31 मार्च 2011

हमारे नये साधक । निर्मल बंसल

उना , हिमाचल प्रदेश के मूल निवासी और वर्तमान में छत्तीसगढ भिलाई के निवासी श्री निर्मल बंसल जी से मेरे ब्लाग्स के नियमित पाठक बखूबी परिचित होंगे ।  कई लेखों में उनके प्रश्नों के उत्तर है । तथा कहीं कहीं उनके बारे में लिखा भी है ।

बंसल जी आठ साल से भी अधिक योग साधना कर रहे हैं । और राधास्वामी के किसी मंडल से पंचनामा द्वारा दीक्षा भी लिये हुये थे । बंसल जी ने पूरे मनोयोग से साधना की । और उसके अच्छे परिणाम भी आये । परन्तु निरंकार शब्द पर आकर उनकी साधना अटक गयी । और इससे आगे नहीं बङी । बंसल जी ने इस सम्बन्ध में मंडल के लोगों से कई बार बात भी की ।
पर कोई सही समाधान नहीं निकला ।

तब एक बार बंसल जी नेट पर "  अनुराग सागर " सर्च कर रहे थे । और उनका मेरे ब्लाग से परिचय हुआ । बंसल जी के अनुसार उन्हें मेरे लेखों में - अपने काफ़ी प्रश्नों के उत्तर मिले । और कई

जानकारियाँ प्राप्त हुयीं । इसके बाद बंसल जी अक्सर फ़ोन पर मुझसे और गुरुजी से बात करने लगे । होली के बाद 21 मार्च 2011 को बंसल जी आगरा हमारे यहाँ आये । और दीक्षा लेकर हमारे मंडल से जुङ गये । बंसल जी के अनुसार इस दीक्षा से उन्हें नये और अलग और तुरन्त अनुभव हुये ।

 दूसरे दिन सुबह बातचीत में श्री महाराज जी ने मेरे सामने ही बंसल जी से कहा - क्योंकि हमारी महामन्त्र दीक्षा राधास्वामी पंचनामा से एकदम अलग होती है । अतः 6 महीने के नाम अभ्यास के बाद वे आगे बङाने वाली दीक्षा करेंगे ।


यह फ़ल साधन से नहिं होई । तुम्हरी कृपा पाये कोई कोई ।
अर्थात ये दुर्लभ ग्यान बङे भाग्य से हासिल होता है । इसमें तीसरा नेत्र तो

बहुत जल्दी ही खुल जाता है ।
अगला जन्म मनुष्य का पक्का हो जाता है । और अलौकिक अनुभव होने लगते हैं । इन कुछ प्रमुख बातों के अलावा इस दीक्षा का प्रभाव इसको लेने वाला ही जानता है । जय जय श्री गुरुदेव ।
एक टिप्पणी भेजें

Follow by Email