14 जून 2011

मैं भारत को आध्यात्मिक महाशक्ति बनाकर ही छोङूँगा

नमस्ते राजीव जी ! मैं सुभाष राजपुरा से । आज मैं जो पूछने जा रहा हूँ । वो मैं अकेला नही पूछ रहा । मेरे साथ मेरे सभी मित्र ये बात जानना चाहते हैं । ये प्रश्न असल में पूरे भारत के लिये है । मैं जो भी लिखकर पूछने जा रहा हूँ । वो मेरे निजी विचार नही हैं । सब बातें टीवी पर और अखबारों पर आ चुकी हैं । और आ रही हैं ।
राजीव जी ! मैंने कल आपका नया लेख पढा । जिसमें जगदीश खोपाराय नाम के अंकल ने बहुत उचित बात पूछी । उसके आधार पर हम सबके ( खासकर मेरे और रजत के ) मन में कुछ विचार आये हैं । इन विचारों को हम आपके सामने प्रश्नों के रूप में रखने जा रहे हैं ।
राजीव जी ! बाबा रामदेव जी का चक्कर कुछ समझ में नहीं आया । पिछले 1 साल से बाबा जी कह रहे थे कि - मुझे मौत आ नहीं सकती । बीमारी मुझे कोई मार नहीं सकती । मैं तो कैंसर का इलाज भी कर सकता हूँ ।
यहाँ शायद बाबा रामदेव जी अपने आपको भीष्म पितामह समझ रहे थे । लेकिन जब उस दिन पुलिस पकडने आयी । तब बाबा जी सफ़ेद रंग का सलवार कमीज ( औरतों वाला ) पहन कर भागने लगे थे । लेकिन बाबा रामदेव अकसर कहते थे कि - मैं मौत से नही डरता ।
2010 में तो लोग बाबा रामदेव को महात्मा गान्धी का अवतार या पुर्नजन्म बता रहे थे । ये भी सुनने में आया है कि आस्था चैनल बाबा रामदेव के जो गुप्त सहयोगी ( कुछ बडे लोग ) हैं । उनका निजी है । बाबा रामदेव की बहुत सी दवाईयो की फ़र्मे हैं । यहाँ तक कि उनकी फ़र्म इंगलेंड में भी है । आजकल बाबा आने वाले दिनो में रूस जाना चाहते है ?

अनशन के दिनो दौरान बाबा नींबू पानी में शहद मिलाकर लेते थे । जब अनशन के आखिरी दिनों में ग्लुकोज लगाने की नौबत आयी । तो आपको तो पता ही होगा कि ग्लुकोज में इन्जेकशन के द्वारा विटामिन आदि दिये जा सकते हैं । ये भी सुना है कि बाबा को BJP सहयोग दे रही थी । साथ में 2 चंडू पार्टियाँ और भी थी ।
जब अनशन चल रहा था । तब कोई कहता था कि बाबा रामदेव की स्थिति ठीक है । कोई कहता था कि बाबा " कोमा " में भी जा सकता है । आजकल.. बिल्कुल जी आजकल कभी खबर आती है कि बाबा रामदेव और बालकृष्ण जी डरे हुए हैं । वो दोनों कह रहे है कि उन दोनों की जान को खतरा है । और उनकी हत्या की प्लेनिंग की जा रही है ।
अब ये ही रामदेव जी 2010 में कहते थे कि - मैं मौत से नही डरता । लेकिन आज दोपहर में बाबा रामदेव का मैंने लाइव टेलिकास्ट बयान सुना । बाबा रामदेव कह रहा है - मैंने देश के हित के लिये अनशन तोडा । लेकिन अब मैं सत्याग्रह करुँगा । मैं भारत को आध्यात्मिक महाशक्ति बनाकर ही छोङूँगा ।
अब बाबा रामदेव के फ़िर से बयान आने शुरु हो गये हैं । लगता है - अब फ़िर रोज कोई न कोई भाषण रामदेव का आने लगेगा । बाबा रामदेव कब सुधरेगा ?
राजीव जी ! बाबा रामदेव ने गलती से फ़िर एक ऐसा बयान दे दिया । जिस पर उन पर केस दर्ज हो सकता है । सुनिये उन्होंने क्या कहा - मैं अब देश के नौजवानों को शास्त्र विध्या और शस्त्र विध्या साथ साथ दूँगा । मैं देश के नौजवानों की 1 फ़ौज तैयार करूँगा ।

राजीव जी ! अब यहाँ सवाल खडा होता है कि बाबा रामदेव को आजाद देश में निजी फ़ौज ( वो भी हथियार बन्द ) हजारों की तादाद में बनाने या रखने की इजाजत कौन देगा ? कौन से नौजवान हथियारों की सिखलाई लेंगे । बाबा रामदेव सिखलाई के लिये सिखाने वाले लोग कहाँ से लायेगा । पैसा कहाँ से आयेगा । हथियार कहाँ से और कैसे और कितने खरीदे जायेंगे । किस प्रांत या जगह पर लडकों को बन्दूक चलानी या बम्ब फ़ोडना सिखाया जायेगा ।
बाबा रामदेव ने कहा है कि - मैं कम से कम 11000 नौजवानों की हथियार बन्द सेना तैयार करुँगा । क्या बाबा रामदेव दूसरा ओसामा बिन लादेन बनना चाहता है । पिछला इतिहास उठाकर अगर देंखे । तो ये जितने ऐसे लोग थे । जो धर्म के नाम पर आतंकवाद करने चले थे । चाहे ओसामा या भिंडरावाला । सब ... की मौत मारे गये । लेकिन दुनियाँ को फ़िर भी नहीं अक्ल आयी ।
अब आजकल BJP भी चुप है । जब बाबा रामदेव अस्पताल से वापिस हरिद्वार जा रहा था । तब रास्ते में कितनी कारें, मोटर साइकिल और तो और लोग पैदल भी भाग रहे थे । जब बाबा हरिद्वार आश्रम में पहुँचा । तो गुलाब की पंखङियो की बारिश की गयी ।
हरिद्वार में जो आश्रम के नाम पर काफ़ी सारी जमीन है । वो भी BJP ने बेहद सस्ते दाम पर आश्रम को दिलवाई थी । क्युँ कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखन्ड में  BJP  है । यहाँ मैं किसी कांग्रेस की तरफ़दारी नहीं कर रहा । हम सब दोस्त किसी भी पार्टी के मेम्बर नहीं हैं ।

हम सब दोस्त तो ये चाहते हैं कि - इस इंडिया में सब हिन्दू । सिख । मुस्लिम और ईसाई एक बढिया परिवार की तरह रहें । अब हम सब भारतवासियों को चाहिये कि इन राजनीतिक चालों के चक्कर में ना आये ।
राजनीति ने ही पाकिस्तान बना दिया । राजनीति के कारण बांग्ला देश अलग हुआ । कहते हैं कि पुराने समय में ये भारत की हद अफ़गानिस्तान तक थी । अफ़गानिस्तान में जो काबुल और कन्धार जगह है । महाभारत के समय में इस कान्धार को गंधार कहा जाता था । जहाँ की राजकुमारी गंधारी ( दुर्योधन की माँ ) थी । तभी तो शकुनी को गंधार नरेश बोला जाता था । भारत की हद बर्मा तक भी थी । नेपाल का भी शायद कुछ हिस्सा भारत के अंतर्गत ही आता था । अनुचित राजनीति ने आधुनिक भारत को क्या दिया ? नक्शा आपके सामने हैं ।

राजीव जी ! आप बडे हैं । और समझदार हैं । जो भी मुनासिब समझें । वो सुझाव आप हमें और अपने अन्य पाठकों को जरुर दें । हमे कल तक आपकी प्रतिक्रिया का इंतजार रहेगा ।
लगे हाथ ये भी बता दीजिये कि आप 2 प्रेत कहानियाँ लिख रहे थे । वो दोनों प्रेत कहानियाँ कब तक छप जायेंगी ? राजपुरा से सुभाष और रजत ( साथ में नीशु । शालु । वरुण । दीपक । जतिन । कपिल । नितिन । अतुल । राहुल । रोहित और अंकुर भी )

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 धन्यवाद मित्रो ! मैं अपने सभी पाठकों को बता दूँ । ये सभी लोग ( पत्र लेखक ) युवा छात्र हैं । अच्छे संस्कारी घरों से हैं । और एक खुशहाल स्वच्छ आपस में प्रेमभाव भाईचारा और जातिगत भेदभाव से दूर भारत की और विश्व की कामना करते हैं । वास्तव में असली क्रांति ऐसे ही विचारों से होती है । न कि किसी पार्टी के बनाने से । न संगठन बनाने से । न बाबा दामदेव की तरह से फ़ौजी सेना बनाने से ।
असली बात है - जागरूकता । और ये किसी समूह से नहीं होती । बल्कि व्यक्ति के अन्दर जागृति होने से होती है ।
मैं आपको दो उदाहरण देता हूँ । वैसे मेरी माँ बहुत धार्मिक स्वभाव की हैं । पर वह भिखारियों को कभी भीख नहीं देतीं ( मतलब असहाय और वृद्ध लाचार टायप को छोङकर ) जब भी ये हट्टे कट्टे या स्वस्थ दिखने वाले भिखारी या भिखारिनें हमारे दरवाजे पर आते हैं । तो वे कह देती हैं - चलो..कोई काम करो । और पैसे ले जाओ । ये पूरी सङक ( हमारे घर के सामने - लगभग 600 मीटर ) ठीक से साफ़ करो । और दस रुपये ले जाओ..आदि । ऐसे ही बीस जगह काम करोगे । 200 रुपया हो जायेगा ।

भिखारिनों से - गेंहूँ दाल आदि साफ़ करना या खिङकी दरवाजे साफ़ करने का काम ( जो भी उस समय हो बता देती हैं ) तो भिखारी हमारे घर आते ही नहीं ।
2- जो गुरु या महंत टायप के भिखारी आते हैं । कोई अनुष्ठान जागरण भंडारा आदि कराने वाले । या हाथी या देवी देवता का रथ लेकर । या लोगों की समस्या दूर करने वाले । वे मुझे देखते ही दूर से खिसक जाते हैं । मेरे प्रश्नों की वजह से - असली सन्यास क्या है ? शास्त्र अनुसार भिक्षावृति क्यों और कितनी और किन परिस्थितियों में करनी चाहिये । उसके बदले आप भिक्षा देने वाले गृहस्थ को क्या देते हैं । इस भिक्षा का आप किस तरह उपयोग करते हैं । सन्यास कब लिया । क्यों लिया ? कैसे ( गुरु आदि तरीका ) लिया । सो भी बताओ..आदि । लिहाजा बाबा लोग इस बाबा ( राजीब ) को देखते ही भागते हैं ।
ये मैंने जागरूकता का एक उदाहरण दिया है । बस आपको अपात्र को भीख ही तो नहीं देनी । और क्या करना पङा । इसी से बहुत बङा सुधार हो जाता है । बस आप अनुचित और भृष्टाचार युक्त बातों को अपने जीवन से अलग कर दें । फ़िर समाज से । फ़िर देश से । फ़िर विश्व से ..अलग करने की कोशिश करें ।
इसके लिये आपको किसी रामलीला मैदान पर अनशन करके डंडे नहीं खाने । कहीं कश्मीर से कन्या कुमारी तक रथयात्रा नहीं निकालनी । बस आप ..घर में । कालेज में । पार्क में । यात्रा में..जहाँ भी अपने कार्य से मौजूद हों । वैचारिक क्रांति हेतु वार्ता करें ।
आपके उत्तर बङे होने के कारण अलग लेख में शीघ्र प्रकाशित किये जायेंगे ।
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