03 सितंबर 2016

2 घन्टे = 50 वर्ष

फ़ेसबुक पर नरेश आर्य की पोस्ट -
रैवतक राजा की पुत्री का नाम रेवती था । वह सामान्य कद के पुरुषों से बहुत लंबी थी  । राजा उसके विवाह योग्य वर खोजकर थक गये । और चिंतित रहने लगे । थक हारकर वो योगबल के द्वारा पुत्री को लेकर ब्रह्मलोक गए । राजा जब वहां पहुंचे । तब गन्धर्वों का गायन समारोह चल रहा था । राजा ने गायन समाप्त होने की प्रतीक्षा की ।
गायन समाप्ति के उपरांत ब्रह्मदेव ने राजा को देखा । और पूछा - कहो, कैसे आना हुआ ?
राजा ने कहा - मेरी पुत्री के लिए किसी वर को आपने बनाया अथवा नहीं ?
ब्रह्मा जोर से हंसे । और बोले - जब तुम आये । तब तक तो नहीं । पर जिस कालावधि में तुमने यहाँ गन्धर्वगान सुना । उतनी ही अवधि में पृथ्वी पर 27 चतुर्युग बीत चुके हैं । और 28 वां द्वापर समाप्त होने वाला है । अब तुम वहां जाओ । और कृष्ण के बड़े भाई बलराम से इसका विवाह कर दो । अच्छा हुआ कि तुम रेवती को अपने साथ लाए । जिससे इसकी आयु नहीं बढ़ी ।
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मेरी प्रतिक्रिया - 

कथा का वैज्ञानिक संदर्भ - अपनी आरिजनलिटी को लेकर सत्य और ठोस है । लेकिन लोग असली बात समझे नहीं ।
- दरअसल रेवती ने बलराम को पति रूप में पाने को घोर तपस्या की । सम्बन्धित इष्ट तप पूर्ण होने पर अभीष्ट वरदान के लिये बोला । रेवती ने बलराम को मांगा । उस इष्ट ने (संभवत) कई हजार वर्ष बाद बलराम के किसी संस्करण से विवाह हेतु वरदान दिया । रेवती बिफ़र
गयी । बोली - या तो वर वापिस लो । अन्यथा अभी विवाह हो । फ़िर किसने देखा है ?
वर वापिस होने से वर मर्यादा भंग हो सकती थी ।
- तब उपाय के रूप में प्रथ्वी का तत्कालिक कालमान + वरदान समय का कालमान
- फ़िर किसी वृहद समय क्षेत्र का कालमान - वरदान समय का कालमान = रेवती को वर प्राप्ति को दिया कालमान ।
मामला ऐसे था ।
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संकर सहज सरूप संभारा । लागि समाधि अखंड अपारा
बीते संबत सहस सतासी । तजी समाधि संभु अबिनासी ।
रामचरित मानस (बालकाण्ड)
अब पार्वती (या शायद सती) समाधि लगने से तजने तक उनके पास ही बैठी हैं । और बहुत अधिक दो-तीन दिन की ही बात रही होगी । लेकिन जिस zone में शंकर गये और जितनी देर समाधिस्थ रहे । वह प्रथ्वी के समय मान अनुसार (87) सतासी हजार वर्ष के बराबर था ।
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-ऐसे ही कालमान में एक रोटी सिकने की अवधि में अर्जुन ने पूरा जीवन जिया ।

- एक राजा का प्रथ्वी के 2 घन्टे में लगभग 50 वर्ष का जीवन मिट (समाप्त)  किया गया । 
- राम जन्मोत्सव और लंका से अयोध्या वापिसी पर 1 माह का 1 दिन रहा ।
- अभी कलियुग में स्वामी रामतीर्थ ने 3 घन्टे के लिये सृष्टि रोक दी थी ।
ये उदाहरण तो सामान्य और प्रसिद्ध उदाहरणों में से हैं । 
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नरेश आर्य - कलियुग में स्वामी रामतीर्थ ने 3 घन्टे के लिये सृष्टि रोक दी थी ।
..कृपया विस्तार से बताये स्वामीजी !
उत्तर - किसी विदेश यात्रा के दौरान एक राजा और रामतीर्थ दोनों जलपोत पर थे । तब किसी प्रसंग में रामतीर्थ ने राजा का उपहास करते हुये कहा - वो काहे का राजा । असली शहंशाह मैं हूँ ।
राजा को साधारण वस्त्र और सन्यासी वेश रामतीर्थ की बात सुनकर आश्चर्य हुआ । पर वह व्यंग्य से बोला - आप कहाँ के शहंशाह हैं ?
इस पर रामतीर्थ ने कहा - समस्त सृष्टि का । यह सूर्य चाँद तारे आदि मेरी सत्ता में ही तो हैं ।
राजा के पुनः प्रति व्यंग्य पर रामतीर्थ ने ‘सुन्नमंडल’ से ध्यान एकाग्र कर समस्त ग्रह आदि को ठहरने का आदेश दिया । और सृष्टि रुक गयी ।
यह स्पष्ट पता नहीं । पर शायद वह व्यक्ति राम का शिष्य भी हुआ था ।
रामतीर्थ जब चर्च प्रभावित देशों में गये । तो उनके वाणी प्रभाव से लोग बोले - ईसा आ गये । ईसा आ गये ।
तब भी उन्होंने कहा था - मैं ईसा नहीं ईसा का बाप हूँ ।
इसकी पुष्टिगत वैज्ञानिक विवेचना थोङे विस्तार की मांग करती है । पर यह घटना 100% सत्य है । स्वामी रामतीर्थ के हिमालयीन प्रवास के दौरान शेर बाघ जैसे हिंसक जानवर उनके पैर चाटते थे । और पास बैठे रहते थे ।
हिंसक जानवर वाली बात बुद्ध के साथ भी थी । इसी को अरिहन्त पद कहते हैं । कम से कम मेरे निश्चय मत से रामतीर्थ के चमत्कारिक जीवन की सभी घटनायें सत्य हैं । 
पर उनका रहस्य text में समझाना कुछ असंभव सा है । क्योंकि एक अनजानी बात ढ़ेरों प्रश्न उत्पन्न कर देती है ।
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