11 जून 2011

मुझे हिन्दी भाषा प्रिय है

नमस्ते सर ! मेरा नाम रितु कोइराला है । मैं नेपाल की रहने वाली हूँ । मैं आपके ब्लाग पर टोटली फ़्रेशर हूँ । मुझे आपके ब्लाग के बारे में कल ही श्रीमती थापा ने बताया है । मिसिज थापा जिस स्कूल में टीचर हैं । मैं भी उसी आर्मी स्कूल की हेड मिस्ट्रेस हूँ । मेरे पति बिजनेस मैन हैं । मेरे 3 बेटे हैं ।
मुझे आपके ब्लाग के बारे में अभी नया नया मालूमात हुआ है । कल रविवार है तो कल मैं इतमीनान से आपका ब्लाग पढ़ना शुरु करुँगी । मेरी हिन्दी साहित्य में बहुत रूचि है ।
मैंने मुंशी प्रेमचन्द जी की कुछ पुस्तकें पढी हैं । मुंशी प्रेमचन्द जी ने उत्तर भारत के ग्रामीण हालात को नजदीक से देखा समझा था फ़िर बाद में उसे अपनी कहानियों और उपन्यास का रूप दिया ।
भारत एक अलग ही देश है । अगर दक्षिण की तरफ़ जायें तो 1 अलग ही माहौल नजर आता है । उत्तरी पूर्वी राज्यों में भी अपना 1 अलग सा ही माहौल है । बाकी बचे महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि सब अपनी अपनी बोली बोलते हैं । बाकी बचे हुए छोटे मोटे प्रान्त अपनी अपनी जगह ठीक ही हैं ।
लेकिन मेरी समझ के अनुसार अगर भारत को समझना है तो पहले हिन्दी को जानना होगा । हिन्दी को जानने के लिये उत्तर प्रदेश की जङों को समझना होगा ।
जितना मैंने उत्तर प्रदेश के बारे में पढ़ा है । उस हिसाब से ये कहते हुये दुख होता है कि - उत्तर प्रदेश ने उतनी तरक्की आधुनिक समय में की नहीं जितनी होनी चाहिये थी । उत्तर प्रदेश में जगह बहुत है । खेतीबाङी भरपूर है । ये भी 1 अति महत्वपूर्ण पाइंट है । तकरीबन हर किस्म की फ़सल होती है । राजधानी भी बहुत अधिक दूर नही है (अगर हम बंगाल, मद्रास आदि स्थानों के हिसाब से देखें)  ऐतिहासिक स्थान भी बहुत हैं ।
वैसे मैं ताजमहल देखने 2 बार आ चुकी हूँ कुछ साल पहले अपने परिवार के साथ । मेरे ख्याल से उत्तर प्रदेश ऐसा प्रदेश होना चाहिये था जो ग्रामीण भारत और शहरीकरण का उचित सुमेल हो । जिस कारण इसे उत्तर प्रदेश के स्थान पर उत्तम प्रदेश कहना पडता ।

आप तो उत्तर भारतीय हैं यानि उत्तर प्रदेश के निवासी है । आपकी क्या राय है ? उत्तर प्रदेश की हालत के बारे में । मेरे ख्याल से शायद उत्तर प्रदेश की 1 खास समस्या वहाँ की अधिक आबादी है ।
आप सोचते होंगे कि - ये महिला नेपाल की है लेकिन भारत में खासकर उत्तर भारत या उत्तर प्रदेश में इतनी दिलचस्पी क्यों ले रही है । जिसका कारण स्पष्ट है कि - मुझे हिन्दी भाषा प्रिय है और मैंने अपने विद्यार्थी जीवन में मुंशी प्रेमचन्द जी के उपन्यास पढे हैं । मैंने आपसे कुछ और भी बातें करनी हैं लेकिन पहले मैं कुछ दिन आपके ब्लाग के छपे लेख पढ़ लूँ ।
जाते जाते इतना ही कहूँगी अक्सर मैंने कुछ पुराने ख्यालात के लोगों को ये कहते सुना है कि - ये ठीक है और ये गलत है । जैसे आजकल कुछ लोग माडर्न टेक्नोलोजी को सही कहते हैं, कुछ लोग इसमें दोष निकालते हैं ।
लेकिन मैं हमेशा हर बात को दो पहलूओं से देखने और समझने की कोशिश करती हूँ । मैं कभी भी बात के दूसरे पहलू को नजर अन्दाज नही करती । कभी कभी कहीं कोई दूसरा पहलू ही अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है ।
जैसे अगर ये माडर्न टेक्नोलोजी का कम्युनिकेशन सिस्टम आजकल न होता (ये कम्प्यूटर आदि) तो मैं आज आपसे बातचीत का ये सिलसिला कैसे शुरु करती ?
हाँ वो अलग बात है कि - आज इंटरनेट आदि का गलत इस्तेमाल भी हो रहा है । बच्चे अश्लील वातावरण में सांस ले रहे हैं । साइबर क्राइम बढ रहा है । इंटरनेट के जरिये कुछ और भी गैर- सामाजिक गतिविधियों में बढावा हो रहा है ।
लेकिन दूसरी तरफ़ अगर इसका सही उपयोग हो तो कितनी सहूलियत भी है । जैसे आपसे ब्लाग के जरिये मुलाकात । सो इस तरह मैं आपके ब्लाग के जरिये तमाम पाठकों को 1 ही संदेश देना चाहूँगी कि हर बात के 2 पहलू जरूर देखें । सिर्फ़ 1 ही पहलू को पकङ कर न बैठें । आप चाहे तो पानी में शराब मिलाकर उसका स्वाद कङवा कर लें या चाहे तो शरबत मिलाकर मीठा कर लें । दोनों ही बातें सम्भव हैं ।
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उत्तर प्रदेश की ये भी एक मुख्य समस्या है अन्य प्रदेशों - बिहार, बंगाल, उङीसा, पंजाब, मध्यप्रदेश,  राजस्थान, नेपाल आदि तमाम जगहों के लोगों का बङी मात्रा में आकर यहाँ का निवासी हो जाना । अकेले आगरा में ही 40% आबादी बाहर की ही है ।
दूसरे यूपी के गाँव वालों की मैंने एक खासियत देखी कि वे शहर की तरफ़ भागते हैं । हालांकि अब सरकार गाँव में बिजली पानी अस्पताल शिक्षा सङकें आदि तमाम जरूरी सुविधायें दे रही हैं । फ़िर भी गाँव खाली से होते जा रहे हैं और शहर ओवर लोडेड । इस तरह उत्तर प्रदेश पिछले 50 सालों से असंतुलन का शिकार है । इसके बाबजूद यहाँ शांति है । यह अपने आप में चमत्कार ही है ।
हिन्दी भाषा - यदि किसी को ‘आत्मा’ का सही ज्ञान प्राप्त करना हो तो संस्कृत के एकदम समान हिन्दी का अध्ययन आपके लिये नितान्त आवश्यक है । हिन्दी में जो शब्द धातु की खासियत 100% है । वह अन्य भाषाओं में 5% या 10% ही है । ये रहस्यात्मक ज्ञान इस तरह (शब्द बोध से) आपको आगे समझ में आ सकता है ।
बाकी असली साइंस क्या है । इसका विस्तार कितना संभव है ? ये भी आपको बातचीत से ही पता चलेगा ।
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एक नकली आई डी द्वारा भेजा गया मेल ।

मेल का उद्देश्य - आत्मज्ञान के मूल विषय से भटकाना, अन्यत्र उलझाना ।
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