09 अप्रैल 2012

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मान हानि के एक मुकद्दमें की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने महा ठग निर्मल बाबा को जमकर लताड लगाई । और कोर्ट को गुमराह करने का केस दर्ज करने का आदेश दिया । मित्रों ! एक मान हानि के केस में निर्मल के वकील ने निर्मल की तरफ से कोर्ट में एफिडेविट दिया था कि उसका मुवक्किल निर्मलजीत सिंह नरुला विश्व का एक जाना माना आध्यात्मिक गुरु है । और उसके कार्यकृमों का विश्व में 40 टीवी चैनलों पर प्रसारण होता है । बस इसी मुद्दे पर सामने वाले वकील ने कोर्ट का ध्यान खींचा । सामने वाले वकील ने जज से रिकवेस्ट किया कि - ये प्रसारण नही है । बल्कि खरीदे हुए टाइम स्लाट में एक एडवरटाइज है । जैसे संधि सुधा तेल या स्लिम सोना बेल्ट बेचा जाता है । वैसे ही ये किरपा या कृपा बेचा जा रहा है । फिर कोर्ट ने निर्मलजीत उर्फ निर्मल बाबा के वकील से कहा  - क्या वो कम से कम 5 टीवी चैनल की तरफ से एक पत्र कोर्ट में जमा करवा सकते हैं । जिसमें लिखा हो कि आपका टीवी का कार्यक्रम चैनल वाले जनहित में मुफ्त में प्रसारण करते हैं ? इस पर निर्मल बाबा के वकील को सांप सूंघ गया । और उसने स्वीकार किया कि एफिडेविट

गलत है । प्रसारण नहीं । बल्कि एडवरटाइज होना चाहिए था । और फिर कोर्ट ने निर्मल बाबा की तरफ से दायर की गयी मान हानि के मुकद्दमे को तुरंत ख़ारिज करते हुए निर्मल बाबा पर कोर्ट को गुमराह करने के आरोप में 10 000 रूपये जुर्माना लगाया ।
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निर्मल बाबा का चमत्कार है । या फिर देश की भावुक जनता पर निर्मल बाबा का अत्याचार ।  बाबा के थिएटर में बड़ी भीड़ थी । लोग रो रहे थे । एक महिला उठी । और बोली - बाबा ! कल मैं रात को पार्टी में गयी थी । और जब पार्टी से वापस लौटने लगी । तो देखा कि मेरी गाडी की चाभी खो चुकी थी । मैं परेशान हो गयी । लेकिन तभी मैंने आपका स्मरण किया । और कुछ ही देर में एक लड़का मेरी चाभी लेकर आ गया । बाबा ऐसी कृपा बनाये रखना । बाबा बोले - ये सब तो ठीक है । ये गोलगप्पे कहाँ से आ रहे हैं  ? कितने दिनों से गोलगप्पे नहीं खाए । आज जाकर गोलगप्पे खाना । कृपा हो जाएगी  ( बाबा गोलगप्पे के भी स्टार प्रचारक हैं ) एक व्यक्ति भीड़ के बीच से उठा । और बोला - बाबा मेरे घर में शिव । पार्वती । हनुमान । राम । सीता । काली और लक्ष्मी की मूर्तियाँ हैं । बाबा बोले - काली को घर से बाहर निकाल दो । कृपा हो जाएगी । और ये बीडी का क्या मामला है ? कब से नहीं पी ? रोज़ 2-3 पिया करो । कृपा हो जाएगी ( बाबा ने काली को तो निकालने के लिए बोल दिया । और लक्ष्मी के लिए क्यों नहीं बोला )  एक बुज़ुर्ग उठा । और 


रोने लगा - बाबा मेरी लड़की की शादी होनी थी । और अचानक मेरे घर में चोरी हो गयी । शादी रुक गयी । मैंने आपका स्मरण किया । और शादी हो गयी । कृपा बना के रखना ।  बाबा बोले - तुम्हारी हरी कमीज़ अलमारी में क्या कर रही है ? उसको पहन कर हनुमान जी के दर्शन करो । कृपा हो जायेगी । अब बाबा बोले - सब अपना पर्स खोल दो । पर्स का मुँह मेरी तरफ कर दो । जिसके पास 10 रूपये वाला पर्स है । उसके पास लक्ष्मी नहीं आएगी । इसलिए 100 रुपये वाला पर्स लो । कृपा हो जाएगी( बाबा बने पर्स के स्टार प्रचारक ) भोली जनता पी एन बी में लाइन लगा कर खड़ी है । कोई समागम के टिकट ले रहा है । तो कोई दसबंद भेज रहा है । अरे आखिर ये है क्या माजरा ? किसी गरीब को पेट भर खाना दे दो । किसी असहाय का इलाज़ करवा दो । किसी अनाथ

आश्रम में दान दे आओ । तो कृपा बने । ऐसे अर्जी फर्जी बाबा जो शकल से बाबा कम धूर्त और व्यापारी ज्यादा लगते हों । इनसे तौबा करो । और पूजा की अध्यात्मिक पद्धति से विरक्त मत बनो । ईश्वर सर्व व्याप्त है । उस ईश्वर की कृपा पाने के लिए ऐसे ढोंगी बाबाओं का सहारा लेना किसी बेवकूफी से कम नहीं है । इसलिए ऐसे बाबाओं के चंगुल में जान बूझ कर अपनी गर्दन फ़ँसाना समझदारी नहीं । पोस्ट साभार श्री मदन शर्मा फ़ेस बुक पर ।
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अभी अचानक फ़ेस बुक खोलते ही ब्लागर श्री मदन शर्मा जी द्वारा पोस्ट किया ये मैसेज देखा । मुझसे पहले भी मेरे पाठकों ने ऐसा ही प्रश्न पूछा था कि - तब आखिर इन बाबाओं ? की इतनी ख्याति क्यों है । जो चैनल वाले इनके कार्यकृमों का प्रसारण करते हैं । और मैंने यही जबाब दिया था - दरअसल ये कार्यकृम नहीं विज्ञापन होते हैं । जिसे कोई भी निर्धारित शुल्क अदा कर प्रसारित करवा सकता है ।
अखवार या इलेक्ट्रानिक मीडिया या इस तरह का कोई भी व्यापारी हो । ये सब पैसा कमाने के लिये बैठे हैं । न कि पुण्य धर्म कमाने । शायद आपको पता न हो । टीवी के टाइम स्लाट की तरह अखबार के भी पेज और पेज में स्थान का अलग अलग महत्व होता है । और उसी हिसाब से उसकी कीमत तय होती है । जैसे टीवी में रात 9 बजे से 11 बजे का टाइम महत्वपूर्ण होता है । क्योंकि ज्यादातर लोग इसी टाइम टीवी देखते हैं । उसी प्रकार अखबार में भी मुखप्रष्ठ । अंतिम प्रष्ठ । खेल । सिनेमा । स्थानीय आदि पेज का अलग अलग महत्व होता है । और इस पेज में भी ऊपर नीचे बीच में स्थान महत्व अनुसार कीमत होती है ।


आपने अखबारों में देखा होगा । खूब बङा सा विज्ञापन । सचित्र । बाक्स स्टोरी की तरह छापा जाता है । परन्तु उसी के बार्डर पर कहीं बहुत छोटा लिखा होगा - विज्ञापन । इसका एक और तरीका भी है । जो मैं जानता भी था । और एक प्रमुख पत्रकार ने भी बताया । प्रमुख राजनैतिक पार्टियाँ । नेता आदि अपना जनाधार बङाने हेतु । छवि सुधारने हेतु । कोई कूटनीति आदि के चलते यह अलिखित सा रवैया अपनाते हैं । इसके तहत कुछ लाख की थैली अखबार के मालिक के यहाँ सीधी पहुँच जाती है । और तब वे उस पार्टी या उस नेता का स्तुति गान बङे से लेख द्वारा कई बार करते हैं । दरअसल ये भी बिज्ञापन ही होता है । बस अन्तर इतना होता है कि - इस पर लिखा नहीं होता कि ये विज्ञापन है । कभी कभी आपके सुनने में आया होगा । फ़लां अखबार फ़लां पार्टी का है । तब वह उन्हीं के पक्ष में बोलता है ।

जहाँ तक ऐसे बाबाओं और सिद्ध मंदिर सिद्ध स्थानों की बात है । उन पर वही फ़ार्मूला काम करता है । जब हजारों लोग इनके पास आते हैं । तब उनमें सैकङों का काम तो वैसे ही होना होता है । चाहे वो किसी बाबा  या मंदिर में आयें जायें । या न जायें । और वही लोग बाद में उस मंदिर या बाबा की जय जयकार कर उसे सिद्ध बना देते हैं । जिनका काम भाग्यवश सफ़ल हो गया होता है । बस इसी फ़ार्मूले पर ये पूरा धर्म धँधा बङी सफ़लता से चल रहा है । हर्र लगे ना फ़िटकरी । रंग चोखा आवे । इससे सिद्ध बाबा बनने का फ़ार्मूला क्या है ? इस सम्बन्ध में बहुत पहले ही मैं लेख प्रकाशित कर चुका हूँ ।
अब उदाहरण रूप में ( ऊपर ) बाबा की बात देखें । दूसरों का तमाम तरह का कार्य सफ़ल कराने वाले बाबा खुद 40 चैनलों ( उनके अनुसार ही ) को अपनी बात कहने के लिये भुगतान करते हैं । एक छोटे से छोटे चैनल का कम से कम निर्धारित मासिक शुल्क 20 000 ( वैसे ये बहुत कम है ) ही मान लिया जाय । तब 40 चैनलों का हिसाब लगा लीजिये । तब सवाल उठता है । ये सब करने की आखिर जरूरत ही क्या है ? खास कर सन्तों के लिये । और ये इतना ? पैसा आता कहाँ से है ? जरा सोचिये ।
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