17 जनवरी 2011

मनोज बनाम स्वप्नयोद्धा ।

बस मौला ज्‍यादा नहीं । कर इतनी औकात । सर उँचा कर कह सकूं । मैं मानुष की जात ।..
आदरणीय राजीव जी । नमस्कार । कल से मुझे मेल करने का मन कर रहा था । एक स्वप्न मैं बराबर देखता हूं । कुछ घर या बाग का दृश्य होता है । कोई चोर या बदमाश टाइप का आदमी होता है ।
या तो वह किसी को खासकर महिला को परेशान कर रहा होता है । या फिर चोरी । हत्या । कभी कभार मुझ पर भी आक्रमण करता है । मैं उससे भिड़ जाता हूं । फिर उसे भगाने या मारने के क्रम में ज़ोर से चीखता हूँ । या बोलता हूँ ।
और इसी के साथ या तो मेरी नींद भय के कारण । या पत्नी द्वारा झकझोर कर उठा दिए जाने के कारण टूटती है । कृपया इस पर प्रकाश डालें । और ये कैसे बंद होगा ? कुछ समाधान भी बताएं । श्री मनोज कुमार जी । कोलकाता । ई मेल से ।

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मेरी बात..हालांकि ये किसी भूत प्रेत का मामला नहीं है । पर अपनी छिराया या छहराया नामक पोस्ट में इससे ही मिलती जुलती स्थिति वाले एक अल्पशक्ति नगण्य से प्रेत की मैंने बात कही है । जो कतई और किसी रूप  में हानिकारक नहीं होता । कमोवेश लगभग प्रत्येक इंसान को अपनी जिंदगी में इस प्रेत का या ऐसी ही स्थिति का अनुभव होता है । जैसी कि आपने ऊपर बतायी है ।

 लेकिन उस स्थिति में दो प्रकार हो जाते हैं । 2 % लोगों के मुँह से गूँ गूँ  या इससे मिलती जुलती भयभीत होने की अस्पष्ट आवाज निकलती है । और 98 % लोगों को ये लगता है कि वो चीख चीखकर अपने  किसी परिजन को बुला रहे हैं । लेकिन वो सुन नहीं रहा । या सुन नहीं पा रहा । पर वास्तव में होता ये है कि आवाज निकल ही नहीं रही होती । इसमें एक मामला तो निसंदेह छिराया का ही होता है । और  उसकी सेम परिस्थियाँ ऐसी ही होती है । जैसी आपने ऊपर कहीं ।

बस एक बात अलग हैं । इसका एक ही दृश्य बार बार रिपीट नहीं होता । लेकिन दूसरे प्रकार में छिराया आपके पास न भी आये । तो लोग निम्नलिखित कारणों से किसी ऐसे स्थल ( जिसे नीचलोक या अंधेरे लोक कहना अधिक उचित है । ) पर पहुँच जाते हैं । जहाँ दुष्ट या  नीच आत्माओं का वास होता है ।

घबराईये नहीं । जागते की नहीं । उसी स्वप्निल अवस्था की ही बात कर रहा हूँ । इसमें क्या होता है । कि छाती पर हाथ रखने । या भारी वजन रखने । या बीमारी की वजह से रक्तप्रवाह का धीमा होना । या अधिक मोटापा होने से रक्तसंचार में बाधा । या ठीक स्थिति में न सोने पर किसी हिस्से पर दबाब पङने से रक्तप्रवाह में बाधा आना । आदि ऐसे कारण है । जिनमें रक्तवेग में रुकावट आने से शरीर की सचेतक सामान्य रक्षा प्रणाली कुछ समय के लिये निष्क्रिय हो जाती है ।

क्योंकि सिस्टम की कनेक्टविटी डिस्टर्ब हो चुकी होती है ।..इस दरम्यान ही आपको अपने सुरक्षा गार्ड के बिना रहना होता है । और चेतना शरीर के वर्जित क्षेत्रों ( जहाँ सामान्य स्थिति में नहीं जाती । ) में रक्तप्रवाह के बहाब के साथ चली जाती है । और वहाँ के लोग आपसे वैरभाव दिखाते हैं । क्योंकि आप अजनवी हैं ।

इधर आपके शरीर की पुलिस ( सामान्य रक्षा प्रणाली ) जहाँ अक्षम हो जाती  है । तब S T F ( विशेष रक्षा प्रणाली ) सक्रिय होकर खोजते हुये आपके पास पहुँच जाती है । उसको देखते ही वे लोग भाग जाते हैं । और तब आप किसी भी कारण से जाग जाते हैं । आपने अक्सर देखा होगा । इस  तरह की घटना हम अधिक से अधिक तीन चार दिन में ही भूल जाते हैं । ये माया का कार्य होता है । क्योंकि यदि घटना आपको हमेशा याद रहेगी । तो चेतना बारबार आकर्षित होकर वहीं पहुँचेगी ।..

लेकिन आपके मामले में इनमें से कोई बात नहीं हैं । आपका मामला किसी पूर्वजन्म के गहरे संस्कार से जुङा है । जो आपकी चित्रानाङी में लगभग अमिट स्याही जैसा अंकित हो गया है । क्योंकि इस व्यक्ति से किसी कारणवश आपका घोर वैरभाव रहा होगा । इसलिये नींद में जाते ही आप दोनों दुश्मन की तरह अखाङे में पहुँच जाते हैं ।

 अब मामला यह है कि आपके सोते समय वो पावरफ़ुल है । और जागते समय आप पावरफ़ुल हैं । क्योंकि आप न सोंये । तो उसका अस्तित्व भी आपको याद नहीं आयेगा । और जगी हुयी अवस्था में उसके पिताजी भी आप से तू मैं करने नहीं आ पायेंगे । लेकिन सोना भी आवश्यक है ।

अब समाधान की बात करते हैं । व्यक्तिगत तौर पर गुप्त समाधान मैंने आपको मेल से भेज ही दिया है । और आपका रिप्लाई मेल भी आ गया है । मेल में शीघ्रता की वजह से यह लिखना भूल गया कि कनेक्टिविटी आप बाहरी लोगों से शो न करें । मिसाल के तौर पर किसी से ये न कहें । कि राजीव ने ये उपाय बताया है । ये मामले गुप्त होते हैं । फ़िर उपाय इतना असरदायक नहीं रहता ।

अब..सार्वजनिक रूप से सर्वजन हिताय एक उपाय बता रहा हूँ । मैंने अक्सर कहा है । परमात्मा यानी जिसे संत लोग साहेब कहते हैं । उससे बङी कोई शक्ति नहीं है । ईश्वर । भगवान । देवी । देवता आदि महाशक्तियाँ सब उसी के अधीन हैं । और उसकी साधारण और सरल भक्ति से ( मेरा मतलब तंत्र मंत्र आदि प्रपंच । ये दरअसल भक्ति नहीं इलाज होते हैं । और अहम शक्ति को बङाना होता है । ) ज्यादा किसी भक्ति में ताकत नहीं है । और भक्ति का फ़ल भी नहीं हैं ।

 पर आप गलती कहाँ करते हो ?? आप हे भगवान । हे प्रभु । हे ईश्वर । हे राम आदि कहते हो । और उसको याद करते समय आपके दिमाग में देवी देवता आ जाते हैं । जो कि उसके बहुत छोटे कर्मचारी हैं । और नियमों से बँधे हुये हैं । अतः वे आपकी सहायता कर तो सकते हैं । पर नियम के अंतर्गत । जबकि परमात्मा पर किसी का कोई नियम लागू नहीं होता । उसके एक बन्दे ( सच्चा संत । ध्यान दें । साहेब सिफ़ारिश आदि नहीं करते । ) की दृष्टि होते ही आपके ऊपर से कठोर प्रावधान हट जाते हैं । यानी लाइलाज समस्या एकदम सरल हो जाती है । जैसे डेंगू का इलाज सिर्फ़ एक सेरिडान खाने से हो जाय ।

इसको बारीकी से समझने के लिये । तकनीकी रूप से समझने के लिये । आपकी समस्या को एक लाइन मान लेते है । जिसको या तो मिटाना हो । या फ़िर वो छोटी ( महत्वहीन ) हो जाय । यानी उसका प्रभाव कम हो जाय । मिटाना ?? मिटाने के लिये यदि आप अंतर्योग जानते हो । तो आसानी से इस लाइन को उसी तरह मिटा सकते हैं । जैसे इरेजर से मिटाते हैं । ( कंठ पर संयम करके । उसी संस्कार को जाग्रत करके । योग अग्नि से जला देते हैं । और समस्या खत्म । )

पर ये विशेष योग जनसामान्य को तो आते नहीं । अतः इससे भी प्रभावी और सरल उपाय वही है । जो मैंने ऊपर बताया । यानी परमात्मा की भक्ति । यानी वो लाइन । जिसके आगे सभी तुच्छ हैं ।

अब इसका तरीका भी जान लीजिये । अगर किसी ने संतमत वाले संतों का कभी सानिध्य किया होगा । तो वो संतजन थोङी थोङी देर में साहेब..साहेब कहते हुये याद करते रहते हैं । और कई वर्षों के अभ्यास से उनका भाव ये बन जाता है कि साहेब यानी जो सबका मालिक है । और जिसका मालिक कोई नहीं । यानी परमात्मा ।  इस तरह आपकी पुकार ( एप्लीकेशन ) सीधी । बिना किसी माध्यम के साहेब के पास पहुँचती है ।

और फ़िर क्या कहने । आप खुद ही समझदार हैं..हो गयी । तेरी बल्ले बल्ले । हो जायेगी । तेरी बल्ले बल्ले । हूँ..तुङुक तुङुक धुन..तुङुक तुङुक धुन..ना ना ना ना रे..।

धन्यवाद ।.. तू अजर अनामी वीर । भय किसकी खाता । तेरे ऊपर । कोई न दाता ।
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