08 अगस्त 2013

इस दौड़ से हासिल क्या

यह जो क्षण है । यह दूर ट्रेन के गुजरने की आवाज । सन्नाटे में बैठे हुए लोग । प्रेम पगे । मेरी बात को सुनते हुए । मेरी तरफ अपलक देखते हुए तुम । वृक्षों पर पड़ती हुई धूप । हवा के झोंके । अभी कहां दुख, कैसा दुख ? इस क्षण में सब सुख है । इस सुख को गहराओ । इस सुख को पियो । यही मदिरा है  जो ढालनी है । यही मधुशाला है जिसके अंग हो जाना है ।  एक क्षण से ज्यादा तो कभी कुछ मिलता नहीं । 2 क्षण 1 साथ तो मिलते नहीं । बस 1 क्षण को जियो ।
जीसस ने अपने शिष्यों को कहा है - देखते हो । खेत में उगे हुए लिली के फूलों को । इनका सौंदर्य क्या । इनके सौंदर्य का राज क्या ? गरीब लिली के फूल.. इनके सौंदर्य का रहस्य क्या है । इनकी सुगंध कहां से उठती है ? और मैं तुमसे कहता हूं । जीसस ने कहा कि सम्राट सोलोमन भी अपने परम वैभव में इतना सुंदर नहीं था । जितने ये लिली के फूल ! राज क्या है इनके सौंदर्य का ? इनके सौदर्य का राज 1 है । जो गया गया । जो आया नहीं आया नहीं । इन्हें न बीते कल की चिंता है । न आने वाले कल की चिंता है । ये बस यहीं हैं...।
इसलिये, जीसस ने अपने शिष्यों को कहा - कल की मत सोचो । सब सोच कल का है । इस क्षण में कोई सोच नहीं होता । और जहाँ सोच नहीं है । जहां विचार नहीं है । जहां चिंता नहीं है । वहां मन नहीं है । और जहाँ मन नहीं है । वहाँ परमात्मा है । मन मर जाये । तो परमात्मा का अनुभव हो जाये ।
मरी हे जोगी मरी । छांडै आसा रहै निरास ।

आशा करते हो । उससे ही मन पैदा होता है । मन है और की मांग । मन कहता है - और, और... जो भी दे दो । वही कम है  और चाहिए । यह और की बीमारी ऐसी पुरानी बीमारी है कि कितना ही देते चले जाओ । मन अपनी आदत से पुराना है । मांगता चला जायेगा । 10 हजार हैं । 10 लाख मांगेगा । 10 लाख दो । 10 करोड़ मांगेगा । मांगता ही रहेगा । ऐसी कोई घड़ी न आने देगा । ऐसा कोई पल न आने देगा । जहां मन तुमसे कह दे कि बस...। बस आता ही नहीं । पूर्ण विराम लगता ही नहीं ।
इसलिये मन दौड़ाये रखता है । सिकंदरों को भी दौड़ाये रखता है । सब भागते चले जाते हैं । सब दौड़ते चले जाते हैं । दौड़ते दौडते ही मर जाते हैं । झूले से लेकर कब्र तक सिवाय इस महत्वाकांक्षा की दौड़ के और तुम क्या हो ? इस दौड़ से हासिल क्या । इससे कब किसको क्या मिला है ? ओशो
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