03 नवंबर 2012

अरे ये वही करेंगे जो बाबर औरंगजेब ने किया ?


जानिये । अमरीकी बाबरी मस्जिद की अनोखी कहानी । समस्त हिंदु समाज । धर्म गुरु । और सारे हिंदुत्व वादी संगठनों ने 1200 वर्षों के अनुभव के उपरांत भी इस्लाम को समझने में बहुत बड़ी भूल की है । विश्व के जिन देशो में इस्लाम की तलवार पहुँची । उन दुर्भाग्यशाली देशों में हिंदु और उनका भारत भी है । परन्तु जैसे तुर्क । मुगल इस्लाम के अरब मजहबी पंजो में समाप्त हो गए । जैसे - सीरिया । इजिप्त । इरान अपनी संस्कृति समेत नष्ट हो गए । वैसा भारत के बारे में नही हुआ ।
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इसका कारण है । हिंदु राष्ट्र की वीरता । साहस । और बलिदानी वृत्ति ( दुर्भाग्य से गाँधी नेहरु की विषैली छाया । इस वीरता को दीमक के समान आज चाट रही है ) 
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पृथ्वीराज चौहान की हत्या के उपरांत 300 वर्षों तक मुस्लिम सत्ता उत्तर भारत में पनपती रही । आगे दक्षिण भारत पर भी ये मुस्लिम सत्ता का गिद्ध टूट पड़ा ( अलाउद्दीन खिलजी ने दक्षिण भारत में लूटपाट और मारकाट के अभियान 1306-07 के माध्यम से कुछ समय के लिए दक्षिण भारत को अपने अधीन किया ) इस भयानक काल में हिंदु समाज लहूलुहान होकर भी लड़ रहा था । पर हारा नही था । ऐसी भीषण परिस्थित में सिख पंथ की स्थापना हुई । छत्रपति शिवाजी महाराज और गुरु गोविन्द सिंह जैसे शूर पुरुषों के वीर आवेश में सारा हिंदु समाज इस्लामी आकृमण के आगे एक मुख से खड़ा हुआ । इतना ही नहीं । उस इस्लामी आक्रामकों को अपनी तलवार का पानी पिला कर इस्लामी सत्ता को भारत से उखाड फेंका । 17वीं शताब्दी हिंदूओं के वीरता की शताब्दी 

थी । इस शताब्दी ने 1 से 1 हिंदु वीरों को इस्लामी सत्ता को भारत की भूमि से उखाड़ते देखा । इस्लाम की इस लज्जास्पद हार का वर्णन स्वय 1 मुल्ले ने अपने मुसद्दस ( कविता का 1 प्रकार ) में लिखा है । उसमें 19वी शताब्दी का वो मौलाना लिखता है ।
वो दीन ए हिजाज का बेबाक बेडा । निशान जिसका अक्साई आलम में पंहुचा ।
गए मिस्त्र इरान गए यूनान । किये पस्सी पार जिसने सातों समंदर ।
आखिर डूबा दरियाए गंगा में आकर ।
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अर्थ - इस्लाम की 1 विशाल नौका अरब भूमि से निकली । जिस पर इस्लाम का झंडा लहरा रहा था । 1 के बाद 1

देश इस इस्लाम रूपी अरब नौका ने जीते । इरान । मिस्त्र ( इजिप्त ) यूनान ( ग्रीस ) और विश्व की अनेक सभ्यता इस इस्लामी नौका ने समाप्त कर दी । जिस इस्लामी नौका ने विश्व के सातों समंदर पार किये । वो अंतत गंगा नदी में आकर डूबी । आज आपको ये सुनकर आश्चर्य होगा कि मिस्त्र ( इजिप्त ) इरान या यूनान नामक संस्कृति परंपरा अमुस्लिम Non Muslim थी । पिरामिड बनाने वाले फ़ारो मुस्लिम नही थे । उनकी पूरी प्रजाति मृत्यु की यातनायें देकर मुस्लिम बनाई गई । वही कथा इरान की । इराक की भी है । इन सब देशों का आज अपने आपमें कोई अस्तित्व नहीं । ये सारे के सारे अरब राष्ट्रों के उपग्रह बन चुके हैं । जिस अरब इस्लामी सत्ता ने उनके पूर्वजों को छल बल से मुस्लिम बनाया । उस अरब भूमि के आगे ये लोग आज दिन में 5 बार झुक कर माथा रगडते हैं । ताजा उदाहरण पाकिस्तान का ही ले लो । ये 

अपने आपको पाकिस्तानी कहने वाले मुस्लिम । या फिर स्वयं को पाकिस्तानी समझने वाले । भारत के मुस्लिम कौन हैं ? हम पाकिस्तान की सेना में झाक कर देखते हैं । तो कौन हैं । उनके सैनिक ? उत्तर मिलेगा - गुजर । कुशवाह । राजपूत ( लश्कर के तोइबा का सेनापति कुशवाह राजपूत मुस्लिम है )  डोगरा । जुन्जुआ राजपूत । इतिहास बताता है कि - कुशवाह राजपूत श्रीराम के पुत्र कुश के वंशज हैं । तथा जुन्जुआ राजपूत वीर अर्जुन के । किन्तु ये सब पाकिस्तानी क्या स्वयं को राम के वंशज मानते हैं ?
http://en.wikipedia.org/wiki/Janjua#Early_history 
बिलकुल नहीं । वे सब आज अपने आपको अरब समझते हैं । क्या इजिप्त का फ़ारो । तथा राम । अर्जुन या

कृष्ण अरब थे ? इस अरब साम्राज्यवाद को धर्म समझने की भयंकर भूल सारे हिंदू कर चुके हैं । आज भी कर रहे हैं । क्या आप जानते हैं । जब अरब इस्लामी सेना इन पराभूत राष्ट्रों पर आक्रमण करती थी । तो कुरआन के अनुसार उनके मान बिन्दुओं को नष्ट किया जाता था ।  ये सब इस्लामी साहित्य में सिखाया गया है कि - काफिरों को इस्लाम की शक्ति दिखाओ । जिससे भय चकित होकर वे इस्लाम को स्वीकार कर लें । इसलिए जब इन बर्बरता पूर्ण आक्रामकों ने भारत पर आकृमण किया । तो भारतीयों के सामर्थ्य और शक्ति केंद्र ( जो उस समय मंदिर थे ) ध्वस्त कर दिये । राम मंदिर का ही उदाहरण देख लो । जब बाबर ने राम मंदिर पर आकृमण किया । तो उसे ध्वस्त कर दिया । फिर कहा ये जाता है कि - उस मलबे से मस्जिद खड़ी की गई । यही मथुरा के कृष्ण जन्म भूमि । और सोमनाथ मंदिर के बारे में भी हुआ । क्या आप इस कृम को ध्यान से देख रहे हैं ? जो पहले उस शक्ति केंद्र को नष्ट करके । उस पर उस अरब

साम्राज्यवाद का केद्र ( मस्जिद ) खड़ा करते थे । हमें मुर्ख बनाने के लिए गाँधी नेहरु के सेकुलर ? हमें बताते हैं कि - कुरआन पवित्र पुस्तक है ? उसमें सब शांति और भाईचारे का संदेश दिया है ।
ये हैं । कुरान के कुछ शांति संदेश ।
- O ye who believe ! Murder those of the disbelievers ( kafirs )  and let them find harshness in you ( Repentance 123 )
- Humiliate the non Muslims to such an extent that they surrender and pay tribute ( Repentance 29 )
- Certainly God is an enemy to the unbelievers ( kafirs ) (  The Cow 90 )
- Do not let non Muslims enter mosques. They will go to hell ( Repentance 17 )

- O ye who believe ! The non Muslims are unclean. So let them not come near the Inviolable Place of Worship. ( Repentance  28 )
- I ( Allah ) shall cast terror into the hearts of the unbelievers. Strike them above the necks, smite their finger tips ( Qur’an 8.12 ) 
यहाँ आप कुरआन देख सकते हैं ।
http://www.usc.edu/org/cmje/religious-texts/quran/verses/002-qmt.php#002.216 
सम्पूर्ण कुरआन में 6236 आयतें ( वचन ) हैं । जिसमें 3930 आयतों में " काफ़िर " शब्द आता है । जो उन्हें

क़त्ल करने और उनकी स्त्रियों को लूटने अपमानित करने हेतु प्रयोग किया गया है । इसका अर्थ है कि कुरआन का 63% भाग अमुस्लिम Non Muslim के विरुद्ध द्वेष सिखाता है । काफिरों का सर्वनाश करना ही अल्ला का कार्य है ? यही जड है । बाबरी मस्जिद । और भारत की मुस्लिम समस्या की । 
क्या आप जानते हैं । ऐसी ही 1 बाबरी मस्जिद आज अमरीका में खड़ी होने वाली है । इसकी कहानी बड़ी रोचक है । हम सब तो जानते हैं कि इस्लामी आतंकवादियों ने 9 । 11 को अमरीका के शक्ति केद्रों अर्थात वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर आकृमण करके उन टावरों को ध्वस्त कर दिया । जहाँ ये टावर खड़े थे । उस स्थान को आज शून्य स्थान Ground Zero कहा जाता है । टावर गिरने से यहाँ पर 1 बड़ा ग्राउंड जैसा भू भाग

निर्माण हो चूका है । अब इस आश्चर्य जनक सत्य को देखिये । पिछले कुछ वर्षों में अरब देश के इस्लामी संगठन ने टावरों के मलबे को खरीदने की मांग की थी । लोग आश्चर्य में पड़ गए । इस मलबे का क्या करेंगे - ये अरब ? उत्तर आया । इस मलबे के साथ । हम शून्य 0 स्थान को भी मुँह बोले भाव में खरीदना चाहते हैं । फिर तो अमरीकी और भी चौके । मलबा और शून्य 0 स्थल की भूमि लेकर क्या करोगे ? 
क्या आप उत्तर जान गये ? वही करेंगे । जो बाबर और औरंगजेब ने किया ? मलबे से मंदिर के स्थल पर मस्जिद निर्माण । वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसे अमरीकी शक्ति केंद्र को नष्ट करके वहाँ इस्लाम की ताकत खड़ी करने के लिए ( मस्जिद के रूप में ) इस घटना से अमरीकियो में इस्लाम विरोधी ज्वर भड़का । जिसके चलते मलबे को अमरीकी नौ सेना

ने खरीद लिया । जिससे न्यूयार्क नामक युद्ध नौका खड़ी की गई ( जिसे आप चित्र में देख सकते हैं ) मलबा तो गया हाथ से । परन्तु Ground Zero  शून्य 0 स्थल की भूमि नहीं छोडेंगे  । ये सोचकर सारे इस्लामी संगठन मुँह बोले मूल्य पर उस भूमि को खरीदना चाहते हैं । अमरीकी अपनी प्रतिष्ठा के लिए फिर 1 बार खड़े हो गए । और शेखों के इस्लामी संगठनों को कुछ समय के लिए तो आज चुप बैठना पड़ा है । पर इन संगठनों ने मस्जिद निर्माण का अपना सपना आज भी छोड़ा नही है । ये घटना हमें बहुत कुछ सिखाती है । जो इतिहास भारत में 

घट चूका है । वो आज विश्व के किसी दूसरे कोने में जैसे का तैसा घटते हुए हम देख रहे हैं । तब क्या सीखा हमने ? अब भी हम इस इतिहास से कुछ भी नहीं सीखना चाहेंगे ? या फिर मूर्खो के जैसे विषैले अरब साम्राज्यवाद को धर्म कह कर धर्म संकल्पना को अपमानित करेंगे ?
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डा सुबृह्मनियम स्वामी ने ट्विटर पर बताया - उन्हें कुछ उच्च अधिकारियों ने बताया कि सोशल मीडिया के

दवाब के कारण ही बिकी हुई कांग्रेसी मीडिया ने डा स्वामी के - सोनिया । राहुल गाँधी भृष्टाचार के खुलासे को कवरेज दिया । उन्होंने सोशल मीडिया के सभी देशभक्तों को धन्यवाद कहा ।
नोट - डा सुबृह्मनियम स्वामी के  27 OCT 2012 के प्रेस कांफ्रेंस को 1 भी रास्ट्रीय TV चैनल या न्यूज़ पेपर ने कवर नहीं किया था । इसलिए सोशल मीडिया पर देशभक्तों ने आन्दोलन किया । ताकि 1 नवम्बर के प्रेस कांफ्रेंस को बिकी हुई मीडिया में थोडा कवरेज मिले ।
जरुर देखें । और शेयर करें । यह दोनों वीडियो ।
डॉ स्वामी 28 OCT प्रेस विज्ञप्ति - http://www.youtube.com/watch?v=RfQohTipfkg
डॉ स्वामी नवम्बर 1 प्रेस विज्ञप्ति - http://www.youtube.com/watch?v=vV8DxIyUMIk
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=554296297919611&set=a.402583873090855.113599.256288937720350&type=1&theater
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जीवन में कुछ खोना पड़े । तो ये 2 लाइन जरुर याद रखियेगा ।
जो खोया है । उसका ग़म नहीं । लेकिन जो पाया है । वो भी किसी से कम नहीं ।
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We yearn for our independence not just so we can go where we want to and speak up when we want to, though that feels good. But that's child's play and ego driven . The deeper part of us yearns to create, to fulfill whatever it is we were born to do and that requires we take charge of our own power of choice . Meaning and purpose is driven by the engine of choice, make no mistake about that ~ Caroline Myss
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