21 अगस्त 2012

प्रेत प्रभावित परिवार


पिछले दिन कुछ अजीव से रहे । और अभी भी अजीव ही हैं । जैसे मैं हूँ । जैसे मैं नहीं हूँ । एक धुँधली यादों सा सब कुछ बचा रह गया है । वृद्धावस्था में शारीरिक रूप से निष्क्रिय लोग जैसे खुद उदासीन हो उठते हैं । ये मरजीवा योग है । जीते जी मरना । इसीलिये मैंने कहा - वृद्धावस्था में जैसे सिर्फ़ सुखद मौत का इंतजार होता है । लेकिन ये स्थिति सिर्फ़ मन की है । मुझे ( बेमन से ही सही ) अभी भी काम करना होता है । और  पूरी ऊर्जा से काम करने होते हैं । पर जैसे बेमन से । क्योंकि मैं इन तमाम योग क्रियाओं से बुरी तरह ऊब चुका हूँ । वही तमाम उच्च निम्न लोकों का जरूरी गैर जरूरी भृमण । वही आदेशित किये गये जीव के संस्कारों का निबटारा । वही सब कुछ । कोई भी ऊब जायेगा । यदि एक लम्बेऽऽ समय तक ऐसा हो ।
14 aug 2012

- महाराज जी ! मुझे आपसे कुछ बात करना है । हमारा एक शिष्य मुझसे  फ़ोन पर कहता है - बात कुछ लम्बी है । इसलिये थोङा देर तक बात करनी होगी । ..हमारे एक रिश्तेदार हैं । पिछले समय से उनके यहाँ कुछ अजीव स्थितियाँ हैं । वे तीन भाई हैं । जिनमें दो भाई कुछ महीनों के अन्तराल में आत्महत्या कर चुके हैं । उनके घर में एक औरत ने भी आत्महत्या कर ली है । इसलिये वे सभी भयभीत हैं । कोई कहता है । घर में बरम देव का स्थान है । कोई कुछ कहता है । कई तरह के उपचार करा चुके हैं । अब किसी के बताने पर ईसाई प्रार्थना शिविर में भाग ले रहे हैं । उन्हें 21 बार प्रार्थना हेतु बुलाया गया है । और कहा गया है कि यदि 21 बार प्रार्थना में सम्मिलित नहीं हुये । तो प्रेत सबको मार डालेगा । घर के बाकी लोग भी अजीव से सम्मोहन का शिकार है ..आदि आदि । गुरूजी ये सब क्या है ? क्या ये बात वाकई सच है ? वे लोग बहुत डरे हुये हैं ।
दया बिन सन्त कसाई । दया करी तो आफ़त आई । मैं अपने अनुभव से समझ गया । सत्ता ने कार्य भेज दिया ।

- हाँ ये सच है । मैं फ़ोन पर कहता हूँ - प्रायः अन्य मामलों की तरह माँस मदिरा का प्रयोग करने वाले परिवार ऐसे दोषों से अक्सर पीङित हो जाते हैं । और इसकी शुरूआत बहुत पहले से हो चुकी होती है । लेकिन इन प्रेत आवेशों के प्रभावी परिणाम आने जब शुरू होते है । तब इंसान को होश आता है । पर तब तक बहुत देर हो चुकी होती है । अतः उनका शक एकदम सही है । आगे भी  ये सिलसिला चलता रहेगा । अभी जिक्र किये व्यक्ति 20% प्रभावित हैं । इसलिये कुछ सामान्य सा लग रहा है  ।
- तो उस प्रार्थना से कुछ नहीं होगा ?
-  हाँ क्यों नहीं होगा । लोगों की ईसाई शिविरों की ओर आस्था बढेगी कि यहाँ ऐसे ऐसे लोग ठीक हो जाते हैं ? क्योंकि बाद में कोई दुर्घटना होने पर वह भीङ ( ईसाई शिविरि की ) देखने नहीं आती कि क्या हुआ । न ही कोई फ़ादर

आदि बताता है कि - यीशु ने प्रार्थना नहीं सुनी । और कोई फ़ायदा नहीं हुआ ।
यह बात जब मुझे बताई जा रही थी । प्रभावित परिवार हमारे शिष्य के घर ही था । लेकिन मेरी उनसे कोई बात नहीं हुयी ।
- वे लोग चले गये हैं । कुछ देर बाद फ़िर फ़ोन आता है - अब आप स्पष्ट बतायें क्या होगा ?
- कोई भी मरने वाला । मैं स्पष्ट ही कहता हूँ - यदि अकाल मौत मरता है । तो भले ही वह घर का ही हो । दुश्मन हो जाता है । या दूसरे भाव में । वह चाहता है कि इनको भी अपने पास बुला लूँ । क्योंकि अकाल मौत होने से उसकी तरंगे और घर के सदस्यों के भाव अभी भी आपस में जुङे रहते हैं । इसलिये प्रेत योनि प्राप्त रूह का काम आसान हो जाता है । इसके .. ( आगे पूछने पर ) दो ही उपाय है । अच्छे तांत्रिक द्वारा प्रेत वायु का समूल उपचार । लेकिन यदि घर के लोगों का भय नहीं निकला । वे अपनी भावनायें नहीं हटा पाये । तो प्रेत फ़िर जुङ सकते हैं । और दूसरा सतनाम भक्ति । इससे तो दैवीय बाधायें भी हाथ

जोङ कर थर थर कांपती हैं । फ़िर प्रेत किस खेत की मूली हैं । ये हमेशा के लिये उपचार हो जायेगा । अब ये उन पर निर्भर है कि वे क्या तय करते हैं ।
- प्रणाम महाराज जी ! कुछ देर बाद उन्हीं रिश्तेदार का फ़ोन आता है - वो जो आपकी बात हुयी थी .. महाराज जी हम लोग बहुत डरे हुये हैं । आपकी शरण में आये हैं । हमारे लिये कुछ करें । हम जल्द से जल्द नाम उपदेश ले लेंगे । पर तब तक आप हमारी रक्षा करें । ..और वो जो हम ईसाई प्रार्थना शिविर में जाते हैं । उसमें जायें । या ना जायें ?
- ठीक है । मैं बिना कुछ सोचे ही तुरन्त कहता हूँ - तुम कोई चिन्ता मत करो । कोई तुम्हारे पास भी नहीं फ़टकेगा । पर यह अस्थायी होगा । स्थायी समाधान के लिये आपको नामदान लेना होगा । जहन्नुम में जाने दो । प्रार्थना आरती पूजा सूजा को ।
भले ही मत विश्वास करना । पर मैं खिङकी से बाहर देखता हुआ कहता हूँ - ऐ फ़ूट लो तीनों । अभी कुछ दिनों तक डिस्टर्ब नहीं करोगे ।  ( यह मौन भाव होता है । न कि वाणी आदेश )


इसके बाद प्रभावित व्यक्ति की पत्नी भी मुझसे बात करती हैं - गुरूजी वास्तव में तो हमें भी ईसाईओं की उस प्रार्थना बगैरह में कुछ विश्वास नहीं है । पर मरता क्या न करता वाली बात है । वह हम बेमन से ही करते हैं । ऊपर से उन्होंने धमकी भी दी कि प्रार्थना नहीं करायी । तो ये हो जायेगा । वो हो जायेगा । बताईयें हमें क्या करना चाहिये । हम लोग डरें हुये हैं ।
- तुम्हें कुछ नहीं करना चाहिये । मैंने कहा - और झाङू मारों ईसाईओं को । और उनकी प्रार्थना को भी ।
कोई भी कल्पना कर सकता है कि ऐसी समस्या जिसका कोई ठोस समाधान न हो । और बात मृत्यु के परिणाम

तक हो । तो प्रभावित लोग कितना भयभीत होंगे । मैं उनसे कहता हूँ - तुम डरो मत । कोई बङी बात नहीं है ।
इसके कुछ ही देर बाद फ़िर हमारे शिष्य का फ़ोन आता है - गुरूजी वो लोग अब बहुत खुश हैं । उनके मन का जैसे अन्दर से ही डर निकल गया है । वो कह रहे थे । पहले जो अजीव सा डर हर वक्त रहता था । अब बिलकुल नहीं लग रहा । लग रहा है । जैसे कोई बात थी ही नहीं ।
लेकिन अभी भी एक बात थी ? दूसरे ही दिन फ़िर उन लोगों का हल्की घबराहट के साथ फ़ोन आता है - गुरूजी गोरबा ( पैर ) में बहुत तेज अजीब सा दर्द है । फ़िर से घबराहट हो रही है ।
- तुम चिन्ता मत करो । मैंने कहा - वह कुछ ही देर में खुद ठीक हो जायेगा ।
आखिर जाते जाते कोई ना कोई खीझ तो हर बन्दा निकालता ही है । सो वह भी निकाल रहा था । कितना अजीव है ये इंसान भी । सही वक्त में जैसे नशे में रहता है । उसे अपना हर काम सही लगता है । चाहे खुद अपनी ही

अंतर आत्मा से वह उसे गलत लग रहा हो । सुख में सुमरन ना किया दुख में करता याद । कह कबीर उस दास की कौन सुने फ़रियाद ।
19 aug 2012 चिंताहरण आश्रम ।
प्रभावित परिवार में पत्नी को दीक्षा के बाद अनुभव होता है । या स्पष्ट दिखता है । उसके परिवार के मृत तीनों लोग । दो आदमी एक औरत । एक अंधेरी सी गुफ़ा के पास खङे हैं । वे उसकी तरफ़ से मुँह फ़ेर लेते हैं । और निराश आगे चले जाते हैं ।
- एक महीने तक । श्री महा्राज जी कहते हैं - खूब मन लगा कर इस नाम का सुमरन कर लो । फ़िर कोई भूत 

प्रेत कभी नहीं सतायेगा ।
इतनी सरल सतनाम भक्ति के प्रेतक उपचार में कई बार तुरन्त प्रभाव मेरे सामने आये हैं । मैं कई बातें सोचता हूँ । इन्हें कितनी बङी प्राप्ति हुयी । शायद इन्हें भी पता न हो । डर से ही सही । ये सतनाम का सुमरन करेंगे । और धीरे धीरे आनन्द को प्राप्त होते जायेंगे । अनजाने में ही असली भक्ति और हमेशा के लिये मनुष्य जन्म की पात्रता भी मिल गयी ।
- इसमें कई बातें जिनका उल्लेख उचित नहीं था । और पात्र स्थान के नाम मैंने नहीं लिखे ।


एक टिप्पणी भेजें

Follow by Email