझे इस राह में और आगे बढना है । जैसे कोई अदृश्य शक्ति मुझे खुद इस ओर खींच रही हो । मेरा मन भी अब सांसारिक भोग के विषयों में नहीं लगता । पर हाँ कभी कभी जब मन विचलित होकर कहता है कि थोङा सा ये भी करके देख । और मैं गलत दिशा में अग्रसर होने ही वाला होता हूँ । तो तभी कोई अजीब शक्ति मुझे किसी ना किसी बहाने से संदेश देती है कि जो मेरे मन में चल रहा है । वो गलत है । और मैं उस शक्ति को धन्यवाद देते हुये गलत काम करने से बच जाता हूँ । फ़ार एग्जाम्पल..मैंने सुबह कोई काम करने का सोचा । जो एक सच्चे इंसान के लिये गलत मार्ग है । तो शाम को उसी दिन मुझे ये मैसेज मिल जाता है कि ऐसा मत करना । और अचम्भे की बात ये है कि वो मैसेज उसी टापिक से रिलेटिड होता है । जो मैनें सोचा होता है । और मैसेज भी हमारी रोजमर्रा की चीजों से मिलता है । जैसे कि किसी बुक या टीवी । या किसी को बात करते हुये । या किसी न्यूजपेपर में । या किसी मूवी से । और मजे की बात यह है कि ये उसी दिन मिलता है । मैं हैरान हो जाता हूँ कि ये सब क्या है ? कौन मुझे आगाह कर देता है ।
No-3 मेरे अब तक 3 बहुत रहस्यमय एक्सीडेंट हुये हैं । रहस्यमय इसलिये कह रहा हूँ । क्योंकि वो एक्सीडेंट ऐसे थे कि बचने का कोई सवाल ही नहीं रहता । लेकिन करिश्मा ये है कि मुझे तीनों बार कोई चोट भी नहीं आयी । शायद किसी अजीव शक्ति ने बचाया मुझे...??
No-4 आज से करीब 1 साल पहले मैंने ऐसे ही रात को बैठे बैठे अपना ध्यान लगाया । तो मेरा ध्यान एक ऐसी आनन्ददाई स्थिति में चला गया कि उसे शब्दों में बयान करना मुश्किल है । ऐसे लगता था । जैसे मैं अनन्त आकाश में उङ रहा हूँ । पर ऐसा सिर्फ़ उसी दिन हुआ था । उसके बाद कई बार कोशिश की । वैसा ध्यान लगा पाऊँ । पर आज तक वैसा आनन्द हासिल नहीं कर पाया । धन्यवाद ।
RAJEEV..पंजाब से एक नियमित पाठक के कुछ अलौकिक अनुभव । इसके बारे में अपने विचार किसी अन्य पोस्ट में बताऊँगा । लेकिन..यदि आप भी कुछ ऐसा अनुभव करते हैं । कुछ अजीव सा आपके जीवन में भी हुआ है । तो हमें GOLU224@YAHOO.COM पर लिख भेजिये । हम उसे प्रकाशित करेंगे । ताकि अन्य लोग भी आपके अलौकिक अनुभव जान सकें । धन्यवाद ।
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