15 अगस्त 2012

बोलो कोका कोला भगवान की जय - ओशो


राधास्वामी पंथ पर ओशो से एक जिज्ञासु द्वारा पूछे गये प्रश्न का उत्तर । पिछले दो उत्तर इसी माह प्रकाशित अन्य लेख में देखें ।  
- कोई भी ध्वनि कार्य करेगी । क्योंकि सभी ध्वनियाँ दैवीय हैं । सभी उसके नाम हैं । हाँ कोका कोला भी । याद रखें रामकृष्ण भी । अगर एक चाय का प्याला परमात्मा है । तो कोका कोला क्यों नहीं ? वास्तव में कोका कोला ही इस दुनिया में इस एक अंतर्राष्ट्रीय वस्तु है । केवल एक वही । रूस में भी कोका कोला । वे अमरीकी रहन सहन के तौर तरीके पसंद नहीं करते । लेकिन कोका कोला उन्हें पसंद है । और यही एक बृह्मांण्डिय भाई चारे और प्रेम का चिन्ह भी होना चाहिए । हो सकता है कि तुम्हें किसी दुसरे के मंदिर में उस परमात्मा पर विश्वास न हो । उसके धर्म 

ग्रंथो में विश्वास न हो । लेकिन जहाँ बात कोका कोला की आती है । वहां न कोई मुस्लिम है । न कोई हिन्दू । और न ही कोई ईसाई । कोका कोला एक मसीह चिह्न है ।
सभी ध्वनियाँ काम करती हैं । बस तुम्हें केवल उन्हें जागरूकता से दोहराने की जरूरत है । और जब आप उन्हें दोहरा रहे होते हैं । तो उन पर ध्यान भी दीजिये । यदि आपका ध्यान नहीं है । तो कोई भी ध्वनि कार्य नहीं करेगी । फिर चाहे तुम कितना भी उत्तम मन्त्र ले लो । और किसी भी पहुंचे हुए गुरु से ले लो । वह कार्य नहीं  करेगा । और वह तभी तक काम करता है । जब तक तुम उस पर ध्यान देते हो । आप उन्हें दोहराते रहिये । और दोहराते हुए देखते रहिये । आप दोहराते हैं - राम ..राम ..राम ..और भीतर ही आप देखते है कि आप दोहरा रहे हैं । और देखते हैं कि भीतर से आवाज ऊपर उठ रही है । देखिये कि आवाज उत्पन्न हो रही है । उठती है । और धीरे धीरे लुप्त हो जाती है । दो राम के मध्य के विराम को देखिये ।
और धीरे धीरे उस आवाज को और परिष्कृत कीजिये । इस तरह मन्त्र के 4 चरण होते हैं । पहला - उसे जोर से दोहराना । ताकि दुसरे भी सुन सकें । क्योंकि आप सचेत नहीं हो । और यदि आप अंतर में ही इसे बिना होंठ हिलाए दोहराते हैं । तब हो सकता है कि आप सचेत न हों । इसे इतने जोर से चिल्ला कर दोहराना होगा कि कोई और इसे दोहरा रहा है । राम.. राम .. राम .. तुम्हे सचेत रहना पड़ेगा । इससे तुम नींद में न पड़ोगे । और जब तुम इसे सीख जाते हो । तो मुँह बंद करके दोहराओ । आपके होंठ बिलकुल भी न हिलें । अंतर में इसे दोहराते जाओ । तब यह आपके गले में हो रहा होगा । अब यह चिल्लाने वाली स्थिति से कुछ परिष्कृत हो चूका है । अब थोडा और गहराई में जाते हैं । इसे दोहराना बंद कर दें । और तीसरे चरण में इसे दोहराएँ ही नहीं । इसे खुद ही होने दें । यदि आप किसी ध्वनि पर बहुत देर तक काम करते हैं । तो आप देखते हैं कि वह खुद को दोहराती है । वह स्वयँ होती जाती है । कभी कभी किसी गीत की पंक्तियाँ स्वयँ ही आ जाती हैं । और आप उसे दोहराने लगते हैं । आप उसे दोहराना नहीं चाहते हैं । आप कुछ और कर रहे होते हैं । और वह अपने आप आ जाते हैं । और दोहराने लगते हैं । यह आपको दीवाना भी कर देती है । ठीक यही तब भी होता है । जब कोई व्यक्ति किसी एक ध्वनि पर वर्षों काम करता है । तब उसे दोहराने की जरूरत नहीं पड़ती । वह जब भी शांति से बैठता है । वह आवाज़ उसे सुनाई देने लगती है । दोहराने लगती है । तब आप केवट एक श्रोता और एक दृष्टा होते हैं । यही तीसरा चरण है । और चौथे चरण में आवाज़ भी गायब हो जाती है । कोई दोहराव नहीं । केवल एक दृष्टा ही बचता है ।
यह चारों चरण यही सिखाते हैं कि - कैसे जागृत बनें ? आप कोई भी आवाज इस्तेमाल कर सकते हैं ।  इसीलिए मैंने कहा - कि ये सब बकवास है कि केवल उन्हीं ( राधास्वामी ) के धुन और 5 मन्त्र ? ही वैध साधना है । आप अपना ही कोई तरीका खोज सकते हैं । और वह कारगर भी सिद्ध होगा । क्योंकि उसमें आपका प्यार और गहनता जुड़े होंगे । और उनका बाकी सब चीजों से ज्यादा प्रभाव पड़ेगा ।
तीसरा - केवल चरण सिंह ही आपको सूरत शब्द से जोड़ सकते हैं ।
आप उससे जुड़े हुए हैं । आप उससे अ सम्बन्ध नहीं हैं । आपको उससे जुड़ने के लिए किसी की भी आवश्यकता नहीं है । ये वही लोग हैं । जो आपका शोषण करते हैं । अगर आप उससे जुड़े न होते । तो आप क्षण भर भी जी न पाते । आप जीवित हैं । आपका जीवन इस बात का सबूत है कि - आप परमात्मा के शब्द से जुड़े हैं । उस निस्तब्धता से । उस संगीत से । उस मधुर गीत से जुड़े हैं । आप उसी मधुर संगीत का एक स्वर हैं । उसका एक अंग हैं । एक गुरु में और आप में केवल यही अंतर होता है कि वह चेतन रूप से इससे जुड़ा होता है । और आप अनजाने में । वह जानता है कि वह जुड़ा हुआ है । और आप नहीं जानते कि तुम भी जुड़े हो । वह तो आपको इस तथ्य के प्रति जागरूक करता है । वह जोड़ता नहीं है । यही वे लोग हैं । जो तुम्हारा शोषण करते हैं । यही धूर्त लोग होते हैं । इनसे बचिए ।
चौथा - यदि आप उनके शिष्य बन जाते हैं । तो आपको और जन्म लेने पङ सकते हैं । परन्तु मौजूदा योनि से नीचे नहीं ।
- क्या आपने कभी सूना है कि कोई नीचे गया है । नीचे जाने का कोई रास्ता ही नहीं है । और कोई नीचे नहीं गया है । क्योंकि आपने जो कुछ सीखा है । वो सीख चुके । और जो कुछ जाना है । वह जान चुके । आप इससे पीछे नहीं जा सकते । पीछे जाने का कोई रास्ता नहीं है । सभी कुछ आगे बढ़ता है । इसीलिए मैं कहता हूँ - ये धूर्त लोग होते हैं । जो कहते हैं कि अगर तुम हमारे शिष्य नहीं बने । तो कुत्ते या मगरमच्छ बनोगे । और तब भय पैदा होता है - मगरमच्छ ? कुत्ता ? तब क्यों न खुद को बचाया जाय । चरण सिंह के शिष्य बन जाओ । तो कम से कम मगरमच्छ तो न बनोगे । कुत्ते तो न बनोगे । या और भी बुरी चीजे हैं । जैसे कोकरोच और चूहे । आप अपने आप ही चुन सकते हो । कोकरोच बनने के बारे में सोचा । तब तुम बहुत डर जाओगे । कोई भी कोकरोच बनना नहीं चाहेगा । 
धर्म के नाम पर सदियों से लोगों का शोषण होता आया है । यह व्यापार का रहस्य रहे हैं । भय पैदा करो । और लालच पैदा करो । यही दो गुप्त रहस्य हैं । अगर कोई आपको डराने या तुम में लालच पैदा कर रहा है । तो उस जगह जाने से बचो । उस जगह का धर्म से कोई लेना देना नहीं है । क्योंकि वास्तविक धर्म तो तुम्हें सभी भय और लालचों से मुक्त करता है । यह रोगात्मक स्थिति के चिन्ह हैं । जो तुम में भय और लालच जगा रहा है । जो कि एक ही सिक्के के दो पहलु हैं । तुम्हें नरक और उसकी आग के भय से डरायेगा । और तुम में स्वर्ग का लालच जगायेगा ।
लेकिन चरण सिंह वास्तव में बहुत चालाक और धूर्त लगता है । क्योंकि अगर आप एक स्वर्ग की बात करते । तो ईसा आपको वहाँ ले जा सकते थे । बुद्ध आपको वहाँ ले जा सकते थे । कबीर या नानक भी आपको वहाँ ले जा सकते थे । कोई भी ले जा सकता था । अब सात स्वर्ग हैं । और छह और उसने खोजे हैं । और जब लोग इस बारे में बात करेंगे । तो जाहिर है । सोचेंगे कि बाकी सब तो एक की बात करते हैं । और ये सात की बात कर रहा है । यह अवश्य ही कुछ ज्यादा जानता है । 
क्या आपने सुना है ? शायद आपने न सुना हो । बुद्ध और महावीर के समय में एक आदमी हुआ था । शायद चरण सिंह का ही पिछला अवतार रहा हो । उसका नाम था - मतली घोसल । वह सात सौ नरक और सात सौ स्वर्ग की बात करता था । और अब ये जानता है । और बहुत लोगों ने इसका अनुसरण किया । इसका कारण था कि - महावीर केवल एक की बात करते थे । और मतली घोसल कहता । देखो वह केवल एक के बारे में जानता है । उसने केवल एक में प्रवेश किया । मैं सात सौ के बारे में जानता हूँ । और अगर तुम लोग कुछ आगे जाना चाहते हो । तो तुम सात सौ के बारे में जान सकते हो । तुमे कोई नहीं रोकेगा । 
आप भी इस तरह की कहानियाँ बना सकते हो । इन्ही कथाओं ने धर्म की विश्वसनीयता को ख़त्म कर दिया है । इस तरह की कहानियाँ । और इन जैसे धूर्त लोग ही दुनिया में अधार्मिकता के मूल कारण होते हैं । और उन्ही के कारण शंका पैदा होती है । मैं फिर से दोहराऊंगा कि - असली गुरु कभी तुम्हें डराता नहीं है । बल्कि वह तुम्हें निर्भय बनाता है । वह कहता है कि - कोई नरक नहीं होता । और न ही कोई स्वर्ग । यह सब मनोवैज्ञानिक स्थितियाँ हैं । नरक अन्दर का भय है । और कुछ भी नहीं । और स्वर्ग अंतर का परमानन्द । यह स्थितियां अंतर में हैं । और आप केवल तभी मुक्त हो सकते हैं । जब आप इन दोनों से छूट जाओ ।
http://www.messagefrommasters.com/Psychic-World/Osho-on-Charan-Singh-Radha-Soami.html ( ये हिन्दी अनुवाद है । अंग्रेजी में मूल लेख हेतु क्लिक करें )
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There is a way of relating to others such that one deliberately listens for the hidden beauty in them... The place of their beauty is often the place of their greatest integrity... When you listen, the integrity and wholeness in others moves closer... Your attention strengthens it and makes it easier for them to hear it for themselves... In your presence, they can more easily inhabit that in them which is beyond their limitations, a place of greater freedom and sanctuary... Eventually they may be able to live there  - Rachel Naomi Remen
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