31 दिसंबर 2010

जब सृष्टि 3 घन्टे को रुक गयी ??


और ये ज्यादा पुरानी बात भी नहीं है । बस लगभग 150 वर्ष पहले पहले की बात है । भारत के प्रसिद्ध संत स्वामी रामतीर्थ पानी के जहाज से अमेरिका जा रहे थे । उसी जहाज में किसी देश का बादशाह सवार था । रामतीर्थ जी बडी मौज वाले संत थे । अचानक उन्हें मौज आयी और वे बोले , " ऐ एक जहाज में दो बादशाह नहीं जा सकते ।"उनकी बात सुनकर बादशाह को बेहद आश्चर्य हुआ । साधारण वेशभूषा के एक इंसान की यह बात सुनकर उसने बडे व्यंग्य से कहा ," कहां के बादशाह है , आप ? "
" पूरी सृष्टि का । " उसी मौज में साधु ने जवाव दिया ।
" लेकिन । " राजा बोला ," मेरे राज्य में मेरा हुकुम चलता और आपका ? "
रामतीर्थ ने फ़िर से मौज में ही जबाब दिया । और मेरा हुकुम पूरी सृष्टि पर चलता है । ये सूरज । धरती । चांद । तारे । सब मेरी आग्या का पालन करते हैं । बेहद दुस्साहस भरी यह बात सुनकर बादशाह चकित रह गया । उससे कुछ बोलते न बना । अपनी बात की पुष्टि के लिये रामतीर्थ ने ऊर्ध्व ( केन्द्रसत्ता ) में ध्यान स्थिर किया और सधे स्वर में बोले ," सब वहीं के वहीं ठहर जाओ । " सभी सूर्य । चांद । तारे आदि अपनी अपनी कक्षा में स्थिर हो गये । तीन घन्टे सृष्टि रुकी रही । तब रामतीर्थ की आग्या के बाद फ़िर से आगे बडी । बादशाह उनके पैरों पर गिर पडा । इसी क्रम में रामतीर्थ जब अमेरिका आदि देशों में पहुंचे । तो उनकी वाणी आदि सुनकर । चमत्कृत होकर लोग कहने लगे । ईसा आ गये । ईसा दोबारा आ गये । रामतीर्थ ने कहा । ठहरो । मैं ईसा नहीं । ईसा का बाप हूं ? "
** कुछ लोगों को मेरा ये लेख अजीव और किसी भी तरह हजम न होने वाला ही लगेगा । पर इस तरह सृष्टि एक बार नहीं । कई बार शक्तियों द्वारा रोकी गयी है । राम के जन्म । और लंका से वापसी पर सृष्टि एक महीने रुकी रही थी । मांडव्य ऋषि और कोढी ब्राह्मण की पतिवृता सती पत्नी के विवाद में सृष्टि 6 महीने तक रुकी । जिसे बाद में बडे देवताओं की मध्यस्थता के बाबजूद चलाया गया । स्वरूपानंद जी के एक शिष्य ने स्टीमर वाले द्वारा खुद को ले जाने पर एक घन्टे के लिये प्रकृति के सिस्टम को प्रभावित कर दिया । मूसा के गुरु खिजर साहब सृष्टि को तो नही रोकते थे । पर ऐसे अनेकों उदाहरण हैं । जब प्रकृति उनके आगे हाथ जोडकर खडी हो गयी । जिसमें उन्होंने 12 साल पूर्व डूबी बुढिया की बारात को जिंदा करने का आदेश दिया । और बारात जीवित हो गयी । ऐसे एक नहीं हजारों उदाहरण है । जब सामर्थ्यवान योगियों ने सृष्टि को रोक दिया ।
**** अब जो आपके मन में घुमड रहा है । यदि सृष्टि रुक जाती है । घडियां रुक जाती हैं । तो हडकम्प मच
जाना चाहिये ? ये बात तो बडे जोर शोर से इतिहास में दर्ज हो्नी चाहिये । दर्ज है । रामायण में दर्ज है ।
पुराणों में दर्ज है ।.. और अभी भी कभी रुक जाय । तो आपको पता भी नहीं चलेगा कि सृष्टि इतने समय तक रुकी रही थी । और इसकी वजह ये है कि अग्यान स्थिति में ..? आप भी उसी प्रकृति का ही हिस्सा हो । ये मामला फ़्रीज हो जाने जैसा है । आप सब कार्य कर रहें होंगे । और आपको लगेगा कि सब कुछ वैसा ही चल रहा है । पर ये सब अन्मन्स्यकता जैसा फ़ील होगा ।
* रामतीर्थ द्वारा खुद को ईसा का बाप बताना भी गलत नहीं था । रामतीर्थ उस वक्त परमात्मा से । परमात्मा में स्थित थे । ध्यान रहे । स्वामी रामतीर्थ परमहंस संत थे ।.. जब हंसा परमहंस हुय जावे । पारबृह्म परमात्मा साफ़ साफ़ दिखलावे । ( स्वामी रामतीर्थ का जीवन विवरण आदि साथ में प्रकाशित है ।
swami Ramteerth का जन्म पंजाब के मुरलीवाला village के निवासी पण्डित हीरानंद के परिवार में सन 1873 ई. में दीवाली के दिन हुआ । इनके बचपन का नाम teerathram था । इनके जन्म के कुछ दिन बाद ही mother का देहान्त हो गया । तब इनका पालन पोषण इनकी बुआ ने किया । ये बचपन से ही बेहद कमजोर थे । 5 वर्ष की age में इनकी पडाई शुरू हो गयी । और इन्होंने प्राथमिक स्तर पर फारसी की शिक्षा प्राप्त की । 10 वर्ष की age तक प्राथमिक शिक्षा पूरी करके इनका इसी age में विवाह हो गया । और इसके बाद आगे की पढाई के लिए तीरथराम गुजरांवाला गये । वहां इनके father के मित्र धन्नाराम रहते थे । उन्हीं के यहां रहकर तीरथराम की पढाई हुयी । 14 वर्ष की age में तीरथराम ने मैट्रिक परीक्षा में state में first position प्राप्त किया । तब उन्हें state की ओर से छात्रवृत्ति दी गयी । फ़िर आगे की पढाई के लिए तीरथराम लाहौर गये । इनके father की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी । वे तीरथराम को आगे पढाने में असमर्थ थे । तब तीरथराम ने छात्रवृत्ति के सहारे ही आगे पढने का निर्णय लिया । उनकी पडाई में अनेक विघ्न आये । पर तीरथराम अपने will power से सारी बाधाओं को पार कर गये । उन्होंने इण्टरमीडिएट परीक्षा first class में उत्तीर्ण की । life की भीषण परिस्थितियां तीरथराम के धैर्य और आत्मविश्वास की परीक्षा पर परीक्षा लिए जा रही थी । उनके father तीरथराम की wife को उनके पास छोड गये । पहले तो अपने ही खाने की समस्या थी । अब wife की और हो गयी । कभी कभी तो दोनों लोगों को भूखा रहना पडता । तीरथराम नंगे पांव विद्यालय जाते थे । B A की परीक्षा में उन्हें संस्कृत और फारसी विषयों में तो बहुत अच्छे नम्बर मिले । पर english में वह fail हो गये । इसलिये full exam में ही fail कर दिया गया । अब क्या होता ? कहीं से कोई सहारा भी नहीं था । तब उन्हें झंडूमल नाम के मिठाई वाले ने सहारा दिया । उसने तीरथराम के परिवार के लिये भोजन आवास आदि की व्यवस्था की । इस सहारे से तीरथराम का हौसला बडा । और next year उन्होने अपनी मेहनत से पूरे विश्वविद्यालय में B A exam में first position प्राप्त किया । इस समय तीरथराम की age 19 वर्ष की थी । तीरथराम ने लाहौर विश्वविद्यालय से ही math subject में परास्नातक परीक्षा उत्तीर्ण की । इसके बाद वे सियालकोट में अमेरिकन मिशन द्वारा संचालित 1 school में शिक्षण कार्य करने लगे । तब उन्हें 80 रुपये per month वेतन मिलता था । इसी समय उनकी पत्नी ने 2 पुत्रों को जन्म दिया । जिनका नाम मदन गोस्वामी और ब्रह्मानन्द था । लेकिन कुछ समय बाद ही तीरथराम का मन संसार से उचट गया । और उनकी व्याकुलता दिनों दिन बढती गयी । अंत में 25 वर्ष की age में नौकरी घर परिवार छोडकर तीरथराम ऋषिकेश के पास ब्रह्मपुरी में निवास करने लगे । कहा जाता है कि इसी स्थान पर तीरथराम को दिव्यज्ञान की प्राप्ति हुयी । 28 वर्ष की अवस्था में तीरथराम 1 नया बदलाव हुआ । वे तीरथराम से swami Ramteerth हो गये । और संन्यास भाव में आ गये । टेहरी के महाराज ने आपके ज्ञान से प्रभावित होकर आपको देश विदेश की यात्रा करने हेतु कहा । swami Ramteerth जापान एवं america की यात्रा पर गये । इन देशों में के लोगों को उन्होने india के महान प्राचीन ज्ञान से परिचित कराया । america में swami Ramteerth लगभग 2 वर्षो तक रहे । विदेश यात्रा से लौटकर वे महाराज टेहरी के विशेष आग्रह पर टेहरी राज्य में ganga के किनारे एक cottage में निवास करने लगे । 1 दिन ब्रह्ममुहूर्त में स्वामी रामतीर्थ गंगास्नान हेतु गये । और स्नान करते हुये आगे बढते ही गये । और 1 भंवर में फंस गये । वहीं उनकी जलसमाधि बन गयी । यह घटना 1906 की है । इस समय उनकी age मात्र 33 वर्ष की थी । वे hindi sanskrit और फारसी के अच्छे कवि थे ।
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