16 दिसंबर 2010

वे कहेंगे - प्रेम यानी पागलपन



जिस दिन कोई व्यक्ति इस सत्य को समझने में समर्थ हो जाता है कि जब तक मैं आवश्यकता की पूर्ति खोजता रहूंगा । तब तक मैं 1 वर्तुल में घूमूंगा । रोज भूख लगेगी । रोज खाना कमा लूंगा । रोज खाना खा लूंगा । फिर भूख मिट जाएगी । कल फिर भूख लगेगी । फिर भोजन । फिर भूख । फिर भोजन । भोजन से कुछ सुख न मिलेगा । सिर्फ भूख से जो दुख मिलता था । वह न होगा । सांसारिक आदमी की परिभाषा यही है । जो केवल सुविधा खोज रहा है । असुविधा न हो । आध्यात्मिक आदमी का अर्थ यही है कि जो इस सत्य को समझ गया कि सुविधा सब भी मिल जाए । तो जीवन में फूल नहीं खिलते । न सुगंध उठती । न गीत बजते । नहीं । जीवन की वीणा खाली ही पड़ी रह जाती है । इसलिए मैं धर्म को आभिजात्य कहता हूं । आभिजात्य का अर्थ है । इसका कोई प्रयोजन नहीं है । यह प्रयोजन हीन, प्रयोजन शून्य या कहो प्रयोजन अतीत । और तुम्हारे जीवन में जब भी कभी कोई प्रयोजन अतीत उतरता है । वहीं थोड़ी सी झलक आनंद की मिलती है । जैसे - प्रेम में । प्रेम का क्या अर्थ है । क्या सार है ? खाओगे ? पीयोगे ? ओढोगे ? क्या करोगे प्रेम का ? न अगर कोई तुमसे पूछने लगे कि क्या पागल हो रहे हो । प्रेम से फायदा क्या है ? बैंक बैलेंस तो बढ़ेगा नहीं । मकान बड़ा बनेगा नहीं । प्रेम से फायदा क्या है ? क्यों समय गंवाते हो ? इसलिए तो राजनीतिज्ञ प्रेम व्रेम के चक्कर में नहीं पड़ता । वह सारी शक्ति पद पर लगाता । प्रेम पर नहीं । धन का दीवाना । धन का आकांक्षी । सारी शक्ति धन को कमाने में लगाता है । प्रेम -  वह कहता है । अभी नहीं । अभी फुर्सत कहां ? फिर प्रेम का प्रयोजन भी कुछ नहीं दिखाई देता । स्व तरह का पागलपन मालूम होता है । तुम व्यावहारिक लोगों से पूछो । वे कहेंगे - प्रेम यानी पागलपन । लेकिन प्रेम में थोड़ी सी झलक मिलती है - उसकी । जो प्रयोजन हीन है । जिसका कोई अर्थ नहीं । फिर भी परम रसमय है । फिर भी परम विभामय है । फिर भी सच्चिदानंद है ।
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1 - 10 तोला घी के हवन से 1 टन आक्सीजन निर्माण होता है I
2 -  गौ वंश आधारित खेती से ही सारा विश्व सुखी, समृद्ध व स्वालंबी जीवन जी सकता है I
3  -  5 लीटर गौ मूत्र में 100 धतूरे के पान काटकर मिला दें । और गौ मूत्र मिश्रण में 15 लीटर पानी मिलाकर प्रातःकाल फवार दें । तो मच्छर व लटें नष्ट होती हैं I
4 - 10 किलो गौ मूत्र में 2 किलो नीम के पत्ते मटके में भिगोकर 10 दिन रख दें I फिर इस 1 किलो गौ मूत्र में 10 किलो पानी मिलाकर किसी फसल पर 15 दिन से नियमित छिङक दें । तो फसल पर रोग नहीं लगेगा I
5 - गोबर गैस में गौ वंश के गोबर का उपयोग अधिक लाभकारी है I
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