26 जुलाई 2012

ये भगवान मर क्यों नहीं जाता


राजीव जी ! अगर भगवान सब कुछ कर सकता है । तो क्या वो अपने आपको मार सकता है ? क्या वो अपने आपका अस्तित्व समाप्त कर सकता है । अगर नहीं । तो उसे सर्व शक्तिशाली नहीं कह सकते । क्या वो 2 और 2 पाँच कर सकता है ? नहीं न । या सत्य कुछ और ही है । जो हमेशा रहता है । जैसे 2 और 2 चार ही होते है । इसे कैसा भी भगवान नहीं बदल सकता । तो जो है । उसी में जीना सीखो । और जो है । उसे स्वीकार करो । और हाँ ! एक बात और । हमेशा ऐसा मान लो कि - मैं कुछ न जानता । बस मैं हूँ ।  पता नहीं कैसे हूँ ? न होता किसी का भी अस्तित्व । तो न दुःख होता । न सुख । पर कैसे ? ये संसार है । ये एक रहस्य है । तो मुझे गौतम बुद्ध की बातें ज्यादा यथार्थ लगी । मैं तो ये मानता हुँ कि - जो है । उसे स्वीकार करते जाओ । बस क्यों है । पता नहीं । पर बस इतना स्वीकार करना काफी है । न मैं ये जानता कि - कोई भगवान है या नहीं ? क्योंकि असलियत तो है । जो ही 


है । हमारे मानने या न मानने से उसका कोई सम्बन्ध नहीं । उपेन्द्र मीणा । ई मेल से ।
ANS - कोई भी थोङा सा धार्मिक अध्ययन किया हुआ इंसान इस मेल के शब्दों में छिपी अपरिपक्वता को  भलीभांति समझ सकता है । उपेन्द्र मीणा के इसी तरह के कशमकश भाव वाले कुछ मेल मुझे प्राप्त हो चुके हैं । जिनका यथासंभव उत्तर भी दिया जा चुका है । दरअसल आप गौर करें । तो उपेन्द्र मीणा आस्तिकता और नास्तिकता के असमंजस युक्त झूले पर झोटे ( झूले का आगे पीछे होना ) खाते युवा की विचारधारा है  । इस झूले का एक झोटा आस्तिकता का है । तो दूसरा नास्तिकता का है । ये धार्मिकता का सही बोध न होने से एक आम आदमी का धार्मिकता के प्रति चिङचिङापन है । क्योंकि अज्ञान में धार्मिकता रूढियों का भारी बोझ ही महसूस होती है । कौन है भगवान ? हम क्यों मानें ? वो हमारे 


लिये क्या करता है ? दरअसल ये चिङचिङे प्रश्न आज हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई के ही नहीं हैं । बल्कि हर उस इंसान के हैं । जो सही मार्गदर्शन न मिलने से आस्था अनास्था के अनिश्चित झूले पर बैठा हुआ है । मानना मजबूरी वश है । और न मानने से भी शान्ति नहीं मिलती ।
उपेन्द्र मीणा जैसे तमाम लोगों को नहीं पता । सिर्फ़ अनदेखी अनजानी आत्मा ही अमर नहीं है । बल्कि तमाम दृश्य तुच्छ चीजें भी अमर हैं । एक तुच्छ तिनके को भी मारना असंभव है । सिर्फ़ उसका रूप और स्थिति परिवर्तन ही हो सकता है ।
हाँ ! वाकई उपेन्द्र मीणा सही कहते हैं । भगवान इस मामले में कमजोर ही है । वह न सिर्फ़ अपने आपको मार ( क्या इनका मतलब सुसाइड से था ? ) सकने में असमर्थ है । बल्कि वह चीटीं जैसे तुच्छ जीव को भी नहीं मार सकता । बस कर्मफ़ल आधार पर उसका शरीर और स्थिति परिवर्तन होगा । लेकिन उसे सर्व शक्तिशाली इसलिये कहते हैं कि - इस अखिल सृष्टि पर उसी का नियम कानून चलता है । सभी उसी  के कानून का पालन करते हैं ।
क्या वो 2 और 2 पाँच कर सकता है - वास्तव में तो वो 2 और 2 को 6 या 10 भी कर सकता है । क्योंकि 5 भी उसी

के नियम से हुये हैं । उसने एक बहुरंगी विलक्षण खेल बनाया है । भारत की बिल्ली..बिल्ली सुनते सुनते समझ ( सीख ) जाती है कि उसी से कहा जा रहा है । पर अमेरिका योरोप की बिल्ली CAT कहने पर ही समझ पायेगी । क्योंकि उसे CAT ( pussy ) सुनने की आदत हो गयी है । लेकिन दोनों ही एक ही जानवर है । बताईये ये  ೫ ௫ ౫ ൫ ૫ ੫ ৫ ୫ v क्या लिखा हुआ है ? खा गये ना चक्कर । ये ५ या 5 विभिन्न भाषाओं में लिखा हुआ है । लेकिन आप इनमें से कितने 5 को जानते थे ? इसलिये उपेन्द्र तुमने बहुत छोटी बात बाल बुद्धि से की । उसकी सृष्टि के तिनका भर खेल को समझने में ज्ञानियों के कई जन्म व्यतीत हो जाते हैं । इसलिये सत्य कुछ और नहीं । सिर्फ़ वही ( आत्मा ) सत्य है । और बाकी सब उसका खेल भर है । 

और जो है । उसे स्वीकार करो - अगर आपकी दाल में मक्खी गिर जाये । तो फ़िर उसे स्वीकार कर लेना । और ऐसे ही मक्खी सहित दाल खा लेना । अगर रास्ते में चलते समय आपके पद चिह्नों की सीध में मल आ रहा हो । तो कोई बात नहीं । उसी से गन्दे होते हुये चले जाना । थोङा इधर उधर मत होना । कोई रोग हो जाये । तो दवा मत लेना । साइकिल पंचर हो गयी हो । तो टयूब में हवा मत डलवाना । पंचर न जुङवाना । रात हो जाय । तो लाइट मत जलाना । और मुँह गन्दा हो जाय । तो धोना मत । और कभी नहाना भी मत । जो जैसा है । उसे स्वीकार करो ? अगर आप इन कुछ ही बातों पर ( क्योंकि ऐसी बातें तो लाखों हैं ) उचित तर्क रखते हैं । तो फ़िर कोई और आपका समर्थन करे । ना करे । मैं अवश्य करूँगा । वैसे एक बात माननी होगी । आप भगवान के सामने 


भी अपना तर्क रखो । तो भगवान का भी दिमाग घूम सकता है । प्रभु उवाच - what a logic upendra
मैं कुछ न जानता । बस मैं हूँ । पता नहीं कैसे हूँ - चलिये मैं आपकी ये बात भी मान लेता हूँ । लेकिन किसी पुलिस वाले के पकङ लेने पर । स्कूल में शिक्षक के पूछने पर । खुद के खो जाने पर । लङकी के घर वालों द्वारा रिश्ते के लिये आने पर । मोबाइल फ़ोन का कनेक्शन लेने पर । गैस की बुकिंग । रेल आदि की टिकट बुक आदि आदि आदि आदि..जैसी परिस्थितियों में फ़िर आप क्या कहोगे ? सोचिये । अगर आपने ये जबाब दिया - मैं कुछ न जानता । बस मैं हूँ । पता नहीं कैसे हूँ ? तो लोग आपको जिस जगह ले जायेंगे । उसका नाम हिन्दी में पा..और अंग्रेजी में M से शुरू होता है ।
जब इस क्षण भंगुर ( पानी के बुलबुले समान ) जीवन में आपको कदम कदम पर न सिर्फ़ अपना नाम बल्कि पूरा ब्यौरा बताना होता है । तब जीवन के पार भी निरंतर जीवन है । इसलिये आप यदि अपनी और दूसरों की ID जाने बिना किसी चमत्कार से जीवन की गतिविधियाँ सामान्य रख सकते हैं । तो मैं 100% SURE हूँ । ये बिज्ञान । ये चमत्कार । ये उपलब्धि । अभी भगवान तक को भी हासिल नहीं हुयी । तब वो जरूर आप जैसी विलक्षण प्रतिभा से मिलना चाहेगा । अब क्योंकि आपके तर्क विचार मेरी पढाई से भी ऊपर जा रहे हैं । फ़िर मैं इनका उत्तर कैसे दे सकता हूँ ? बेहतर होता । आप 


ही अपने इस अदभुत ज्ञान को  विस्तार देते ।
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hello मैंने आपके ब्लाग की काफ़ी कहानियाँ पढी हैं । मुझे आपसे एक जरूरी बात कहनी है । पहले तो मैं आपसे ये पूछना चाहता हूँ कि आपकी भूत प्रेतों की जो कहानियाँ हैं । ये सिर्फ़ काल्पनिक है । या हकीकत है ? अगर हकीकत है । तो आपकी कहानियों के किरदार मि. प्रसून और नीलेश ये कौन हैं ?  आपके जबाब के बाद मैं आपको कुछ ऐसा बताऊँगा । जो शायद आपको अच्छा लगेगा । thanks राम चौधरी । ई मेल से  ।
ANS - मैंने पहले भी ऐसी जिज्ञासाओं का उत्तर दिया है । मेरी प्रेत कहानियाँ या अन्य अलौकिक वर्णन सत्य तथ्यों पर आधारित होते हैं । लेकिन इसके दुष्प्रभावों से आपको दूर रखने हेतु मैं 


अलग अलग घटनाओं का मिश्रण करके 1 कहानी बनाता हूँ । क्योंकि मैं जानता हूँ । इन रोचक वर्णनों और घटनाकृमों को आप बहुत गहराई से पढते हैं । कोई भी 1 घटना और उसके स्थान पात्र आदि ज्यों के त्यों होने पर आप अनजाने ही गहराई से उससे जुङ जायेंगे । ये कोई कल्पना नहीं । बल्कि मनोबैज्ञानिक सत्य है । और विराट माडल की स्थिति के अनुसार " ये सभी चीजें " हरेक के अन्दर मौजूद हैं । तब कोई शरीरी अशरीरी तांत्रिक या भूत प्रेत आपको आवेशित कर प्रभावित कर सकता है । आप गौर करें । तो सभी शास्त्रों में मंत्र तंत्र गृन्थों में सामान्य जानकारी के बाद कई महत्वपूर्ण अंगों को संकेत में बताया जाता है । या छोङ दिया जाता है । इसलिये क्योंकि हठी दुस्साहसी

लोग उनमें दी गयी चेतावनी के बाबजूद ( कि बिना जानकार या गुरु के सानिध्य में जाये वगैर न करें ) भी वो प्रयोग करे बिना नहीं मानेंगे । लेकिन अपूर्ण जानकारी से वे असफ़ल हो जाते हैं । और इसके परिणाम खतरनाक होते हैं । यही वजह है । ऐसे शास्त्र आदि गृन्थों को आज के समय में काल्पनिक या myth कहा जाता है । यहाँ मैं स्पष्ट कर दूँ । मेरी कहानियों अलौकिक घटनाओं के स्थान पात्र और घटनायें न सिर्फ़ इसी प्रथ्वी बल्कि अन्य अलौकिक लोकों से भी जुङी होती हैं । अतः कुछ वर्णन छुपा देने से पाठक इसके हानिकारक प्रभावों से पूर्णतया दूर रहता है । इसी तरह कहानियों के किरदार या मुख्य पात्र जो होते हैं । जरूरी नहीं । वह घटना उन्हीं के साथ घटी हो । बल्कि 


महत्वपूर्ण है । घटना किस तरह की थी । और उसका हल क्या था । संभावित गतिविधियाँ परिणाम क्या हो सकते थे । इस सबके बाबजूद भी मेरी इन प्रेतक बातों में कैसी भी कोई रुचि नहीं है । भूत प्रेतों के सम्बन्ध में फ़ैली गलतफ़हमियों को दूर करने और लोगों को जागरूक करने हेतु मैंनें ऐसे विवरण प्रकाशित किये । हाँ ! लेकिन वाकई कोई ऐसी रहस्यमय स्थितियों से गुजर रहा है । तो फ़िर मैं अवश्य उसकी सहायता कर सकता हूँ । लेकिन बाधा अलौकिक और बेहद खतरनाक स्तर की हो । तभी मजा आता है । आप जो बताना चाहें । बता सकते हैं ।
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आपने काफ़ी दिन हो गये । स्वपनिल तिवारी के प्रश्न का उत्तर नहीं दिया । कृपया जल्दी उत्तर दें । अनाम टिप्पणी । लेख - परम सन्तुष्टि और परमात्मा की प्राप्ति कैसे सम्भव है ? इस लेख के लिये नीचे लिंक पर क्लिक करें ।
http://searchoftruth-rajeev.blogspot.in/2012/05/blog-post_13.html?showComment=1342961640112#comment-c2363593485247542744
ANS - अभी मुझे ये तो याद नहीं कि इस लेख के विवरण और प्रश्न आधार पर मैंने जो उत्तर पोस्ट की थी । वह

किस शीर्षक से थी । लेकिन इसके बाद से तो स्वपनिल तिवारी के कई प्रश्न उत्तर आदि के लेख प्रकाशित हो चुके हैं । जो सम्भवत आपकी निगाह में नहीं आये होंगे । ये भी सम्भव है कि वो उत्तर परमात्मा ब्लाग पर प्रकाशित हुये हों । लेकिन सत्यकीखोज और परमात्मा ब्लाग के अलावा मेरे अन्य ब्लाग पर नहीं हुये । इतना तय है । मैं चाहूँगा । स्वपनिल या अन्य को इस उत्तर का लिंक मालूम हो । तो मुझे आनलाइन URL  से कापी करके सीधा मेल में पेस्ट कर भेज दें । तब वो लिंक मैं इस पोस्ट के नीचे ADD कर दूँगा ।

ये पोस्ट देखने के बाद दूसरे दिन स्वयं श्री स्वपनिल तिवारी द्वारा भेजे गये लिंक -
॥ जय जय श्री गुरुदेव ॥ प्रणाम महाराज । टिप्पणीकर्ता द्वारा मांगे गए उत्तरों के लिंक -
[ अनेको रहस्य साथ मे होने के कारण उत्तर अस्पष्ट प्रतीत होते हैं । अधिक जानकारी के लिए कृपया अनुराग सागर पढ़े ] स्वपनिल तिवारी ।


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राजीव जी ! नमस्कार कृपया नीचे दी हुयी लिंक देखिये । ये अष्टावक्र गीता के संस्कृत श्लोको के साथ हिंदी टीका हैं । जो सचमुच में आत्मज्ञान से भरपूर है । आशा है । बहुजन लाभ ले पायेंगे । धन्यवाद । योगेन्द्र परदेशी ।  
http://www.slideshare.net/praveenkmr78/ashtavakra-gitasanskrithindi 
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