11 अक्तूबर 2013

क्या करूँ ? मैं भटकी हुई सी हूँ

मैंने ब्लाग शुरू करते समय ही इस बात का जिक्र किया था कि आज विश्व में जिस कदर योग ध्यान लोकप्रिय है । और लोग मनमाने तरीके से योग अभ्यास कर रहे हैं । करवा रहे हैं । वह उन्हें शुरूआती लाभ आकर्षण के बाद मौत के मुँह में ले जायेगा । हमें ऐसे ही लोगों से निरन्तर मिलना होता रहता है । ऐसे ही एक विदेशी महिला का सन्देश ।
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- मेरी कुण्डलिनी जागृत हो रही है । इसके बारे में कोई सुझाव ? मैं इसका क्या करूँ ? मैं भटकी हुई सी हूँ ।
- निश्चित ही इसकी शुरूआती अवस्था में हूँ । मुझे इसका बहाव 24 घंटे महसूस होता है । मैं हर तरह की उर्जाओं को पकडती हूँ । और मुझे अलग अलग चीजें दिखाई देती हैं । 1 सुबह मैं उठकर अपने चक्रों को पढ़ रही थी । यह मेरे लिए कोई आश्चर्य की बात नहीं । पर इसकी आदत डालनी पड़ती है । यह बहुत रोमांचक है । और कभी कभी बहुत तनाव पूर्ण हो जाता है । मुझे मेरे स्पिरिट गाइड ( Spirit Guide ) से भी निर्देश मिलते रहते हैं ।
- अभी वह ( कुंडलिनी ) मुझसे आराम करने और अपने शरीर को स्वस्थ रखने को कह रही है ।
- मैं विशेष रूप से 1 व्यक्ति से जुडी हुई हूँ । जिससे मैं प्रेम करती हूँ । मैं उसके उर्जा में आये परिवर्तन को जान लेती हूँ । भले ही वह दूसरे प्रदेश में क्यों न हो । यदि मैं बीमार होती हूँ । तो वह जान जाता है । और यदि वह बीमार पड़ता है । तो मैं जान जाती हूँ । मुझे नहीं लगता कि उसकी

भी कुण्डलिनी सक्रिय है । परन्तु मैं विशेष रूप से इसी व्यक्ति से ही क्यों जुड़ी हुई हूँ ?
- मेरी कुण्डलिनी रीढ़ पर बढ़ती 1 गर्मी के सामान महसूस होती है । इसके चलते मुझे कभी कभी पीठ से सम्बंधित समस्या भी हो जाती हैं । यह मेरे पीठ के निचले हिस्से से शुरू हुयी थी । और अभी यह मध्य तक जा पहुंची है । 1 सतगुरु खोजने के मामले में मैं अनिच्छुक हूँ । जहाँ तक मुझे पता है । कुण्डलिनी का अनुभव हर 1 के लिए अलग होता है । मुझे ऐसे लोगों के बारे में पहले ही चेतावनी दे दी गयी है । जो मुझे इस्तेमाल कर सकते हैं । झूठे या फिर पागल भी हो सकते हैं । इसीलिए मैं गुरु के बारे में निश्चित तौर पर कुछ कह नहीं सकती । परन्तु मैं इस विषय के प्रति खुले विचार रखती हूँ । Mayra Coria Luna
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आपकी कुण्डलिनी निश्चय ही जाग्रत हो रही है । बल्कि हो चुकी है । रीढ के सबसे निचले हिस्से में नितम्बों की

तरफ़ यदि आपको हल्का सा गुनगुना गर्म एक तरल पदार्थ या घना वाष्प सा ऊपर उठता महसूस होता है । ये कुण्डलिनी के जाग्रत होकर कृमश ऊपर चलने की ही पहचान है । इसकी सक्रियता के समय शरीर में किसी तनी हुयी स्प्रिंग जैसा तनाव महसूस होता है । अगर ये चक्रीय ध्यान विधि से या किसी मन्त्र तन्त्र या कङे ध्यान अभ्यास से जाग्रत की जाये । तो ये एक तरह का हठ योग हो जाता है । जबकि एक समर्थ गुरु का हम पर हाथ न हो । और उसका मार्गदर्शन भी न हो । क्योंकि कुण्डलिनी जाग्रत होना और तीसरी आँख खुलना इन दोनों का साथ है । अतः आपको अदृश्य चीजें दिखने लगी । यह कोई आश्चर्य नहीं है । हाँ यह रोमांचक ही होता है । पर उसी तरह खतरनाक भी । जैसे आपने कभी प्लेन न उङाया हो । और यकायक कुछ समय के लिये वह आपकी छेङखानी से हठात ही उङ गया हो । लेकिन आपको उसका कोई नियन्त्रण न ज्ञात हो । तब वह प्लेन दुर्घटना ग्रस्त ही होगा । क्योंकि इसमें सामान्य मनुष्य के तुलना में एक अदभुत और बङी मात्रा में ऊर्जा पैदा होती है । अतः इसमें कामुक भावों की प्रधानता और इच्छा तीवृ होती है । लेकिन इससे बहुत दूर रहना चाहिये । क्योंकि यहाँ दुष्ट शक्तियां आपकी शक्ति क्षीण कर आपको भटका कर मार भी डालती हैं । हाँ ! कुण्डलिनी जागरण की अवस्था में यदि हम किसी व्यक्ति या स्थान या पदार्थ से भी जुङे हैं । तो उसके रहस्य हमें पता होने लगते हैं । आप सतगुरु खोजो । या न खोजो । पर क्या आपकी समस्या का हल आपके या किसी के पास है । तब आप क्या करेंगी ? मैं कोई दबाव नहीं दूँगा । पर यह अच्छा होने के बजाय एक गम्भीर स्थिति है । जिससे आप निश्चय खतरे में हैं । हो सकता है । आपको ये अनोखा लग रहा हो । पर हमारे लिये ऐसे व्यक्तियों से मिलना आम बात ही है । क्योंकि दुनियां में गलत और भृमित सिद्धांत रहित तरीके से ध्यान अभ्यास आदि क्रियाओं का प्रचलन बहुत अधिक हो गया है । अतः आप तेजी से खतरे की तरफ़ जा रही हैं । कृपया आप पूर्व समय निश्चित कर चैट पर बात को ठीक से समझ लें । मैं इतना ही कर सकता हूँ । और गम्भीर स्थिति से बचने हेतु आपको भारत में हमारे यहाँ आना ही होगा ।
https://www.facebook.com/fromquarkstoquasars
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