05 नवंबर 2012

क्या है ये - सर्व धर्म समभाव ?


2 Nov 2012 को हिन्दू त्यौहार करवा चौथ का दिन था । अचानक मेरे कमरे की पुताई का कार्यकृम बन गया । पुताई करने वाले मजदूरों के आगमन के साथ ही ऐसा लगा कि - घर में औरंगजेब या तैमूर लंग का आकृमण हुआ हो । और घर का सुव्यवस्थित सामान लूटने की तर्ज पर अव्यवस्थित होकर बिखर गया । मैंने सोचा - अब क्या करना चाहिये ? क्या मुझे आराम से सोते हुये दिन बिताना चाहिये । नहीं कर सकता । मैंने खुद..खुद को ही जबाब दिया । U.P में 1 कहावत है । डेढ भुट्टा और टीले पर खलिहान । मतलब हमारे घर में गिने चुने 3 लोग । अतः मैं समझ गया । आज का दिन जागते हुये बैठकर ही गुजारना होगा । मुझे कुछ करना नहीं है । केवल बाहरी हलचल को देखते रहना है । अतः मैंने TV के सामने बैठना ठीक समझा । TV और BB दोनों ही बृह्मचारी साधुओं के लिये tension जैसी है । पर आज इसी TV tension के साथ रहना था । अतः चैनल बदलने लगा । आस्था और संस्कार चैनल पर किसी स्वामी चिदानन्द सरस्वती जन्म समारोह का LIVE प्रसारण हो रहा था । फ़ेमस TV साधु हरिद्वार में बङे अजीव से गंगा जल के बीच बने मंच पर विराजमान थे । बालीवुड फ़िल्मी संत श्री श्री अनिल कपूर एकदम चिदानन्द की बगल में बैठे थे । नाम गिनाने से कोई फ़ायदा नहीं । वो सभी थे । जिनको आप रोज ही देखते होगे । TV आस्था पर TV  संस्कार पर ? कुछ

मुस्लिम संत भी थे । मुझे याद आया । दीक्षा आदि कुछ - भक्त TV चैनलों.. से मुझे कई बार फ़ोन आया - महाराज जी ( उनका मतलब मेरे गुरुदेव ) का कोई ( कथा भागवत ) प्रोग्रेम आदि हो । तो आप  हमारे यहाँ से प्रसारित करायें । हमारा चैनल विश्व के इतने देशों में ? देखा जाता है । वे सोचते थे कि - मैं निरा बाबा आदमी । शायद कार्यकृम प्रसारण के तरीके यानी TIME SLOT SYSTEM के बारे में नहीं जानता होऊँगा । अतः कुछ झिझक के साथ बोले - यह 1000 रुपये प्रति मिनट होगा । लेकिन लगातार सेवायें लेने और सम्बंध बने रहने पर यह UP  DOWN होकर एडजस्ट भी हो जाता है । मैंने कहा - जिस दिन भी श्री महाराज जी भागवत कथा कहेंगे । मेरा वादा है । मैं आपके यहाँ से ही प्रसारण कराऊँगा । यह सब फ़ालतू में नहीं बता रहा । 1000 रुपये प्रति मिनट वीडियो दिखाने का मूल्य था । यदि LIVE प्रसारण का तामझाम लगता है । तव कीमत अलग ही होती है । मैं प्रसारण देख रहा था । भगवान के प्रत्यक्ष सम्पर्की और आपका भी सरल सम्प्पर्क कराने वाले ? तमाम दिग्गज प्रतिनिधि मंचासीन थे । और  दिये गये 5-10 मिनट में कुछ बोल रहे थे । बीच बीच में उनके बिजी होने का जिक्र भी होता । फ़लाने महाराज कहीं कार्यकृम में जाने की जल्दी में है । अतः अभी उनके स्थान पर इनको सुन लीजिये । क्या मजेदार बात है ना । संत समागम में भी व्यवसायिक व्यस्तता । कार्यकृम 

एकदम बोरिंग सा था । और कतई प्रभावित नहीं कर रहा था । लेकिन इसके बजाय मैं उस पर होने वाले ( महा ) खर्च का अनुमान लगा रहा था । ये पैसा क्यों खर्च हो रहा है ? और साधुओं के पास आता कहाँ से है ? किसी अन्ना की । किसी केजरीवाल की इस पर कभी निगाह नहीं जाती । आपने कभी इसके रिकार्ड निकलवाये ? इन कार्यकृमों का उद्देश्य क्या है ?
खैर..ये तो मैंने सिर्फ़ 1 LIVE उदाहरण दिया है । अन्य का गुणा भाग आप स्वयं लगायें । पर इसको भी छोङिये । इस जल सभा में बारबार " सर्व धर्म समभाव " का उल्लेख ( या नारा ) किया जा रहा था । और ये शब्द मेरे दिलो दिमाग पर हथौङे सा चोट कर रहा था । क्या है ये - सर्व धर्म समभाव ? यकीन मानिये । मुझे अभी तक पता नहीं चला । कितनी बेशर्मी से ये इतना बङा झूठ विश्व के सामने वो भी LIVE बोल

रहे हैं । सर्व धर्म ? क्या कोई मुझे बता सकता है । इसका मतलब क्या है ? कौन से सब धर्म ? गौर करें । क्या इसका मतलब ये नहीं हुआ कि - इनका और उनका धर्म बिज्ञान अलग है ? पुर्जे अलग हैं ? यंत्र अलग हैं ? तरीके अलग हैं ? खुदा अलग है ? GOD अलग है ? भगवान अलग है ? कहाँ है - सर्व धर्म ? किस मूर्ख ने किया - ये शब्द संयोजन ? शर्म नहीं आती । विभिन्न देश काल और व्यक्तियों द्वारा संकृमित तरीके से आरोपित जातिगत रीति रिवाजों को धर्म का नाम देते हो । मैंने कई बार कहा है । अंग्रेजी भाषी देशो में यदि बिल्ली को CAT कहते हैं । तो वह कुतिया या बन्दर नहीं हो जाती । आप फ़िर से गौर करें । बङा घातक हत्यारा और खतरनाक शब्द है ये - सर्व धर्म ? अगर कोई मुसलमान उल्टे तवे पर रोटी पकाता है । तब भी वह रोटी ही है । और हिन्दू सीधे तवे पर । तब भी । फ़िर बोलो - 2 रोटी । हिन्दू रोटी । मुसलमान रोटी । सर्व रोटी समभाव सम्मेलन । जरा और 

बारीकी से गौर करें । यदि किसी अंग्रेज देश में हिन्दी अंग्रेजी शब्दकोश छापा जाय । तो क्या GOD का शब्दार्थ - हिन्दुओं का भगवान लिखा जाता है ? या उर्दू हिन्दी शब्दकोश में अल्लाह के आगे - हिन्दुओं का परमात्मा..ऐसा लिखा जाता है ? और इसीलिये मैं कहता हूँ । बङा खतरनाक शब्द है ये - सर्व धर्म । अलग अलग लोगों के जातिगत रीति रिवाजों को । किसी वर्ग के विशेष आचरण को । अलग रहन सहन । अलग निर्माण प्रकार को । किसी कबीलाई सभ्यता को । धर्म किस आधार पर कहते हो ? क्या वाकई मूल धर्म अनेक हैं ? तब ये अनेक का विष क्यों बो रहे हो । मैं 1 बार फ़िर से चैलेंज करता हूँ । जिनको तुम अलग अलग धर्म कहते हो । वे इसी एकमात्र सत्य सनातन धर्म समुद्र के छींटे मात्र हैं । सुना आपने - सिर्फ़ छींटे । कोई जल या गढ्ढा या जलाशय तक नहीं । फ़िर क्यों नहीं

तुम अनेकों को सिर्फ़ 1 में ले आते हो । शर्म करो । नासमझ जनता तुमसे सत्य जानने समझने की आशा करती है । और तुम उसे अंधकार में ले जाते हो । सर्व धर्म समभाव का बेसुरा राग अलापते हो । और मैं फ़िर से कहता हूँ । यदि तुम अपने किसी गणित और भावना ? के आधार पर भी - सर्व धर्म समभाव की मूर्खतापूर्ण बात करते हो । तो भी ये सम्भव नहीं । क्योंकि कोई भी असली हिन्दू कभी बकरा काट कर बकरीद नहीं मनायेगा । कोई मुसलमान कभी मूर्ति और गाय पूजा नहीं करेगा । ईसाई आराम से सुअर का मांस खायेगा । सोचिये । ये धार्मिक बधाईयां । हिन्दू - ईद मुबारक तुमने गाय बकरे काटे । अल्लाह तुम्हें जन्नत बख्शे । मुसलमान - दीवाली मुबारक भाईजान । ये लो मेरी तरफ़ से मटन  बिरियानी । भगवान को भी प्रसाद चढाना । क्या संभव है । फ़िर कैसा - सर्व धर्म समभाव ?

- मैं ठीक से नहीं कह सकता कि ये कार्यकृम मैंने 2 Nov 2012 को ही देखा हो । क्योंकि इसके अगले दो तीन दिन भी श्री महाराज जी के आकस्मिक आगरा आगमन से मुझे कुछ समय आगंतुकों के साथ TV  के सामने बैठना पङा था । हो सकता है । उस समय देखा हो । मैंने कई बार स्पष्ट किया है । मुझे अक्सर घटना और व्यक्ति याद रहता है । दिन और समय कभी नहीं । मैंने पुष्टि हेतु Google में भी सर्च किया । पर जन्म दिनांक मिली नहीं ।
http://www.parmarth.com/

जैसा कि हमेशा ही होता है । समयाभाव । पर इसी में और भी ।
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