24 जून 2011

महाराज जी आज 25 june को अम्बाला में

ये लेख जब तक आप देख रहे होंगे । तब तक श्री महाराज जी अम्बाला पहुँच चुके होंगे । जैसा कि पूर्व लेख में ( जो नीचे फ़िर से प्रकाशित है ) मैंने सूचित किया था । महाराज जी 25 june  को अम्बाला आयेंगे । तीन दिन पहले श्री महाराज जी आगरा आ गये थे । और कल 24 june की रात अम्बाला चले गये । ये तीन दिन बहुत ही दिव्यता वाले और आनन्द भरे रहे । जो कुछ बात सतसंग आदि हुयी । समय समय पर आपसे शेयर करूँगा ।
केवल एक खास सूचनात्मक चौंकाऊँ रहस्य की बात अभी बता देता हूँ । जो सतसंग के दौरान महाराज जी ने कही । हालांकि उनकी सभी बातें रहस्य की परतें खोलने वाली ही होती है । वह बात यह थी कि - जो लोग श्रीमदभगवत गीता पढना पसन्द करते हैं । वो एक बार सन्त ग्यानेश्वर जी की गीता टीका अवश्य पढें । इस गीता टीका में श्लोंकों की सही और स्पष्ट व्याख्या है । अब रहस्य की बात ये थी । जो कि मेरे लिये भी नई थी । सन्त ग्यानेश्वर जी का जन्म नहीं हुआ था । बल्कि वे प्रकट हुये थे । और इससे पहले वाले जन्म में जो गीता टीका उन्होंने लिखी थी । वह गलत थी । इसलिये अपने अल्प समय के जीवन में वो मात्र इसी गीता की सही अर्थ वाली टीका करने हेतु आये थे । और कार्य पूरा कर चले गये ।
- पूर्व प्रकाशित लेख नये लोगों के लिये फ़िर से प्रकाशित ।
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अभी श्री महाराज जी से फ़ोन पर मेरी कम ही बात हो पाती है । और अगर होती भी है । तो वो अलग सहज योग मैटर पर ही अधिक होती है । इसलिये उनके आने जाने के बारे में मुझे कम ही पता रहता है । लेकिन अभी कोई 8 दिन पहले जीरकपुर ( चंडीगढ ) के हमारे गुरुभाई कुलदीप जी ने बताया कि श्री महाराज जी 25 june  को अम्बाला आयेंगे । फ़िर यही बात मोहाली के हमारे अन्य गुरुभाई मदनलाल जी ने बतायी कि श्री महाराज जी 25 june  को अम्बाला आ रहें हैं ।
तब मैंने महाराज जी से फ़ोन पर बात की । पिछले दिनों महाराज जी पटियाला गये थे । जहाँ कई लोगों की हँसदीक्षा हुयी । और एक साधिका की परमहँस दीक्षा हुयी । जो पहले किसी और मंडल से दीक्षित थी । इसके बाद महाराज जी हनुमानगढ राजस्थान टिब्बी गये । वहाँ भी कई लोगों की हँसदीक्षा और एक परिपक्व साधक की परमहँस दीक्षा हुयी । ये भी किसी और मंडल से दीक्षित थे । और हँस को लगभग पार करने के बाद आगे नहीं बङ पा रहे थे ।
इसके बाद महाराज जी सिर्फ़ एक दिन के लिये आगरा आये । तब मेरी उनसे मुलाकात नहीं हो पायी । एक दिन बाद ही महाराज जी इटावा चले गये । और दो तीन दिन अग्यात रहे । चौथे दिन जब मैंने महाराज जी को फ़ोन किया । तो वो फ़रिहा मुस्तफ़ाबाद के एक ग्रामीण क्षेत्र में थे । और वहाँ जोरदार सतसंग चल रहा था । श्रद्धालु प्रतिदिन दीक्षित हो रहे थे ।
इसके बाद कुलदीप ने ही फ़िर बताया कि महाराज जी कानपुर की तरफ़ जाने वाले हैं । मुझे थोङी हैरानी थी कि इनमें से कोई बात मुझको पता ही न थी । जिसका एक कारण ये भी था कि पिछले दिनों में और भी ज्यादा व्यस्त हो गया ।
कल मेरी फ़िर महाराज जी से बात हुयी । तब मुझे सब बात स्पष्ट पता चली । 17 june  से 20 june तक महाराज जी फ़िर से फ़रिहा के पास कौरारी नाम के स्थान पर जायेंगे । इसके बाद दो तीन दिन के लिये आगरा आयेंगे । इसके बाद यहीं से अम्बाला जायेंगे । अम्बाला के बाद पक्का तो पता नहीं । पर शायद फ़िर से आगरा आयें । क्योंकि उनके शिष्य परिवार में एक विवाह समारोह है ।
लगभग 7 july  से 19 july गुरु पूर्णिमा उत्सव तक श्री महाराज जी फ़िर से कौरारी के आसपास ही रहेंगे । क्योंकि वहाँ के लोगों का आग्रह है कि इस बार गुरु पूर्णिमा और सतसंग ग्यान सप्ताह आदि आयोजन उनके यहाँ ही सम्पन्न हो ।
तो अब से लेकर 19 july  तक का महाराज जी का जो भी भृमण कार्यकृम आदि मुझे मालूम था । वह मैंने मंडल से जुङे लोगों शिष्यों आदि के लिये सूचना रूप में प्रकाशित कर दिया ।
***अम्बाला के आसपास के लोग जो भी हँसदीक्षा । परमहँस दीक्षा । सार शब्द ग्यान । सन्तवाणी के रहस्य आदि विषयों पर समाधान के इच्छुक हों । इससे सम्बन्धित ग्यान या दीक्षा चाहते हों । वे अम्बाला में उनसे मिल सकते हैं ।
अम्बाला के लिये सही दीक्षा का विधान । पूर्व तैयारी । स्थान आदि की जानकारी आप इन दो फ़ोन नम्बरों पर प्राप्त कर सकते हैं ।
1- kuldeep singh श्री कुलदीप सिंह जी जीरकपुर - चंडीगढ
0 98884 13419
2 - madanlal श्री मदनलाल जी मोहाली
0 75089 24458
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