01 नवंबर 2012

पैसे दे दो नहीं तो मैं मर जाऊँगा


डेंगू का उपचार । जनहित में जारी । आजकल डेंगू 1 बड़ी समस्या के तौर पर उभरा है । जिससे कई लोगों की जान जा रही है । यह 1 ऐसा वायरल रोग है । जिसका मेडीकल चिकित्सा पद्धति में कोई इलाज नहीं है । परन्तु आयुर्वेद में इसका इलाज है । और वो इतना सरल और सस्ता है कि उसे कोई भी कर सकता है । तीवृ ज्वर । सर में तेज़ दर्द । आँखों के पीछे दर्द होना । उल्टियाँ लगना । त्वचा का सुखना । तथा खून के प्लेटलेट की मात्रा का तेज़ी से कम होना । डेंगू के कुछ लक्षण हैं । जिनका यदि समय रहते इलाज न किया जाए । तो रोगी की मृत्यु भी सकती है । यदि आपके किसी भी जानकार को यह रोग हुआ हो । और खून में प्लेटलेट की संख्या कम होती जा रही हो । तो चित्र में दिखाई गयी 4 चीज़ें रोगी को दें । 1 अनार जूस । 2 गेहूं घास रस । 3 पपीते के पत्तों का रस । 4 गिलोय । अमृता । अमरबेल सत्व ।
- अनार जूस तथा गेहूं घास रस नया खून बनाने तथा रोगी की रोग से लड़ने की शक्ति प्रदान करने के लिए है । अनार जूस आसानी से उपलब्ध है । यदि गेहूं घास रस ना मिले । तो रोगी को सेब का रस भी दिया जा सकता है ।
- पपीते के पत्तों का रस सबसे महत्वपूर्ण है । पपीते का पेड़ आसानी से मिल जाता है । उसकी ताज़ी पत्तियों का रस निकाल कर मरीज़ को दिन में 2 से 3 बार दें  । 1 दिन की खुराक के बाद ही प्लेटलेट की संख्या बढ़ने लगेगी ।
- गिलोय की बेल का सत्व मरीज़ को दिन में 2-3 बार दें । इससे खून में प्लेटलेट की संख्या बढती है । रोग से 

लड़ने की शक्ति बढती है । तथा कई रोगों का नाश होता है । यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले । तो किसी भी नजदीकी पतंजलि चिकित्सालय में जाकर " गिलोय घनवटी " ले आयें । जिसकी 1-1 गोली रोगी को दिन में 3 बार दें ।
यदि बुखार 1 दिन से ज्यादा रहे । तो खून की जांच अवश्य करवा लें । यदि रोगी बार बार उल्टी करे । तो सेब के रस में थोडा नीबू मिला कर रोगी को दें । उल्टियां बंद हो जाएंगी ।
यदि रोगी को अंग्रेजी दवाईयां दी जा रही है । तब भी यह चीज़ें रोगी को बिना किसी डर के दी जा सकती हैं । डेंगू जितना जल्दी पकड़ में आये । उतना जल्दी उपचार आसान हो जाता है । और रोग जल्दी ख़त्म होता है । रोगी के खान पान का विशेष ध्यान रखें । क्योंकि बिना खान पान कोई दवाई असर नहीं करती ।
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It could be a miracle cure for dengue. And the best part is you can make it at home.
The juice of the humble papaya leaf has been seen to arrest the destruction of platelets that has been the cause for so many deaths this dengue season. Ayurveda researchers have found that enzymes in the papaya leaf can fight a host of viral infections, not just dengue, and can help regenerate platelets and white blood cells.
Scores of patients have benefited from the papaya leaf juice, say doctors. Papaya has always been known to be good for the digestive system. Due to its rich vitamin and mineral content, it is a health freak's favourite. But its dengue -

fighting properties have only recently been discovered. Chymopapin and papin - enzymes in the papaya leaf - help revive platelet count, say experts. Source -  Times of India.
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बकरी का दूध । और मुठ्ठी भर चने । और गेहूं को भिगोकर 2 गिलास पानी में उबालें । जब आधा गिलास पानी बचे । तभी उसका सेबन करें । डेंगू के मरीज के लिय रामबाण इलाज है ये ।
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क्या सच में " आजादी बिना खड़ग बिना ढाल " के मिली ? कृपया निम्न तथ्यों को बहुत ही ध्यान से तथा मनन करते हुए पढ़िये ।
1 1942 के " भारत छोड़ो " आन्दोलन को ब्रिटिश सरकार कुछ ही हफ्तों में कुचल कर रख देती है ।
2 1945 में ब्रिटेन विश्व युद्ध में " विजयी " देश के रुप में उभरता है ।
3 ब्रिटेन न केवल इंफ़ाल कोहिमा सीमा पर आजाद हिन्द फौज को पराजित करता है । बल्कि जापानी सेना को बर्मा से भी निकाल बाहर करता है ।
4 इतना ही नहीं । ब्रिटेन और भी आगे बढ़कर सिंगापुर तक को वापस अपने कब्जे में लेता है ।
5 जाहिर है । इतना खून पसीना ब्रिटेन भारत को आजाद करने’ के लिए तो नहीं ही बहा रहा है । अर्थात उसका भारत से लेकर सिंगापुर तक अभी जमे रहने का इरादा है ।

6 फिर 1945 से 1946 के बीच ऐसा कौन सा चमत्कार होता है कि ब्रिटेन हड़बड़ी में भारत छोड़ने का निर्णय ले लेता है ? हमारे शिक्षण संस्थानों में आधुनिक भारत का जो इतिहास पढ़ाया जाता है । उसके पन्नों में सम्भवतः इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिलेगा । हम अपनी ओर से भी इसका उत्तर जानने की कोशिश नहीं करते । क्योंकि हम बचपन से ही सुनते आये हैं - दे दी हमें आजादी । बिना खडग बिना ढाल । साबरमती के सन्त तूने कर दिया कमाल । इससे आगे हम और कुछ जानना नहीं चाहते ।
प्रसंगवश - 1922 में असहयोग आन्दोलन को जारी रखने पर जो आजादी मिलती । उसका पूरा श्रेय गाँधीजी को जाता । मगर " चौरी चौरा " में ‘हिंसा’ होते ही उन्होंने अपना " अहिंसात्मक " आन्दोलन वापस ले लिया । जबकि उस वक्त अंग्रेज घुटने

टेकने ही वाले थे । दरअसल गाँधीजी " सिद्धांत " व " व्यवहार " में अन्तर नहीं रखने वाले महापुरूष हैं ? इसलिए उन्होंने यह फैसला लिया । हालाँकि 1 दूसरा रास्ता भी था कि गाँधीजी " स्वयं अपने आपको " इस आन्दोलन से अलग करते हुए इसकी कमान किसी और को सौंप देते । मगर यहाँ " अहिंसा का सिद्धान्त " भारी पड़ जाता है - देश की आजादी पर ।
यहाँ हम 1945-46 के घटनाकृमों पर 1 निगाह डालेंगे । और उस " चमत्कार " का पता लगायेंगे । जिसके कारण और भी सैकड़ों वर्षों तक भारत में जमे रहने की इच्छा रखने वाले अंग्रेजों को जल्दीबाजी में फैसला बदलकर भारत से जाना पड़ा । 
प्रसंगवश - जरा अंग्रेजों द्वारा भारत में किये गये " निर्माणों " पर नजर डालें - दिल्ली के " संसद भवन " से लेकर अण्डमान के " सेल्यूलर जेल " तक । हर निर्माण 500 से 1000 वर्षों तक कायम रहने एवं इस्तेमाल में लाये जाने के काबिल है ।
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Don't overlook HERBS and SPICES as powerful natural remedies. Before you grab for that bottle of pills, try some of these natural elixirs.
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मेरी समझ में नहीं आता । ये हिन्दू राष्ट्र है । या मुस्लिम ?  ये मुस्लिम हमारी ऐसी तैसी करते रहे । और हम जबाब दें । तो साम्प्रदायिक दंगे । जागो हिन्दू जागो ।
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A Very Touchy Thought - There are many people . who are Ready to cry when You Die. But The one who is Made for You, Is the one who is ready to die whenever You cry .
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Who likes to drink herbal tea ? They can be SO powerful for health. Here are some of the best ones. Do you have any to add ? I am a huge fan of Pau D' Arco for candida.
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गांधी संत या कंस ? आपसे निवेदन है कि इसे पहले पढें । फिर बहस करें । पाकिस्तान से दिल्ली की तरफ जो रेलगाड़ियां आ रही थीं । उनमें हिन्दू इस प्रकार बैठे थे । जैसे माल की बोरियां 1 के ऊपर 1 रखी जाती हैं । अन्दर ज्यादातर मरे हुए ही थे । गला कटे हुए । रेलगाङी की छत पर पर बहुत से लोग बैठे हुए थे ।  डिब्बों के अन्दर सिर्फ सांस लेने भर की जगह बाकी थी । बैलगाड़ियां ट्रक हिन्दुओं से भरे हुए थे । 

रेलगाड़ियों पर लिखा हुआ था - आज़ादी का तोहफा ।
रेलगाड़ी में जो लाशें भरी हुई थी । उनकी हालत कुछ ऐसी थी कि उनको उठाना मुश्किल था । दिल्ली पुलिस को फावड़ें में उन लाशों को भरकर उठाना पड़ा । ट्रक में भरकर किसी निर्जन स्थान पर ले जाकर  उन पर पेट्रोल के फवारे मारकर उन लाशों को जलाना पड़ा । इतनी विकट हालत थी । उन मृत देहों की भयानक बदबू । सियालकोट से खबरें आ रही थी कि वहाँ से हिन्दुओं को निकाला जा रहा है । उनके घर । उनकी खेती । पैसा टका । सोना चाँदी । बर्तन । सब मुसलमानों ने अपने कब्जे में ले लिए थे । मुस्लिम लीग ने सिवाय कपड़ों के कुछ भी ले जाने पर रोक लगा दी थी । किसी भी गाडी पर हल्ला करके हाथ को लगे उतनी महिलाओं बच्चियों

को भगाया गया । बलात्कार किये बिना 1 भी हिन्दू स्त्री वहां से वापस नहीं आ सकती थी । बलात्कार किये बिना ? जो स्त्रियाँ वहाँ से जिन्दा वापस आई । वो अपनी वैद्यकीय जांच करवाने से डर रही थी । डाक्टर ने पूछा - क्यों ? 
उन महिलाओं ने जवाब दिया - हम आपको क्या बतायें । हमें क्या हुआ हैं ? हम पर कितने लोगों ने बलात्कार किये हैं । हमें भी पता नहीं है । 
उनके सारे श रीर पर चाकुओं के घाव थे - आज़ादी का तोहफा ?
जिन स्थानों से लोगों ने जाने से मना कर दिया । उन स्थानों पर हिन्दू स्त्रियों की यात्रा ( धिंड ) निकाली गयी । उनको बाज़ार सजाकर बोलियाँ लगायी गयी । 1947 के बाद दिल्ली में 4 00 000 हिन्दू निर्वासित आये । और इन हिन्दुओं को जिस हाल में यहाँ आना पड़ा था । उसके बावजूद पाकिस्तान को 55

करोड़ रुपये देने ही चाहिए । ऐसा महात्मा जी का आग्रह था ।
क्योकि 1 तिहाई भारत के टुकडे हुए हैं । तो भारत के खजाने का 1 तिहाई हिस्सा पाकिस्तान को मिलना चाहिए था । विधि मंडल ने विरोध किया - पैसा नहीं देगे ।
और फिर बिरला भवन के पटांगन में महात्मा जी अनशन पर बैठ गए - पैसे दो । नहीं तो मैं मर जाऊँगा ।
1 तरफ अपने मुँह से ये कहने वाले महात्मा जी कि - हिंसा उनको पसंद नहीं है । दूसरी तरफ जो हिंसा कर रहे थे । उनके लिए अनशन पर बैठ गये । दिल्ली में हिन्दू निर्वासितों के रहने की कोई व्यवस्था नहीं थी । इससे ज्यादा बुरी बात ये थी कि दिल्ली में खाली पड़ी मस्जिदों में हिन्दुओं ने शरण ली । तब बिरला भवन से महात्मा जी ने भाषण में कहा - दिल्ली पुलिस को मेरा आदेश है । मस्जिद जैसी चीजों पर हिन्दुओं का कोई दाबा नहीं रहना चाहिए । निर्वासितों को बाहर निकालकर मस्जिदें खाली करें । क्योंकि महात्मा जी की दृष्टि में जान सिर्फ मुसलमानों में थी । हिन्दुओं में नहीं । जनवरी की कडकडाती ठंड में हिन्दू महिलाओं और छोटे छोटे बच्चों को हाथ पकड़कर पुलिस

ने मस्जिद के बाहर निकाला ।
गटर के किनारे रहो । लेकिन छत के नीचे नहीं । क्योंकि - तुम हिन्दू हो । 4 0 00 000 हिन्दू भारत में आये थे । ये सोचकर कि - ये भारत हमारा है । ये सब निर्वासित गांधीजी से मिलने बिरला भवन जाते थे । तब गांधीजी माइक पर से कहते थे -  क्यों आये यहाँ ? अपने घर द्वार बेचकर । वहीं पर अहिंसात्मक प्रतिकार करके क्यों नहीं रहे ? यही अपराध हुआ तुमसे । अभी भी वही वापस जाओ । और ये महात्मा किस आशा पर पाकिस्तान को 55 करोड़ रुपये देने निकले थे ?
सरदार पटेल ने कहा - ठीक है । अगर भाई को इस्टेट में से हिस्सा देना पड़ता हैं । तो कर्ज की रकम का हिस्सा भी चुकाना पड़ता है । गाँधी जी ने कहा - बराबर है । 
पटेल जी ने कहा - फिर दुसरे महा युद्ध के समय अपने देश ने 110 करोड़ रुपये कर्ज के रूप में खड़े किये थे । अब उसका 1 तृतीय भाग पाकिस्तान को देने को कहिये । आप तो बैरिस्टर है ? आपको कायदा पता है ?
गांधीजी ने कहा - नहीं ये नहीं होगा ।  अब आप ही बताये - कंस या संत ? जय महाकाल ।
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साधक किसे कहते हैं ? धर्म प्रसार की सेवा के मध्य ऐसे अनेक प्रसंग हुए । जिससे हमें भान हुआ कि मात्र गुरु मंत्र लेने से साधकत्व का विकास नहीं होता । जब तक हमारे अंदर त्याग की प्रवृत्ति का विकास न हो । तो हमें अपने को साधक समझने का भूल नहीं करना चाहिए । इस मुद्दे के अंतर्गत हम आपके समक्ष ऐसे कुछ प्रसंग प्रस्तुत करेंगे । जिससे आपको साधक में कौन से गुण होने चाहिए ? और कौन से अवगुण नहीं होने चाहिए । यह बोध होगा । 1 शहर में 1 साधक को उनके घर के कुछ सदस्यों से विरोध है । और वे उन्हें प्रसार साहित्य घर पर नहीं रखने देते हैं । मैंने 1 अन्य साधक को इसके बारे में बताया । और कहा - यदि संभव हो । तो आप उन साहित्य को अपने घर पर रख लें । जिससे उस साधक की भी साधना होती रहे । उस साधक का घर अत्यधिक बड़ा है । और वे दोनों पति पत्नी ही वहाँ रहते हैं । परंतु जैसे ही मैंने यह कहा । ऐसा लगा । जैसे उन्हें साँप सूंघ गया हो । वे कुछ क्षण के लिए कुछ नहीं बोले । मैं उन्हें सहज करते हुए किसी और विषय पर बात करने लगी । प्रसार साहित्य में ग्रंथ फलक इत्यादि थे । उन सबसे चैतन्य निकलता है । और उससे वास्तु की शुद्धि होती है । यह जानते हुए भी 1 कोठी समान घर में उसके लिए स्थान न देने वाले साधक ईश्वर प्राप्ति हेतु अपना सर्वस्व कभी अर्पण कर पाएंगे क्या ? और ऐसे साधक पर ईश्वर अपनी कृपा क्यों 

बरसाएँगे ? आप ही सोचें । क्या इसे साधकत्व कहते हैं ? 
ऐसे ही दिल्ली में 1 साधक के घर मैं अपना 1 समान रख अलीगढ़ गयी थी । और उसे पुनः 3 दिन पश्चात लेकर दूसरे शहर जाने वाली थी । कुछ कारणों से मैं उनके यहाँ से वह समान 5 दिन तक नहीं ले पायी । इस बीच उन्होंने मुझे 2 बार संपर्क किया कि - मैं अपना सामान कब ले जाऊँगी । और पुनः अपनी 1 संबंधी से मुझे कहलवाया कि मैं सामान कब ले जाऊँगी । अपने घर 1 साधक की 1 पेटी कुछ दिन नहीं रख सकने वाले । अपने को साधक कहने योग्य समझते हैं । क्या इस बारे वे स्वयं अंतर्मुख होकर सोचें ? ये सब साधक किसी न किसी संस्था से जुड़कर और किसी गुरु से दीक्षा लेकर अनेक वर्ष से साधनारत हैं । अनेक वर्ष साधना कर यदि इतना छोटा सा त्याग नहीं कर सकते हैं । तो ईश्वर को क्या पड़ी है कि वे अपनी कृपा उन पर बरसाएँगे । तनुजा ठाकुर ।
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केजरीवाल गैंग के लठैतों ( गुंडों ) की ट्रेनिंग की खबर की पुष्टि के लिए क्लिक करें । ये लिंक ।
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/16929911.cms
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I am alone in spite of love.  In spite of all I take and give In spite of all your tenderness . Sometimes I am not glad to live . I am alone, as though I stood On the highest peak of the tired gray world . About me only swirling snow . Above me . endless space unfurled . With earth hidden and heaven hidden . And only my own spirit's pride . To keep me from the peace of those . Who are not lonely, having died  ~ Sara Teasdale
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क्या राहुल गाँधी में इतनी हिम्मत नहीं है कि वो ये कह सके कि - हम किसी भी जांच के लिये तैयार हैं ।
जबकि इसके उलट गडकरी पर आरोप लगते ही उन्होंने कहा कि - हम किसी भी जांच के लिये तैयार हैं । और सरकार जिससे चाहे । जांच करवा ले । क्या कभी किसी कांग्रेसी की जांच होगी ? कांग्रेस के राज में ।
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अगर आप आज तक कभी हबाई जहाज में नहीं बैठे । और जल्द ही बैठने वाले हैं । या आपको उम्मीद है कि कभी आप बैठेंगे । तो इस वीडियो को ध्यान से देखें । वीडियो बनाने वाले ने मजाक मजाक में बहुत सारी बातें बता दी । जो हमें जरुर जाननी चाहिये । और जब हम पहली बार बैठते हैं । तो कुछ डर के कारण । कुछ झिझक के कारण । तो कुछ खुशी के कारण । बहुत सी गलतिया करते हैं । सबसे पहले तो हम गलत सीट पर बैठ जाते हैं । चलिये । इस वीडियो से सीख लें । बाकी बातें । राज भाटिया ।
https://www.youtube.com/watch?feature=player_embedded&v=cBlRbrB_Gnc#!
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3 काले दोस्त जा रहे थे । रास्ते में उन्हें 1 परी मिली । उसने तीनों को  1-1 वरदान offer किया ।
1st - मुझे दूध जितना गोरा बना दो । 2nd - मुझे भी उतना ही गोरा बना दो । वो दोनों गोरे हो गये । 
3rd - हा हा हा हा इन सबको पहले जैसा काला बना दो । तीनों फ़िर से काले हो गये ।
Moral - कुछ दोस्त कमीने ही रहते हैं । 
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1 पिता अपने बेटे को भारत की गरीबी दिखाने के लिये 1 गाँव में ले गया । ग्राम भृमण के बाद पिता ने गरीबों के बारे में पूछा । बेटा बोला - हमारे पास 1 कुत्ता है । और ग्रामीणों के पास 4-4। हमारे पास छोटा सा स्वीमिँग पूल है । और उनके पास लम्बी नदी । हमारे पास बल्ब ट्रयूब लाइट है । और उनके पास सितारे । हमारे पास जमीन का 1 छोटा सा टूकड़ा है । और उनके पास बड़ा । हम खुद अपना काम नहीं कर पाते । हमारे पास काम करने के लिये नौकर हैं । और वो अपना काम भी करते हैं । दूसरों का भी ।
हम अन्न खाते हैं । और वो उगाते हैं । हमारे पास सुरक्षा के लिये मकान है । और उनके पास मित्र । पिता निरुत्तर था । तब बेटा बोला - हम कितने गरीब हैं । ये दिखाने के लिये धन्यवाद पापा ।
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Did you know ? Drinking water at the correct time Maximizes its effectiveness on the Human body .

1 glasses of water after waking up - helps activate internal organs
1 glass of water 30 minutes before a meal -helps digestion
1glass of water before taking a bath - helps lower blood pressure
1 glass of water before going to bed - avoids stroke or heart attack
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शशि थरूर और सुनन्दा पुष्कर के इस फ़ोटो का लिंक ।
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=435875629809617&set=a.370607759669738.87990.370597503004097&type=1&theater
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अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का पर्याय और बेहद शक्तिशाली माध्यम इंटरनेट हमें अनेक उपयोगी जानकारियां और विभिन्न ज्वलंत सामयिक मुद्दों पर परस्पर विचारों को बांटने और जानने का 1 सशक्त मंच देता है । अतः बिना किसी राग द्वेष के किसी भी सहमति या असहमति के बजाय ऐसे विवरणों को लिंक सहित अक्सर प्रकाशित करने का ( मेरा ) उद्देश्य आपको महत्वपूर्ण जानकारी और ऐसे लिंकों से परिचित कराना ही है । क्योंकि ये 1 बेहद लोकप्रिय ब्लाग है । और तब इस तरह के बेव पेजों से अनजान और नेट के नये नये प्रयोगकर्ताओं हेतु ऐसा लिंक सहित विवरण बेहद उपयोगी साबित होता है । मुझे नहीं लगता । इसमें कोई आपत्ति वाली बात हो सकती है । फ़िर भी आप ऐसा कुछ सोचते हैं । तो मुझे कमेंट या मेल द्वारा बतायें - राजीव कुलश्रेष्ठ ।
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