05 जनवरी 2011

मुहम्मद साहब और 3 बातें । 2

अब आईये । कयामत के दिन रूहों के हिसाब किताब के बाद उनको । जन्नत या दोजख मिलने की बात । आप लोगों का यही तो मानना है । कि जिस जिसकी मृत्यु होती जाती है । वह हमेशा के लिये कयामत के दिन तक सोता रहेगा । और कयामत वाले दिन उसको  उठाकर । उसकी बहीखाता चैक करके दोजख या जन्नत में डाल दिया जायेगा । जन्नत में बढिया नहरें होगी । हर तरह के एशो आराम होंगे । आदि ..। और इसके उलट दोजख वाले को हमेशा के लिये जलती तपती जगह पर रखा जायेगा । उसकी एक खाल जल जायेगी । तो दूसरी खाल बदल दी जायेगी । (  बदल दी जायेगी । पर ध्यान देना । ).. और ये सिलसिला सृष्टि के आरम्भ से अंत (कयामत ) तक  चलता है । मतलब एक बार जो पैदा हो गया । उसका यही एक जीवन है ?? इसके बाद कयामत के दिन स्वर्ग या नरक ? AM I RIGHT ??
आईये धार्मिक बातों से थोडी बोरियत सी महसूस हो रही है । कुछ गणित की बात करें ? तो साहब । ये गणित लगाईये । कि सृष्टि कबसे शुरू हुयी है ?? बैग्यानिक तर्क आप लोग अब मानने लगे हो । कुरआन को भी बिग्यान से जोड देते हो । बिग्यान के अनुसार चार अरब वर्ष पहले ये big bang हुआ था । पर अब बिगबैंग को छोडो । सृष्टि तीन अरब वर्ष पहले शुरू हुयी मान लेते हैं । और एक बार के जन्म के बाद दोबारा जन्म नहीं होता । तो अब तक कितनी रूहें आ चुकी हैं ? और कितनी कयामत के इंतजार में सोयी पडी हैं ? और आप 84 लाख योनियों का सिद्धांत मानते नहीं । पुनर्जन्म मानते नहीं । तो  कोई गणना हो सकती है कि कितनी रूहें जन्मी । और कितनी सो रही हैं ? अब कुछ सवालों पर ध्यान देते  हैं । 1 - स्वर्ग और नरक इस टाइम तो खाली पडे होंगे । क्योंकि दोनों में भर्ती कयामत वाले दिन ही होगी । 2 - इस्लाम   को मानने वाले लोगों में 1 साल  से लेकर 15 साल तक के बच्चों की मृत्यु नहीं होती क्या ? तो इन बेचारों ने तो कर्म की किताब में  ऐसा कुछ लिख ही नहीं पाया होगा । जिसके आधार पर स्वर्ग नरक मिलता है ।
कयामत वाले दिन इनको कहां रखा जायेगा ? और क्यों ? मतलब बेबजह इनको स्वर्ग और नरक में बिना
नियम के कैसे रखा जायेगा । 3 - आपका मानना है । भले ही कोई इस्लाम का कानून माने  या न माने । पर सृष्टि के आदि से अंत तक यही कानून सब मनुष्य जो यहां उपजे हैं । उन पर लागू होता है ।  तो इस तरह तो 1 से 15 तक आयु की रूहें बहुत  हो गयीं । 4 - अब इन्ही खरबों से भी अधिक ( गरीब आदमी हूं । खरब से ज्यादा गिनती नहीं आती मुझे । ) रूहों की जब कयामत वाले दिन स्वर्ग नरक में भर्ती चल रही होगी । और  सबकी कर्म किताब पढ पढकर उनकी भर्ती चल रही होगी । तो कितना स्टाफ़ वहां लगेगा । कोई अन्दाजा है , आपको ? और कितने लाख वर्षों में यह भर्ती अभियान पूरा हो  पायेगा ? और जिस जगह  ये भर्ती की जा रही होगी । वो जगह कौन सी होगी  ?
अब एक खाल जल जाने पर दूसरी खाल बदलने वाली बात ..? आज के  हालात देखते हुये सृष्टि से कयामत तक कितने लोगों को नरक में जाना होगा ? ये मुल्जिमों की खाल बदलने के लिये कितना स्टाफ़ चाहिये ? और कितनी खाल चाहिये ?
आप स्वर्ग की कैसी कल्पना करते हैं ? बढिया नहरें..बाग..महल आदि.? चलिये । ये सब मिल गया । फ़िर कब तक के लिये ये है ? और कितने दिन अच्छा लगेगा ? रात से दिन अच्छा लगता है , ना । लेकिन वो इसीलिये कि दिन के बाद फ़िर रात होती है ? अगर रात ना हो । तो दिन दो कौडी का नहीं लगेगा । मतलब यही है । जैसे  अति का मीठा भी खाने में बेमजा लगता है ।  वैसे ही लगातार सुख और मौजमस्ती भी बेमजा ही लगती है । और इसके  लिये  किसी स्वर्ग जाने की जरूरत नहीं है । ये बात आप यहीं आजमाकर देख लीजिये । जिसके पास खूब पैसा है । काम के नाम पर तिनका नहीं तोडता । हर वक्त ऐशो आराम में डूबा रहता है । वो आदमी आपको सुखी लगता है । हरगिज नहीं । भृम है आपका ? जो मेहनत करके । पसीना बहाकर । ईमानदारी की रोटी खा रहा है । अन्दर बाहर दोनों जगह से वही आपको  संतुष्ट नजर आयेगा । और  ये  कोई मैं नयी खोज वाली बात नहीं बता रहा । सभी धर्म जाति वाले इससे सहमत है । कहने का मतलब ये । लगातार एक  सी स्थिति ।  एक  सी चीज किसी को अच्छी नहीं लगती ।  फ़िर वह कितनी ही बढिया चीज क्यों न हो ?? जब  यहां ही आपको अच्छी नहीं लगती । तो वहां कैसे लगेगी ?
तो साहब ऐसा नहीं है । कि स्वर्ग नरक नहीं है । और  वहां भर्ती भी उसी कर्म अनुसार होती है । जिसे कुरआन ए पाक ।  कर्म की किताब कहती है । लेकिन गलती यहीं पर है कि वो सिर्फ़ कयामत वाले दिन होती है । वहां प्रतिदिन भर्ती और निकासी का दौर अभी भी जारी है । आपने जो बहुत ऊंचे आसमान में तारे टूटते देखे हैं । वो स्वर्ग और उस जैसे लोकों से आत्माओं का गिराया जाना ही होता है । ( चिंता न करें । आगे प्रमाण भी है । ) अब आईये । मरी रूहों के कयामत वाले दिन तक सोने की बात पर ? सभी लोगों ने तो  नहीं । पर फ़िर भी बहुत से लोगों ने जमीन से लगभग 30 फ़ुट की ऊंचाई से 150 फ़ुट की ऊंचाई तक कभी कभी एकदम दूधिया । चांदी के समान । बेहद चमकती हुयी एक फ़ुट से लेकर ढाई फ़ुट तक । एक  बेहद  चमकता प्रकाश  कुछ क्षणों के लिये अवश्य देखा  होगा । क्योंकि इसकी गति बेहद तेज होती है । इसलिये ये अधिकतम तीन सेकेंड ही दिखाई देता है । ये ही रूह और उसको ले जाने वाली रूहें हैं ।  ना मानों तो अपने आसपास के  बुजुर्गों से पूछकर देखना । उनमें से किसी ने । अवश्य देखा होगा ।   2 -  अगर अभी तक आपने ये प्रक्टीकल नहीं किया । तो अब करके देखना । जब भी आपके आसपास कोई मरणासन्न हो । तो लगातर उसके पास रहना । बस वहां एक दो पालतू या गैर पालतू कुत्ता । मौत से आधा घन्टा पहले से लेकर मौत तक मौजूद हो । आप बस कुत्ते पर नजर रखना । और देखना कि ये कुत्ता खाली स्थान को  देखकर किस पर भौंक रहा है ? और अजीव सा व्यवहार क्यों कर रहा है ? मानों कुछ नया देख रहा हो ? अदभुत देख रहा हो ?? वास्तव में ये यमदूतों को देख रहा है । ये बात भी बुजुर्गो से पूछना ।
अब रही । नरक वालों की खाल बदलने की बात । ये भी एकदम सच है । पर थोडा हटकर । नरक एक ही प्रकार का नहीं हैं । बल्कि कर्म अनुसार हजारों प्रकार के हैं । और ये तुम्हारी प्रथ्वी से नीचे स्थित है । जिनका प्राणीनामा गुदामार्ग से निकलता  है । सिर्फ़ वही नरक को जाते हैं । इसका प्रमाण भी देखिये । अगर आप कुन्डलिनी चक्रों के बारे में जानते हैं । तो गुदा और लिंग या योनि के बीच में जो स्थान है । उसको मूलाधार या प्रथ्वी का चक्र वोलते हैं । और गुदा का स्थान इससे नीचे हैं । इसी से सिद्ध हो जाता है ।
सभी नरक प्रथ्वी से नीचाई पर है । क्योंकि मनुष्य शरीर की बनाबट और इस सकल बृह्माण्ड की बनाबट एकदम समान है । नरक प्राप्त करने वाली रूहों के सूक्ष्म शरीर को । यातना शरीर । नामक शरीर में  डाल दिया जाता है । इस शरीर की खासियत ही यही है । कि ये यातना समय तक आटोमेटिक बार बार नया होता रहता है । उदाहरण । किसी को आग में जलने की सजा मिली है । तो जलने के बाद अपने आप फ़िर नयी खाल । किसी को खतरनाक जीवों जन्तुओं से नोच नोचकर खाये जाने की सजा मिली है । तो मांस खत्म हो जाने पर फ़िर से नया मांस..E T C..। कहने का मतलब वहां किसी की डयूटी नहीं होती । हां कुछ अलग सजाओं में होती है ।
अब ये देखिये । हिंदू । मुस्लिम । सिख । ईसाई या विश्व का कोई भी जाति या समुदाय हो । स्वर्ग प्राप्ति को जाने कितनी बडी उपलब्धि मानता है । जबकि संतमत की किताबों में जगह जगह लिखा है । संत स्वर्ग पर थूकना भी पसन्द नहीं करते । अच्छा योगी । किसी कारण योगभृष्ट होकर पदच्युत हो जाय । तो भी स्वर्ग उसे पैरों में पडी चीज के समान मिल जाता है । स्वर्ग से बहुत बडी स्थिति अपवर्ग की है । पर योगी या संत उसकी भी चाह नहीं रखते । एहि  तन कर फ़ल विषय ना भाई । स्वर्ग ऊ स्वल्प अंत दुखदाई । अब प्रभु कृपा करो येहि भांती । सब तजि भजन करों दिन राती ।
विशेष - स्वर्ग या नरक सिर्फ़ मरने के बाद ही नहीं देखा जा सकता । कुन्डलिनी ग्यान द्वारा महज दस पन्द्रह दिनों के अभ्यास में स्वर्ग और उससे ऊंचे लोकों की यात्रा जीते जी ही हो जाती है । मैंने कई सरल ह्रदय साधक ऐसे देखे हैं । जो पहली बार के ध्यान में ही स्वर्ग मन्डल तक की चढाई कर आये । कोई देखना चाहे । तो बताये । मौत के इंतजार की आवश्यकता नहीं ? बस 15 दिन का समय और साधना के आचरण अपनाने होगे ।
लेखकीय - इस संसार में जिनको धर्म या जातियां कहते हैं । उनमें सभी में मेरे मित्र मौजूद हैं । ( मेरी 1 से 5  तक शिक्षा ही इस्लामियां स्कूल में हुयी है । इसके बाद मिडिल स्कूल के मेरे प्रधानाचार्य ( जिनका नाम याद  नहीं । ) और इंगलिश  टीचर मजहर अली जी थे । ) पर मुझे  धर्म और जाति शब्द से ही नफ़रत है ।
इंसान का सिर्फ़ एक ही धर्म । सनातन धर्म है । लेकिन हमारी वेशभूषा ।  रहन सहन । खानपान । आदतें । देशकाल में काफ़ी विभिन्नता और असमानता होने से इंसान जाति धर्मरूपी चक्रव्यूह में फ़ंस गया । ध्यान रहे । सच्चे साधु की कोई भी जाति और देश नहीं होता । वह सबका और  सब जगह का होता है । जाति न पूछो साधु की । पूछ लीजिये  ग्यान । मोल करो तलवार का । पडा रहन दो म्यान ।.. इस लेख में अगर आपकी निगाह में कुछ छूट गया हो । या स्पष्ट न हो सका हो । तो अवश्य पूछें । राम राम । सलाम वालेकुम । सत श्री अकाल AND..GOOD BY..TATA ..BY.BY.
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