02 अक्तूबर 2012

हम भूखे मरें या खाकर तुम्हें क्या तकलीफ ?


2 घंटे युद्ध और चलता । तो भारत की सेना ने लाहौर तक कब्जा कर लिया होता । लेकिन तभी पाकिस्तान को लगा कि - जिस रफ्तार से भारत की सेना आगे बढ़ रही है । हमारा तो पूरा अस्तित्व ही खत्म हो जायेगा । तब पाकिस्तान ने अमेरिका से कहा कि - वो किसी तरह से युद्ध रुकवा दे । अमेरिका जानता था कि - शास्त्री जी इतनी जल्दी नहीं मानने वाले । क्योंकि वो पहले भी 2-3 बार भारत को धमका चुका था ।
धमका कैसे चुका था ?
अमेरिका से गेहूं आता था । भारत के लिये । PL 48 स्कीम के अंडर । PL मतलब public law 48  जैसे भारत में सविधान में धारायें होती हैं । ऐसे अमेरिका में PL होता है । तो बिलकुल लाल रंग का सड़ा हुआ गेंहू । अमेरिका से भारत मे आता था । और ध्यान रहे । ये समझौता भी पंडित नेहरू ने किया था । 
जिस गेंहू को अमेरिका में जानवर भी नहीं खाते थे । उसे भारत के लोगों के लिए आयात करवाया जाता था । आपके घर में कोई बुजुर्ग हो । आप उनसे पूछ सकते हैं । कितना घटिया गेहूं होता था वो ।
तो अमेरिका ने भारत को धमकी दी कि - हम भारत को गेहूं देना बंद कर देंगे । तो शास्त्री जी ने कहा - हाँ कर दो । फिर कुछ दिन बाद अमेरिका का बयान 

आया कि - अगर भारत को हमने गेंहू देना बंद कर दिया । तो भारत के लोग भूखे मर जायेंगे ।
शास्त्री जी ने कहा - हम बिना गेंहू के भूखे मरें । या बहुत अधिक खाकर मरें । तुम्हें क्या तकलीफ है ? 
हमे भूखे मरना पसंद होगा । बशर्ते तुम्हारे देश का सड़ा हुआ गेंहू खाकर । 1 तो हम पैसे भी पूरे दें । ऊपर से सड़ा हुआ गेहूं खायें ! नहीं चाहिये तुम्हारा गेंहू ।
फिर शास्त्री जी ने दिल्ली में  रामलीला मैदान में लाखों लोगों से निवेदन किया कि - 1 तरफ पाकिस्तान से युद्ध चल रहा है । ऐसे हालातों में देश को पैसे की बहुत जरूरत पड़ती है । सब लोग

अपने फालतू खर्चे बंद करें । ताकि वो domestic saving से देश के काम आये । या आप सीधे सेना के लिये दान दें । और हर व्यति सप्ताह से 1 दिन सोमवार का वृत जरूर रखे ।
तो शास्त्री जी के कहने पर देश के लाखों लोगों ने सोमवार को वृत रखना शुरू कर दिया । हुआ ये कि हमारे देश में ही गेहुं बढने लगा । और शास्त्री जी भी खुद सोमवार का वृत रखा रखते थे ।
शास्त्री जी ने जो लोगों से कहा । पहले उसका पालन खुद किया । उनके घर में बाई आती थी । जो साफ सफाई और कपड़े धोती थी । तो शास्त्री जी ने उसको हटा दिया । और बोले - देश हित के लिये मैं इतना खर्चा नहीं कर सकता । मैं खुद ही घर की सारी सफाई करूंगा । क्योंकि पत्नी ललिता देवी बीमार रहा करती थीं ।
और शास्त्री जी अपने कपड़े भी खुद धोते थे । उनके पास सिर्फ 2 जोड़ी धोती कुरता ही थी ।
उनके घर में 1 टयूटर भी आया करता था । जो उनके बच्चों को अंग्रेजी पढ़ाया करता था । तो शास्त्री जी ने उसे भी हटा दिया । उसने शास्त्री जी से कहा कि - आपका बच्चा अंग्रेजी में फेल हो जायेगा । तब शास्त्री जी ने कहा - होने दो । देश के हजारों बच्चे अंग्रेजी में ही फेल होते हैं । तो इसे भी होने दो । अगर अंग्रेज़ हिन्दी में फेल हो सकते हैं । तो भारतीय अंग्रेजी में फेल हो सकते हैं । ये तो स्वाभाविक है । क्योंकि अपनी भाषा ही नहीं है ये ।

1 दिन शास्त्री जी की पत्नी ने कहा कि - आपकी धोती फट गई है । आप नई धोती ले आईये । शास्त्री जी ने कहा - बेहतर होगा कि सुई धागा लेकर तुम इसको सिल दो । मैं नई धोती लाने की कल्पना भी नहीं कर सकता । मैंने सब कुछ छोड़ दिया है । पगार लेना भी बंद कर दिया है । और जितना हो सके । कम से कम खर्चे में घर का खर्च चलाओ ।
अंत में शास्त्री जी युद्ध के बाद समझौता करने ताशकंद गये । और फिर जिंदा कभी वापिस नहीं लौट पाये । पूरे देश को बताया गया कि - उनकी मृत्यु हो गई । जबकि उनकी हत्या की गई थी ।
हत्या का सारा राज जानने के लिये यहाँ click करें । 
http://youtu.be/BJmkS7azuGU
भारत में शास्त्री जी जैसा सिर्फ एक मात्र प्रधानमंत्री हुआ । जिसने अपना पूरा जीवन आम आदमी की तरह व्यतीत किया । और पूरी ईमानदारी से देश के 

लिये अपना फर्ज अदा किया । जिसने " जय जवान और जय किसान " का नारा दिया । क्योंकि उनका मानना था । देश के लिये अनाज पैदा करने वाला किसान । और सीमा की रक्षा करने वाला जवान । दोनों देश ले लिये सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं ।
स्वदेशी की राह पर उन्होंने देश को आगे बढ़ाया । विदेशी कंपनियों को देश में घुसने नहीं दिया । अमेरिका का सड़ा गेंहू बंद करवाया । ऐसा प्रधानमंत्री भारत को शायद ही कभी मिले । अंत में जब उनकी paas book चेक की गई । तो सिर्फ 365 रुपये 35 पैसे थे । उनके बैंक अकाउंट में । शायद आज कल्पना भी नहीं कर सकते । ऐसा नेता भारत में हुआ । आज प्रधानमंत्री अमेरिका के agent हैं । लाखों करोड़ों के घोटाले करते हैं । विदेशी कंपनियों को भगाना तो दूर । walmart ला रहे हैं । लाखों करोड़ों के घोटाले कर रहे हैं ।
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साहसी लड़का - 1 लड़का काशी में हरिश्चन्द्र हाई स्कूल में पढ़ता था । उसका गाँव काशी से 8 मील दूर था । वह रोजाना वहाँ से पैदल चलकर आता । बीच में जो गंगा नदी बहती है । उसे पार करता । और फिर विद्यालय पहुँचता । उस जमाने में गंगा पार करने के लिए नाव वाले को 2 पैसे देने पड़ते थे । 2 पैसे आने के । और 2 पैसे जाने के । कुल 4 पैसे । यानी पुराना - 1 आना । महीने में करीब 2 रुपये हुए । जब सोने के 1 तोले का भाव 100 रुपयों से भी कम था । तब के 2 रुपये । आज के तो 5-25 रुपये हो जायें ।
उस लड़के ने अपने माँ बाप पर अतिरिक्त बोझा न पड़े । इसलिए 1 भी पैसे की माँग नहीं की । उसने तैरना सीख लिया । गर्मी हो । बारिश हो कि ठण्ड हो । गंगा पार करके हाई स्कूल में जाना उसका कृम हो गया । ऐसा करते करते कितने ही महीने गुजर गये ।
1 बार पौष मास की ठण्ड में वह लड़का सुबह की स्कूल भरने के लिए गंगा में कूदा । तैरते तैरते मझधार में आया । 1 नाव में कुछ यात्री नदी पार कर रहे

थे । उन्होंने देखा कि - छोटा सा लड़का अभी डूब मरेगा । वे नाव को उसके पास ले गये । और हाथ पकड़कर उसे नाव में खींच लिया । लड़के के मुख पर घबराहट या चिन्ता का कोई चिन्ह नहीं था । सब लोग दंग रह गये कि - इतना छोटा है । और इतना साहसी ।
वे बोले - तू अभी डूब मरता तो ? ऐसा साहस नहीं करना चाहिए ।
तब लड़का बोला - साहस तो होना ही चाहिए । अगर अभी से साहस नहीं जुटाया । तो जीवन में बड़े बड़े कार्य कैसे कर पायेंगे ?
लोगों ने पूछा - इस समय तैरने क्यों आये ? दोपहर को नहाने आते ?
लड़का बोलता है - मैं नदी में नहाने के लिए नहीं आया हूँ । मैं तो स्कूल जा रहा हूँ ।

- फिर नाव में बैठकर जाते ?
- रोज के 4 पैसे आने जाने के लगते हैं । मेरे गरीब माँ बाप पर मुझे बोझ नहीं बनना है । मुझे तो अपने पैरों पर खड़े होना है । मेरा खर्च बढ़ेगा । तो मेरे माँ बाप की चिन्ता बढ़ेगी । उन्हें घर चलाना मुश्किल हो जायेगा ।
लोग उस लड़के को आदर से देखते ही रह गये । वही साहसी लड़का आगे चलकर भारत का प्रधानमंत्री बना । वह लड़का था - लाल बहादुर शास्त्री । शास्त्री जी उस पद पर भी सच्चाई । साहस । सरलता । ईमानदारी । सादगी । देश प्रेम आदि सदगुण और सदाचार के मूर्तिमन्त स्वरूप थे । ऐसे महा मानव भले फिर थोड़े समय ही राज्य करें । पर 1 अनोखा प्रभाव छोड़ जाते हैं जनमानस पर ।

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Happy BirthDay Baapu 
भारत विरोधी फ़ेसबुक पेज " सेकुलर इंडिया " द्वारा गाँधीजी को जन्मदिन की बधाई ?
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