11 जून 2011

आलतू फ़ालतू बातें

उफ़ ! कितनी मुश्किल से बचकर आ पाया हूँ । डायना की तरह ये पपराजी ( फ़ोटोग्राफ़र ) मेरे पीछे ही पङे रहते हैं । मेरी फ़ेमिली और बच्चे भी बङा सतर्क रहते हैं इनसे । एक बार मेरी मिसेज का मल्लू ( मेरा छोटा सन ) को किस करते हुये फ़ोटो खींच ही लिया । 2 मिलियन डालर तो ( सुना है ) टाइम ( पत्रिका ) से ही मिल गये ।
उनसे तो खैर किसी तरह निबट भी लूँ । ये स्टीवन ( स्पीलबर्ग ) 8 साल से मेरे पीछे पङा हुआ है ।
D O G - P सर ! एक बार मेरी फ़िल्म में काम कर लीजिये । आप जो बोलोगे ( मुँह माँगा ) दूँगा । अभी इसको ( अपनी हैसियत ) क्या बताऊँ । एक मिलियन ( डालर ) का तो मेरे बच्चे अपने फ़्रेंडस को ( रोज ) कोक पेप्सी पिला देते हैं ।
मैंने उससे ( स्पीलबर्ग ) कहा । भाई ! आप कंप्यूटर इफ़ेक्ट से ही मूवी बनाओ । ये ( नकली ) डायनासौर एन्ड गोडजिला ही सस्ते पङते हैं । बोला - D O G - P सर ! पब्लिक ( इनसे अब ) बोर हो गयेला  । उनको आप जैसा स्टार माँगता है ।
खैर..मैं भी कहाँ आलतू फ़ालतू बातें ले बैठा । अभी पिछले दिनों बाबा  की बहुत किरकिरी हुयी । होती ( और होगी ) क्यों नहीं । कहावत है - जा को काम । वा ही को साजे । और करे तो । डंडा बाजे । ( इसलिये बाज गये डंडे )
अरे बाबाजी ! अभी योग का ही लक्ष्य बहुत बाकी था । भूल गये ( अपनी वो बात ) गाँव गाँव घर घर योग पहुँचाना है । अभी तो ठीक से भारत में ही उल्टा पुल्टा ( अनुलोम विलोम ) नहीं करते भाई लोग । और बाबा आप इसको भूलकर झमेलों में पङ गये ।
लेकिन बाबा  पङा नहीं । बल्कि चढा दिया ( वो भी चने के झाङ पर )
बाबा को पता नहीं । करप्शन व्यक्ति में नहीं सिस्टम में होता है । और फ़ुल्ली सिस्टम को अनशन से नहीं । बल्कि टेंशन ( देकर ) से सुधारा जाता है ।

अभी बाबा के ( इतने ) समर्थकों और मित्रों को ये आयडिया भी नहीं आया कि - बाबा को बोलते । ( काला ) धन को ( विदेशों से )  आउट करके इन करने के लिये बाबा संजू ( संजय दत्त ) की तरह " नाक आउट " करना माँगता ।
कर दिया न । अकेले आदमी ने 36 हजार करोङ रुपया वापस । और किसी को डंडे अंडे कुछ भी नहीं पङे । अभी ये सत्याग्रह और अनशन की हवा बापू ( फ़ाँसाराम बापू नहीं - गाँधी बाबा यार ) ने ऐसी चलायी कि हर कोई इसे ही लेकर अनशन करता हुआ टेंशन करता है ।
और पब्लिक को भी ( पता नहीं क्या ) मजा आता है । पहुँच जाती है । डंडे खाने । अभी इन लोग से पूछो । भृष्टाचार त्रेता में नहीं था क्या ? तब तो ब्लैक मनी नहीं था । पैसे की हवस द्वापर में नहीं थी क्या ? तब तो ब्लैक मनी नहीं थी ।
तो अभी बाबा को पूछो । वो योगी ( राम -त्रेता ) और वो योगेश्वर ( श्रीकृष्ण - द्वापर ) जभी करप्शन फ़िनिश नहीं कर पाये  । तो अभी आप दूनों नाक से फ़ूँ और फ़ाँ करने वाले - कइसन फ़िनिश करोगे भाई !
अच्छा खासा आदमी बाडी ( योग करके ) बना रहा था । ब्लैक मनी में फ़ँस गया । अभी ब्लैक मनी के नोट क्या काले रंग से प्रिंट होते हैं ?
खैर ..बाबा की बात बाबा ही जाने । पर मेरे को ऐसा लगता है । माया का विरोध करने वाला बाबा महामाया के जाल में फ़ँस गया । अङे बाबा ! एक बाप अपने चार बच्चों को नहीं सुधार पाता । आप देश को कैसे सुधारेंगा ?
अभी आगे की बात बाद में करता हूँ । मेरी हाटलाइन बोल रही है ।
- यस !
- D O G - P  सर ! मैं बाबा दामदेव स्पीकिंग फ़्राम हरिद्वार । एक ठो आयडिया मँगता ?
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