11 अगस्त 2010

हो महाप्रलय तो भी न मरे

ये माया तेरी अजब निराली है ।
है अजर अमर तू निराकार । परमेश्वर सबसे परे ।
बिन पैर चले । बिन कान सुने । बिन हाथ अनेकों काम करे ।
जो भक्त करे प्रभु ध्यान तेरा । हो महाप्रलय तो भी न मरे ।
तू हाकिम सारी दुनिया का । तेरा हुक्म न कोई टाल सके ।
जो दीन हीन तेरी शरन परे । वो भव से पल में पार तरे ।
हे कृपानिधान इस बगिया का । तू ही माली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
क्या अदभुत मानुस देह रची । माया का संग दिया कैसे ।
तेरा नाम रूप सब में झलका । फ़िर सबसे अलग रहा कैसे ।
कासी काबे में मिला नहीं । तो पता बता दे हम कैसे ।
जब हमको दरसन दिया नहीं । तो बता पकड ले पग कैसे ।
ये खेल निराला है भगवन । तेरी शान निराली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
सूरज से चमके पदार्थ जो । तेरी चमक निराली कहीं नहीं ।
पत्ते पत्ते की कतरन न्यारी । तेरे हाथ कतरनी कहीं नहीं
वारिस से भरे हैं जन जंगल । आकाश में सागर कहीं नहीं ।
तू माया योग बरताव करे । बिन कृपा रियायत कहीं नहीं ।
चींटी से लेकर कुंजर तक की करता रखवाली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
तेरे किसी पेड को फ़ल लगते । तेरे किसी पेड को लगे फ़ली ।
कही हाय हाय कहीं वाय वाय । कहीं खुशी अनेकों भरी पडी ।
किसी के घर में नौबत बाज रही । किसी के घर में अंखिया नीर भरी ।
किस तरह करूं गुणगान तेरा । धन धन तेरी ये कारीगरी ।
कहीं अधेरा किसी के घर में । कही रोज दिवाली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
कोई चले नहीं बिन मोटर के । कोई नंगे पांव भाग रहा ।
कहीं ढेर लगे हैं नोटो के । कोई कर्ज किसी से मांग रहा ।
कोई सुख की निंदिया सोय रहा । कोई पडा फ़िकर में जाग रहा ।
कोई धर्म से मुखडा मोड रहा । कोई भक्ति राग अलाप रहा ।
महलों की चाहत कोई करे । कोई बनी हवेली छोड रहा ।
कहीं हैं गोरी किसी की काया । किसी की काली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
तू जाने किस विधि गर्भ रखे । फ़िर हो क्रीडा बालकपन की ।
जब आया बुडापा ग्यान हुआ । जुगती एक दिन बिगड गयी ।
कोई पैसे को मोहताज फ़िरे । कहीं हो बरसा नित धन की ।
कोई कामिनी संग खेल रहा । कोई रो रो खाक करे तन की ।
कोई भटक भटक कर उमर गंवा दे । कोई मौज उडावे जीवन की ।
कहीं पानी बिना अकाल पडे । कहीं बरसा होय झमाझम सी ।
कहीं भूमि पडी ऊसर बंजर । और कहीं हरियाली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
कोई शहंशाह तूने बना दिया । कोई भिक्षा मांगे घर घर से ।
कोई बना दिया तूने महाबली । कोई दिना गुजारे डर डर के ।
कोई हुकम चलाये लाखों पे । कोई जीता सेवा कर कर के ।
कोई मौज करे कोई पेट भरे । कोई बोझा ढोता घर घर के ।
कोई गुजर करे है छप्पर में । कहीं महल खडे संगमरमर के ।
कोई देख किसी को मगन हुआ । कोई मिला खाक में जल जल के ।
तेरी कृपा से खिलती । हर बाग की डाली है ।
ये माया तेरी अजब निराली है ।
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आयुर्वेद के अनुसार मैथी 1 बहुगुणी औषधि के रूप में प्रयोग की जा सकती है । .भारतीय रसोईघर की यह 1 महत्वपूर्ण हरी सब्जी है । प्राचीनकाल से ही इसके स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण इसे सब्जी और औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता रहा है । मैथी की सब्जी तीखी, कडवी और उष्ण प्रकृति की होती है । इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, पोटेशियम, सोडियम, फास्फोरस, कार्बोहाइड्रेट, आयरन और विटामिन C प्रचुर मात्रा में होते हैं । ये सब ही शरीर के लिए आवश्यक पौष्टिक तत्व हैं । यह कब्ज, गैस, बदहजमी, उलटी, गठिया, बवासीर, अपच, उच्च रक्तचाप, साइटिका जैसी बीमारियों को दूर करने में सहायक है । यह ह्रदय रोगियों के लिए भी लाभकारी है । मैथी के सूखे पत्ते, जिन्हें कसूरी मैथी भी कहते हैं का प्रयोग कई व्यंजनों को सुगन्धित बनाने में होता है । मैथी के बीज भी 1 बहुमूल्य औषधि के समान हैं । ये भूख को बढ़ाते हैं । एवं संक्रामक रोगों से रक्षा करते हैं । इनको खाने से पसीना आता है । जिससे शरीर के विजातीय तत्व बाहर निकलते हैं । इससे सांस एवं शरीर की दुर्गन्ध से भी छुटकारा मिलता है । आधुनिक शोध के अनुसार यह अल्सर में भी लाभकारी है । मैथी से बने लड्डू 1 अच्छा टानिक है । जो प्रसूति के बाद खिलाये जाते हैं । शरीर की सारी व्याधियों को दूर कर यह शरीर में बच्चे के लिए दूध की मात्र बढाती है । डायबिटीज में मैथी के दानों का पावडर बहुत लाभकारी होता है । इसमें अमीनो एसिड होते हैं । जो कि इंसुलिन निर्माण में सहायक होता है । ये थकान, कमर दर्द और बदन दर्द में लाभदायक है । इसकी पत्तियों का लेप बालों एवं चहरे के कई विकारों को दूर कर उसे कांतिमय बनाता है ।
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शतावरी - 100 रोगों को हरने वाली शतावरी । आज हम आपको 1 झाड़ीनुमा लता के बारे में बताते हैं । जिसमें फूल मंजरियों में 1 से 2 इंच लम्बे 1 या गुच्छे में लगे होते हैं । और फल मटर के समान पकने पर लाल रंग के होते हैं । नाम है - शतावरी । आपने विभिन्न आयुर्वेदिक औषधियों में इसके प्रयोग को अवश्य ही जाना होगा । अगर नहीं । तो हम आपको बताते हैं । इसके प्रयोग को । आयुर्वेद के आचार्यों के अनुसार - शतावर पुराने से पुराने रोगी के शरीर को रोगों से लड़ने क़ी क्षमता प्रदान करता है । इसे शुक्रजनन, शीतल, मधुर एवं दिव्य रसायन माना गया है । महर्षि चरक ने भी शतावर को बल्य और वयः स्थापक ( चिरयौवन को बरकार रखने वाला ) माना है । आधुनिक शोध भी शतावरी क़ी जड़ को हृदय रोगों में प्रभावी मान चुके हैं । अब हम आपको शतावरी के कुछ आयुर्वेदिक योग क़ी जानकारी देंगे । जिनका औषधीय प्रयोग चिकित्सक के निर्देशन में करना अत्यंत लाभकारी होगा । - यदि आप नींद न आने क़ी समस्या से परेशान हैं । तो बस शतावरी क़ी जड़ को खीर के रूप में पका लें । और थोड़ा गाय का घी डालें । इससे आप तनाव से मुक्त होकर अच्छी नींद ले पायेंगे ।
- शतावरी क़ी ताज़ी जड़ को यव ( जौ ) कूट करें । इसका स्वरस निकालें । और इसमें बराबर मात्रा में तिल का तेल मिलाकर पका लें । हो गया मालिश का तेल तैयार । इसे माइग्रेन जैसे सिरदर्द में लगायें । और लाभ देखें ।
- यदि रोगी खांसते खांसते परेशान हो । तो शतावरी चूर्ण 1.5 ग्राम वासा के पत्ते का स्वरस 2.5 मिली मिश्री के साथ लें । और लाभ देखें ।
- प्रसूता स्त्रियों में दूध न आने क़ी समस्या होने पर शतावरी का चूर्ण 5 ग्राम गाय के दूध के साथ देने से लाभ मिलता है ।
- यदि पुरुष यौन शिथिलता से परेशान हो । तो शतावरी पाक या केवल इसके चूर्ण को दूध के साथ लेने से लाभ मिलता है ।
- यदि रोगी को मूत्र या मूत्रवह संस्थान से सम्बंधित विकृति हो । तो शतावरी को गोखरू के साथ लेने से लाभ मिलता है ।
- शतावरी के पत्तियों का कल्क बनाकर घाव पर लगाने से भी घाव भर जाता है ।
- यदि रोगी स्वप्न दोष से पीड़ित हो । तो शतावरी मूल का चूर्ण 2.5 ग्राम मिश्री 2.5 ग्राम को 1 साथ मिलाकर । 5 ग्राम क़ी मात्रा में रोगी को सुबह शाम गाय के दूध के साथ देने से प्रमेह, प्रीमेच्युर इजेकुलेशन ( स्वप्न दोष ) में लाभ मिलता है ।
- गाँव के लोग इसकी जड़ का प्रयोग गाय या भैंसों को खिलाते हैं । तो उनकी दूध न आने क़ी समस्या में लाभ मिलता पाया गया है । अतः इसके ऐसे ही प्रभाव प्रसूता स्त्रियों में भी देखे गए हैं ।
- शतावरी के जड के चूर्ण को 5 से 10 ग्राम क़ी मात्रा में दूध से नियमित से सेवन करने से धातु वृद्धि होती है ।
- वातज ज्वर में शतावरी के रस एवं गिलोय के रस का प्रयोग या इनके क्वाथ का सेवन ज्वर ( बुखार ) से मुक्ति प्रदान करता है ।
- शतावरी के रस को शहद के साथ लेने से जलन, दर्द एवं अन्य पित्त से सम्बंधित बीमारियों में लाभ मिलता है ।
शतावरी हिमतिक्ता स्वादीगुर्वीरसायनीसुस्निग्ध शुक्रलाबल्यास्तन्य मेदो । ग्निपुष्टिदा चक्षु स्यागत पित्रास्य,गुल्मातिसारशोथजित । उद्धत किया है । तो शतावरी 1 बुद्धि वर्धक, अग्नि वर्धक, शुक्र दौर्बल्य को दूर करने वाली स्तन्य जनक औषधि है ।
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सामान्यत: दालचीनी मसालों के रूप में काम मे ली जाती है । लेकिन यह पेट रोग, इंफ्यूएंजा, टाइफाइड, टीबी और कैंसर जैसे रोगों में उपयोगी पाई गई है । दालचीनी का तेल बनता है । दालचीनी, साबुन, दांतों के मंजन, पेस्ट, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक के रूप में काम में आती है । चाय, काफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वादिष्ट हो जाती है । तथा जुकाम भी ठीक हो जाता है । आज हम आपको बताने जा रहे हैं दालचीनी के कुछ घरेलू प्रयोग जो बहुत उपयोगी हैं ।
- दालचीनी का तेल दर्द, घावों और सूजन को नष्ट करता है ।
- दालचीनी को तिल के तेल, पानी, शहद में मिलाकर उपयोग करना चाहिए । दर्द वाले स्थान पर मालिश करने के बाद इसे रात भर रहने देते है । मालिश अगर दिन में करें । तो 2-3 घंटे के बाद धोएं ।
- दालचीनी त्वचा को निखारती है । तथा खुजली के रोग को दूर करती है ।
- दालचीनी सेहत के लिए लाभकारी है । यह पाचक रसों के स्त्राव को भी उत्तेजित करती है । दांतों की समस्याओं को दूर करने में भी यह उपयोगी है ।
- रात को सोते समय नियमित रूप से 1 चुटकी दालचीनी पाउडर शहद के साथ मिलाकर लेने से मानसिक तनाव में राहत मिलती है । और स्मरण शक्ति बढ़ती है ।
- दालचीनी का नियमित प्रयोग मौसमी बीमारियों को दूर रखता है ।
- ठंडी हवा से होने वाले सिर दर्द से राहत पाने के लिए दालचीनी के पाउडर को पानी में मिलाकर पेस्ट बनाकर माथे पर लगाएं ।
- दालचीनी पाउडर में नीबू का रस मिलाकर लगाने से मुंहासे व ब्लैक हैडस दूर होते हैं ।
- दालचीनी, डायरिया व जी मिचलाने में भी औषधि के रूप में काम में लाई जाती है ।
- मुंह से बदबू आने पर दालचीनी का छोटा टुकड़ा चूसें । यह 1 अच्छी माउथ फ्रेशनर भी है ।
- दालचीनी में एंटी एजिंग तत्त्व उपस्थित होते हैं । एक नीबू के रस में 2 बड़े चम्मच जैतून का तेल, 1 कप चीनी, आधा कप दूध, 2 चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर 5 मिनट के लिए शरीर पर लगाएं । इसके बाद नहा लें । त्वचा खिल उठेगी ।
- दालचीनी पाउडर की 3 ग्राम मात्रा सुबह शाम पानी के साथ लेने पर दस्त बंद हो जाते हैं ।
- आर्थराइटिस का दर्द दूर भगाने में शहद और दालचीनी का मिश्रण बड़ा कारगर है ।
- गंजेपन या बालों के गिरने की समस्या बेहद आम है । इससे छुटकारा पाने के लिए गरम जैतून के तेल में 1 चम्मच शहद और 1 चम्मच दालचीनी पाउडर का पेस्ट बनाएं । इसे सिर में लगाए । और 15 मिनट बाद धो लें ।
- 1 चम्मच दालचीनी पाउडर और 5 चम्मच शहद मिलाकर बनाए गए पेस्ट को दांत के दर्द वाली जगह पर लगाने से फौरन राहत मिलती है ।
- सर्दी जुकाम हो । तो 1 चम्मच शहद में 1 चौथाई चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर दिन में 3 बार खाएं । पुराने कफ और सर्दी में भी राहत मिलेगी ।
- पेट का दर्द शहद के साथ दालचीनी पाउडर लेने पर पेट के दर्द से राहत मिलती है । 
- खाली पेट रोजाना सुबह 1 कप गरम पानी में शहद और दालचीनी पाउडर मिलाकर पीने से फैट कम होता है । इससे मोटे से मोटा व्यक्ति भी दुबला हो जाता है ।
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