26 अगस्त 2012

दूसरों की कमी निकालने के बजाय ज्ञान प्रकाश फ़ैलाना ही उचित


राजीव जी नमस्कार ! मै और अन्य अनेकों लोग आपके ब्लाग को बडे विश्वास व श्रद्धा से पढते हैं ।
आपसे एक विनती है कि आपसे पुछे गये प्रश्नो का उत्तर आप स्वयं ही दिया कीजिये । क्योकि आप स्वयं उस अवस्था में हैं । जहाँ आप स्वयं अन्दर जाकर सत्य व असत्य का पता लगा सकते हैं । जहाँ आप उन प्रश्नों ( जिनका उत्तर स्वयं अन्दर जाकर ही मिल सकता है ) के उत्तर स्वयं अन्दर जाकर खोजकर निकाल सकते है । जबकि अन्य सिर्फ़ अपनी बुद्धि से उत्पन्न विचारो को प्रकट या व्यक्त कर सकते है । जिनका आधार अधिकतर बाहरी ज्ञान ( नेट सर्फ़िंग । अज्ञान । या काल के दूतों द्वारा लिखी भ्रामक किताबें । अपरिपक्व मानसिक सोच । अज्ञान लोगों से आध्यात्मिक ज्ञान चर्चा से प्राप्त अज्ञान आदि-2 ) होता है । और जो हो सकता है कि ये आधार भृमित करने के लिये काल के द्वारा ही निर्मित हो । या दिया गया हो । हो सकता है कि कभी-2 आप भी समय के अभाव में बाहरी या अन्य स्रोतों से प्राप्त जानकारी के आधार पर उत्तर दे देते हों । किन्तु उसका नुकसान जिज्ञासुओं को ही होता है ।
अतः आपसे विनमृ निवेदन है कि आप स्वय ही अन्दर जाकर उन प्रश्नों का उत्तर या समाधान खोजकर निकालें । तभी सत्य को लिखें । न कि बाहरी जानकारी के आधार पर । जैसे कि अन्य सन्तों । पन्थों । गुरुओं आदि की सत्यता को परखने के लिये

आप स्वयं अन्दर जाकर उनकी लोकों तक पहुंच । उनकी शक्ति । उनके आध्यात्मिक स्तर । वे किस मंडल तक पहुँचे हुये हैं इत्यादि-2 सवालो के जवाब स्वयं खोजकर ही लिखें ।
किन्तु मेरे विचार से दुसरे सन्तों । पन्थों । गुरुओं आदि की कमियों को निकालने की अपेक्षा अपने ज्ञान के प्रकाश को फ़ैलाना ज्यादा उचित है । ताकि जिज्ञासु इंसान स्वयं ही पतंगे की तरह इस रोशनी की तरफ़ भागा आये । और आपसे जुड जाये । जैसा कि कबीर साहब ने कहा है -
कबीरा खडा बाजार में । सबकी मांगे खैर । ना काहु से दोस्ती । ना काहु से बैर ।
एक बात और कहना चाहुँगा कि - मैं स्वयं भी राधास्वामी मत से जुडा हुआ हुँ । पंजाब जो कि सन्त मत के गुरुओं की भूमि है । वहाँ आज गुरुवाणी के सही अर्थ को कोई नहीं जानता है । इसीलिए जब वहाँ किसी पूर्ण सन्त ने गुरुवाणी का सही अर्थ बताया । उन्हें सच्चे नाम से जोडने की कोशिश की । तो वहाँ के कुछ अज्ञानी लोगों ने जो स्वयं को सच्चा सिख समझते थे । और समझते हैं । ने उनका विरोध करना शुरु कर दिया । जिसके लिये उन्होने कई हथकन्डे अपनाये । उनके बारे में भ्रामक व दूषित अफ़वाहें उडाई । तथ्यों को तोड मरोड कर पेश किया जाने लगा । 

जुलियन जोन्सन बाबा सावन सिंह जी से दीक्षा प्राप्त थे । उनकी जिस किताब का आपके यहाँ जिक्र आया है - who killed path of the masters उसका असली नाम - path of the masters है । और उनकी लिखी ये किताब सच्चे जिज्ञासुओं के लिये किसी ग्रंथ से कम नहीं है । आप स्वयं इस किताब को पढ कर देखिए ।
और जैसा कि आपके ब्लाग पर जिक्र किया गया है । उसमें ऐसा कुछ नहीं लिखा है । ये सब जानबुझ कर तथ्यों को छिपाकर दुष्प्रचार किया गया है । इसीलिए मैं आपसे फ़िर निवेदन करता हुँ कि सत्य को स्वयं अन्दर जाकर जानने की कोशिश कीजिये । ताकि किसी की आधी अधूरी व गलत जानकारी के आधार पर ही सत्य व असत्य को प्रमाणित न किया जा सके । जिससे किसी की भावनाओं को ठेस न पहुँचे ।

मैं स्वयं आप पर बहुत भरोसा व विश्वास करता हुँ । और ये उम्मीद करता हुँ कि आप सभी जिज्ञासुओं के प्रश्नों का उत्तर स्वयं अन्दर जाकर उनके समाधानों व उत्तरों को जान व खोजकर ही बतायेगे ।
अगर मुझसे कोई गलत या अशिष्ट लिखा गया हो । तो मुझे मुर्ख । अज्ञानी समझ कर माफ़ कर देना ।
मैंने अगर किसी की भावना या अहं को ठेस पहुचाया हो । तो इसके लिये मै क्षमा प्रार्थी हुँ । दीपक ।
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धन्यवाद दीपक जी ! हम शीघ्र बात करेंगे ।
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