06 जून 2013

श्री महाराज जी दिल्ली में

आज जहाँ तमाम धर्मगुरु किसी भी साधारण जीव को जैसे जादू से (सिर्फ़ उनकी शिष्यता ग्रहण कर लेने पर ही) सीधे सतलोक पहुँचाने का दावा करते हैं तो कोई कोई वाणी के शब्द ‘सतनाम’ को ही महामन्त्र या कबीर साहब का ज्ञान या सन्तमत ज्ञान बताते हैं ।
कोई दावा कर रहा है, कबीर ने सिर्फ़ उसी को जीवों को मुक्त करने का अधिकार दिया है और कोई कह रहा है - परमात्मा का न रूप है न रंग है न आकार है फ़िर भी ? उसने परमात्मा को देखा है ? लेकिन मैंने ऐसी कोई बात कभी नहीं की । मैं श्री महाराज जी से सिर्फ़ 11 साल से जुङा हूँ और पहला शिष्य हूँ । इसी बीच सदगुरुदेव श्री महाराज जी ने कुछ हजार लोगों के ही अंतर में ज्ञानबीज (हंसदीक्षा) बोया, अंतर के प्रकाश से मिलाया । 
अगर तमाम गुरुओं से तुलना करें तो इसका 1% भी वो नहीं कर पाये ।
क्योंकि बुझे दीपक से कभी अन्य दीपक नहीं जलता । इसलिये आज जब जीव अज्ञानी, वेशधारी गुरुओं के फ़ैलाये भृमजाल से बुरी तरह दिग्भृमित है, यह उपलब्धि ठीक ही है ।
आपको आश्चर्य होगा लगभग 11 वर्ष के क्रियात्मक ज्ञान प्रसार में (हमारे यहाँ) सिर्फ़ 1 ही जीव पूर्णता या आवागमन से मुक्त या गर्भवास से छूटकारा या जन्म मरण के बन्धन से मुक्त हो पाया और इनका नाम है - श्री राकेश शर्मा ।
शिमला मूल के निवासी राकेश जी पेशे से मैंनेजर हैं और दिल्ली के ईस्ट आफ़ कैलाश में रहते हैं । राकेश जी को हमसे जुङे लगभग 1 ही वर्ष हुआ है कोई 1 वर्ष पहले ही नेट के द्वारा मुझसे सम्पर्क हुआ फ़िर फ़ोन पर मुझसे बात हुयी और राकेश जी हमारे चिंताहरण आश्रम पर आये । 
जो इनके साथ होना था वह गुरुकृपा से मैंने इन्हें आने से पूर्व ही फ़ोन पर बता दिया ।
श्री महाराज जी ने नियमानुसार इन्हें ‘हँसदीक्षा’ दी ।
फ़िर कुछ ही घण्टे बाद उन्होंने कहा - तुम परमहँस ज्ञान के अधिकारी हो ।
और अगली परमहँस दीक्षा कर दी और इसके कुछ ही समय बाद समाधि का ज्ञान कराया ।

अगर आप अभी तक सामान्य जीवन के प्राणी रहे हैं और आश्चर्यजनक अलौकिक बातें सिर्फ़ पत्र पत्रिकाओं और धार्मिक पुस्तकों में ही पढ़ते रहे हैं तो आप स्व संस्कार वश एक वर्गीय जीवन जीते रहे हैं । ये बात मैं क्यों कह रहा हूँ आपको आगे समझ में आ जायेगी ।
इत्तफ़ाकन अभी पिछले दिनों जितने भी लोग मेरे सम्पर्क में आये । उनमें विभिन्न छोटे बङे स्तरों पर अलौकिकता की पूर्वजन्म की चिंगारी दबी हुयी थी । उन्हें अजीब अजीब संकेत क्रियायें होती थी । दरअसल ये अचानक नहीं होने लगी । ये पूर्वजन्म के चले हुये योग यात्री थे जो अलग अलग दूरी तक मंजिल तय कर पाये थे और इसके बाद उनकी जीवन आयु पूरी हो गयी थी । 
इनके अनुभवों में किसी को सोते में या आँखे बन्द कर लेने पर तारों भरा आकाश दिखाई देना, किसी को मष्तिष्क में कोई सीटी, घण्टा, कोई अन्य ध्वनि आदि बारबार सुनाई देना, किसी को कोई विचित्र आकृति दिखाई देना या किसी को LCD जैसी स्क्रीन जैसा साफ़ कोई विचित्र रहस्यमय स्वपन दिखाई देना आदि थे ।
दरअसल राकेश जी भी ऐसे ही एक योग यात्री थे । ये बचपन से ही अचानक जमीन पर गिर पङते थे और इन्हें मस्तिष्क के अन्दर विभिन्न वाद्य (संगीत) यन्त्रों की ध्वनि अलग अलग सुनाई देती थी । और कभी कभी प्रकाशयुक्त गुफ़ा जैसी चीजें दिखाई देती थी और ये डर से लगभग बेहोश से हो जाते थे ।
कुछ समझ विकसित होने पर इन्होंने घर वालों को बताया कि - इन्हें क्या महसूस होता है ? 
तो उनके मानों होश ही उङ गये ।
और जैसा कि ऐसे केस में हमेशा ही होता है । घर वाले इन्हें झाङ फ़ूँक वालों के पास ले जाने लगे पर कोई भी फ़ायदा नहीं हुआ । 
उपचार की इसी प्रक्रिया के दौरान राकेश जी कृमशः एक ‘नाथयोगी’ के पास पहुँचे और उन्हें कुछ राहत मिली । तबसे इनकी योग क्रियायें नियन्त्रित हो उठी और ये कुछ कुछ समझने लगे । आनन्द सा आने लगा पर इनका योग ठहर गया ।
क्योंकि जहाँ तक का गुरु होता है वहीं तक का योग होता है ।
तब ये श्री महाराज जी के सम्पर्क में आये और 1 साल में ही ये परम सत्य को जान गये । श्री राकेश महाराज जी अब गुरु स्तर के आत्मज्ञानी हैं । जो महा-राज को अनुभूत तौर पर जान जाये । वास्तविक रूप में उसे ही ‘महाराज’ कहते हैं ।  
दिल्ली से अक्सर लोग मुझे फ़ोन करते रहते हैं कि - सदगुरुदेव श्री शिवानन्द महाराज जी दिल्ली कब आयेंगे ? 
ये लेख खास इसी सूचना को देने के लिये है । 
इसी रविवार 9 JUNE 2013 को श्री महाराज जी दिल्ली में होंगे ।
अतः मिलने के इच्छुक लोग श्री राकेश महाराज जी से फ़ोन पर सम्पर्क स्थापित कर समय लेकर उनसे मिल सकते हैं ।
श्री राकेश महाराज जी के फ़ोन नम्बर हैं । 
0 98183 12908 
0 84478 15644 
एक टिप्पणी भेजें

LinkWithin

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

Follow by Email