28 जनवरी 2011

आईये आपका अंधविश्वास और भी बढाऊँ ।

अगर किसी इंसान को जहरीला सर्प डस ले । तो इलाज में दस - बीस हजार के तो इंजेक्शन ही लगते हैं । लेकिन कोई इंसान यदि आपसे यह कहे कि पीपल की एक स्वस्थ पत्तेदार डाली तोङ लायें । और मरीज को लिटाकर बारबार दो पत्ते तोङकर उसकी डंडी ( शाखा से जुङने वाली ) की तरफ़ से मरीज के दोनों कानों में आहिस्ता आहिस्ता प्रवेश करायें । इस पर मरीज तङपेगा और चीखेगा । इस तरह दो तीन बार करायें । जब मरीज शान्त हो जाय । तो पत्ते बदलकर फ़िर वही क्रिया करायें । फ़िर तङपने आदि की स्थिति रिपीट होगी । इस तरह जब सर्पदंश से प्रभावित व्यक्ति डंडी प्रवेश कराने पर जब पीङा का बिलकुल अहसास न करे । तब समझिये उसका जहर उतर गया । ( है ना कोरी गप्प । )..यह गप्प प्रतिष्ठित धार्मिक पत्रिका । कल्याण । गीता प्रेस गोरखपुर में लगभग 17 साल पहले प्रकाशित हुयी थी । बाद में उसकी छोटी बङी कई पुस्तकों में प्रकाशित हुयी । फ़िर जिक्र के अनुसार । कादम्बिनी आदि पत्रिकाओं में भी प्रकाशित हुयी ।..उस समय फ़ोन का आम चलन नहीं था । अतः इसके एक्सपर्ट सज्जन ने अपना नाम पता आदि सभी लेख के अंत में दिया था । जिससे उनके पास सैकङों पत्र पहुँचे । और सीधे सीधे मिलने भी लोग गये । महत्वपूर्ण बात यह है । कि ये उनकी सिर्फ़ मौखिक बात नहीं थी । उन्होंने तमाम पीङितों को इससे अच्छा किया था । जिसके प्रत्यक्षदर्शी गवाह गाँववालों के साथ समय समय पर अनेक लोग बने । यह कोई दबी छुपी बात न होकर बहुचर्चित लेख था । जिससे कल्याण का पूरा स्टाफ़ परिचित था । जिसको भी इसकी पूरी जानकारी चाहिये हो । गीता प्रेस से सम्पर्क कर सकते है ।
AND..मैं इस मामले में भाग्यशाली हूँ कि आज तक मुझे कुत्ते ने नहीं काटा । कुत्ते के काटने पर दो हजार के लगभग इंजेक्शन लगते हैं । पहले तो ये पेट में लगाये जाते थे ।..जिला मैंनपुरी उत्तर प्रदेश में विघरई नाम का एक गाँव है । गाँव में एक बहुत प्रसिद्ध कुँआ है । जिसका पानी आम प्रयोग में न होकर कुत्ता काटने के इलाज के लिये अधिक होता है । ( है ना कोरी गप्प ) अस्पष्ट जानकारी ( लेकिन सिर्फ़ मेरी । स्थानीय लोगों और वहाँ पहुँचे लोगों को पूरी बात सही मालूम है । ) के अनुसार बहुत पहले वहाँ कोई महात्मा हुये । जिनसे जुङी किसी बात से यह संभव हुआ । कुत्ते द्वारा काट लेने पर आज भी इस कुँए का पानी पीने बहुत दूर दूर से लोग आते हैं । इस कूपजल के प्रभाव के अनेक आसपास के लोग तो गवाह हैं ही । दूर दूर के लोग भी हैं । जिनकी मैंनपुरी के पास जान पहचान हो । फ़ोन से कई वर्षों से प्रमाणित इस सच्चाई का पता लगा सकते हैं ।
AND NOW ..RAJEEV BABA *** जिस बात से यह पोस्ट लिखी गयी..??.. वैसे इस बात को शायद मैं कभी नहीं जान पाता । पर ब्लाग के STATS पर निगाह डालते समय मेरी निगाह रैफ़र साइटस पर गयी । जिसमें.. प्रवीण शाह.ब्लाग स्पाट. काम का नाम दर्ज था । और इसका सीधा सा मतलब था कि उक्त ब्लाग से मेरे ब्लाग का लिंक जुङ रहा था । मैंने यू आर एल पर क्लिक किया । तो मेरी एक पोस्ट का जिक्र लेकर पूरा लेख प्रकाशित था ।..कहते हैं । आलोचना ही स्वस्थ चिंतन को जन्म देती है । मैंने इस आलोचनात्मक पोस्ट को पढा । और नये सिरे से इस पर विचार किया कि क्या सही है । और क्या गलत ?..यह बात मुझे करनपुर के स्वयँ आनन्द वेवाह उर्फ़ पुजारी बाबा ( तीन वर्ष पहले अशरीर ) ने बतायी थी । वास्तव में इस विधि में उनकी बतायी एक लाइन मैं लिखना भूल गया । वो ये कि..जीभ नाक की नोक और अन्दर गले के काग को समान रूप से स्पर्श करे । मतलब अन्दर भी उसका मुङाव हो । और बाहर भी । लेकिन ये दो अलग स्थिति हैं । एक ही समय में न समझें ।..इसका अभ्यास मैंने कुछ ही दिन किया । और छोङ दिया । क्योंकि धूम्रपान की आदत होने से मेरी जीभ मुँह आदि की मांसपेशियां कङी रहती थीं । इसलिये मेरे लिये ये अभ्यास नामुमकिन जैसा ही था । मुझे इस अभ्यास और इसके फ़ल में कोई अधिक रुचि भी नहीं थी । इस अभ्यास का कोई अनुभूत प्रयोग मैंने नहीं देखा था । पुजारी बाबा से क्योंकि सामान्य जिक्र में मैंने इस रोचक बात को सुना था । और मेरा उनसे अधिक मिलना भी नहीं होता था । इसलिये इस प्रयोग का सफ़ल प्रयोगकर्ता कौन था । ये भी मुझे नहीं पता था । लेकिन इस बात पर आंशिक ही सही विश्वास करने के कुछ कारण थे ?
जैसा कि श्री प्रवीण शाह जी । और कुछ टिप्पणीकर्ताओं ने । कुछ लोगों के उदाहरण भी दिये । जिनकी जीभ जन्मजात ही नाक को छूती थी । और प्रमाण के लिये ऐसे लोगों के चित्र भी प्रकाशित थे । मुझे नहीं मालूम विष के साथ उनके शरीर का क्या व्यवहार रहता होगा ?..लेकिन मेरे ख्याल में इस तरह की जीभ पर ये नियम लागू नहीं हो सकता । क्योंकि प्रयास द्वारा बङाई गयी जीभ । शरीर में यौगिक क्रियाओं का परिणाम लाती है । किसी भी यौगिक क्रिया से शरीर की आंतरिक संरचना । रसायनों में फ़ेरबदल होता है । जिससे यह संभव हो सकता है । जबकि जन्मजात ऐसा बाडी पार्ट सामान्य ही होगा । AND....इसका सबसे बङा सफ़ल जीता जागता हालिया उदाहरण बाबा रामदेव का अनुलोम विलोम है । नाक के छिद्रों से तो वैसे भी आवागमन करती वायु । उसी तरह निकलती है । फ़िर उसको थोङा सा घुमा फ़िरा देने से । वो जटिल रोगों में । शरीर को स्वस्थ रखने में । अत्यन्त प्रभावशाली कैसे हो सकती है ?? AND.. दर्द हार्ट में हो रहा है । और हथेली के किसी बिंदु पर दवाव देने से । हार्ट में लाभ कैसे हो सकता है ? ( एक्यूप्रेशर थैरेपी । जिसका इस्तेमाल बाबा रामदेव भी करते हैं । विश्व के अनेक लोगों द्वारा अपनायी गयी । AND..कुछ बाबाओं की संगति में मैंने सुना है । ये आयुर्वेद की कुछ पुस्तकों में भी मिलता है कि संखिया जैसा तीक्ष्ण विष थोङा सा । मटर के दाने का भी आधा । सिल पर घिसें । घिसा हुआ पूरा संखिया कपङे से बिलकुल साफ़ करके । सिल के उस स्थान पर उंगली घिसकर चाटें । यही क्रिया अनेकों महीने तक करें । विष शरीर पर निष्प्रभावी हो जाता है । AND..सांप के जहर से कुछ लोग एक बार काटने से ही मर जाते हैं । जबकि कुछ लोग धीरे धीरे अभ्यास से सर्पदंश सहन करते हुये । सर्पदंश से अप्रभावित हो जाते हैं । इस तरह के कई कार्यक्रम डिस्कवरी । नेशनल ज्योग्राफ़िक जैसे चैनलों पर प्रसारित हो चुके हैं । होते रहते हैं ।
AND..क्या किसी स्टील आदि धातु की चम्मच चमचा को एकटक एकाग्रता से देखते हुये मोङी जा सकता है । जापान जैसे देश में यह योग सिखाया जाता है । इसका सफ़ल प्रयोग मैंने टीवी पर देखा । AND..आगरा के खचाखच भरे सूरसदन हाल में । शायद मुम्बई से आये किसी व्यक्ति ने बाइक की इग्नीशन में लगी चाबी दूर से ही घुमा दी । तीस के लगभग एकाग्रता के प्रयोग दिखाते हुये सभी महिला पुरुषों को चमत्कृत कर दिया । सभी बङे अखबारों द्वारा कवरेज और प्रकाशित । AND.. क्या स्कूटर के एक्सीडेंट से रीढ में खराबी होने पर । लकवा हो जाने पर । डाक्टरों द्वारा लाइलाज घोषित किये मरीज को सिर्फ़ डेढ महीने के शीर्षासन द्वारा ( दीवाल के सहारे । एक खूँटी से पैर बाँधकर । योगी द्वारा सहारा देकर कराया गया । शीर्षासन । वैसे तो अच्छा भला शीर्षासन नहीं कर पाता । फ़िर लकवा पेशेंट कैसे करेगा । ) एकदम चंगा कर देना । आधा घंटा की डाक्यूमेंटरी दूरदर्शन पर अनेकों बार प्रसारित । AND..अभी कुछ ही दिनों पहले मैंने बिजली के बारे में पोस्ट लिखी । जोर का झटका धीरे से । जिसमें झांसी के प्रसिद्ध करेंट बाबा के बारे में है । ( प्रसिद्ध और अखबारों में प्रकाशित । ) इस पोस्ट पर ब्लागर श्री ललित शर्मा । श्री विनय शर्मा । ने कमेंट दिया कि ऐसा ही एक प्रोग्राम दूरदर्शन पर उन्होंने देखा था । जिसमें एक व्यक्ति 22000 वोल्ट का करेंटयुक्त नंगा तार जीभ से स्पर्श करता था ।
AND..ज्यादा पुरानी नहीं । लगभग पन्द्रह साल ही पुरानी बात है । जब एक नये नये बाबा रामदेव का अवतार हुआ था । बाबा ने जब ये कहा कि एक नाक छिद्र से खींची फ़ूंक को दूसरे नाक छिद्र से निकालो । फ़िर इसी क्रिया को विपरीत तरीके से करो । बाबा ने इसको अनुलोम विलोम बताया । तो इससे डायबिटीज । ब्लड प्रेशर । हार्ट डिसीज आदि तमाम जटिल रोग ठीक हो जायेंगे । तब 85 % विश्व की जनता । डाक्टर और हम महान भारतवासी बाबा रामदेब की खिल्ली उङाते हुये नहीं थकते थे ।..लेकिन यह क्या..15 -18 सालों में ही विश्व के तमाम पार्कों में सुबह सुबह ही करोङों जनता बाबा की तरकीब से नाक से फ़ूँ फ़ूँ करने लगी । ( जिसको इस बात का विश्वास न हो । हरिद्वार जाकर देख सकते हैं । हरिद्वार नहीं जा पाओगे । कोई बात नहीं । सुबह सुबह अपना टीवी तो खोलकर देख ही सकते हो । )..भाई आप लोग पाला बदलने में हमेशा से माहिर रहे हो । जिसका भी पलङा भारी देखा । कूदकर उधर ही पहुँच गये । AND....आगे तो बाबा ने गप्प लङाने की हद ही कर दी । बाबा ने कहा । नाखून से नाखून घिसने पर बाल मजबूत होते हैं । बङे होते हैं ।..और यह क्या ? तमाम नजाकती फ़ेशनेबल महिलायें भी स्टेशन जैसे स्थानों पर परस्पर नाखून घिसते देखी गयीं । ( बाबा की यह भी गप्प कामयाब रही । )
AND..आगे और भी..पहले जिस लौकी को मरीजी भोजन कहते थे । खाने के नाम पर नाक भों सिकोङते थे । इस लौकी का जूस बेहद फ़ायदेमन्द हैं ।..स्टेटमेंट देकर बाबा ने लौकी के दाम इंटरनेशनल मार्केट में इस कदर उछाल दिये । कि लौकी का एक एक शेयर ( एक रुपये वाली एक लौकी बीस रुपये तक ) एक रुपये से बीस रुपये की उछाल मारने लगा । गरीबों की लौकी दुर्लभ होकर अमीरों के जूसर में पहुँच गयी । ..ढाई कपङा ( एक अंगोछा । एक लुंगी । एक लंगोट । ) पहनने वाले इस बाबा ने विश्व के तमाम स्थापित सिद्धांतो की चूलें हिलाकर रख दी ।
AND..1 अपनी दुकान के सामने हरी मिर्च नीबू लटकाने वाले । 2 भवन पर राक्षस मुख का मुखौटा लगाना । 3 जच्चा के सोअर कक्ष के बाहर निरंतर धुँआ करना । 4 जच्चा के सिरहाने चाकू आदि रखना । 5 पैदा हुये बच्चे का नाम विधि विधान से क्यों रखवाते हो । आप ही क्यों नहीं सोनू मोनू रख लेते । 6 जो मर गया । वो तो गया । फ़िर क्यों लम्बे खर्चीले ठठाकर्म करते हो । 7 विवाह में एक कन्या और एक वर को आजीवन साथ निभाने का वादा करना होता है । फ़िर इसके लिये इतने लम्बे तामझाम की क्या आवश्यकता । चार लोगों के बीच वैसे ही यह शपथ ली जा सकती है । मैं विवाह मन्त्र और रीतरिवाजों की बात कर रहा हूँ । 8 शोक संदेश में लिखते हो । फ़लाना स्वर्गवासी हुआ । आपको कैसे गारंटी है । मृतक स्वर्ग ही गया ? 9 किसी बकरा के शरीर पर अल्लाह लिखा हो सकता है । 10 क्या किसी बिल्ली की जेर ( बिल्ली के प्रसव के बाद । शिशु का आवरण टायप ) तिजोरी या बक्से में रखने से धन हमेशा बना रहेगा । इस जेर की मुँहमांगी कीमत देने के लिये बङे बङे अच्छे तैयार रहते हैं । पर कहा जाता है । बिल्ली इस जेर को खा लेती है । 11 वास्तु । फ़ेंगशुई आदि का कोई बैग्यानिक आधार हो सकता है । + एक छोटा सा फ़ङ लगाने वाले से लेकर अम्बानी जैसे । मित्तल जैसे लोग भी सुबह बिजनेस की शुरूआत अगरबत्ती को भगवान के आगे घुमाकर । फ़िर अपने दुकान आदि के सामानों पर घुमाकर लगाते हैं । इनमें मैंने विदेशों में शिक्षा प्राप्त M B B S डाक्टर को भी देखा है । 12 नवजात शिशु से लेकर दो तीन साल के शिशु को कमर करधनी पहनाने का औचित्य क्या है । 13 उसके काजल का टीका माथे पर लगाने का औचित्य क्या है । 14 उसके अकारण ज्यादा रोने ( नजर लग जाने पर ) पर मिर्च आदि के धुँये से उसकी नजर उतारने का औचित्य क्या है ? घर के किसी बुजुर्ग से पूछना । 15 चलते समय छींक और बिल्ली का रास्ता काटना तो घिसी पिटी बातें हैं । 16 किसी कार्य बिजनेस आदि के शुरू करते समय धार्मिक क्रियाओं हवन । कथा । पूजा आदि का क्या महत्व है ? जबकि किसी को भी ये गारन्टी नहीं । भगवान है भी या नहीं ??
AND..कहाँ कहाँ तक गिनाऊँ । भाई आप अँधविश्वासी लोग गंगा जैसी नदी को माँ मानते हो । आपको कौन और कितना समझायेगा ?? मैं तो हार गया ।
AND..और ये थी वो पोस्ट । जिससे ये पोस्ट । पोस्ट हुयी ।.." एक बार देख ही लीजिये कि क्या आप भी अपनी नाक को अपनी जीभ से छू सकते हैं ? " PRAVEENSHAH.BLOGSPOT.COM
AND..डिस्क्लेमर:- मैंने ये देखा है । कि मेरी एक मामूली पोस्ट से लोगों के पेट में दर्द हो जाता है । इस बिना पर आप ऐसे विषय पर तमाम हालीवुड बालीबुड एनी..बुड फ़िल्मों । हैरी पाटर जैसे देशी विदेशी उपन्यासों । इस तरह के तंत्र मंत्र साहित्य के लिये फ़िर क्या कहेंगे ? क्या करेंगे ? मैंने अपनी ज्यादातर पोस्टों में परमात्मा की सरल । सहज । संत परम्परा द्वारा बतायी गयी । धर्मगृन्थों में वर्णित भक्ति अपनाने पर ही जोर दिया है । बाकी मैटर संतो आदि के सानिध्य के अनुभव । और प्राचीन साहित्य में उपलब्ध जानकारी पर सिर्फ़ हमारे आसपास के ग्यात अग्यात रोचक प्रमाणित अप्रमाणित रहस्यों पर चर्चा करना मात्र है ।
AND..और अंत में मेरी माँ की सीख...बचपन में कभी कोई गलती हो जाने पर । मैं माँ से कहता । उस लङके ने ऐसा करने को कहा था । उसने मुझे प्रेरित किया था । तब माँ कहती । वह लङका अगर कहे । कुऍ में कूद जा । तो तू कूद जायेगा । तेरी अपनी फ़ूटी हैं क्या ?... जाहिर है । हम कुछ भी करते हैं । तो हमारा कोई न कोई निजी स्वार्थ अवश्य रहता है ।
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